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जिला बलौदा बाजार अल्ट्राटेक सीमेंट ग्रासीम विहार रावन में मजदूरों पर कंपनी प्रबंधन द्वारा शोषण मामला आया सामने सैंकड़ों कार्यरत 15सालो से मज़दूरी कर रहे मजदूरों ने छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना और जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी का मांगा समर्थन मजदूरों का हक़ अधिकार नहीं मीला तो जल्द उग्रआंदोलन करने का दिया चेतावनी। अल्ट्राटेक सीमेंट ग्रासीम विहार रावन में मजदूरों पर हों रहा शोषण छत्तीसगढ़ीया क्रांतिसेना और जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी का मिला समर्थन उचित मुआवजा नहीं मिलने पर उग्रआंदोलन करने का दिया चेतावनी। अल्ट्राटेक सीमेंट ग्रासीम विहार रावन महाराजा ब्रदर्स ठेकेदार में जो 12से15 सालों तक काम करने वाले मजदूरों ने लगाया कंपनी प्रबंधन पर गंभीर आरोप मामला आया सामने मजदूरों का कहना है कि कंपनी प्रबंधन को कई बार आवेदन निवेदन हों गया करते फिर भी मजदूरों का कहना है कि हमारे कालींग डियुटी है उसे सीप्ट में डियुटी चाहिए मांग किया जा रहा है अभी 12,15 हाजरी दिया जा रहा है उसे 26हाजरी होना चाहिए जिससे हमारे परिवार का पालन पोषण हों सकें नहीं हुआ तो आंदोलन का दिया गया चेतावनी सैंकड़ों मजदूरों ने छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना, जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी का लिया सदस्यता ग्रहण किया और जोहार छत्तीसगढ़ क्रांतिसेना पार्टी ने भी आश्वासन दिया कि हम मजदूरों के हक अधिकार उचित मुआवजा दिलाने का समर्थन किया और अगर कंपनी प्रबंधन मजदूरों पर शोषण किया जाता है तो कंपनी गेट के सामने ही उग्रआंदोलन किया जा सकता है।

9 hrs ago
user_Hariom .Vishwakarma . रीपोर्ट
Hariom .Vishwakarma . रीपोर्ट
बलौदा बाजार, बलौदा बाजार, छत्तीसगढ़•
9 hrs ago

जिला बलौदा बाजार अल्ट्राटेक सीमेंट ग्रासीम विहार रावन में मजदूरों पर कंपनी प्रबंधन द्वारा शोषण मामला आया सामने सैंकड़ों कार्यरत 15सालो से मज़दूरी कर रहे मजदूरों ने छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना और जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी का मांगा समर्थन मजदूरों का हक़ अधिकार नहीं मीला तो जल्द उग्रआंदोलन करने का दिया चेतावनी। अल्ट्राटेक सीमेंट ग्रासीम विहार रावन में मजदूरों पर

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हों रहा शोषण छत्तीसगढ़ीया क्रांतिसेना और जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी का मिला समर्थन उचित मुआवजा नहीं मिलने पर उग्रआंदोलन करने का दिया चेतावनी। अल्ट्राटेक सीमेंट ग्रासीम विहार रावन महाराजा ब्रदर्स ठेकेदार में जो 12से15 सालों तक काम करने वाले मजदूरों ने लगाया कंपनी प्रबंधन पर गंभीर आरोप मामला आया सामने मजदूरों का कहना है कि कंपनी प्रबंधन को

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कई बार आवेदन निवेदन हों गया करते फिर भी मजदूरों का कहना है कि हमारे कालींग डियुटी है उसे सीप्ट में डियुटी चाहिए मांग किया जा रहा है अभी 12,15 हाजरी दिया जा रहा है उसे 26हाजरी होना चाहिए जिससे हमारे परिवार का पालन पोषण हों सकें नहीं हुआ तो आंदोलन का दिया गया चेतावनी सैंकड़ों मजदूरों

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ने छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना, जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी का लिया सदस्यता ग्रहण किया और जोहार छत्तीसगढ़ क्रांतिसेना पार्टी ने भी आश्वासन दिया कि हम मजदूरों के हक अधिकार उचित मुआवजा दिलाने का समर्थन किया और अगर कंपनी प्रबंधन मजदूरों पर शोषण किया जाता है तो कंपनी गेट के सामने ही उग्रआंदोलन किया जा सकता है।

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  • 39.770 किलो गांजा बरामदगी के मामले में NDPS कोर्ट का बड़ा फैसला, आरोपियों को किया दोषमुक्त 39.770 किलो गांजा बरामदगी के मामले में NDPS कोर्ट का बड़ा फैसला, आरोपियों को किया दोषमुक्त स्कॉर्पियो और जुपिटर से गांजा बरामदगी का था मामला, बचाव पक्ष ने पुलिस की तलाशी-जब्ती प्रक्रिया पर उठाए सवाल; कसडोल थाने का CCTV फुटेज पेश नहीं होने और कार्रवाई की प्रक्रिया को लेकर न्यायालय में उठे महत्वपूर्ण बिंदु बिलासपुर। 39.770 किलोग्राम गांजा बरामदगी से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में नारकोटिक्स ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटांसेज (NDPS) से संबंधित न्यायालय ने आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया है। मामला थाना कसडोल क्षेत्र में स्कॉर्पियो और जुपिटर वाहन से गांजा बरामद किए जाने से जुड़ा था। अभियोजन पक्ष की ओर से बरामदगी और पुलिस कार्रवाई को आधार बनाते हुए आरोप सिद्ध करने का प्रयास किया गया, वहीं बचाव पक्ष ने तलाशी, जब्ती और पुलिस कार्रवाई की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए। न्यायालय के समक्ष सुनवाई के दौरान मामले से जुड़े साक्ष्यों, दस्तावेजों तथा पुलिस द्वारा अपनाई गई कार्रवाई की प्रक्रिया पर विस्तार से विचार किया गया। बचाव पक्ष की ओर से यह तर्क रखा गया कि केवल बरामदगी का दावा पर्याप्त नहीं है, बल्कि अभियोजन को कानून के अनुरूप की गई तलाशी एवं जब्ती तथा उससे जुड़े प्रत्येक महत्वपूर्ण तथ्य को विश्वसनीय साक्ष्यों के माध्यम से स्थापित करना आवश्यक है। स्कॉर्पियो और जुपिटर से गांजा बरामदगी का दावा प्रकरण के अनुसार पुलिस कार्रवाई के दौरान स्कॉर्पियो तथा जुपिटर वाहन से कुल 39.770 किलोग्राम गांजा बरामद किए जाने की बात सामने आई थी। बरामदगी के बाद पुलिस ने प्रकरण दर्ज कर आरोपियों के विरुद्ध NDPS अधिनियम के तहत कार्रवाई की थी। मामला न्यायालय पहुंचने के बाद अभियोजन की ओर से पुलिस अधिकारियों एवं अन्य संबंधित गवाहों के बयान तथा दस्तावेजी साक्ष्य प्रस्तुत किए गए। अभियोजन का उद्देश्य यह साबित करना था कि बरामद मादक पदार्थ आरोपियों के कब्जे से मिला था और पूरी कार्रवाई नियमानुसार की गई थी। हालांकि सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने पुलिस की कार्रवाई के कई पहलुओं पर सवाल उठाए और कहा कि मामले में तलाशी एवं जब्ती की प्रक्रिया से संबंधित महत्वपूर्ण परिस्थितियां पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो पाईं। कसडोल थाना परिसर का CCTV फुटेज नहीं हो सका पेश मामले की सुनवाई के दौरान थाना कसडोल के CCTV फुटेज को लेकर भी महत्वपूर्ण सवाल सामने आया। बचाव पक्ष की ओर से पुलिस कार्रवाई की वास्तविक परिस्थितियों को स्पष्ट करने के लिए CCTV फुटेज का मुद्दा उठाया गया। बचाव पक्ष का तर्क था कि यदि संबंधित समय का CCTV फुटेज उपलब्ध था, तो उसे न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया जाना चाहिए था, ताकि पुलिस कार्रवाई की परिस्थितियों और आरोपियों को थाने लाए जाने अथवा कार्रवाई से जुड़े घटनाक्रम की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके। लेकिन सुनवाई के दौरान संबंधित CCTV फुटेज न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत