भुगतान विवाद को लेकर ठेकेदार के आरोप, अधिकारी ने बताया निराधार भुगतान विवाद को लेकर ठेकेदार के आरोप, अधिकारी ने बताया निराधार उमरिया जिले के बिरसिंहपुर स्थित संजय गांधी ताप विद्युत गृह में एक ठेकेदार द्वारा विभागीय अधिकारी पर रिश्वत मांगने और मानसिक प्रताड़ना का गंभीर आरोप लगाए जाने के बाद मामला चर्चा का विषय बन गया है। ऑफिस क्लीनिंग सर्विस से जुड़े इस विवाद ने विभागीय कार्यप्रणाली और भुगतान प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। जानकारी के अनुसार, बिरसिंहपुर निवासी मकबूल खान, प्रोपराइटर एम के ट्रेडर्स, ने विभाग के उच्च अधिकारियों को लिखित शिकायत सौंपते हुए आरोप लगाया है कि उन्होंने कार्यादेश क्रमांक 511-0100/SGTPS/P&W/ENIT-14/2022 के तहत ऑफिस क्लीनिंग सर्विस का कार्य पूरी निष्ठा के साथ पूरा किया था। यह कार्य अवधि 6 मार्च 2024 से 5 जून 2025 तक रही। मकबूल खान का कहना है कि विभागीय निर्देशों के अनुसार उन्होंने श्रमिकों को लगभग 15 माह का बढ़ा हुआ एरियर्स भुगतान भी अपनी आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद कर दिया। उन्होंने दावा किया कि किसी भी श्रमिक का वेतन या भुगतान लंबित नहीं है तथा सभी आवश्यक दस्तावेज विभाग में जमा किए जा चुके हैं। इसके बावजूद उनका लगभग 3 लाख 15 हजार रुपये का भुगतान रोका गया है। शिकायत पत्र में उन्होंने अधीक्षण अभियंता सर्विसेज-1 वीरेंद्र कुमार सिंह बघेल पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि बिल पास करने के एवज में उनसे 15 हजार रुपये रिश्वत मांगी गई। मकबूल खान के अनुसार, जब उन्होंने बार-बार भुगतान जारी करने का अनुरोध किया तो उन्हें कथित रूप से अपमानित किया गया और कहा गया कि “जहां शिकायत करना हो कर दो, बिना पैसा बिल पास नहीं होगा।” ठेकेदार ने यह भी कहा कि श्रमिकों का भुगतान करने के लिए उन्हें कर्ज लेना पड़ा, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति बेहद खराब हो चुकी है। लगातार बढ़ते कर्ज, सामाजिक दबाव और विभागीय प्रताड़ना के कारण वह मानसिक तनाव में जीवन जी रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समय रहते निष्पक्ष कार्रवाई नहीं हुई तो वह लोकायुक्त, भ्रष्टाचार निरोधक एजेंसियों और न्यायालय की शरण लेने को मजबूर होंगे। वहीं, इस पूरे मामले में अधीक्षण अभियंता सर्विसेज-1 वीरेंद्र कुमार सिंह ने सभी आरोपों को निराधार बताया है। उनका कहना है कि संबंधित ठेकेदार का बिल चार दिन पहले ही पास किया जा चुका है। उन्होंने स्पष्ट किया कि रिश्वत मांगने जैसी कोई बात नहीं हुई। अधिकारी के अनुसार, मकबूल खान ने विभाग के दो कर्मचारियों से पैसे उधार लिए थे और कर्मचारी उनसे अपना पैसा वापस दिलाने का आग्रह कर रहे थे। इसी बात को लेकर ठेकेदार ने नाराज होकर झूठे आरोप लगाए हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि उनके पास संबंधित कर्मचारियों के लिखित दस्तावेज और सबूत मौजूद हैं।
