धौलपुर के अधन्नपुर में आयोजित संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा के सातवें दिन, पूज्य संत बाल ब्रह्मचारी अवधूत लोकेशानंद जी महाराज गुफाधाम जारौली टीला वालों ने भगवान श्री कृष्ण की अलौकिक बाल लीलाओं, पूतना वध, विभिन्न राक्षसों के संहार और दिव्य गोवर्धन पूजा का अत्यंत रसपूर्ण वर्णन किया। इस दौरान कथा मंडप में मौजूद श्रद्धालु इन लीलाओं को सुनकर भावविभोर हो गए और पूरा पंडाल 'जय कन्हैया लाल की' के जयकारों से गूंज उठा। कथा के मुख्य यजमान सोबरन सिंह अरेला और भगवंत प्रसाद पीटीआई रहे, जिनके साथ राजेश मरैया, पुरुषोत्तम, संतोष, योगेश चौबे, ब्रजमोहन, दिनेश चंद्र रावत, मोतीराम शर्मा, बृजेश उपाध्याय, राजकुमार बित्थरिया, शशिकांत, भीमसेन, लोकेंद्र, आदित्येन्द्र और कृष्णकांत सहित कई अन्य भक्तजनों ने व्यासपीठ का पूजन कर आशीर्वाद लिया। कथा व्यास लोकेशानंद महाराज ने 'माखन चोरी' की व्याख्या करते हुए स्पष्ट किया कि यह चोरी नहीं बल्कि भक्त लोगों द्वारा निकाला गया एक गलत अर्थ है, क्योंकि जगदीश्वर को किसी वस्तु को चुराने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने साहित्यिक और आध्यात्मिक दृष्टिकोण से समझाया कि प्रभु श्रीकृष्ण को गोपियों के मन यानी चित्त चुराने वाले 'चोर' के रूप में समझा जाना चाहिए। इसके अतिरिक्त, यह कंस द्वारा वसूले जाने वाले क्रूर करों और अत्याचारों के विरुद्ध बालकों की टीम द्वारा किया गया एक अहिंसक प्रतिरोध था, जिसका उद्देश्य गोकुल के उत्पाद को कंस के राज्य तक पहुंचने से रोकना था। महाराज श्री ने बताया कि कंस द्वारा भेजी गई भयानक राक्षसी पूतना जब कपटवेष धारण कर बाल कृष्ण को विषपान कराने आई, तो प्रभु ने उसके प्राण हर लिए; आध्यात्मिक रहस्य यह है कि पूतना अविद्या और कपट का प्रतीक है, और भगवान जब किसी के जीवन में आते हैं, तो सर्वप्रथम उसके भीतर के कपट और अज्ञान का नाश कर उसका उद्धार करते हैं। उन्होंने आगे बताया कि देवराज इंद्र के अभिमान को चूर करने और ब्रजवासियों को प्रकृति की महत्ता समझाने के लिए बाल कृष्ण ने ही गोवर्धन पूजा की परंपरा शुरू कराई थी। व्यासपीठ से यह संदेश भी दिया गया कि गोवर्धन पूजा हमें प्रकृति, पर्यावरण, जल और गायों के संरक्षण की प्रेरणा देती है। भगवान ने यह संदेश दिया कि कर्म ही पूजा है और किसी अदृश्य भय से डरकर अंधविश्वास में नहीं पड़ना चाहिए।
धौलपुर के अधन्नपुर में आयोजित संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा के सातवें दिन, पूज्य संत बाल ब्रह्मचारी अवधूत लोकेशानंद जी महाराज गुफाधाम जारौली टीला वालों ने भगवान श्री कृष्ण की अलौकिक बाल लीलाओं, पूतना वध, विभिन्न राक्षसों के संहार और दिव्य गोवर्धन पूजा का अत्यंत रसपूर्ण वर्णन किया। इस दौरान कथा मंडप में मौजूद श्रद्धालु इन लीलाओं को सुनकर भावविभोर हो गए और पूरा पंडाल 'जय कन्हैया लाल की' के जयकारों से गूंज उठा। कथा के मुख्य यजमान सोबरन सिंह अरेला और भगवंत प्रसाद पीटीआई रहे, जिनके साथ राजेश मरैया, पुरुषोत्तम, संतोष, योगेश चौबे, ब्रजमोहन, दिनेश