नहीं हो सका। बचाव पक्ष ने इसी बिंदु को अभियोजन के मामले की विश्वसनीयता से जोड़ते हुए न्यायालय के समक्ष अपना पक्ष रखा। तलाशी और जब्ती की प्रक्रिया पर भी उठे सवाल NDPS मामलों में तलाशी और जब्ती की प्रक्रिया का विशेष महत्व होता है। इसी को आधार बनाते हुए बचाव पक्ष ने मामले में अपनाई गई तलाशी एवं जब्ती की प्रक्रिया पर सवाल उठाए। बचाव पक्ष की ओर से यह तर्क दिया गया कि मादक पदार्थ की बरामदगी का दावा करने के साथ-साथ अभियोजन को यह भी स्पष्ट करना होता है कि तलाशी और जब्ती किस परिस्थिति में हुई, कौन-कौन लोग मौजूद थे, बरामदगी की प्रक्रिया किस प्रकार पूरी की गई तथा जब्त सामग्री को सुरक्षित रखने और आगे भेजने की प्रक्रिया किस तरह अपनाई गई। बचाव पक्ष ने न्यायालय के समक्ष यह भी तर्क रखा कि जहां अभियोजन की कहानी के महत्वपूर्ण हिस्सों की स्वतंत्र एवं ठोस पुष्टि नहीं हो पाती, वहां केवल पुलिस दस्तावेजों के आधार पर आरोप को संदेह से परे साबित मानना उचित नहीं होगा। अभियोजन के साक्ष्यों पर न्यायालय ने किया विचार मामले की सुनवाई के दौरान न्यायालय ने अभियोजन द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों और बचाव पक्ष द्वारा उठाए गए आपत्तियों पर विचार किया। आपराधिक मामलों में अभियोजन पर आरोपों को संदेह से परे साबित करने का दायित्व होता है। इस मामले में न्यायालय ने उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद यह माना कि आरोपों को आवश्यक कानूनी मानक के अनुसार संदेह से परे साबित नहीं किया जा सका। इसके परिणामस्वरूप न्यायालय ने आरोपियों को दोषमुक्त करने का निर्णय दिया। रामनाथ पटेल को मिली जमानत प्रकरण में आरोपी रामनाथ पटेल को न्यायालय से जमानत भी मिली। न्यायालय के आदेश के बाद मामले में आरोपियों को राहत प्राप्त हुई। यह फैसला NDPS मामलों में पुलिस द्वारा की जाने वाली तलाशी एवं जब्ती की प्रक्रिया तथा अभियोजन द्वारा प्रस्तुत किए जाने वाले साक्ष्यों के महत्व को एक बार फिर सामने लाता है। बचाव पक्ष ने कार्रवाई की पारदर्शिता पर उठाए सवाल बचाव पक्ष के अधिवक्ता जितेंद्र चंद्राकर ने मामले में पुलिस कार्रवाई की पारदर्शिता और प्रक्रिया से जुड़े पहलुओं पर सवाल उठाए। उनका कहना था कि किसी भी आपराधिक मामले में बरामदगी की कहानी के साथ-साथ कार्रवाई की प्रत्येक महत्वपूर्ण कड़ी का विश्वसनीय साक्ष्य के माध्यम से स्थापित होना जरूरी है। अधिवक्ता चंद्राकर के अनुसार, मामले में CCTV फुटेज पेश नहीं होने, तलाशी-जब्ती की प्रक्रिया से जुड़े बिंदुओं तथा अन्य परिस्थितियों के कारण अभियोजन की कहानी को संदेह से परे स्थापित करने में कठिनाई रही। उन्होंने कहा कि न्यायालय ने उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद आरोपियों को दोषमुक्त किया है। NDPS मामलों में प्रक्रिया का महत्व कानूनी जानकारों के अनुसार NDPS अधिनियम से जुड़े मामलों में मादक पदार्थ की बरामदगी जितनी महत्वपूर्ण होती है, उतनी ही महत्वपूर्ण उसकी तलाशी, जब्ती, सीलिंग, सुरक्षित अभिरक्षा और साक्ष्य की निरंतरता से जुड़ी प्रक्रिया भी होती है। यदि अभियोजन किसी मामले में आरोप सिद्ध करना चाहता है तो उसे बरामदगी की परिस्थितियों के साथ-साथ संबंधित कानूनी प्रक्रिया और साक्ष्य की विश्वसनीयता भी न्यायालय के समक्ष स्थापित करनी होती है। इस मामले में न्यायालय के समक्ष इन्हीं प्रक्रियात्मक एवं साक्ष्य संबंधी पहलुओं पर बचाव पक्ष ने जोर दिया। उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद न्यायालय इस निष्कर्ष पर पहुंचा कि आरोपों को संदेह से परे सिद्ध नहीं माना जा सकता। न्यायालय के फैसले से सामने आया महत्वपूर्ण कानूनी पहलू 39.770 किलोग्राम गांजा बरामदगी जैसे गंभीर आरोप वाले मामले में आरोपियों का दोषमुक्त होना न्यायिक प्रक्रिया में साक्ष्य की भूमिका को रेखांकित करता है। किसी व्यक्ति के विरुद्ध लगाया गया आरोप कितना भी गंभीर क्यों न हो, आपराधिक न्याय व्यवस्था में दोष सिद्ध करने के लिए अभियोजन को निर्धारित कानूनी कसौटी पर साक्ष्य प्रस्तुत करना होता है। इस प्रकरण में न्यायालय ने उपलब्ध रिकॉर्ड और साक्ष्यों का परीक्षण किया तथा अभियोजन द्वारा लगाए गए आरोपों को संदेह से परे सिद्ध नहीं पाया। इसी आधार पर आरोपियों को दोषमुक्त किया गया। फैसला पुलिस कार्रवाई पर भी महत्वपूर्ण सवाल छोड़ गया इस मामले का फैसला केवल आरोपियों को मिली राहत तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जांच और अभियोजन की प्रक्रिया से जुड़े कई महत्वपूर्ण सवाल भी सामने लाता है। विशेषकर ऐसे मामलों में जहां बरामदगी को मुकदमे का मुख्य आधार बनाया जाता है, वहां तलाशी और जब्ती की पूरी प्रक्रिया का दस्तावेजीकरण और उपलब्ध इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को सुरक्षित रखना महत्वपूर्ण माना जाता है। कसडोल थाना परिसर के CCTV फुटेज का न्यायालय में प्रस्तुत नहीं हो पाना भी सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के तर्कों का हिस्सा बना। इसके अलावा तलाशी एवं जब्ती की प्रक्रिया को लेकर उठाई गई आपत्तियों पर भी न्यायालय ने विचार किया। आरोप सिद्ध नहीं होने पर मिला दोषमुक्ति का लाभ अंततः न्यायालय ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर यह माना कि अभियोजन आरोपों को संदेह से परे साबित करने में सफल नहीं रहा। इसके बाद आरोपियों को दोषमुक्त किए जाने का आदेश दिया गया। मामले में रामनाथ पटेल को जमानत मिलने से उन्हें भी न्यायिक राहत मिली है। यह खबर न्यायालय के निर्णय, उपलब्ध मामले की जानकारी और बचाव पक्ष की ओर से रखे गए तर्कों पर आधारित है। किसी व्यक्ति के विरुद्ध आरोपों को यहां अंतिम सत्य के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जा रहा है। न्यायालय द्वारा दोषमुक्त किए जाने के बाद संबंधित आरोपों को उसी संदर्भ में देखा जाना चाहिए।
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    39.770 किलो गांजा बरामदगी के मामले में NDPS कोर्ट का बड़ा फैसला, आरोपियों को किया दोषमुक्त
39.770 किलो गांजा बरामदगी के मामले में NDPS कोर्ट का बड़ा फैसला, आरोपियों को किया दोषमुक्त
स्कॉर्पियो और जुपिटर से गांजा बरामदगी का था मामला, बचाव पक्ष ने पुलिस की तलाशी-जब्ती प्रक्रिया पर उठाए सवाल; कसडोल थाने का CCTV फुटेज पेश नहीं होने और कार्रवाई की प्रक्रिया को लेकर न्यायालय में उठे महत्वपूर्ण बिंदु
बिलासपुर। 
39.770 किलोग्राम गांजा बरामदगी से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में नारकोटिक्स ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटांसेज (NDPS) से संबंधित न्यायालय ने आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया है। मामला थाना कसडोल क्षेत्र में स्कॉर्पियो और जुपिटर वाहन से गांजा बरामद किए जाने से जुड़ा था। अभियोजन पक्ष की ओर से बरामदगी और पुलिस कार्रवाई को आधार बनाते हुए आरोप सिद्ध करने का प्रयास किया गया, वहीं बचाव पक्ष ने तलाशी, जब्ती और पुलिस कार्रवाई की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए।