भुगतान विवाद को लेकर ठेकेदार के आरोप, अधिकारी ने बताया निराधार भुगतान विवाद को लेकर ठेकेदार के आरोप, अधिकारी ने बताया निराधार उमरिया जिले के बिरसिंहपुर स्थित संजय गांधी ताप विद्युत गृह में एक ठेकेदार द्वारा विभागीय अधिकारी पर रिश्वत मांगने और मानसिक प्रताड़ना का गंभीर आरोप लगाए जाने के बाद मामला चर्चा का विषय बन गया है। ऑफिस क्लीनिंग सर्विस से जुड़े इस विवाद ने विभागीय कार्यप्रणाली और भुगतान प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। जानकारी के अनुसार, बिरसिंहपुर निवासी मकबूल खान, प्रोपराइटर एम के ट्रेडर्स, ने विभाग के उच्च अधिकारियों को लिखित शिकायत सौंपते हुए आरोप लगाया है कि उन्होंने कार्यादेश क्रमांक 511-0100/SGTPS/P&W/ENIT-14/2022 के तहत ऑफिस क्लीनिंग सर्विस का कार्य पूरी निष्ठा के साथ पूरा किया था। यह कार्य अवधि 6 मार्च 2024 से 5 जून 2025 तक रही। मकबूल खान का कहना है कि विभागीय निर्देशों के अनुसार उन्होंने श्रमिकों को लगभग 15 माह का बढ़ा हुआ एरियर्स भुगतान भी अपनी आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद कर दिया। उन्होंने दावा किया कि किसी भी श्रमिक का वेतन या भुगतान लंबित नहीं है तथा सभी आवश्यक दस्तावेज विभाग में जमा किए जा चुके हैं। इसके बावजूद उनका लगभग 3 लाख 15 हजार रुपये का भुगतान रोका गया है। शिकायत पत्र में उन्होंने अधीक्षण अभियंता सर्विसेज-1 वीरेंद्र कुमार सिंह बघेल पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि बिल पास करने के एवज में उनसे 15 हजार रुपये रिश्वत मांगी गई। मकबूल खान के अनुसार, जब उन्होंने बार-बार भुगतान जारी करने का अनुरोध किया तो उन्हें कथित रूप से अपमानित किया गया और कहा गया कि “जहां शिकायत करना हो कर दो, बिना पैसा बिल पास नहीं होगा।” ठेकेदार ने यह भी कहा कि श्रमिकों का भुगतान करने के लिए उन्हें कर्ज लेना पड़ा, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति बेहद खराब हो चुकी है। लगातार बढ़ते कर्ज, सामाजिक दबाव और विभागीय प्रताड़ना के कारण वह मानसिक तनाव में जीवन जी रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समय रहते निष्पक्ष कार्रवाई नहीं हुई तो वह लोकायुक्त, भ्रष्टाचार निरोधक एजेंसियों और न्यायालय की शरण लेने को मजबूर होंगे। वहीं, इस पूरे मामले में अधीक्षण अभियंता सर्विसेज-1 वीरेंद्र कुमार सिंह ने सभी आरोपों को निराधार बताया है। उनका कहना है कि संबंधित ठेकेदार का बिल चार दिन पहले ही पास किया जा चुका है। उन्होंने स्पष्ट किया कि रिश्वत मांगने जैसी कोई बात नहीं हुई। अधिकारी के अनुसार, मकबूल खान ने विभाग के दो कर्मचारियों से पैसे उधार लिए थे और कर्मचारी उनसे अपना पैसा वापस दिलाने का आग्रह कर रहे थे। इसी बात को लेकर ठेकेदार ने नाराज होकर झूठे आरोप लगाए हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि उनके पास संबंधित कर्मचारियों के लिखित दस्तावेज और सबूत मौजूद हैं।