चंद्र रावत, मोतीराम शर्मा, बृजेश उपाध्याय, राजकुमार बित्थरिया, शशिकांत, भीमसेन, लोकेंद्र, आदित्येन्द्र और कृष्णकांत सहित कई अन्य भक्तजनों ने व्यासपीठ का पूजन कर आशीर्वाद लिया। कथा व्यास लोकेशानंद महाराज ने 'माखन चोरी' की व्याख्या करते हुए स्पष्ट किया कि यह चोरी नहीं बल्कि भक्त लोगों द्वारा निकाला गया एक गलत अर्थ है, क्योंकि जगदीश्वर को किसी वस्तु को चुराने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने साहित्यिक और आध्यात्मिक दृष्टिकोण से समझाया कि प्रभु श्रीकृष्ण को गोपियों के मन यानी चित्त चुराने वाले 'चोर' के रूप में समझा जाना चाहिए। इसके अतिरिक्त, यह कंस द्वारा वसूले जाने वाले क्रूर करों और अत्याचारों के विरुद्ध बालकों की टीम द्वारा किया गया एक अहिंसक प्रतिरोध था, जिसका उद्देश्य गोकुल के उत्पाद को कंस के राज्य तक पहुंचने से रोकना था। महाराज श्री ने बताया कि कंस द्वारा भेजी गई भयानक राक्षसी पूतना जब कपटवेष धारण कर बाल कृष्ण को विषपान कराने आई, तो प्रभु ने उसके प्राण हर लिए; आध्यात्मिक रहस्य यह है कि पूतना अविद्या और कपट का प्रतीक है, और भगवान जब किसी के जीवन में आते हैं, तो सर्वप्रथम उसके भीतर के कपट और अज्ञान का नाश कर उसका उद्धार करते हैं। उन्होंने आगे बताया कि देवराज इंद्र के अभिमान को चूर करने और ब्रजवासियों को प्रकृति की महत्ता समझाने के लिए बाल कृष्ण ने ही गोवर्धन पूजा की परंपरा शुरू कराई थी। व्यासपीठ से यह संदेश भी दिया गया कि गोवर्धन पूजा हमें प्रकृति, पर्यावरण, जल और गायों के संरक्षण की प्रेरणा देती है। भगवान ने यह संदेश दिया कि कर्म ही पूजा है और किसी अदृश्य भय से डरकर अंधविश्वास में नहीं पड़ना चाहिए।
- राजाखेड़ा की ग्राम पंचायत सिंघावली कला के गांव देवदासपुरा में रविवार को नवनिर्मित आंगनवाड़ी केंद्र भवन का लोकार्पण भाजपा नेत्री नीरजा शर्मा ने फीता काटकर किया। इस अवसर पर उन्होंने विपक्षी नेताओं पर तीखा हमला बोला, आरोप लगाया कि कुछ नेताओं ने वर्षों तक समाज को जातीय आधार पर बांटने, भाई को भाई से लड़ाने और झूठे वादों से जनता को गुमराह करने का काम किया। शर्मा ने जोर देकर कहा कि अब जनता जागरूक हो चुकी है और विकास में बाधा डालने वालों को जवाब देने के लिए तैयार है। कार्यक्रम के दौरान महिला एवं बाल विकास विभाग के कर्मचारियों और ग्रामीणों ने फूलमालाओं, तिलक और पुष्पवर्षा से नीरजा शर्मा का स्वागत किया। अपने संबोधन में उन्होंने बच्चों के मानसिक और शारीरिक विकास को समाज की सबसे बड़ी जिम्मेदारी बताया। उन्होंने कहा कि नए आंगनवाड़ी भवन से गांव के बच्चों को बेहतर वातावरण, पोषण और प्रारंभिक शिक्षा मिल सकेगी, जिससे उनका सर्वांगीण विकास होगा। शर्मा ने केंद्र और प्रदेश की भाजपा सरकार की सराहना करते हुए कहा कि वे अंतिम पंक्ति में बैठे व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने के लिए लगातार कार्य कर रही हैं और बीते ढाई वर्षों में क्षेत्र में अनेक जनकल्याणकारी कार्य कराए गए हैं। उन्होंने विपक्ष पर तंज कसते हुए कहा कि कुछ लोग केवल थाना-तहसील की राजनीति करते रहे, जबकि लोग विकास और पारदर्शी राजनीति चाहते हैं। भाजपा नेत्री ने क्षेत्र में शिक्षा, सड़क, स्वास्थ्य और युवाओं के भविष्य के लिए लगातार संघर्ष करने तथा हर सुख-दुख में जनता के साथ खड़े रहने का भी संकल्प लिया। देवदासपुरा के कार्यक्रम के बाद नीरजा शर्मा का शेखपुर ब्राह्मण गांव में भी ग्रामीणों ने स्वागत-सम्मान किया। इस दौरान ग्रामीणों ने राजकीय विद्यालय को कक्षा 8 से बढ़ाकर 12वीं तक क्रमोन्नत करने की मांग को लेकर ज्ञापन सौंपा। ग्रामीणों ने बताया कि उच्च माध्यमिक विद्यालय न होने के कारण विद्यार्थियों, विशेषकर छात्राओं को पढ़ाई के लिए दूर-दराज के क्षेत्रों में जाना पड़ता है। इस पर नीरजा शर्मा ने विद्यालय क्रमोन्नति के लिए हरसंभव प्रयास करने का आश्वासन दिया। इस कार्यक्रम में मंगल सिंह निषाद, खुशीलाल निषाद, सतनाम निषाद, रमेश निषाद, ब्रजराज निषाद, रामसेवक निषाद, होतम सिंह, उदय सिंह निषाद, देवेंद्र मुद्गल, जगराम निषाद, रामनिवास निषाद, विपिन तोमर, कपूर चंद, रामखिलाड़ी पाराशर, करन सिंह तोमर, रविशंकर, बालू सिंह, विनोद तोमर, विनोद शर्मा, अशरफी सिंह, राजू तिवारी और रणबीर गुर्जर सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।2
- मिली जानकारी के अनुसार, जहाँ एक ओर स्वयंसेवक पूरी सक्रियता और निष्ठा के साथ अपने कर्तव्य निभा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर दुर्भाग्यवश वेतनभोगी कर्मचारी अपने दायित्वों का ठीक से निर्वहन नहीं कर रहे हैं। बताया गया है कि कुछ कर्मचारियों की इसी लापरवाही के कारण हजारों की संख्या में लोग परेशानी और पीड़ा का सामना कर रहे हैं।1
- मुरैना जिले में अवैध रेत खनन और परिवहन के खिलाफ पुलिस का अभियान लगातार तेज़ हो रहा है। इसी क्रम में, नगरा थाना पुलिस ने मुखबिर की सूचना के आधार पर बड़ी कार्रवाई करते हुए अवैध रेत से भरे दो ट्रैक्टर-ट्रॉली जब्त कर लिए। पुलिस ने अटेर रोड पोरसा स्थित ढका कीचौल मोड़ पर चेकिंग अभियान चलाया, जहाँ इन दो ट्रैक्टर-ट्रॉलियों को रोका गया। जांच के दौरान, वाहन चालकों के पास रेत परिवहन से संबंधित कोई भी वैध दस्तावेज नहीं मिले। पुलिस ने मौके से दो आरोपियों को गिरफ्तार किया और दोनों ट्रैक्टर-ट्रॉलियों को जब्त कर थाना परिसर में खड़ा करवा दिया। जब्त किए गए इन वाहनों की अनुमानित कीमत लगभग 14 लाख रुपये बताई जा रही है। पुलिस ने इस मामले में प्रकरण दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है, साथ ही अवैध रेत परिवहन से जुड़े अन्य पहलुओं की जांच के लिए वन विभाग को भी सूचित किया गया है।1
- विभिन्न संगठनों द्वारा गौ माता को राष्ट्र माता और राज्य माता का दर्जा दिलाने के लिए प्रदेशव्यापी जन संघर्ष की घोषणा की गई है। यह जनांदोलन 31 तारीख को भोपाल में आयोजित किया जाएगा। ब्राह्मण महासभा संपूर्णभारत मध्य प्रदेश के प्रदेश अध्यक्ष अखिलेश शर्मा जी ने गौ माता के सम्मान में इस प्रदेशव्यापी जन संघर्ष और जनांदोलन का आह्वान करते हुए यह संदेश जारी किया है।1