न्यायालय के समक्ष सुनवाई के दौरान मामले से जुड़े साक्ष्यों, दस्तावेजों तथा पुलिस द्वारा अपनाई गई कार्रवाई की प्रक्रिया पर विस्तार से विचार किया गया। बचाव पक्ष की ओर से यह तर्क रखा गया कि केवल बरामदगी का दावा पर्याप्त नहीं है, बल्कि अभियोजन को कानून के अनुरूप की गई तलाशी एवं जब्ती तथा उससे जुड़े प्रत्येक महत्वपूर्ण तथ्य को विश्वसनीय साक्ष्यों के माध्यम से स्थापित करना आवश्यक है।
स्कॉर्पियो और जुपिटर से गांजा बरामदगी का दावा
प्रकरण के अनुसार पुलिस कार्रवाई के दौरान स्कॉर्पियो तथा जुपिटर वाहन से कुल 39.770 किलोग्राम गांजा बरामद किए जाने की बात सामने आई थी। बरामदगी के बाद पुलिस ने प्रकरण दर्ज कर आरोपियों के विरुद्ध NDPS अधिनियम के तहत कार्रवाई की थी।
मामला न्यायालय पहुंचने के बाद अभियोजन की ओर से पुलिस अधिकारियों एवं अन्य संबंधित गवाहों के बयान तथा दस्तावेजी साक्ष्य प्रस्तुत किए गए। अभियोजन का उद्देश्य यह साबित करना था कि बरामद मादक पदार्थ आरोपियों के कब्जे से मिला था और पूरी कार्रवाई नियमानुसार की गई थी।
हालांकि सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने पुलिस की कार्रवाई के कई पहलुओं पर सवाल उठाए और कहा कि मामले में तलाशी एवं जब्ती की प्रक्रिया से संबंधित महत्वपूर्ण परिस्थितियां पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो पाईं।
कसडोल थाना परिसर का CCTV फुटेज नहीं हो सका पेश
मामले की सुनवाई के दौरान थाना कसडोल के CCTV फुटेज को लेकर भी महत्वपूर्ण सवाल सामने आया। बचाव पक्ष की ओर से पुलिस कार्रवाई की वास्तविक परिस्थितियों को स्पष्ट करने के लिए CCTV फुटेज का मुद्दा उठाया गया।
बचाव पक्ष का तर्क था कि यदि संबंधित समय का CCTV फुटेज उपलब्ध था, तो उसे न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया जाना चाहिए था, ताकि पुलिस कार्रवाई की परिस्थितियों और आरोपियों को थाने लाए जाने अथवा कार्रवाई से जुड़े घटनाक्रम की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके।
लेकिन सुनवाई के दौरान संबंधित CCTV फुटेज न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत नहीं हो सका। बचाव पक्ष ने इसी बिंदु को अभियोजन के मामले की विश्वसनीयता से जोड़ते हुए न्यायालय के समक्ष अपना पक्ष रखा।
तलाशी और जब्ती की प्रक्रिया पर भी उठे सवाल
NDPS मामलों में तलाशी और जब्ती की प्रक्रिया का विशेष महत्व होता है। इसी को आधार बनाते हुए बचाव पक्ष ने मामले में अपनाई गई तलाशी एवं जब्ती की प्रक्रिया पर सवाल उठाए।
बचाव पक्ष की ओर से यह तर्क दिया गया कि मादक पदार्थ की बरामदगी का दावा करने के साथ-साथ अभियोजन को यह भी स्पष्ट करना होता है कि तलाशी और जब्ती किस परिस्थिति में हुई, कौन-कौन लोग मौजूद थे, बरामदगी की प्रक्रिया किस प्रकार पूरी की गई तथा जब्त सामग्री को सुरक्षित रखने और आगे भेजने की प्रक्रिया किस तरह अपनाई गई।
बचाव पक्ष ने न्यायालय के समक्ष यह भी तर्क रखा कि जहां अभियोजन की कहानी के महत्वपूर्ण हिस्सों की स्वतंत्र एवं ठोस पुष्टि नहीं हो पाती, वहां केवल पुलिस दस्तावेजों के आधार पर आरोप को संदेह से परे साबित मानना उचित नहीं होगा।
अभियोजन के साक्ष्यों पर न्यायालय ने किया विचार
मामले की सुनवाई के दौरान न्यायालय ने अभियोजन द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों और बचाव पक्ष द्वारा उठाए गए आपत्तियों पर विचार किया। आपराधिक मामलों में अभियोजन पर आरोपों को संदेह से परे साबित करने का दायित्व होता है।
इस मामले में न्यायालय ने उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद यह माना कि आरोपों को आवश्यक कानूनी मानक के अनुसार संदेह से परे साबित नहीं किया जा सका।
इसके परिणामस्वरूप न्यायालय ने आरोपियों को दोषमुक्त करने का निर्णय दिया।
रामनाथ पटेल को मिली जमानत
प्रकरण में आरोपी रामनाथ पटेल को न्यायालय से जमानत भी मिली। न्यायालय के आदेश के बाद मामले में आरोपियों को राहत प्राप्त हुई।
यह फैसला NDPS मामलों में पुलिस द्वारा की जाने वाली तलाशी एवं जब्ती की प्रक्रिया तथा अभियोजन द्वारा प्रस्तुत किए जाने वाले साक्ष्यों के महत्व को एक बार फिर सामने लाता है।
बचाव पक्ष ने कार्रवाई की पारदर्शिता पर उठाए सवाल
बचाव पक्ष के अधिवक्ता जितेंद्र चंद्राकर ने मामले में पुलिस कार्रवाई की पारदर्शिता और प्रक्रिया से जुड़े पहलुओं पर सवाल उठाए। उनका कहना था कि किसी भी आपराधिक मामले में बरामदगी की कहानी के साथ-साथ कार्रवाई की प्रत्येक महत्वपूर्ण कड़ी का विश्वसनीय साक्ष्य के माध्यम से स्थापित होना जरूरी है।
अधिवक्ता चंद्राकर के अनुसार, मामले में CCTV फुटेज पेश नहीं होने, तलाशी-जब्ती की प्रक्रिया से जुड़े बिंदुओं तथा अन्य परिस्थितियों के कारण अभियोजन की कहानी को संदेह से परे स्थापित करने में कठिनाई रही।
उन्होंने कहा कि न्यायालय ने उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद आरोपियों को दोषमुक्त किया है।
NDPS मामलों में प्रक्रिया का महत्व
कानूनी जानकारों के अनुसार NDPS अधिनियम से जुड़े मामलों में मादक पदार्थ की बरामदगी जितनी महत्वपूर्ण होती है, उतनी ही महत्वपूर्ण उसकी तलाशी, जब्ती, सीलिंग, सुरक्षित अभिरक्षा और साक्ष्य की निरंतरता से जुड़ी प्रक्रिया भी होती है।
यदि अभियोजन किसी मामले में आरोप सिद्ध करना चाहता है तो उसे बरामदगी की परिस्थितियों के साथ-साथ संबंधित कानूनी प्रक्रिया और साक्ष्य की विश्वसनीयता भी न्यायालय के समक्ष स्थापित करनी होती है।
इस मामले में न्यायालय के समक्ष इन्हीं प्रक्रियात्मक एवं साक्ष्य संबंधी पहलुओं पर बचाव पक्ष ने जोर दिया। उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद न्यायालय इस निष्कर्ष पर पहुंचा कि आरोपों को संदेह से परे सिद्ध नहीं माना जा सकता।
न्यायालय के फैसले से सामने आया महत्वपूर्ण कानूनी पहलू
39.770 किलोग्राम गांजा बरामदगी जैसे गंभीर आरोप वाले मामले में आरोपियों का दोषमुक्त होना न्यायिक प्रक्रिया में साक्ष्य की भूमिका को रेखांकित करता है। किसी व्यक्ति के विरुद्ध लगाया गया आरोप कितना भी गंभीर क्यों न हो, आपराधिक न्याय व्यवस्था में दोष सिद्ध करने के लिए अभियोजन को निर्धारित कानूनी कसौटी पर साक्ष्य प्रस्तुत करना होता है।
इस प्रकरण में न्यायालय ने उपलब्ध रिकॉर्ड और साक्ष्यों का परीक्षण किया तथा अभियोजन द्वारा लगाए गए आरोपों को संदेह से परे सिद्ध नहीं पाया। इसी आधार पर आरोपियों को दोषमुक्त किया गया।
फैसला पुलिस कार्रवाई पर भी महत्वपूर्ण सवाल छोड़ गया
इस मामले का फैसला केवल आरोपियों को मिली राहत तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जांच और अभियोजन की प्रक्रिया से जुड़े कई महत्वपूर्ण सवाल भी सामने लाता है। विशेषकर ऐसे मामलों में जहां बरामदगी को मुकदमे का मुख्य आधार बनाया जाता है, वहां तलाशी और जब्ती की पूरी प्रक्रिया का दस्तावेजीकरण और उपलब्ध इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को सुरक्षित रखना महत्वपूर्ण माना जाता है।
कसडोल थाना परिसर के CCTV फुटेज का न्यायालय में प्रस्तुत नहीं हो पाना भी सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के तर्कों का हिस्सा बना। इसके अलावा तलाशी एवं जब्ती की प्रक्रिया को लेकर उठाई गई आपत्तियों पर भी न्यायालय ने विचार किया।
