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"गैरसैंण में AIIMS बनेगा तो पहाड़ की हर सांस को नई उम्मीद मिलेगी। अब दूर की दौड़ नहीं, बस जिंदगियां बचेंगी।" "अभी तक पहाड़ में बीमारी मतलब मौत की राह। गैरसैंण में AIIMS बनेगा तो बीमारी मतलब इलाज की राह। कितनी मांएं, कितने बच्चे, कितने बूढ़े... बच जाएंगे।" "गैरसैंण AIIMS पहाड़ की जिंदगियों का बीमा" #गैरसैंण_aiims_हॉस्पिटल_बनाओ #स्वास्थ्य_के_लिए_एकजुट #गैरसैंण #गैरसैंण_जाग_रहा_है #everyonehighlights #महिला_शक्ति_निर्णय #hooks #viralreelschallenge
पवन नेगी
"गैरसैंण में AIIMS बनेगा तो पहाड़ की हर सांस को नई उम्मीद मिलेगी। अब दूर की दौड़ नहीं, बस जिंदगियां बचेंगी।" "अभी तक पहाड़ में बीमारी मतलब मौत की राह। गैरसैंण में AIIMS बनेगा तो बीमारी मतलब इलाज की राह। कितनी मांएं, कितने बच्चे, कितने बूढ़े... बच जाएंगे।" "गैरसैंण AIIMS पहाड़ की जिंदगियों का बीमा" #गैरसैंण_aiims_हॉस्पिटल_बनाओ #स्वास्थ्य_के_लिए_एकजुट #गैरसैंण #गैरसैंण_जाग_रहा_है #everyonehighlights #महिला_शक्ति_निर्णय #hooks #viralreelschallenge
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- Post by पवन नेगी1
- बागेश्वर में पिछले तीन दिनों से दोपहर बाद हो रही लगातार जबरदस्त बारिश और ओलावृष्टि ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया है। खेतों में गेहूं की फसल पूरी तरह पककर तैयार है, लेकिन मौसम की बेरुखी के कारण किसान अपनी उपज समेट नहीं पा रहे हैं। आए दिन हो रही इस बारिश के चलते किसानों की चिंताएं लगातार बढ़ती जा रही हैं, क्योंकि फसल कटाई के लिए उन्हें सूखे मौसम का इंतजार है। स्थानीय काश्तकारों का कहना है कि रोज-रोज की बारिश से खेतों में नमी बढ़ रही है, जिससे तैयार खड़ी फसल के खराब होने का डर सता रहा है। यदि जल्द ही मौसम साफ नहीं हुआ, तो फसल की गुणवत्ता पर बुरा असर पड़ सकता है और उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। किसान अब इस उम्मीद में हैं कि जल्द ही बारिश थमे ताकि वे सुरक्षित रूप से अपनी गेहूं की फसल को सुरक्षित ठिकानों तक पहुंचा सकें।1
- फायर सीजन में बागेश्वर पुलिस अलर्ट, दुकानों में सुरक्षा जांच तेज1
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- पहाड़ की शांत वादियों में बसी एक ऐसी प्रेम कहानी, जो आपको भावुक कर देगी। यह कहानी है उत्तराखंड के कपकोट क्षेत्र के फरसाली गांव के रहने वाले 89 वर्षीय सेवानिवृत्त सैनिक केदार सिंह कोश्यारी की, जिन्हें लोग प्यार से 'बूबू' कहते हैं। अपनी जीवनसंगिनी लक्ष्मी देवी के निधन के बाद बूबू बिल्कुल अकेले पड़ गए थे। उस अकेलेपन को दूर करने और अपनी पत्नी के साथ को अमर बनाने के लिए उन्होंने घर में उनकी एक आदमकद प्रतिमा स्थापित करवाई है। वे हर सुबह अपनी पत्नी की मूर्ति की पूजा करते हैं, उनसे बातें करते हैं और अपनी यादों को जीवंत रखते हैं। यह सिर्फ पत्थर की मूर्ति नहीं, बल्कि उस अटूट बंधन का प्रतीक है जिसे मौत भी नहीं तोड़ सकी। केदार सिंह कोश्यारी (89) का अपनी पत्नी के प्रति अद्भुत प्रेम। रिटायर फौजी ने घर में ही बनवाया पत्नी का मंदिर। सोशल मीडिया पर वायरल हुई 'पत्थर में ढली मोहब्बत'। वर्तमान पीढ़ी के लिए सच्चे प्रेम की एक दुर्लभ मिसाल।1
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