जानसठ ज्ञानेश्वर महादेव मंदिर में उमड़ा जनसैलाब, 'हिंदू बचाओ, हिंदू बढ़ाओ और हिंदू पढ़ाओ' का गूंजा शंखनाद आरएसएस के शताब्दी वर्ष पर आयोजित विराट हिंदू सम्मेलन में हुंकार; छुआछूत मिटाने और स्वदेशी अपनाने का लिया संकल्प जानसठ । ऐतिहासिक और पौराणिक महत्व की स्थली, जहाँ कभी भगवान श्रीकृष्ण ने बैठक की थी, उसी ज्ञानेश्वर महादेव मंदिर के प्रांगण में सोमवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में एक 'विराट हिंदू सम्मेलन' का आयोजन किया गया। इस गौरवमयी अवसर पर वक्ताओं ने हिंदुत्व की रक्षा, सनातन संस्कृति के संरक्षण और सामाजिक समरसता का पुरजोर संदेश दिया। कार्यक्रम का शुभारंभ भारत माता और प्रभु श्री रामचंद्र जी के चित्र के सम्मुख दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया। सैकड़ों की संख्या में जुटे जनसमूह ने 'भारत माता की जय' के नारों से आकाश गुंजायमान कर दिया। मुख्य वक्ता संजय लाखन ने संघ के इतिहास पर प्रकाश डालते हुए कहा, "वर्ष 1925 में नागपुर की धरती से जिस उद्देश्य के साथ आरएसएस की स्थापना हुई थी, आज वह वटवृक्ष बनकर पूरे विश्व को राह दिखा रहा है। शताब्दी वर्ष के ये कार्यक्रम केवल उत्सव नहीं, बल्कि भारत की बढ़ती शक्ति का प्रदर्शन हैं।" सामाजिक कुरीतियों पर प्रहार और पर्यावरण संरक्षण विशिष्ट वक्ता उदय जी ने अपने संबोधन में सामाजिक एकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि हमें छुआछूत जैसी कुरीतियों को त्यागना होगा। उन्होंने तर्क दिया कि वाल्मीकि समाज को समाज में पुजारी और मुखाग्नि जैसे पवित्र कार्यों का अधिकार है, इसे हमें हृदय से स्वीकारना होगा। पर्यावरण पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा, "यदि हमने आज पीपल जैसे वृक्षों का संरक्षण नहीं किया और नए पौधे नहीं लगाए, तो आने वाली पीढ़ियों को स्कूल बैग के साथ ऑक्सीजन सिलेंडर ले जाना पड़ेगा।" उन्होंने नवरात्रि में कन्या पूजन के दौरान प्लास्टिक और डिस्पोजल के उपयोग पर प्रतिबंध लगाने तथा स्वदेशी वस्तुओं को अपनाने का आह्वान किया। स्वामी यशवीर महाराज का ओजस्वी संबोधन---"जागृत हिंदू ही सुरक्षित भारत की नींव" योग साधना आश्रम बघरा के पीठाधीश्वर स्वामी यशवीर महाराज ने मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित जनसमूह में जोश भरते हुए कहा--- "आज समय की मांग है कि हिंदू समाज अपनी सोई हुई शक्ति को पहचाने। हमारी एकता ही हमारी सबसे बड़ी सुरक्षा है। 'हिंदू बचाओ, हिंदू बढ़ाओ और हिंदू पढ़ाओ' केवल एक नारा नहीं, बल्कि हर सनातनी का जीवन मंत्र होना चाहिए। हमें अपनी संस्कृति पर गर्व करना होगा और उन ताकतों को मुंहतोड़ जवाब देना होगा जो सनातन धर्म को कमजोर करने का प्रयास कर रही हैं। सामूहिक भजन, सामूहिक पूजन और परिवार के साथ समय बिताना ही हमारे संस्कारों को जीवित रखेगा। भोजन के समय मोबाइल को दूर रखकर अपनों से जुड़ें, तभी कुटुंब और समाज मजबूत होगा। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रवीण तंवर ने की, जबकि मंच का कुशल संचालन ठाकुर पूनम राणा व ठाकुर प्रदीप राणा ने संयुक्त रूप से किया। इस अवसर पर क्षेत्र के गणमान्य व्यक्ति और भारी संख्या में मातृशक्ति व युवा उपस्थित रहे। सम्मेलन के अंत में सभी ने एकजुट होकर राष्ट्र और धर्म की सेवा का संकल्प लिया।इस दौरान मुख्य रूप बृजेश रस्तोगी रोहित खत्री अजय कुमार दिनेश कुमार नेत्रपाल कश्यप तेजपाल अरविंद प्रजापति शिवा सैनी नितिन कंबोज, शालू वालिया, अनिल स्मृति बिट्टू कांबोज गोपाल सैनी यनेश तंवर, सवीता नीलम ज्योति सरीता कोमल आदि मौजूद रहे।
