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Sonipat News : नकली और असली अमूल बटर पर मचा बवाल नकली और असली अमूल बटर पर मचा बवाल
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Sonipat News : नकली और असली अमूल बटर पर मचा बवाल नकली और असली अमूल बटर पर मचा बवाल
More news from हरियाणा and nearby areas
- नकली और असली अमूल बटर पर मचा बवाल1
- बाहरी-उत्तरी दिल्ली की जिला पुलिस ने संगठित अपराध के खिलाफ एक निर्णायक प्रहार करते हुए नरेला इलाके के सबसे कुख्यात गैंगस्टर और अपराधी सिंडिकेट के सरगना मुकेश उर्फ पुनीत को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने आरोपी की जघन्य आपराधिक गतिविधियों और क्षेत्र में उसकी गहरी दहशत को देखते हुए उस पर कड़ा महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम (MCOCA) लगाया है।1
- बाहरी-उत्तरी दिल्ली की जिला पुलिस ने संगठित अपराध के खिलाफ एक निर्णायक प्रहार करते हुए नरेला इलाके के सबसे कुख्यात गैंगस्टर और अपराधी सिंडिकेट के सरगना मुकेश उर्फ पुनीत को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने आरोपी की जघन्य आपराधिक गतिविधियों और क्षेत्र में उसकी गहरी दहशत को देखते हुए उस पर कड़ा महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम (MCOCA) लगाया है।1
- ye Krishan vihar near Rajni Gupta hospital ke pass wala road hai yaha ek khali plote hai yaha log road par hi khuda dalkar chale jate hai itni gandgi hai ki yaha ke gharo me raha bi nhi jata1
- यह गटर नहीं है सिस्टम की असलियत है1
- दिल्ली के बादली विधानसभा वार्ड 20 में अधूरी सड़क निर्माण से जाम, धूल और हादसों का खतरा बढ़ा। महीनों से काम बंद होने पर स्थानीय लोगों ने प्रशासन से त्वरित कार्रवाई की मांग की। #BadliVidhansabha #DelhiNews #RoadConstruction #Ward20 #TrafficJam #PublicIssue #DelhiInfrastructure #LocalResidents #CivicProblem #BreakingNews1
- उत्तर प्रदेश कुशीनगर नरकटिया बाजार1
- भारतीय रेलवे द्वारा हाल ही में एक ट्रेन को “नई ट्रेन” के रूप में पेश किया गया, लेकिन यात्रियों की पैनी नजरों ने जल्दी ही सच्चाई उजागर कर दी। ट्रेन की संरचना, लेआउट और घिसावट के निशान साफ तौर पर बताते हैं कि यह कोई नई ट्रेन नहीं, बल्कि पुरानी ट्रेन का नवीनीकरण है। नई पेंटिंग, बदले हुए इंटीरियर और आकर्षक वॉलपेपर के साथ ट्रेन को पेश किया गया, जिसे लेकर सोशल मीडिया पर लोग इसे “चीनी कैटलॉग से निकला डिज़ाइन” तक कह रहे हैं। रेलवे अधिकारी इसे लागत कम करने, रीसाइक्लिंग और नवाचार का उदाहरण बता रहे हैं। वहीं आलोचकों का कहना है कि यह कदम रेलवे बजट पर बढ़ते दबाव और आधुनिक बुनियादी ढांचे की कमी को दर्शाता है। सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या पुरानी परिसंपत्तियों को नया नाम देकर पेश करना पारदर्शिता और दीर्घकालिक योजना के अनुरूप है।1