हाथरस के सादाबाद कोतवाली परिसर में पुलिस कर्मियों के लिए निर्मित आधुनिक और हवादार आरक्षी बैरक का उद्घाटन पुलिस अधीक्षक चिरंजीव नाथ सिन्हा ने किया। उद्घाटन के उपरांत, उन्होंने बैरक का निरीक्षण कर वहां उपलब्ध सुविधाओं का जायजा भी लिया। निरीक्षण के दौरान पुलिस अधीक्षक ने बताया कि पुलिस जवान दिन-रात कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए कठिन परिस्थितियों में अपनी जिम्मेदारियां निभाते हैं, और ऐसे में उन्हें बेहतर आवासीय सुविधाएं प्रदान करना पुलिस विभाग की प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने यह भी कहा कि इन आधुनिक, स्वच्छ और हवादार बैरकों से जवानों को एक बेहतर वातावरण मिलेगा, जिससे निश्चित रूप से उनके मनोबल और कार्यक्षमता में वृद्धि होगी। इसी के साथ, उन्होंने संबंधित अधिकारियों को बैरक की व्यवस्थाओं का नियमित रखरखाव सुनिश्चित करने के निर्देश भी जारी किए।
हाथरस के सादाबाद कोतवाली परिसर में पुलिस कर्मियों के लिए निर्मित आधुनिक और हवादार आरक्षी बैरक का उद्घाटन पुलिस अधीक्षक चिरंजीव नाथ सिन्हा ने किया। उद्घाटन के उपरांत, उन्होंने बैरक का निरीक्षण कर वहां उपलब्ध सुविधाओं का जायजा भी लिया। निरीक्षण के दौरान पुलिस अधीक्षक ने बताया कि पुलिस जवान दिन-रात कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए कठिन परिस्थितियों में अपनी जिम्मेदारियां निभाते हैं, और ऐसे में उन्हें बेहतर आवासीय सुविधाएं प्रदान करना पुलिस विभाग की प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने यह भी कहा कि इन आधुनिक, स्वच्छ और हवादार बैरकों से जवानों को एक बेहतर वातावरण मिलेगा, जिससे निश्चित रूप से उनके मनोबल और कार्यक्षमता में वृद्धि होगी। इसी के साथ, उन्होंने संबंधित अधिकारियों को बैरक की व्यवस्थाओं का नियमित रखरखाव सुनिश्चित करने के निर्देश भी जारी किए।
- उत्तर प्रदेश के आगरा के थाना सिकंदरा क्षेत्र से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहाँ एक महिला पर अपने ही पति की हत्या करने और फिर सबूत मिटाने के लिए शव को घर के बाथरूम में दफना देने का आरोप है। कथित तौर पर, महिला ने शव के ऊपर प्लास्टर भी करा दिया था ताकि किसी को शक न हो। वारदात के बाद, महिला करीब डेढ़ महीने तक पति के लापता होने की झूठी कहानी गढ़ती रही और उसने पुलिस थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट भी दर्ज करा दी थी, जिससे मामला एक सामान्य गुमशुदगी की तरह दिखाई दे। हालांकि, कहानी में उस समय बड़ा मोड़ आया जब पुलिस सत्यापन के लिए महिला के घर पहुँची। इस दौरान मृतक के भाई ने महिला की गतिविधियों पर संदेह व्यक्त किया और बाथरूम की खुदाई कराने की माँग की। पुलिस ने संदेह के आधार पर खुदाई करवाई तो बाथरूम के नीचे से शव बरामद हो गया। इस घटना के बाद पूरे इलाके में सनसनी फैल गई। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और आरोपी महिला से गहन पूछताछ कर रही है। पुलिस हत्या के कारणों, पूरी साजिश और इसमें किसी अन्य व्यक्ति की संभावित भूमिका की भी जाँच कर रही है। मामले में आगे की कार्रवाई जारी है।1
