“माफिया, अपराधी और भ्रष्टाचारियों के लिए उत्तर प्रदेश में कोई जगह नहीं है राजधानी लखनऊ में माफियाओं पर शिकंजा कसने के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी के सख्त निर्देशों के बीच एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने पूरे सिस्टम को कटघरे में खड़ा कर दिया है। एक तरफ़ मुख्यमंत्री खुले मंच से साफ कह चुके हैं— “माफिया, अपराधी और भ्रष्टाचारियों के लिए उत्तर प्रदेश में कोई जगह नहीं है”, तो दूसरी तरफ़ राजधानी से सामने आई यह घटना कई गंभीर सवाल खड़े कर रही है। सूत्रों के हवाले से जो जानकारी सामने आ रही है, उसके मुताबिक कुछ प्रभावशाली लोग नियम-कानून को ताक पर रखकर अपने फायदे के लिए सिस्टम से खेलने की कोशिश कर रहे थे। सबसे हैरानी की बात यह है कि यह सब उस वक्त उजागर हुआ है, जब प्रशासन को माफियाओं के खिलाफ ज़ीरो टॉलरेंस पर काम करने के निर्देश हैं। 👉 सवाल ये है— क्या ज़मीनी स्तर पर मुख्यमंत्री के आदेशों को हल्के में लिया जा रहा है? क्या कुछ लोग अब भी खुद को कानून से ऊपर समझ रहे हैं? और क्या राजधानी लखनऊ में पर्दे के पीछे कुछ और चल रहा है? प्रशासन का कहना है कि मामले को गंभीरता से लिया गया है और जांच के आदेश दे दिए गए हैं। अधिकारियों ने साफ किया है कि दोषी चाहे कितना भी बड़ा या रसूखदार क्यों न हो, कार्रवाई तय है। सीएम योगी की नीति बिल्कुल स्पष्ट है— ⚠️ न माफिया बचेगा, न संरक्षण देने वाला। अब सबकी निगाहें प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। क्योंकि यह मामला सिर्फ एक घटना नहीं, बल्कि यह परीक्षा है कि राजधानी में कानून का डर कितना ज़िंदा है।
“माफिया, अपराधी और भ्रष्टाचारियों के लिए उत्तर प्रदेश में कोई जगह नहीं है राजधानी लखनऊ में माफियाओं पर शिकंजा कसने के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी के सख्त निर्देशों के बीच एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने पूरे सिस्टम को कटघरे में खड़ा कर दिया है। एक तरफ़ मुख्यमंत्री खुले मंच से साफ कह चुके हैं— “माफिया, अपराधी और भ्रष्टाचारियों के लिए उत्तर प्रदेश में कोई जगह नहीं है”, तो दूसरी तरफ़ राजधानी से सामने आई यह घटना कई गंभीर सवाल खड़े कर रही है। सूत्रों के हवाले से जो जानकारी सामने आ रही है, उसके मुताबिक कुछ प्रभावशाली लोग नियम-कानून को ताक पर रखकर अपने फायदे के लिए सिस्टम से खेलने की कोशिश कर रहे थे। सबसे हैरानी की बात यह है कि यह सब उस वक्त उजागर हुआ है, जब प्रशासन को माफियाओं के खिलाफ ज़ीरो टॉलरेंस पर काम करने के निर्देश हैं। 👉 सवाल ये है— क्या ज़मीनी स्तर पर मुख्यमंत्री के आदेशों को हल्के में लिया जा रहा है? क्या कुछ लोग अब भी खुद को कानून से ऊपर समझ रहे हैं? और क्या राजधानी लखनऊ में पर्दे के पीछे कुछ और चल रहा है? प्रशासन का कहना है कि मामले को गंभीरता से लिया गया है और जांच के आदेश दे दिए गए हैं। अधिकारियों ने साफ किया है कि दोषी चाहे कितना भी बड़ा या रसूखदार क्यों न हो, कार्रवाई तय है। सीएम योगी की नीति बिल्कुल स्पष्ट है— ⚠️ न माफिया बचेगा, न संरक्षण देने वाला। अब सबकी निगाहें प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। क्योंकि यह मामला सिर्फ एक घटना नहीं, बल्कि यह परीक्षा है कि राजधानी में कानून का डर कितना ज़िंदा है।
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- Post by MAKKI TV NEWS1
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- Post by MAKKI TV NEWS1
- गौवंशों को चारा दाना की बात छोड़िए,जिम्मेदार तन ढकने के लिए छाया का भी बंदोबस्त नहीं कर सके, ग्राम पंचायत चेना की गौशाला बदहाली की कगार पर,जिम्मेदारों की अनदेखी ने खोली सरकारी दावों की पोल। हरदोई जनपद की ब्लॉक टोडरपुर की ग्राम पंचायत चेना में संचालित गौशाला की स्थिति बेहद दयनीय बताई जा रही है। शासन और प्रशासन की ओर से गौवंश संरक्षण के नाम पर किए जा रहे दावों के बीच इस गौशाला की बदहाली न केवल सरकारी योजनाओं की जमीन पर हकीकत बयान कर रही है, बल्कि जिम्मेदारों की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर रही है। स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार गौशाला में रहने वाले पशुओं के लिए न पर्याप्त छाया है, न पीने लायक शुद्ध पानी और न ही पौष्टिक चारा उपलब्ध है। गौवंशों के लिए सुरक्षा और देखभाल के मद में सरकार लाखों रुपये खर्च कर रही है, लेकिन जमीनी स्थिति इससे बिल्कुल उलट दिखाई दे रही है। गौशाला में न कोई केयरटेकर मौजूद है, न ही देखभाल के लिए कोई नियमित कर्मचारी नियुक्त किया गया है। ऐसी स्थिति में गौवंश दिन-रात खुले में पड़े रहने को मजबूर हैं और उनका जीवन पूरी तरह भगवान भरोसे चल रहा है। प्रशासन गौशाला की ओर बिल्कुल ध्यान नहीं दे रहा। स्थानीय लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि ग्राम पंचायत चेना के प्रधान की गौवंश संरक्षण में रुचि न होने के कारण गौशाला की स्थिति लगातार बिगड़ी है। ग्रामीणों का कहना है कि प्रधान कभी गौशाला का निरीक्षण करने नहीं आता,यहां तक कि पशुओं की संख्या, उनके लिए उपलब्ध चारा, पानी और देखभाल की स्थिति के बारे में भी उसे कोई जानकारी नहीं रहती। ग्रामीणों ने पीड़ा व्यक्त करते हुए बताया कि गौशाला में कई पशुओं की मृत्यु हो चुकी है,लेकिन प्रशासन की ओर से कोई संज्ञान नहीं लिया गया। ठंड के मौसम में पशुओं के लिए न बिछावन है,न छप्पर और न ही कोई सुरक्षित आश्रय। दिन में धूप और रात में ठिठुरन के बीच असहाय पशुओं की हालत देखकर ग्रामीण भी भावनात्मक रूप से आहत हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि ग्राम पंचायत चेना की गौशाला के लिए सरकारी स्तर पर बजट जारी होने और योजनाएं लागू होने के बावजूद यह धन आखिर खर्च कहां हो रहा है? गोवंशों की वास्तविक स्थिति किसी भी निरीक्षण,रिपोर्टिंग या भू-लेख पर दर्ज नहीं हो रही। ग्रामीणों का कहना है कि ग्राम प्रधान,सचिव,ब्लॉक स्तर के अधिकारी और पशु चिकित्साधिकारी सभी मौन हैं, जिससे यह स्पष्ट है कि अनियमितताओं पर पर्दा डालने की कोशिश की जा रही है।1