आरोप सिद्ध नहीं होने पर मिला दोषमुक्ति का लाभ
अंततः न्यायालय ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर यह माना कि अभियोजन आरोपों को संदेह से परे साबित करने में सफल नहीं रहा। इसके बाद आरोपियों को दोषमुक्त किए जाने का आदेश दिया गया।
मामले में रामनाथ पटेल को जमानत मिलने से उन्हें भी न्यायिक राहत मिली है।
यह खबर न्यायालय के निर्णय, उपलब्ध मामले की जानकारी और बचाव पक्ष की ओर से रखे गए तर्कों पर आधारित है। किसी व्यक्ति के विरुद्ध आरोपों को यहां अंतिम सत्य के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जा रहा है। न्यायालय द्वारा दोषमुक्त किए जाने के बाद संबंधित आरोपों को उसी संदर्भ में देखा जाना चाहिए।
    user_Prabhat news 24
    Prabhat news 24
    पत्रकार बलौदा बाजार, बलौदा बाजार, छत्तीसगढ़•
    5 hrs ago
  • अजीम प्रेमजी फाउंडेशन के तहत छात्रावृत्ति से लाभान्वित छात्राओं ने कलेक्टर -एसपी से की मुलाक़ात* *सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी हेतु मिली महत्वपूर्ण टिप्स* ताराचंद कठोत्रे।। बलौदाबाज़ार,25 अगस्त 2026/मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की पहल पर बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने राज्य शासन द्वारा प्रदेश में अज़ीम प्रेमजी स्कॉलरशिप योजना प्रारम्भ किया गया है। इस योजना के तहत विगत वर्ष छात्रावृत्ति प्राप्त डी.के.कॉलेज बलौदाबाजार के छात्राओं ने शुक्रवार को कलेक्टर कुलदीप शर्मा एवं एसपी गौरव राय से मुलाक़ात की औऱ छात्रावृत्ति शुरू करने पर राज्य शासन के प्रति आभार व्यक्त किया। इस दौरान कलेक्टर कुलदीप शर्मा ने छात्राओं से छात्रावृत्ति के तहत मिली वित्तीय साहयता राशि का उपयोग,पढ़ाई एवं भविष्य की तैयारी के सम्बन्ध मे जानकारी ली। छात्रों ने बताया कि इस राशि से कॉलेज के फीस भरने के साथ ही कॉलेज आने -जाने मे बस के किराया का भी काम आया। इस राशि से बहुत मदद मिली है। कलेक्टर ने सभी छात्राओं से कहा कि इस छात्रावृत्ति योजना के समबंध मे अपने आस -पास के लोगों को भी बताएं ताकि अधिक से अधिक छात्रों को लाभ मिल सके। कलेक्टर श्री शर्मा ने यूपीएससी की तैयारी के सम्बन्ध मे बताया कि दृढ निश्चय लेकर लक्ष्य तय करें,इरादा मजबूत हो लेकिन किसी दबाव मे आगे न बढ़े। पढ़ाई बिलकुल मन लगाकर करें,ध्यान मे कोई भटकाव न हो।उन्होंने कहा कि असफलता से घबरायें नहीं क्योंकि यह मजबूती से आगे बढ़ने का साहस देता है। एसपी गौरव राय ने कहा कि आज डिजिटल युग का दौर है जिसमें सदुपयोग करने के फायदे है लेकिन यह ध्यान भटकाता है यह भी ध्यान रखना होगा। उन्होंने छात्राओं को भविष्य की अग्रिम बधाई औऱ शुभकामनायें दीं। उल्लेखनीय है कि अज़ीम प्रेमजी स्कॉलरशिप के तहत ज़रूरतमंद छात्राओं को कॉलेज की शिक्षा हासिल करने के लिए मदद के तौर पर वार्षिक 30,000 रुपयों की सहायता दी जाती है। यह स्कॉलरशिप छात्राओं के पहले ग्रैजुएशन के लिए डिग्री या डिप्लोमा पूरा होने तक उपलब्ध कराई जाती है जिसकी अधिकतम  अवधि 5 वर्ष होगी। किसी भी सरकारी स्कूल से 10वीं और 12वीं कक्षा नियमित छात्रा के रूप में उत्तीर्ण की हो। छात्रा ने किसी मान्यता प्राप्त स्नातक डिग्री या डिप्लोमा पाठ्यक्रम (अवधि 2 से 5 वर्ष) के प्रथम वर्ष में प्रवेश लिया हो। यह प्रवेश भारत में किसी भी राज्य या केंद्र शासित प्रदेश के सरकारी या विश्वसनीय एवं प्रामाणिक निजी कॉलेज या विश्वविद्यालय हो सकता है। क्रमांक /122
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    अजीम प्रेमजी फाउंडेशन के तहत छात्रावृत्ति से लाभान्वित छात्राओं ने कलेक्टर -एसपी से की मुलाक़ात* 
*सिविल सेवा परीक्षा  की तैयारी हेतु मिली महत्वपूर्ण टिप्स*
ताराचंद कठोत्रे।। 
बलौदाबाज़ार,25 अगस्त 2026/मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की पहल पर बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने राज्य शासन द्वारा प्रदेश में अज़ीम प्रेमजी स्कॉलरशिप योजना प्रारम्भ किया गया है। इस योजना के तहत विगत वर्ष छात्रावृत्ति प्राप्त  डी.के.कॉलेज बलौदाबाजार के छात्राओं ने शुक्रवार को कलेक्टर कुलदीप शर्मा एवं एसपी गौरव राय से मुलाक़ात की औऱ छात्रावृत्ति शुरू करने पर राज्य शासन के प्रति आभार व्यक्त किया।
इस दौरान कलेक्टर कुलदीप शर्मा ने छात्राओं से छात्रावृत्ति के तहत मिली वित्तीय साहयता राशि का उपयोग,पढ़ाई एवं भविष्य की तैयारी के सम्बन्ध मे जानकारी ली। छात्रों ने बताया कि इस राशि से कॉलेज के फीस भरने के साथ ही कॉलेज  आने -जाने मे बस के किराया का भी काम आया। इस राशि से बहुत मदद मिली है। कलेक्टर ने सभी छात्राओं से कहा कि इस छात्रावृत्ति योजना के समबंध मे अपने आस -पास के लोगों को भी बताएं ताकि अधिक से अधिक छात्रों को  लाभ मिल सके।
कलेक्टर श्री शर्मा ने यूपीएससी की तैयारी के सम्बन्ध मे बताया कि दृढ निश्चय लेकर लक्ष्य तय करें,इरादा मजबूत हो लेकिन किसी दबाव मे आगे न बढ़े। पढ़ाई  बिलकुल मन लगाकर करें,ध्यान मे कोई भटकाव न हो।उन्होंने कहा कि असफलता से घबरायें नहीं क्योंकि यह मजबूती से आगे बढ़ने का साहस देता है। एसपी गौरव राय ने कहा कि आज डिजिटल युग का दौर है जिसमें  सदुपयोग करने के फायदे है लेकिन यह ध्यान भटकाता  है यह भी ध्यान रखना होगा। उन्होंने  छात्राओं को भविष्य की अग्रिम बधाई औऱ शुभकामनायें दीं।
उल्लेखनीय है कि अज़ीम प्रेमजी स्कॉलरशिप के तहत ज़रूरतमंद छात्राओं को कॉलेज की शिक्षा हासिल करने के लिए मदद के तौर पर वार्षिक 30,000 रुपयों की सहायता दी जाती है। यह स्कॉलरशिप छात्राओं के पहले ग्रैजुएशन के लिए डिग्री या डिप्लोमा पूरा होने तक उपलब्ध कराई जाती है जिसकी अधिकतम  अवधि 5 वर्ष होगी। किसी भी सरकारी स्कूल से 10वीं और 12वीं कक्षा नियमित छात्रा के रूप में उत्तीर्ण की हो। छात्रा ने किसी मान्यता प्राप्त स्नातक डिग्री या डिप्लोमा पाठ्यक्रम (अवधि 2 से 5 वर्ष) के प्रथम वर्ष में प्रवेश लिया हो। यह प्रवेश भारत में किसी भी राज्य या केंद्र शासित प्रदेश के सरकारी या विश्वसनीय एवं प्रामाणिक निजी कॉलेज या विश्वविद्यालय हो सकता है। 
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    user_Tarachanad Kathotre
    Tarachanad Kathotre
    Advertising agency बलौदा बाजार, बलौदा बाजार, छत्तीसगढ़•
    8 hrs ago