- उत्तर प्रदेश के हाथरस जिले में पुलिस को एक बड़ी सफलता मिली है, जहां थाना हाथरस गेट क्षेत्र में हुई फायरिंग की घटना में वांछित ₹25 हजार के इनामी आरोपी मोना ठाकुर उर्फ सचप्रताप सिंह को गिरफ्तार कर लिया गया है। यह गिरफ्तारी एसओजी, थाना हाथरस जंक्शन और थाना हाथरस गेट पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में एक मुठभेड़ के दौरान हुई। पुलिस के अनुसार, यह मामला 18 जून 2026 को थाना हाथरस गेट क्षेत्र स्थित कैलाश ढाबे के पास दो पक्षों के बीच हुई फायरिंग से जुड़ा है, जिसके बाद एक मुकदमा दर्ज किया गया था। घटना की गंभीरता को देखते हुए, पुलिस अधीक्षक हाथरस चिरंजीव नाथ सिन्हा के निर्देशन में चार विशेष टीमों का गठन किया गया था और आरोपियों पर ₹25-25 हजार का इनाम घोषित किया गया था। शुक्रवार को पुलिस को सूचना मिली कि घटना में शामिल इनामी आरोपी मोना ठाकुर मथुरा-बरेली हाईवे पर मेण्डू-रूहेरी रोड की ओर मौजूद है। पुलिस टीम ने घेराबंदी की तो आरोपी ने फायरिंग शुरू कर दी। आत्मरक्षा में पुलिस द्वारा की गई जवाबी कार्रवाई में आरोपी के दोनों पैरों में गोली लगी, जिसके बाद उसे तुरंत गिरफ्तार कर लिया गया। मुठभेड़ के दौरान आरोपी की गोली पुलिस वाहन और थाना हाथरस जंक्शन प्रभारी की बुलेटप्रूफ जैकेट में भी लगी। घायल आरोपी मोना ठाकुर को उपचार के लिए अस्पताल भेज दिया गया है। उसके कब्जे से एक 315 बोर का तमंचा, दो जिंदा कारतूस, तीन खोखा कारतूस और एक होंडा अमेज कार बरामद की गई है। पुलिस ने बताया कि गिरफ्तार आरोपी मोना ठाकुर थाना हाथरस जंक्शन का हिस्ट्रीशीटर है और उसके विरुद्ध हत्या, हत्या के प्रयास, गैंगस्टर एक्ट, आर्म्स एक्ट, गुंडा एक्ट तथा एनडीपीएस एक्ट सहित करीब दो दर्जन गंभीर आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं। वह कई बार जेल भी जा चुका है। इस संबंध में थाना हाथरस जंक्शन पुलिस द्वारा अग्रिम वैधानिक कार्रवाई की जा रही है।3
- उत्तर प्रदेश के जनपद एटा में जलेसर के थाना शकरौली क्षेत्र के ग्राम वलीदादपुर में 26 जून 2026 की सुबह करीब 7 बजे खेल रहे चार वर्षीय मासूम उवेश कुमार की टाँग एक बैलगाड़ी द्वारा कुचल दी गई, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया। घटना के बाद बैलगाड़ी चालक मौके से फरार हो गया, जिसके बाद गंभीर रूप से घायल बच्चे को तत्काल उपचार के लिए आगरा ले जाया गया, जहाँ उसका इलाज जारी है। इस मामले में दर्ज एफआईआर संख्या 0095 को लेकर पीड़ित परिवार और ग्रामीणों ने पुलिस की प्रारंभिक कार्यवाही पर गंभीर सवाल उठाए हैं, आरोप है कि इसमें सच्चाई का गला घोंटा गया है। पीड़ित परिवार और ग्रामीणों का दावा है कि एफआईआर में जिस व्यक्ति का नाम आरोपी के रूप में दर्ज किया गया है, वह वास्तविक बैलगाड़ी चालक नहीं है। इसके अतिरिक्त, दुर्घटना में प्रयुक्त वाहन का विवरण भी वास्तविक घटना से अलग स्थान पर दर्ज किया गया है। परिजनों का कहना है कि सोशल मीडिया पर वायरल हुआ एक वीडियो, जिसमें घटना स्थल पर महिलाओं की चीख-पुकार सुनाई दे रही है, उनके इस आरोप की पुष्टि करता है कि दुर्घटना बैलगाड़ी से हुई थी। हालाँकि, वायरल वीडियो की स्वतंत्र एवं आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है। ग्रामीणों