- ग्रामीणों के साहस से बड़ा हादसा टला,भालू के हमले में महिला घायल बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के धमोखर बफर क्षेत्र में रविवार सुबह ग्रामीणों की बहादुरी और सूझबूझ से एक बड़ा हादसा टल गया।तेंदूपत्ता संग्रहण के दौरान भालू के अचानक हमले का शिकार हुई महिला की जान आसपास मौजूद ग्रामीणों ने हिम्मत दिखाकर बचा ली।जानकारी के अनुसार ग्राम गौरैया निवासी मीरा सिंह पिता गजराज सिंह अपने परिवार एवं अन्य ग्रामीणों के साथ सुबह करीब 8 बजे तेंदूपत्ता तोड़ने जंगल गई थीं।यह घटना गौरैया बीट के कक्ष क्रमांक पीएफ-160 की बताई जा रही है।इसी दौरान जंगल में विचरण कर रहे भालू ने अचानक मीरा सिंह पर हमला कर दिया और उनके दाहिने पैर में दांत गड़ा दिए।हमले के बाद मौके पर मौजूद ग्रामीणों ने घबराने के बजाय साहस का परिचय दिया।ग्रामीणों ने तेज आवाज और शोर मचाकर भालू को वहां से खदेड़ दिया,जिससे महिला की जान बच सकी।घटना के बाद जानकारी उपरांत वन विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारी मौके पर पहुंचे और घायल महिला को तत्काल जिला चिकित्सालय पहुंचाया गया, जहां महिला उपचारार्थ है।फिलहाल महिला की हालत सामान्य बताई जा रही है।घटना को गंभीरता से लेते हुए वन विभाग ने क्षेत्र में गश्त बढ़ा दी है और ग्रामीणों को सतर्क रहने की सलाह दी है।विभाग ने अपील की है कि तेंदूपत्ता संग्रहण के लिए लोग समूह में ही जंगल जाएं तथा सुबह 8 बजे के बाद ही जंगल में प्रवेश करें।बीटीआर क्षेत्र संचालक अनुपम सहाय ने घटना को दुखद बताया,और कहा कि क्षेत्र में मानव-वन्यप्राणी संघर्ष की घटनाओं को रोकने के लिए निगरानीबढ़ा दी गई है और ग्रामीणों को आवश्यक सावधानियां बरतने के लिए जागरूक किया जा रहा है।1
- नल-जल योजना बनी भ्रष्टाचार का कुआं करोड़ों डकार गए अफसर-ठेकेदार पीने के पानी को मोहताज ग्रामीण उमरिया// केन्द्र सरकार की महत्वाकांक्षी हर घर नल से जल योजना उमरिया जिले में भ्रष्टाचार कमीशनखोरी और लापरवाही की भेंट चढ़ती नजर आ रही है। पाली एवं करकेली विकासखंड के दर्जनों गांवों में करोड़ों रुपये खर्च करने के बावजूद ग्रामीण आज भी बूंद-बूंद पानी के लिए भटक रहे हैं। हालात इतने बदतर हैं कि गांवों में खड़ी विशाल पानी टंकियां अब विकास नहीं बल्कि सरकारी भ्रष्टाचार की मूक गवाही बन चुकी हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि पीएचई विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदारों की सांठगांठ ने पूरी योजना को खोखला कर दिया। कहीं घटिया पाइपलाइन डालकर सरकारी धन का बंदरबांट किया गया तो कहीं बोरवेल खुदाई में ऐसा खेल खेला गया कि कुछ ही महीनों में बोर जवाब दे गए। कई गांवों में पर्याप्त पानी तक नहीं निकला लेकिन कागजों में योजनाएं पूर्ण दिखाकर करोड़ों का भुगतान निकाल लिया गया। पाली विकासखंड के बेली मलियागुड़ा कुरकुचा ममान मलहदू सास चिनकी गढ़रोला सहित कई गांवों और करकेली विकासखंड के पोड़ी कल्दा मछेहा टकटई जैसे गांवों में नल-जल योजना पूरी तरह दम तोड़ चुकी है। कहीं पाइपलाइन फूट रही है कहीं मोटर बंद पड़ी है तो कहीं महीनों से एक बूंद पानी नहीं पहुंचा। ग्रामीणों का कहना है कि ठेकेदारों ने महज कुछ दिन पानी सप्लाई चालू रखकर योजनाओं को पंचायतों के गले मढ़ दिया और बाद में नौ-दो ग्यारह हो गए। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब शासन ने गुणवत्ता और तकनीकी मानकों की स्पष्ट गाइडलाइन तय कर रखी थी तो आखिर घटिया पाइप और निम्नस्तरीय निर्माण सामग्री का इस्तेमाल किसके संरक्षण में हुआ? क्या बिना विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत के करोड़ों रुपये की यह बंदरबांट संभव थी? गांवों में आज भी महिलाएं और बच्चे हैंडपंपों एवं कुओं के सहारे जीवन गुजारने को मजबूर हैं। भीषण गर्मी में जलसंकट विकराल रूप ले चुका है लेकिन जिम्मेदार अफसरों के कानों में जूं तक नहीं रेंग रही। जनता का आरोप है कि फाइलों में हर घर जल पहुंच चुका है जबकि धरातल पर हर घर संकट की तस्वीर दिखाई दे रही है। मीडिया द्वारा मामले को लेकर जिले के पालक मंत्री से सवाल पूछे गए तो उन्होंने जांच का रटा-रटाया आश्वासन देकर पल्ला झाड़ लिया। इससे ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। लोगों का कहना है कि यदि निष्पक्ष जांच हो जाए तो करोड़ों रुपये के घोटाले का खुलासा होना तय है। अब निगाहें जिले की संवेदनशील कलेक्टर पर टिकी हैं। सवाल यह है कि क्या जनता की प्यास पर राजनीति और भ्रष्टाचार भारी पड़ेगा या फिर लापरवाह अधिकारियों एवं ठेकेदारों पर ऐसा हंटर चलेगा कि भविष्य में सरकारी योजनाओं को लूट का जरिया बनाने वालों की नींद उड़ जाए।1
- एक सोशल मीडिया पोस्ट में मध्य प्रदेश में तमिलनाडु के मुख्यमंत्री 'थलापति' जैसा नेतृत्व होने की इच्छा व्यक्त की गई है। यूज़र ने पूछा कि कितने लोग इस विचार से सहमत हैं।1
- मलमाथर गांव में बिजली विभाग की टीम पर हमला, बकाया वसूली के दौरान हंगामा का वीडियो वायरल... गोहपारू क्षेत्र के मलमाथर गांव में बकाया बिजली बिल की वसूली करने पहुंची बिजली विभाग की टीम के साथ अभद्रता और मारपीट का मामला सामने आया है। घटना के दौरान गोहपारू जेई भी मौके पर मौजूद थे। विभागीय कर्मचारियों ने बताया कि संबंधित उपभोक्ताओं पर कई वर्षों से बिजली बिल बकाया था। विभाग द्वारा कई बार नोटिस दिए जाने के बावजूद जब बिल जमा नहीं किया गया, तब अधिकारियों के निर्देश पर बिजली कनेक्शन काटने की कार्रवाई करने टीम गांव पहुंची थी। आरोप है कि इसी दौरान उपभोक्ताओं ने, जिनमें महिलाएं भी शामिल थीं, विभागीय कर्मचारियों के साथ गाली-गलौज शुरू कर दी और विवाद बढ़ते-बढ़ते कथित तौर पर हमला कर दिया। घटना का वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। मामले के बाद विभागीय कर्मचारियों में आक्रोश है और प्रशासन से कार्रवाई की मांग की जा रही है।2
- Post by पंडित कृष्णा मिश्रा पत्रकार1
- शहडोल-बुढार मार्ग पर हुए भीषण सड़क हादसे में एक व्यक्ति की जान चली गई। इस घटना ने एक बार फिर इलाके में सड़क सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है।1
- शहडोल में ओवरलोड रेत वाहनों से प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना की सड़कें जर्जर हो गई हैं। ग्रामीणों ने अवैध रेत परिवहन पर रोक और सड़कों की मरम्मत की मांग करते हुए प्रशासन को ज्ञापन सौंपा है। कार्रवाई न होने पर आंदोलन की चेतावनी भी दी गई है।1
- मानपुर (उमरिया) के वार्ड-6 में पिछले 15 दिनों से कीड़ेयुक्त और मटमैले पानी की सप्लाई हो रही है, जिससे स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है। शिकायतों और निरीक्षण के बावजूद प्रशासन ने अब तक कोई कार्रवाई नहीं की है, जिससे जलजनित बीमारियों का खतरा मंडरा रहा है। नगरवासियों ने जल्द समाधान न होने पर लोकतांत्रिक तरीके से विरोध प्रदर्शन की चेतावनी दी है।1