जानसठ ज्ञानेश्वर महादेव मंदिर में उमड़ा जनसैलाब, 'हिंदू बचाओ, हिंदू बढ़ाओ और हिंदू पढ़ाओ' का गूंजा शंखनाद आरएसएस के शताब्दी वर्ष पर आयोजित विराट हिंदू सम्मेलन में हुंकार; छुआछूत मिटाने और स्वदेशी अपनाने का लिया संकल्प जानसठ । ऐतिहासिक और पौराणिक महत्व की स्थली, जहाँ कभी भगवान श्रीकृष्ण ने बैठक की थी, उसी ज्ञानेश्वर महादेव मंदिर के प्रांगण में सोमवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में एक 'विराट हिंदू सम्मेलन' का आयोजन किया गया। इस गौरवमयी अवसर पर वक्ताओं ने हिंदुत्व की रक्षा, सनातन संस्कृति के संरक्षण और सामाजिक समरसता का पुरजोर संदेश दिया। कार्यक्रम का शुभारंभ भारत माता और प्रभु श्री रामचंद्र जी के चित्र के सम्मुख दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया। सैकड़ों की संख्या में जुटे जनसमूह ने 'भारत माता की जय' के नारों से आकाश गुंजायमान कर दिया। मुख्य वक्ता संजय लाखन ने संघ के इतिहास पर प्रकाश डालते हुए कहा, "वर्ष 1925 में नागपुर की धरती से जिस उद्देश्य के साथ आरएसएस की स्थापना हुई थी, आज वह वटवृक्ष बनकर पूरे विश्व को राह दिखा रहा है। शताब्दी वर्ष के ये कार्यक्रम केवल उत्सव नहीं, बल्कि भारत की बढ़ती शक्ति का प्रदर्शन हैं।" सामाजिक कुरीतियों पर प्रहार और पर्यावरण संरक्षण विशिष्ट वक्ता उदय जी ने अपने संबोधन में सामाजिक एकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि हमें छुआछूत जैसी कुरीतियों को त्यागना होगा। उन्होंने तर्क दिया कि वाल्मीकि समाज को समाज में पुजारी और मुखाग्नि जैसे पवित्र कार्यों का अधिकार है, इसे हमें हृदय से स्वीकारना होगा। पर्यावरण पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा, "यदि हमने आज पीपल जैसे वृक्षों का संरक्षण नहीं किया और नए पौधे नहीं लगाए, तो आने वाली पीढ़ियों को स्कूल बैग के साथ ऑक्सीजन सिलेंडर ले जाना पड़ेगा।" उन्होंने नवरात्रि में कन्या पूजन के दौरान प्लास्टिक और डिस्पोजल के उपयोग पर प्रतिबंध लगाने तथा स्वदेशी वस्तुओं को अपनाने का आह्वान किया। स्वामी यशवीर महाराज का ओजस्वी संबोधन---"जागृत हिंदू ही सुरक्षित भारत की नींव" योग साधना आश्रम बघरा के पीठाधीश्वर स्वामी यशवीर महाराज ने मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित जनसमूह में जोश भरते हुए कहा--- "आज समय की मांग है कि हिंदू समाज अपनी सोई हुई शक्ति को पहचाने। हमारी एकता ही हमारी सबसे बड़ी सुरक्षा है। 'हिंदू बचाओ, हिंदू बढ़ाओ और हिंदू पढ़ाओ' केवल एक नारा नहीं, बल्कि हर सनातनी का जीवन मंत्र होना चाहिए। हमें अपनी संस्कृति पर गर्व करना होगा और उन ताकतों को मुंहतोड़ जवाब देना होगा जो सनातन धर्म को कमजोर करने का प्रयास कर रही हैं। सामूहिक भजन, सामूहिक पूजन और परिवार के साथ समय बिताना ही हमारे संस्कारों को जीवित रखेगा। भोजन के समय मोबाइल को दूर रखकर अपनों से जुड़ें, तभी कुटुंब और समाज मजबूत होगा। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रवीण तंवर ने की, जबकि मंच का कुशल संचालन ठाकुर पूनम राणा व ठाकुर प्रदीप राणा ने संयुक्त रूप से किया। इस अवसर पर क्षेत्र के गणमान्य व्यक्ति और भारी संख्या में मातृशक्ति व युवा उपस्थित रहे। सम्मेलन के अंत में सभी ने एकजुट होकर राष्ट्र और धर्म की सेवा का संकल्प लिया।इस दौरान मुख्य रूप बृजेश रस्तोगी रोहित खत्री अजय कुमार दिनेश कुमार नेत्रपाल कश्यप तेजपाल अरविंद प्रजापति शिवा सैनी नितिन कंबोज, शालू वालिया, अनिल स्मृति बिट्टू कांबोज गोपाल सैनी यनेश तंवर, सवीता नीलम ज्योति सरीता कोमल आदि मौजूद रहे।