- पोरसा के ग्राम इन्नीखेरा में अशोक सिंह तोमर, मान सिंह तोमर, लोकेंद्र सिंह तोमर और शैलेंद्र सिंह तोमर द्वारा आयोजित सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा का समापन श्रद्धा, भक्ति और धार्मिक उल्लास के साथ हुआ। कथा संपन्न होने के अवसर पर, आयोजकों ने विश्व शांति, सुख-समृद्धि और जनकल्याण की कामना को लेकर एक विशाल हवन और उसके बाद भंडारे का आयोजन किया। इस विशाल हवन में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने आहुतियां देकर पुण्य लाभ प्राप्त किया। वैदिक मंत्रोच्चारण और धार्मिक विधि-विधान के बीच आयोजित इस हवन में उपस्थित श्रद्धालुओं ने परिवार, समाज और राष्ट्र की सुख-शांति के लिए विशेष प्रार्थना की। विद्वानों ने सनातन परंपरा में हवन के महत्व को बताते हुए कहा कि यह वातावरण को शुद्ध करता है, सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है तथा मनुष्य के भीतर आध्यात्मिक चेतना जागृत करता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, हवन में दी गई आहुति सीधे देवताओं तक पहुँचती है और इससे लोक कल्याण की भावना मजबूत होती है। हवन की पूर्णाहुति के तत्काल बाद एक विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें आसपास के कई गांवों से पहुंचे हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसादी ग्रहण की। इस भंडारे में श्याम सिंह परिहार, रविंद्र सिंह सिकरवार, प्रदीप सिंह परमार, यादवेंद्र सिंह कुशवाहा, सुनील सिंह, गौरव सिंह, आर्यन सिंह, ऋषभ सिंह सहित समस्त ग्रामवासी और श्रद्धालु पूरे समय सेवा कार्य में जुटे रहे और व्यवस्थाएं संभालीं। धर्मग्रंथों में भंडारे को सेवा, समर्पण और मानवता का प्रतीक माना गया है, और भूखे तथा जरूरतमंद लोगों को भोजन कराना सबसे बड़ा पुण्य कार्य माना जाता है, जिससे समाज में भाईचारा, प्रेम और सामाजिक एकता की भावना मजबूत होती है। इस पूरे कार्यक्रम के दौरान, इन्नीखेरा का पूरा ग्राम भक्ति रस में सराबोर दिखाई दिया। श्रद्धालुओं ने कथा श्रवण, हवन और भंडारे में भाग लेकर धर्म लाभ प्राप्त किया और आयोजकों की भूरी-भूरी प्रशंसा की।1
- मोहन यादव जी से एक सवाल पूछा गया, जिसके दौरान उनका जोरदार अभिनंदन किया गया। इस सवाल में इस बात पर जोर दिया गया कि गली-गली और मोहल्ले-मोहल्ले में शराब आसानी से उपलब्ध हो जाएगी। इस संदर्भ में 'जोरदार पेट्रोल यादव' वाक्यांश का भी उल्लेख किया गया।1
- धौलपुर के अधन्नपुर में आयोजित संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा के सातवें दिन, पूज्य संत बाल ब्रह्मचारी अवधूत लोकेशानंद जी महाराज गुफाधाम जारौली टीला वालों ने भगवान श्री कृष्ण की अलौकिक बाल लीलाओं, पूतना वध, विभिन्न राक्षसों के संहार और दिव्य गोवर्धन पूजा का अत्यंत रसपूर्ण वर्णन किया। इस दौरान कथा मंडप में मौजूद श्रद्धालु इन लीलाओं को सुनकर भावविभोर हो गए और पूरा पंडाल 'जय कन्हैया लाल की' के जयकारों से गूंज उठा। कथा के मुख्य यजमान सोबरन सिंह अरेला और भगवंत प्रसाद पीटीआई रहे, जिनके साथ राजेश मरैया, पुरुषोत्तम, संतोष, योगेश