ने निष्पक्ष जांच के लिए वायरल वीडियो, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान, घटनास्थल के साक्ष्य और अन्य उपलब्ध प्रमाणों की वैज्ञानिक तथा निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका मानना है कि वास्तविक दोषी की पहचान कर बैलगाड़ी चालक के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। पीड़ित परिवार ने प्रशासन से पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है। उन्होंने यह भी कहा है कि यदि एफआईआर में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी या लापरवाही पाई जाती है, तो जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध कानून के अनुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। साथ ही, घायल मासूम के समुचित उपचार और आर्थिक सहायता की व्यवस्था सुनिश्चित करने की अपील भी की गई है। यह मामला अब केवल एक परिवार की पीड़ा तक सीमित नहीं है, बल्कि सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि क्या उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर विवेचना निष्पक्ष होगी या फिर उठ रहे सवालों का समाधान किए बिना ही मामले को आगे बढ़ा दिया जाएगा। अब सभी की निगाहें पुलिस विवेचना और प्रशासनिक जांच पर टिकी हैं, जिसके तथ्य ही निर्धारित करेंगे कि पीड़ित परिवार द्वारा लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है।1
- शिक्षा विभाग की नींद नहीं खुलने के कारण बच्चों का भविष्य अंधकारमय दिख रहा है। बच्चों के भविष्य पर इस स्थिति का सीधा और गंभीर प्रभाव पड़ रहा है।1
- एक नए बयान में, बृजभूषण ने यह जानकारी दी है कि उन्होंने चार साल पहले ही इस विषय में आगाह कर दिया था।1
- एटा जिले के पासियापुर, बेगमपुर में एक लड़के की शादी के अवसर पर एक भव्य दावत का आयोजन किया गया। इस समारोह में परिवार के सदस्यों, रिश्तेदारों, मित्रों और गांव के अनेक लोगों ने बड़े उत्साह के साथ भाग लिया। सभी मेहमानों का पारंपरिक तरीके से स्वागत किया गया, और उनके लिए स्वादिष्ट भोजन की उत्तम व्यवस्था की गई थी। पूरे कार्यक्रम के दौरान खुशी, उल्लास और भाईचारे का माहौल रहा। उपस्थित लोगों ने एक-दूसरे से मिलकर शुभकामनाएँ दीं और नवदंपति के सुखद एवं समृद्ध वैवाहिक जीवन की कामना की। यह आयोजन सभी के लिए यादगार और आनंदमय साबित हुआ।1
- बांदा जनपद की बबेरू विधानसभा 233 के अंतर्गत कमासिन विकासखंड की ग्राम पंचायतों लखनपुर, बीरा और मुसीवा का स्थलीय निरीक्षण किया गया, जिसमें विकास कार्यों की जमीनी हकीकत सरकारी दावों से बिलकुल अलग पाई गई। आरोप है कि विकास के नाम पर करोड़ों रुपये डकार लिए गए हैं, जिसके कारण ये ग्राम पंचायतें चारों ओर से मुसीबतों से घिरी हैं। यह तस्वीर सरकारी दावों और मंचों से किए जाने वाले बड़े-बड़े भाषणों से बिल्कुल भिन्न है, जिससे यह सवाल उठता है कि हाईवे और स्मार्ट सिटी के दावों से देश विकसित नहीं होगा जब तक गाँव की गलियों में विकास नहीं पहुँचेगा। निरीक्षण में सामने आया कि गाँवों में आज भी नालियों का अभाव है, और जहाँ बनी भी हैं, वे जर्जर होकर बजबजा रही हैं। कई जगह खड़ंजे टूटे पड़े हैं, जबकि कई गलियों में तो आज