  • जिला बलौदा बाजार अल्ट्राटेक सीमेंट ग्रासीम विहार रावन में मजदूरों पर कंपनी प्रबंधन द्वारा शोषण मामला आया सामने सैंकड़ों कार्यरत 15सालो से मज़दूरी कर रहे मजदूरों ने छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना और जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी का मांगा समर्थन मजदूरों का हक़ अधिकार नहीं मीला तो जल्द उग्रआंदोलन करने का दिया चेतावनी। अल्ट्राटेक सीमेंट ग्रासीम विहार रावन में मजदूरों पर हों रहा शोषण छत्तीसगढ़ीया क्रांतिसेना और जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी का मिला समर्थन उचित मुआवजा नहीं मिलने पर उग्रआंदोलन करने का दिया चेतावनी। अल्ट्राटेक सीमेंट ग्रासीम विहार रावन महाराजा ब्रदर्स ठेकेदार में जो 12से15 सालों तक काम करने वाले मजदूरों ने लगाया कंपनी प्रबंधन पर गंभीर आरोप मामला आया सामने मजदूरों का कहना है कि कंपनी प्रबंधन को कई बार आवेदन निवेदन हों गया करते फिर भी मजदूरों का कहना है कि हमारे कालींग डियुटी है उसे सीप्ट में डियुटी चाहिए मांग किया जा रहा है अभी 12,15 हाजरी दिया जा रहा है उसे 26हाजरी होना चाहिए जिससे हमारे परिवार का पालन पोषण हों सकें नहीं हुआ तो आंदोलन का दिया गया चेतावनी सैंकड़ों मजदूरों ने छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना, जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी का लिया सदस्यता ग्रहण किया और जोहार छत्तीसगढ़ क्रांतिसेना पार्टी ने भी आश्वासन दिया कि हम मजदूरों के हक अधिकार उचित मुआवजा दिलाने का समर्थन किया और अगर कंपनी प्रबंधन मजदूरों पर शोषण किया जाता है तो कंपनी गेट के सामने ही उग्रआंदोलन किया जा सकता है।
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    जिला बलौदा बाजार अल्ट्राटेक सीमेंट ग्रासीम विहार रावन में मजदूरों पर कंपनी प्रबंधन द्वारा शोषण मामला आया सामने सैंकड़ों कार्यरत 15सालो से मज़दूरी कर रहे मजदूरों ने छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना और जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी का मांगा समर्थन मजदूरों का हक़ अधिकार नहीं मीला तो जल्द उग्रआंदोलन करने का दिया चेतावनी।
अल्ट्राटेक सीमेंट ग्रासीम विहार रावन में मजदूरों पर हों रहा शोषण छत्तीसगढ़ीया क्रांतिसेना और जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी का मिला समर्थन उचित मुआवजा नहीं मिलने पर उग्रआंदोलन करने का दिया चेतावनी।
अल्ट्राटेक सीमेंट ग्रासीम विहार रावन  महाराजा ब्रदर्स ठेकेदार में जो 12से15 सालों तक काम करने वाले मजदूरों ने लगाया कंपनी प्रबंधन पर गंभीर आरोप मामला आया सामने मजदूरों का कहना है कि कंपनी प्रबंधन को कई बार आवेदन निवेदन हों गया करते फिर भी मजदूरों का कहना है कि हमारे कालींग डियुटी है उसे सीप्ट में डियुटी चाहिए मांग किया जा रहा है अभी 12,15 हाजरी दिया जा रहा है उसे 26हाजरी होना चाहिए जिससे हमारे परिवार का पालन पोषण हों सकें नहीं हुआ तो आंदोलन का दिया गया चेतावनी सैंकड़ों मजदूरों ने छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना, जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी का लिया सदस्यता  ग्रहण किया और जोहार छत्तीसगढ़ क्रांतिसेना पार्टी ने भी आश्वासन दिया कि हम मजदूरों के हक अधिकार उचित मुआवजा दिलाने का समर्थन किया और अगर कंपनी प्रबंधन मजदूरों पर शोषण किया जाता है तो कंपनी गेट के सामने ही उग्रआंदोलन किया जा सकता है।
    user_Hariom .Vishwakarma . रीपोर्ट
    Hariom .Vishwakarma . रीपोर्ट
    बलौदा बाजार, बलौदा बाजार, छत्तीसगढ़•
    9 hrs ago
  • दुर्घटना होने की सम्भावना पर 2 पिकप वाहनो पर अतिरिक्त एगल लगाने वालो पर बिल्हा दुर्घटना होने की सम्भावना पर 2 पिकप वाहनो पर अतिरिक्त एगल लगाने वालो पर बिल्हा पुलिस ने की कार्यवाही आज शुक्रवार की रात 8:00 बजे बिल्हा पुलिस द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति से मिली जानकारी के अनुसार ◾नाम अनावेदक - 1. रोहित साहू पिता रामगोपाल साहू उम्र 29 वर्ष निवासी खरकेना थाना हिर्री जिला बिलासपुर। (इस्त.क्र. 01/2026) 2. चैनदास मानिकपुरी पिता गोवर्धन दास मानिकपुरी उम्र 24 वर्ष निवासी बिल्हा थाना बिल्हा जिला बिलासपुर। (इस्त.क्र. 02/2026 मामले का संक्षिप्त विवरण इस प्रकार है कि उमनि एवं वपुअ महोदय श्री रजनेश सिंह बिलासपुर (भा.पु.से.) द्वारा जिले के सभी थाना/चौकी प्रभारीयों को सडक दुर्घटना के मद्देनजर वाहनो के ऊपर अतिरिक्त एगल लगाने जाने वालो वाहनो पर अंकुश लगाने हेतु निर्देशित किया गया था, आदेश के परिपालन मे अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक महोदया मधुलिका सिंह एवं नगर पुलिस अधीक्षक महोदय चकरभाठा श्री राजेश जोशी के मार्गदर्शन मे थाना प्रभारी द्वारा पेट्रोलिंग के दौरान हाईवे रोड बिल्हा पर रोहित साहू के माजदा क्रमांक सीजी10एएफ 5072 व बिल्हा मेन रोड पर चैनदास मानिकपुरी के माजदा क्रमांक सीजी10सीई 3303 मे डीजे को वाहन मे लोड हेतु वाहन के दाये, बाये और ऊपर मे लोहे का एंगल लगाया गया था जिससे दुर्घटना होने की सम्भावना था जिसे मौके पर धारा 130(3)/177, 194(1)(ए) मो.ए. के उल्लघन करते पाये जाने से विधिवत् पंचनामा तैयार कर वाहन को धारा 207 एमव्ही एक्ट के तहत् जप्त किया गया है। आगे भी अवैध गतिविधियों पर लगातार कार्यवाही जारी रहेगी। उक्त कार्यवाही मे थाना प्रभारी निरीक्षक तोपसिंह नवरंग, प्र.आर. 786 अनिल बंजारे, आरक्षक 1431 अर्जुन जांगडे, आरक्षक 1390 संतोष मरकाम का विशेष योगदान रहा।
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    दुर्घटना होने की सम्भावना पर 
2 पिकप वाहनो पर अतिरिक्त एगल लगाने वालो पर बिल्हा 
दुर्घटना होने की सम्भावना पर 
2 पिकप वाहनो पर अतिरिक्त एगल लगाने वालो पर बिल्हा पुलिस ने की कार्यवाही
आज शुक्रवार की रात 8:00 बजे बिल्हा पुलिस द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति से मिली जानकारी के अनुसार 
◾नाम अनावेदक -    1. रोहित साहू पिता रामगोपाल साहू उम्र 29 वर्ष निवासी खरकेना थाना हिर्री 
जिला बिलासपुर। (इस्त.क्र. 01/2026) 
2. चैनदास मानिकपुरी पिता गोवर्धन दास मानिकपुरी उम्र 24 वर्ष निवासी बिल्हा थाना बिल्हा जिला बिलासपुर। (इस्त.क्र. 02/2026
मामले का संक्षिप्त विवरण इस प्रकार है कि उमनि एवं वपुअ महोदय श्री रजनेश सिंह बिलासपुर (भा.पु.से.) द्वारा जिले के सभी थाना/चौकी प्रभारीयों को सडक दुर्घटना के मद्देनजर वाहनो के ऊपर अतिरिक्त एगल लगाने जाने वालो वाहनो पर अंकुश लगाने हेतु निर्देशित किया गया था, आदेश के परिपालन मे अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक महोदया मधुलिका सिंह एवं नगर पुलिस अधीक्षक महोदय चकरभाठा श्री राजेश जोशी के मार्गदर्शन मे थाना प्रभारी द्वारा पेट्रोलिंग के दौरान हाईवे रोड बिल्हा पर रोहित साहू के माजदा क्रमांक सीजी10एएफ 5072 व बिल्हा मेन रोड पर चैनदास मानिकपुरी के माजदा क्रमांक सीजी10सीई 3303 मे डीजे को वाहन मे लोड हेतु वाहन के दाये, बाये और ऊपर मे लोहे का एंगल लगाया गया था जिससे दुर्घटना होने की सम्भावना था जिसे मौके पर धारा 130(3)/177, 194(1)(ए) मो.ए. के उल्लघन करते पाये जाने से विधिवत् पंचनामा तैयार कर वाहन को धारा 207 एमव्ही एक्ट के तहत् जप्त किया गया है। आगे भी अवैध गतिविधियों पर लगातार कार्यवाही जारी रहेगी। 
उक्त कार्यवाही मे थाना प्रभारी निरीक्षक तोपसिंह नवरंग, प्र.आर. 786 अनिल बंजारे,  आरक्षक 1431 अर्जुन जांगडे, आरक्षक 1390 संतोष मरकाम का विशेष योगदान रहा।
    user_Patrkar Sarthi
    Patrkar Sarthi
    Reporter Bilha, Bilaspur•
    3 hrs ago