- जानसठ ज्ञानेश्वर महादेव मंदिर में उमड़ा जनसैलाब, 'हिंदू बचाओ, हिंदू बढ़ाओ और हिंदू पढ़ाओ' का गूंजा शंखनाद आरएसएस के शताब्दी वर्ष पर आयोजित विराट हिंदू सम्मेलन में हुंकार; छुआछूत मिटाने और स्वदेशी अपनाने का लिया संकल्प जानसठ । ऐतिहासिक और पौराणिक महत्व की स्थली, जहाँ कभी भगवान श्रीकृष्ण ने बैठक की थी, उसी ज्ञानेश्वर महादेव मंदिर के प्रांगण में सोमवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में एक 'विराट हिंदू सम्मेलन' का आयोजन किया गया। इस गौरवमयी अवसर पर वक्ताओं ने हिंदुत्व की रक्षा, सनातन संस्कृति के संरक्षण और सामाजिक समरसता का पुरजोर संदेश दिया। कार्यक्रम का शुभारंभ भारत माता और प्रभु श्री रामचंद्र जी के चित्र के सम्मुख दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया। सैकड़ों की संख्या में जुटे जनसमूह ने 'भारत माता की जय' के नारों से आकाश गुंजायमान कर दिया। मुख्य वक्ता संजय लाखन ने संघ के इतिहास पर प्रकाश डालते हुए कहा, "वर्ष 1925 में नागपुर की धरती से जिस उद्देश्य के साथ आरएसएस की स्थापना हुई थी, आज वह वटवृक्ष बनकर पूरे विश्व को राह दिखा रहा है। शताब्दी वर्ष के ये कार्यक्रम केवल उत्सव नहीं, बल्कि भारत की बढ़ती शक्ति का प्रदर्शन हैं।" सामाजिक कुरीतियों पर प्रहार और पर्यावरण संरक्षण विशिष्ट वक्ता उदय जी ने अपने संबोधन में सामाजिक एकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि हमें छुआछूत जैसी कुरीतियों को त्यागना होगा। उन्होंने तर्क दिया कि वाल्मीकि समाज को समाज में पुजारी और मुखाग्नि जैसे पवित्र कार्यों का अधिकार है, इसे हमें हृदय से स्वीकारना होगा। पर्यावरण पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा, "यदि हमने आज पीपल जैसे वृक्षों का संरक्षण नहीं किया और नए पौधे नहीं लगाए, तो आने वाली पीढ़ियों को स्कूल बैग के साथ ऑक्सीजन सिलेंडर ले जाना पड़ेगा।" उन्होंने नवरात्रि में कन्या पूजन के दौरान प्लास्टिक और डिस्पोजल के उपयोग पर प्रतिबंध लगाने तथा स्वदेशी वस्तुओं को अपनाने का आह्वान किया। स्वामी यशवीर महाराज का ओजस्वी संबोधन---"जागृत हिंदू ही सुरक्षित भारत की नींव" योग साधना आश्रम बघरा के पीठाधीश्वर स्वामी यशवीर महाराज ने मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित जनसमूह में जोश भरते हुए कहा--- "आज समय की मांग है कि हिंदू समाज अपनी सोई हुई शक्ति को पहचाने। हमारी एकता ही हमारी सबसे बड़ी सुरक्षा है। 'हिंदू बचाओ, हिंदू बढ़ाओ और हिंदू पढ़ाओ' केवल एक नारा नहीं, बल्कि हर सनातनी का जीवन मंत्र होना चाहिए। हमें अपनी संस्कृति पर गर्व करना होगा और उन ताकतों को मुंहतोड़ जवाब देना होगा जो सनातन धर्म को कमजोर करने का प्रयास कर रही हैं। सामूहिक भजन, सामूहिक पूजन और परिवार के साथ समय बिताना ही हमारे संस्कारों को जीवित रखेगा। भोजन के समय मोबाइल को दूर रखकर अपनों से जुड़ें, तभी कुटुंब और समाज मजबूत होगा। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रवीण तंवर ने की, जबकि मंच का कुशल संचालन ठाकुर पूनम राणा व ठाकुर प्रदीप राणा ने संयुक्त रूप से किया। इस अवसर पर क्षेत्र के गणमान्य व्यक्ति और भारी संख्या में मातृशक्ति व युवा उपस्थित रहे। सम्मेलन के अंत में सभी ने एकजुट होकर राष्ट्र और धर्म की सेवा का संकल्प लिया।इस दौरान मुख्य रूप बृजेश रस्तोगी रोहित खत्री अजय कुमार दिनेश कुमार नेत्रपाल कश्यप तेजपाल अरविंद प्रजापति शिवा सैनी नितिन कंबोज, शालू वालिया, अनिल स्मृति बिट्टू कांबोज गोपाल सैनी यनेश तंवर, सवीता नीलम ज्योति सरीता कोमल आदि मौजूद रहे।1
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