तक खड़ंजे बने ही नहीं। लगभग 50 प्रतिशत परिवारों को अभी भी शौचालय जैसी बुनियादी सुविधा नहीं मिल पाई है। प्राथमिक विद्यालयों और आंगनबाड़ी केंद्रों तक जाने के रास्ते भी बदहाल हैं। ग्राम बीरा के आंगनबाड़ी केंद्र का मार्ग बेहद खराब होने के साथ-साथ वहाँ पीने के पानी के लिए एक हैंडपंप तक उपलब्ध नहीं है। इसी तरह, ग्राम पंचायत मुसीवा में जल निकासी की समुचित व्यवस्था न होने से ग्रामीणों का जीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। इस स्थिति पर सवाल उठाया गया है कि आखिर विकास के नाम पर आया करोड़ों रुपये का बजट कहाँ गया और जनता के टैक्स का पैसा किसकी जेब में पहुँच गया। यह भी पूछा गया है कि दिशा समिति की बैठकों का उद्देश्य क्या सिर्फ़ फोटो खिंचवाना और अखबारों में खबरें छपवाना रह गया है। खुले मंच से विधायक, सांसद, ब्लॉक प्रमुख, अधिकारियों और सभी जनप्रतिनिधियों को चुनौती दी गई है कि यदि उन्हें अपने विकास कार्यों पर भरोसा है, तो वे गाँवों में चलकर जमीनी हकीकत देख लें। जोर दिया गया है कि गाँवों की जनता भी देश की नागरिक है और उनके बच्चों को भी सम्मानजनक शिक्षा, स्वच्छ वातावरण तथा मूलभूत सुविधाओं का समान अधिकार मिलना चाहिए। यह कहा गया है कि आजादी के 78 वर्ष बाद भी यदि ग्रामीण क्षेत्रों की ऐसी स्थिति है, तो केवल भाषणों, करोड़ों की घोषणाओं, हाईवे और स्मार्ट सिटी के निर्माण से भारत विकसित राष्ट्र नहीं बनेगा; भारत तभी विकसित बनेगा जब गाँव का हर रास्ता, हर नाली, हर विद्यालय और हर घर विकास की सच्ची गवाही देगा। अंत में, उत्तर प्रदेश सरकार, जिला प्रशासन और संबंधित अधिकारियों से ग्राम पंचायत लखनपुर, बीरा और मुसीवा की समस्याओं का तत्काल संज्ञान लेकर समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करने और जनता को यह बताने की मांग की गई है कि विकास के नाम पर आया करोड़ों रुपये आखिर कहाँ खर्च हुआ।4
- आगरा में हुई एक सरकारी खुदाई के कारण एक गरीब परिवार का आशियाना ढह गया है। इस घटना ने पूरे परिवार को बेघर कर दिया है, जिससे उन्हें बड़ी मुसीबत का सामना करना पड़ रहा है।1
- हाथरस के थाना चंदपा क्षेत्र के कछपुरा गांव में आपसी विवाद के दौरान हुई गोलीबारी में दो सगे भाई गंभीर रूप से घायल हो गए। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस तत्काल मौके पर पहुंची और घायलों को उपचार के लिए जिला अस्पताल भेजा। घायल भाइयों की पहचान 70 वर्षीय महेश उपाध्याय और उनके 60 वर्षीय छोटे भाई गिरीश उपाध्याय, पुत्रगण रूप सिंह के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि किसी बात को लेकर दोनों पक्षों के बीच विवाद शुरू हुआ, जिसमें गांव का एक अन्य व्यक्ति भी शामिल हो गया। आरोप है कि विवाद बढ़ने पर इस व्यक्ति ने पहले गाली-गलौज की और फिर तमंचे से फायरिंग कर दी, जिससे दोनों भाई गोली लगने से घायल हो गए। इस घटना के बाद गांव में तनाव की स्थिति को देखते हुए भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया। सूचना मिलने पर पुलिस अधीक्षक भी घटनास्थल पर पहुंचे और मामले की जानकारी ली। पुलिस ने इस संबंध में जांच शुरू कर दी है और आरोपित व्यक्ति की तलाश की जा रही है।1