  • मुख्यमंत्री जी के द्वारा प्रधानमंत्री मोदी को विश्वकर्मा भगवान कहे जाने पर छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना ने किया पलटवार #vishnudevsai #pmmodi #ChhattisgarhiyaKrantiSena #viralvideo #trendingvideo मुख्यमंत्री जी के द्वारा प्रधानमंत्री मोदी को विश्वकर्मा भगवान कहे जाने पर छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना ने किया पलटवार #vishnudevsai #pmmodi #ChhattisgarhiyaKrantiSena #viralvideo #trendingvideo
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    मुख्यमंत्री जी के द्वारा प्रधानमंत्री मोदी को विश्वकर्मा भगवान कहे जाने पर छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना ने किया पलटवार #vishnudevsai #pmmodi #ChhattisgarhiyaKrantiSena #viralvideo #trendingvideo
मुख्यमंत्री जी के द्वारा प्रधानमंत्री मोदी को विश्वकर्मा भगवान कहे जाने पर छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना ने किया पलटवार #vishnudevsai #pmmodi #ChhattisgarhiyaKrantiSena #viralvideo #trendingvideo
    user_News30live
    News30live
    Local News Reporter Bilha, Bilaspur•
    13 hrs ago
  • आज हम लोग रिलायंस शासन पावर को जो बोलते लिमिटेड कंपनी हमारी सिंगरौली जिला प्लांट टाउन शिप में बुद्ध टेंपल पार्क में जो बोलते हैं कि बुद्ध भगवान मानते है कि आज ओ ही भगवान हम अभी में तत्काल देखने के कष्ट करे जिला सिंगरौली मध्य प्रदेश सिंगरौली शासन पावर लिमिटेड टाउन शिप में
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    आज हम लोग रिलायंस शासन पावर को जो बोलते लिमिटेड कंपनी हमारी  सिंगरौली जिला  प्लांट  टाउन शिप में बुद्ध टेंपल पार्क में जो बोलते हैं कि बुद्ध भगवान मानते है कि  आज ओ ही भगवान हम अभी में तत्काल देखने के कष्ट करे 
जिला सिंगरौली मध्य प्रदेश सिंगरौली शासन पावर लिमिटेड टाउन शिप में
    user_सिंगरौली,
    सिंगरौली,
    Bilaspur, Chhattisgarh•
    2 hrs ago
  • बिलासपुर कलेक्ट्रेट परिसर का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। बिलासपुर कलेक्ट्रेट परिसर का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वीडियो सिटी मजिस्ट्रेट कार्यालय के सामने का बताया जा रहा है, जहां वकील और कथित दलाल के बीच विवाद के बाद गाली-गलौच और मारपीट हुई। मौके पर पहुंचे पुलिसकर्मियों ने हस्तक्षेप कर विवाद को शांत कराया।
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    बिलासपुर कलेक्ट्रेट परिसर का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।
बिलासपुर कलेक्ट्रेट परिसर का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वीडियो सिटी मजिस्ट्रेट कार्यालय के सामने का बताया जा रहा है, जहां वकील और कथित दलाल के बीच विवाद के बाद गाली-गलौच और मारपीट हुई। मौके पर पहुंचे पुलिसकर्मियों ने हस्तक्षेप कर विवाद को शांत कराया।
    user_Smart Vani News
    Smart Vani News
    बिलासपुर, बिलासपुर, छत्तीसगढ़•
    2 hrs ago
  • 39.770 किलो गांजा बरामदगी के मामले में NDPS कोर्ट का बड़ा फैसला, आरोपियों को किया दोषमुक्त 39.770 किलो गांजा बरामदगी के मामले में NDPS कोर्ट का बड़ा फैसला, आरोपियों को किया दोषमुक्त स्कॉर्पियो और जुपिटर से गांजा बरामदगी का था मामला, बचाव पक्ष ने पुलिस की तलाशी-जब्ती प्रक्रिया पर उठाए सवाल; कसडोल थाने का CCTV फुटेज पेश नहीं होने और कार्रवाई की प्रक्रिया को लेकर न्यायालय में उठे महत्वपूर्ण बिंदु बिलासपुर। 39.770 किलोग्राम गांजा बरामदगी से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में नारकोटिक्स ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटांसेज (NDPS) से संबंधित न्यायालय ने आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया है। मामला थाना कसडोल क्षेत्र में स्कॉर्पियो और जुपिटर वाहन से गांजा बरामद किए जाने से जुड़ा था। अभियोजन पक्ष की ओर से बरामदगी और पुलिस कार्रवाई को आधार बनाते हुए आरोप सिद्ध करने का प्रयास किया गया, वहीं बचाव पक्ष ने तलाशी, जब्ती और पुलिस कार्रवाई की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए। न्यायालय के समक्ष सुनवाई के दौरान मामले से जुड़े साक्ष्यों, दस्तावेजों तथा पुलिस द्वारा अपनाई गई कार्रवाई की प्रक्रिया पर विस्तार से विचार किया गया। बचाव पक्ष की ओर से यह तर्क रखा गया कि केवल बरामदगी का दावा पर्याप्त नहीं है, बल्कि अभियोजन को कानून के अनुरूप की गई तलाशी एवं जब्ती तथा उससे जुड़े प्रत्येक महत्वपूर्ण तथ्य को विश्वसनीय साक्ष्यों के माध्यम से स्थापित करना आवश्यक है। स्कॉर्पियो और जुपिटर से गांजा बरामदगी का दावा प्रकरण के अनुसार पुलिस कार्रवाई के दौरान स्कॉर्पियो तथा जुपिटर वाहन से कुल 39.770 किलोग्राम गांजा बरामद किए जाने की बात सामने आई थी। बरामदगी के बाद पुलिस ने प्रकरण दर्ज कर आरोपियों के विरुद्ध NDPS अधिनियम के तहत कार्रवाई की थी। मामला न्यायालय पहुंचने के बाद अभियोजन की ओर से पुलिस अधिकारियों एवं अन्य संबंधित गवाहों के बयान तथा दस्तावेजी साक्ष्य प्रस्तुत किए गए। अभियोजन का उद्देश्य यह साबित करना था कि बरामद मादक पदार्थ आरोपियों के कब्जे से मिला था और पूरी कार्रवाई नियमानुसार की गई थी। हालांकि सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने पुलिस की कार्रवाई के कई पहलुओं पर सवाल उठाए और कहा कि मामले में तलाशी एवं जब्ती की प्रक्रिया से संबंधित महत्वपूर्ण परिस्थितियां पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो पाईं। कसडोल थाना परिसर का CCTV फुटेज नहीं हो सका पेश मामले की सुनवाई के दौरान थाना कसडोल के CCTV फुटेज को लेकर भी महत्वपूर्ण सवाल सामने आया। बचाव पक्ष की ओर से पुलिस कार्रवाई की वास्तविक परिस्थितियों को स्पष्ट करने के लिए CCTV फुटेज का मुद्दा उठाया गया। बचाव पक्ष का तर्क था कि यदि संबंधित समय का CCTV फुटेज उपलब्ध था, तो उसे न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया जाना चाहिए था, ताकि पुलिस कार्रवाई की परिस्थितियों और आरोपियों को थाने लाए जाने अथवा कार्रवाई से जुड़े घटनाक्रम की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके। लेकिन सुनवाई के दौरान संबंधित CCTV फुटेज न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत नहीं हो सका। बचाव पक्ष ने इसी बिंदु को अभियोजन के मामले की विश्वसनीयता से जोड़ते हुए न्यायालय के समक्ष अपना पक्ष रखा। तलाशी और जब्ती की प्रक्रिया पर भी उठे सवाल NDPS मामलों में तलाशी और जब्ती की प्रक्रिया का विशेष महत्व होता है। इसी को आधार बनाते हुए बचाव पक्ष ने मामले में अपनाई गई तलाशी एवं जब्ती की प्रक्रिया पर सवाल उठाए। बचाव पक्ष की ओर से यह तर्क दिया गया कि मादक पदार्थ की बरामदगी का दावा करने के साथ-साथ अभियोजन को यह भी स्पष्ट करना होता है कि तलाशी और जब्ती किस परिस्थिति में हुई, कौन-कौन लोग मौजूद थे, बरामदगी की प्रक्रिया किस प्रकार पूरी की गई तथा जब्त सामग्री को सुरक्षित रखने और आगे भेजने की प्रक्रिया किस तरह अपनाई गई। बचाव पक्ष ने न्यायालय के समक्ष यह भी तर्क रखा कि जहां अभियोजन की कहानी के महत्वपूर्ण हिस्सों की स्वतंत्र एवं ठोस पुष्टि नहीं हो पाती, वहां केवल पुलिस दस्तावेजों के आधार पर आरोप को संदेह से परे