चौबे, ब्रजमोहन, दिनेश चंद्र रावत, मोतीराम शर्मा, बृजेश उपाध्याय, राजकुमार बित्थरिया, शशिकांत, भीमसेन, लोकेंद्र, आदित्येन्द्र और कृष्णकांत सहित कई अन्य भक्तजनों ने व्यासपीठ का पूजन कर आशीर्वाद लिया। कथा व्यास लोकेशानंद महाराज ने 'माखन चोरी' की व्याख्या करते हुए स्पष्ट किया कि यह चोरी नहीं बल्कि भक्त लोगों द्वारा निकाला गया एक गलत अर्थ है, क्योंकि जगदीश्वर को किसी वस्तु को चुराने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने साहित्यिक और आध्यात्मिक दृष्टिकोण से समझाया कि प्रभु श्रीकृष्ण को गोपियों के मन यानी चित्त चुराने वाले 'चोर' के रूप में समझा जाना चाहिए। इसके अतिरिक्त, यह कंस द्वारा वसूले जाने वाले क्रूर करों और अत्याचारों के विरुद्ध बालकों की टीम द्वारा किया गया एक अहिंसक प्रतिरोध था, जिसका उद्देश्य गोकुल के उत्पाद को कंस के राज्य तक पहुंचने से रोकना था। महाराज श्री ने बताया कि कंस द्वारा भेजी गई भयानक राक्षसी पूतना जब कपटवेष धारण कर बाल कृष्ण को विषपान कराने आई, तो प्रभु ने उसके प्राण हर लिए; आध्यात्मिक रहस्य यह है कि पूतना अविद्या और कपट का प्रतीक है, और भगवान जब किसी के जीवन में आते हैं, तो सर्वप्रथम उसके भीतर के कपट और अज्ञान का नाश कर उसका उद्धार करते हैं। उन्होंने आगे बताया कि देवराज इंद्र के अभिमान को चूर करने और ब्रजवासियों को प्रकृति की महत्ता समझाने के लिए बाल कृष्ण ने ही गोवर्धन पूजा की परंपरा शुरू कराई थी। व्यासपीठ से यह संदेश भी दिया गया कि गोवर्धन पूजा हमें प्रकृति, पर्यावरण, जल और गायों के संरक्षण की प्रेरणा देती है। भगवान ने यह संदेश दिया कि कर्म ही पूजा है और किसी अदृश्य भय से डरकर अंधविश्वास में नहीं पड़ना चाहिए।1
- मध्य प्रदेश के अंबाह स्थित गुधेनिया थोक के वार्ड क्रमांक 14 में चारधाम यात्रा से लौटे श्रद्धालुओं का फूल-मालाओं के साथ भावपूर्ण स्वागत किया गया। क्षेत्र के निवासी शिव शंकर वुल्फ राठौर, शिबू राठौर और रामरति राठौर अपनी पवित्र चारधाम यात्रा पूरी कर अपने गृह नगर लौटे, जहाँ स्थानीय लोगों और उनके परिजनों ने गर्मजोशी से उनका अभिनंदन किया। श्रद्धालुओं के इस स्वागत समारोह के दौरान पूरे क्षेत्र में एक धार्मिक और उत्साहपूर्ण माहौल देखने को मिला। उपस्थित लोगों ने फूल-मालाएं पहनाकर उनका सम्मान किया और उत्सुकता से उनकी यात्रा के अनुभव भी सुने। इस अवसर पर मोहल्ले के कई गणमान्य नागरिक और अन्य श्रद्धालु भी मौजूद थे। स्थानीय लोगों ने कहा कि सनातन धर्म में चारधाम यात्रा का विशेष महत्व है और ऐसे श्रद्धालुओं का सम्मान करना पुण्य तथा सौभाग्य की बात मानी जाती है।1
- 'मैजिक लॉक' नामक एक डिवाइस के बारे में बताया गया है, जो गैस लीकेज को रोकने और घरों को आग लगने से बचाने में सहायक है। यह डिवाइस परिवार की सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण उपाय बताया जा रहा है। इसे लगवाने के इच्छुक लोगों से संपर्क करने का आह्वान किया गया है, और यह केवल ₹299 में उपलब्ध है, जिससे लोग अपने परिवार की जान बचा सकें।2