शिक्षकों का शक्ति प्रदर्शन-टीईटी अनिवार्यता के विरोध में निकली महारैली, गूंजे नारे। दतिया------- वर्षों पुराने नियमों को लेकर एक बार फिर शिक्षक सड़क पर उतर आए हैं। महारैली 2010 से पूर्व शिक्षकों के लिए टीईटी परीक्षा अनिवार्यता के विरोध में बुधवार को अध्यापक शिक्षक संयुक्त मोर्चा ने शहर में जोरदार महारैली निकालकर अपनी ताकत का प्रदर्शन किया। रैली की शुरुआत शहर के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल पीतांबरा पीठ के मुख्य द्वार से शाम करीब 5 बजे हुई। हाथों में बैनर और तख्तियां लिए सैकड़ों की संख्या में शिक्षक “टीईटी अनिवार्यता खत्म करो”, “पुराने शिक्षकों के साथ न्याय करो” जैसे नारे लगाते हुए शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरे। मोर्चा के पदाधिकारियों ने स्पष्ट कहा कि 2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों पर टीईटी की अनिवार्यता थोपना अन्यायपूर्ण है। उनका कहना है कि वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों के अनुभव को नजरअंदाज कर नए नियम लागू करना उनके साथ भेदभाव है। रैली के समापन पर शिक्षकों ने दतिया एसडीएम को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में मांग की गई कि 2010 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को टीईटी परीक्षा से पूर्णतः मुक्त किया जाए, अन्यथा आंदोलन को और उग्र रूप दिया जाएगा। शहर में निकली इस महारैली ने साफ संकेत दे दिया है कि शिक्षक अब अपने हक के लिए निर्णायक लड़ाई के मूड में हैं।
शिक्षकों का शक्ति प्रदर्शन-टीईटी अनिवार्यता के विरोध में निकली महारैली, गूंजे नारे। दतिया------- वर्षों पुराने नियमों को लेकर एक बार फिर शिक्षक सड़क पर उतर आए हैं। महारैली 2010 से पूर्व शिक्षकों के लिए टीईटी परीक्षा अनिवार्यता के विरोध में बुधवार को अध्यापक शिक्षक संयुक्त मोर्चा ने शहर में जोरदार महारैली निकालकर अपनी ताकत का प्रदर्शन किया। रैली की शुरुआत शहर के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल पीतांबरा पीठ के मुख्य द्वार से शाम करीब 5 बजे हुई। हाथों में बैनर और तख्तियां लिए सैकड़ों की संख्या में शिक्षक “टीईटी अनिवार्यता खत्म करो”, “पुराने शिक्षकों के साथ न्याय करो” जैसे नारे लगाते हुए शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरे। मोर्चा के पदाधिकारियों ने स्पष्ट कहा कि 2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों पर टीईटी की अनिवार्यता थोपना अन्यायपूर्ण है। उनका कहना है कि वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों के अनुभव को नजरअंदाज कर नए नियम लागू करना उनके साथ भेदभाव है। रैली के समापन पर शिक्षकों ने दतिया एसडीएम को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में मांग की गई कि 2010 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को टीईटी परीक्षा से पूर्णतः मुक्त किया जाए, अन्यथा आंदोलन को और उग्र रूप दिया जाएगा। शहर में निकली इस महारैली ने साफ संकेत दे दिया है कि शिक्षक अब अपने हक के लिए निर्णायक लड़ाई के मूड में हैं।
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- शिक्षकों का शक्ति प्रदर्शन-टीईटी अनिवार्यता के विरोध में निकली महारैली, गूंजे नारे। दतिया------- वर्षों पुराने नियमों को लेकर एक बार फिर शिक्षक सड़क पर उतर आए हैं। महारैली 2010 से पूर्व शिक्षकों के लिए टीईटी परीक्षा अनिवार्यता के विरोध में बुधवार को अध्यापक शिक्षक संयुक्त मोर्चा ने शहर में जोरदार महारैली निकालकर अपनी ताकत का प्रदर्शन किया। रैली की शुरुआत शहर के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल पीतांबरा पीठ के मुख्य द्वार से शाम करीब 5 बजे हुई। हाथों में बैनर और तख्तियां लिए सैकड़ों की संख्या में शिक्षक “टीईटी अनिवार्यता खत्म करो”, “पुराने शिक्षकों के साथ न्याय करो” जैसे नारे लगाते हुए शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरे। मोर्चा के पदाधिकारियों ने स्पष्ट कहा कि 2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों पर टीईटी की अनिवार्यता थोपना अन्यायपूर्ण है। उनका कहना है कि वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों के अनुभव को नजरअंदाज कर नए नियम लागू करना उनके साथ भेदभाव है। रैली के समापन पर शिक्षकों ने दतिया एसडीएम को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में मांग की गई कि 2010 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को टीईटी परीक्षा से पूर्णतः मुक्त किया जाए, अन्यथा आंदोलन को और उग्र रूप दिया जाएगा। शहर में निकली इस महारैली ने साफ संकेत दे दिया है कि शिक्षक अब अपने हक के लिए निर्णायक लड़ाई के मूड में हैं।1
- दतिया------- वर्षों पुराने नियमों को लेकर एक बार फिर शिक्षक सड़क पर उतर आए हैं। महारैली 2010 से पूर्व शिक्षकों के लिए टीईटी परीक्षा अनिवार्यता के विरोध में बुधवार को अध्यापक शिक्षक संयुक्त मोर्चा ने शहर में जोरदार महारैली निकालकर अपनी ताकत का प्रदर्शन किया। रैली की शुरुआत शहर के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल पीतांबरा पीठ के मुख्य द्वार से शाम करीब 5 बजे हुई। हाथों में बैनर और तख्तियां लिए सैकड़ों की संख्या में शिक्षक “टीईटी अनिवार्यता खत्म करो”, “पुराने शिक्षकों के साथ न्याय करो” जैसे नारे लगाते हुए शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरे। मोर्चा के पदाधिकारियों ने स्पष्ट कहा कि 2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों पर टीईटी की अनिवार्यता थोपना अन्यायपूर्ण है। उनका कहना है कि वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों के अनुभव को नजरअंदाज कर नए नियम लागू करना उनके साथ भेदभाव है। रैली के समापन पर शिक्षकों ने दतिया एसडीएम को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में मांग की गई कि 2010 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को टीईटी परीक्षा से पूर्णतः मुक्त किया जाए, अन्यथा आंदोलन को और उग्र रूप दिया जाएगा। शहर में निकली इस महारैली ने साफ संकेत दे दिया है कि शिक्षक अब अपने हक के लिए निर्णायक लड़ाई के मूड में हैं।1
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