साबित मानना उचित नहीं होगा। अभियोजन के साक्ष्यों पर न्यायालय ने किया विचार मामले की सुनवाई के दौरान न्यायालय ने अभियोजन द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों और बचाव पक्ष द्वारा उठाए गए आपत्तियों पर विचार किया। आपराधिक मामलों में अभियोजन पर आरोपों को संदेह से परे साबित करने का दायित्व होता है। इस मामले में न्यायालय ने उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद यह माना कि आरोपों को आवश्यक कानूनी मानक के अनुसार संदेह से परे साबित नहीं किया जा सका। इसके परिणामस्वरूप न्यायालय ने आरोपियों को दोषमुक्त करने का निर्णय दिया। रामनाथ पटेल को मिली जमानत प्रकरण में आरोपी रामनाथ पटेल को न्यायालय से जमानत भी मिली। न्यायालय के आदेश के बाद मामले में आरोपियों को राहत प्राप्त हुई। यह फैसला NDPS मामलों में पुलिस द्वारा की जाने वाली तलाशी एवं जब्ती की प्रक्रिया तथा अभियोजन द्वारा प्रस्तुत किए जाने वाले साक्ष्यों के महत्व को एक बार फिर सामने लाता है। बचाव पक्ष ने कार्रवाई की पारदर्शिता पर उठाए सवाल बचाव पक्ष के अधिवक्ता जितेंद्र चंद्राकर ने मामले में पुलिस कार्रवाई की पारदर्शिता और प्रक्रिया से जुड़े पहलुओं पर सवाल उठाए। उनका कहना था कि किसी भी आपराधिक मामले में बरामदगी की कहानी के साथ-साथ कार्रवाई की प्रत्येक महत्वपूर्ण कड़ी का विश्वसनीय साक्ष्य के माध्यम से स्थापित होना जरूरी है। अधिवक्ता चंद्राकर के अनुसार, मामले में CCTV फुटेज पेश नहीं होने, तलाशी-जब्ती की प्रक्रिया से जुड़े बिंदुओं तथा अन्य परिस्थितियों के कारण अभियोजन की कहानी को संदेह से परे स्थापित करने में कठिनाई रही। उन्होंने कहा कि न्यायालय ने उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद आरोपियों को दोषमुक्त किया है। NDPS मामलों में प्रक्रिया का महत्व कानूनी जानकारों के अनुसार NDPS अधिनियम से जुड़े मामलों में मादक पदार्थ की बरामदगी जितनी महत्वपूर्ण होती है, उतनी ही महत्वपूर्ण उसकी तलाशी, जब्ती, सीलिंग, सुरक्षित अभिरक्षा और साक्ष्य की निरंतरता से जुड़ी प्रक्रिया भी होती है। यदि अभियोजन किसी मामले में आरोप सिद्ध करना चाहता है तो उसे बरामदगी की परिस्थितियों के साथ-साथ संबंधित कानूनी प्रक्रिया और साक्ष्य की विश्वसनीयता भी न्यायालय के समक्ष स्थापित करनी होती है। इस मामले में न्यायालय के समक्ष इन्हीं प्रक्रियात्मक एवं साक्ष्य संबंधी पहलुओं पर बचाव पक्ष ने जोर दिया। उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद न्यायालय इस निष्कर्ष पर पहुंचा कि आरोपों को संदेह से परे सिद्ध नहीं माना जा सकता। न्यायालय के फैसले से सामने आया महत्वपूर्ण कानूनी पहलू 39.770 किलोग्राम गांजा बरामदगी जैसे गंभीर आरोप वाले मामले में आरोपियों का दोषमुक्त होना न्यायिक प्रक्रिया में साक्ष्य की भूमिका को रेखांकित करता है। किसी व्यक्ति के विरुद्ध लगाया गया आरोप कितना भी गंभीर क्यों न हो, आपराधिक न्याय व्यवस्था में दोष सिद्ध करने के लिए अभियोजन को निर्धारित कानूनी कसौटी पर साक्ष्य प्रस्तुत करना होता है। इस प्रकरण में न्यायालय ने उपलब्ध रिकॉर्ड और साक्ष्यों का परीक्षण किया तथा अभियोजन द्वारा लगाए गए आरोपों को संदेह से परे सिद्ध नहीं पाया। इसी आधार पर आरोपियों को दोषमुक्त किया गया। फैसला पुलिस कार्रवाई पर भी महत्वपूर्ण सवाल छोड़ गया इस मामले का फैसला केवल आरोपियों को मिली राहत तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जांच और अभियोजन की प्रक्रिया से जुड़े कई महत्वपूर्ण सवाल भी सामने लाता है। विशेषकर ऐसे मामलों में जहां बरामदगी को मुकदमे का मुख्य आधार बनाया जाता है, वहां तलाशी और जब्ती की पूरी प्रक्रिया का दस्तावेजीकरण और उपलब्ध इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को सुरक्षित रखना महत्वपूर्ण माना जाता है। कसडोल थाना परिसर के CCTV फुटेज का न्यायालय में प्रस्तुत नहीं हो पाना भी सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के तर्कों का हिस्सा बना। इसके अलावा तलाशी एवं जब्ती की प्रक्रिया को लेकर उठाई गई आपत्तियों पर भी न्यायालय ने विचार किया। आरोप सिद्ध नहीं होने पर मिला दोषमुक्ति का लाभ अंततः न्यायालय ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर यह माना कि अभियोजन आरोपों को संदेह से परे साबित करने में सफल नहीं रहा। इसके बाद आरोपियों को दोषमुक्त किए जाने का आदेश दिया गया। मामले में रामनाथ पटेल को जमानत मिलने से उन्हें भी न्यायिक राहत मिली है। यह खबर न्यायालय के निर्णय, उपलब्ध मामले की जानकारी और बचाव पक्ष की ओर से रखे गए तर्कों पर आधारित है। किसी व्यक्ति के विरुद्ध आरोपों को यहां अंतिम सत्य के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जा रहा है। न्यायालय द्वारा दोषमुक्त किए जाने के बाद संबंधित आरोपों को उसी संदर्भ में देखा जाना चाहिए।
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    39.770 किलो गांजा बरामदगी के मामले में NDPS कोर्ट का बड़ा फैसला, आरोपियों को किया दोषमुक्त
39.770 किलो गांजा बरामदगी के मामले में NDPS कोर्ट का बड़ा फैसला, आरोपियों को किया दोषमुक्त
स्कॉर्पियो और जुपिटर से गांजा बरामदगी का था मामला, बचाव पक्ष ने पुलिस की तलाशी-जब्ती प्रक्रिया पर उठाए सवाल; कसडोल थाने का CCTV फुटेज पेश नहीं होने और कार्रवाई की प्रक्रिया को लेकर न्यायालय में उठे महत्वपूर्ण बिंदु
बिलासपुर। 
39.770 किलोग्राम गांजा बरामदगी से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में नारकोटिक्स ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटांसेज (NDPS) से संबंधित न्यायालय ने आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया है। मामला थाना कसडोल क्षेत्र में स्कॉर्पियो और जुपिटर वाहन से गांजा बरामद किए जाने से जुड़ा था। अभियोजन पक्ष की ओर से बरामदगी और पुलिस कार्रवाई को आधार बनाते हुए आरोप सिद्ध करने का प्रयास किया गया, वहीं बचाव पक्ष ने तलाशी, जब्ती और पुलिस कार्रवाई की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए।
न्यायालय के समक्ष सुनवाई के दौरान मामले से जुड़े साक्ष्यों, दस्तावेजों तथा पुलिस द्वारा अपनाई गई कार्रवाई की प्रक्रिया पर विस्तार से विचार किया गया। बचाव पक्ष की ओर से यह तर्क रखा गया कि केवल बरामदगी का दावा पर्याप्त नहीं है, बल्कि अभियोजन को कानून के अनुरूप की गई तलाशी एवं जब्ती तथा उससे जुड़े प्रत्येक महत्वपूर्ण तथ्य को विश्वसनीय साक्ष्यों के माध्यम से स्थापित करना आवश्यक है।
स्कॉर्पियो और जुपिटर से गांजा बरामदगी का दावा
प्रकरण के अनुसार पुलिस कार्रवाई के दौरान स्कॉर्पियो तथा जुपिटर वाहन से कुल 39.770 किलोग्राम गांजा बरामद किए जाने की बात सामने आई थी। बरामदगी के बाद पुलिस ने प्रकरण दर्ज कर आरोपियों के विरुद्ध NDPS अधिनियम के तहत कार्रवाई की थी।
मामला न्यायालय पहुंचने के बाद अभियोजन की ओर से पुलिस अधिकारियों एवं अन्य संबंधित गवाहों के बयान तथा दस्तावेजी साक्ष्य प्रस्तुत किए गए। अभियोजन का उद्देश्य यह साबित करना था कि बरामद मादक पदार्थ आरोपियों के कब्जे से मिला था और पूरी कार्रवाई नियमानुसार की गई थी।
हालांकि सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने पुलिस की कार्रवाई के कई पहलुओं पर सवाल उठाए और कहा कि मामले में तलाशी एवं जब्ती की प्रक्रिया से संबंधित महत्वपूर्ण परिस्थितियां पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो पाईं।
कसडोल थाना परिसर का CCTV फुटेज नहीं हो सका पेश
मामले की सुनवाई के दौरान थाना कसडोल के CCTV फुटेज को लेकर भी महत्वपूर्ण सवाल सामने आया। बचाव पक्ष की ओर से पुलिस कार्रवाई की वास्तविक परिस्थितियों को स्पष्ट करने के लिए CCTV फुटेज का मुद्दा उठाया गया।
बचाव पक्ष का तर्क था कि यदि संबंधित समय का CCTV फुटेज उपलब्ध था, तो उसे न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया जाना चाहिए था, ताकि पुलिस कार्रवाई की परिस्थितियों और आरोपियों को थाने लाए जाने अथवा कार्रवाई से जुड़े घटनाक्रम की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके।
लेकिन सुनवाई के दौरान संबंधित CCTV फुटेज न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत नहीं हो सका। बचाव पक्ष ने इसी बिंदु को अभियोजन के मामले की विश्वसनीयता से जोड़ते हुए न्यायालय के समक्ष अपना पक्ष रखा।
तलाशी और जब्ती की प्रक्रिया पर भी उठे सवाल
NDPS मामलों में तलाशी और जब्ती की प्रक्रिया का विशेष महत्व होता है। इसी को आधार बनाते हुए बचाव पक्ष ने मामले में अपनाई गई तलाशी एवं जब्ती की प्रक्रिया पर सवाल उठाए।
बचाव पक्ष की ओर से यह तर्क दिया गया कि मादक पदार्थ की बरामदगी का दावा करने के साथ-साथ अभियोजन को यह भी स्पष्ट करना होता है कि तलाशी और जब्ती किस परिस्थिति में हुई, कौन-कौन लोग मौजूद थे, बरामदगी की प्रक्रिया किस प्रकार पूरी की गई तथा जब्त सामग्री को सुरक्षित रखने और आगे भेजने की प्रक्रिया किस तरह अपनाई गई।
बचाव पक्ष ने न्यायालय के समक्ष यह भी तर्क रखा कि जहां अभियोजन की कहानी के महत्वपूर्ण हिस्सों की स्वतंत्र एवं ठोस पुष्टि नहीं हो पाती, वहां केवल पुलिस दस्तावेजों के आधार पर आरोप को संदेह से परे साबित मानना उचित नहीं होगा।
अभियोजन के साक्ष्यों पर न्यायालय ने किया विचार
मामले की सुनवाई के दौरान न्यायालय ने अभियोजन द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों और बचाव पक्ष द्वारा उठाए गए आपत्तियों पर विचार किया। आपराधिक मामलों में अभियोजन पर आरोपों को संदेह से परे साबित करने का दायित्व होता है।
इस मामले में न्यायालय ने उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद यह माना कि आरोपों को आवश्यक कानूनी मानक के अनुसार संदेह से परे साबित नहीं किया जा सका।
इसके परिणामस्वरूप न्यायालय ने आरोपियों को दोषमुक्त करने का निर्णय दिया।
रामनाथ पटेल को मिली जमानत
प्रकरण में आरोपी रामनाथ पटेल को न्यायालय से जमानत भी मिली। न्यायालय के आदेश के बाद मामले में आरोपियों को राहत प्राप्त हुई।
यह फैसला NDPS मामलों में पुलिस द्वारा की जाने वाली तलाशी एवं जब्ती की प्रक्रिया तथा अभियोजन द्वारा प्रस्तुत किए जाने वाले साक्ष्यों के महत्व को एक बार फिर सामने लाता है।
बचाव पक्ष ने कार्रवाई की पारदर्शिता पर उठाए सवाल
बचाव पक्ष के अधिवक्ता जितेंद्र चंद्राकर ने मामले में पुलिस कार्रवाई की पारदर्शिता और प्रक्रिया से जुड़े पहलुओं पर सवाल उठाए। उनका कहना था कि किसी भी आपराधिक मामले में बरामदगी की कहानी के साथ-साथ कार्रवाई की प्रत्येक महत्वपूर्ण कड़ी का विश्वसनीय साक्ष्य के माध्यम से स्थापित होना जरूरी है।
अधिवक्ता चंद्राकर के अनुसार, मामले में CCTV फुटेज पेश नहीं होने, तलाशी-जब्ती की प्रक्रिया से जुड़े बिंदुओं तथा अन्य परिस्थितियों के कारण अभियोजन की कहानी को संदेह से परे स्थापित करने में कठिनाई रही।
उन्होंने कहा कि न्यायालय ने उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद आरोपियों को दोषमुक्त किया है।
NDPS मामलों में प्रक्रिया का महत्व
कानूनी जानकारों के अनुसार NDPS अधिनियम से जुड़े मामलों में मादक पदार्थ की बरामदगी जितनी महत्वपूर्ण होती है, उतनी ही महत्वपूर्ण उसकी तलाशी, जब्ती, सीलिंग, सुरक्षित अभिरक्षा और साक्ष्य की निरंतरता से जुड़ी प्रक्रिया भी होती है।
यदि अभियोजन किसी मामले में आरोप सिद्ध करना चाहता है तो उसे बरामदगी की परिस्थितियों के साथ-साथ संबंधित कानूनी प्रक्रिया और साक्ष्य की विश्वसनीयता भी न्यायालय के समक्ष स्थापित करनी होती है।
इस मामले में न्यायालय के समक्ष इन्हीं प्रक्रियात्मक एवं साक्ष्य संबंधी पहलुओं पर बचाव पक्ष ने जोर दिया। उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद न्यायालय इस निष्कर्ष पर पहुंचा कि आरोपों को संदेह से परे सिद्ध नहीं माना जा सकता।
न्यायालय के फैसले से सामने आया महत्वपूर्ण कानूनी पहलू
39.770 किलोग्राम गांजा बरामदगी जैसे गंभीर आरोप वाले मामले में आरोपियों का दोषमुक्त होना न्यायिक प्रक्रिया में साक्ष्य की भूमिका को रेखांकित करता है। किसी व्यक्ति के विरुद्ध लगाया गया आरोप कितना भी गंभीर क्यों न हो, आपराधिक न्याय व्यवस्था में दोष सिद्ध करने के लिए अभियोजन को निर्धारित कानूनी कसौटी पर साक्ष्य प्रस्तुत करना होता है।
इस प्रकरण में न्यायालय ने उपलब्ध रिकॉर्ड और साक्ष्यों का परीक्षण किया तथा अभियोजन द्वारा लगाए गए आरोपों को संदेह से परे सिद्ध नहीं पाया। इसी आधार पर आरोपियों को दोषमुक्त किया गया।
फैसला पुलिस कार्रवाई पर भी महत्वपूर्ण सवाल छोड़ गया
इस मामले का फैसला केवल आरोपियों को मिली राहत तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जांच और अभियोजन की प्रक्रिया से जुड़े कई महत्वपूर्ण सवाल भी सामने लाता है। विशेषकर ऐसे मामलों में जहां बरामदगी को मुकदमे का मुख्य आधार बनाया जाता है, वहां तलाशी और जब्ती की पूरी प्रक्रिया का दस्तावेजीकरण और उपलब्ध इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को सुरक्षित रखना महत्वपूर्ण माना जाता है।
कसडोल थाना परिसर के CCTV फुटेज का न्यायालय में प्रस्तुत नहीं हो पाना भी सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के तर्कों का हिस्सा बना। इसके अलावा तलाशी एवं जब्ती की प्रक्रिया को लेकर उठाई गई आपत्तियों पर भी न्यायालय ने विचार किया।
आरोप सिद्ध नहीं होने पर मिला दोषमुक्ति का लाभ
अंततः न्यायालय ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर यह माना कि अभियोजन आरोपों को संदेह से परे साबित करने में सफल नहीं रहा। इसके बाद आरोपियों को दोषमुक्त किए जाने का आदेश दिया गया।
मामले में रामनाथ पटेल को जमानत मिलने से उन्हें भी न्यायिक राहत मिली है।
यह खबर न्यायालय के निर्णय, उपलब्ध मामले की जानकारी और बचाव पक्ष की ओर से रखे गए तर्कों पर आधारित है। किसी व्यक्ति के विरुद्ध आरोपों को यहां अंतिम सत्य के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जा रहा है। न्यायालय द्वारा दोषमुक्त किए जाने के बाद संबंधित आरोपों को उसी संदर्भ में देखा जाना चाहिए।
    user_Prabhat news 24
    Prabhat news 24
    पत्रकार बलौदा बाजार, बलौदा बाजार, छत्तीसगढ़•
    6 hrs ago
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