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बोल बम सेवा समिति के तत्वाधान में 33 वा सुंदरकांड सम्पन्न दर्जी मार्केट मेन रोड श्री हनुमान मंदिर

8 hrs ago
user_संजय श्रीवास्तव ( ब्यूरो चीफ)
संजय श्रीवास्तव ( ब्यूरो चीफ)
पत्रकार Dudhi, Sonbhadra•
8 hrs ago
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बोल बम सेवा समिति के तत्वाधान में 33 वा सुंदरकांड सम्पन्न दर्जी मार्केट मेन रोड श्री हनुमान मंदिर

More news from Sonbhadra and nearby areas
  • बोल बम सेवा समिति के तत्वाधान में 33 वा सुंदरकांड सम्पन्न दर्जी मार्केट मेन रोड श्री हनुमान मंदिर
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    बोल बम सेवा समिति के तत्वाधान में 33 वा सुंदरकांड सम्पन्न दर्जी मार्केट मेन रोड श्री हनुमान मंदिर
    user_संजय श्रीवास्तव ( ब्यूरो चीफ)
    संजय श्रीवास्तव ( ब्यूरो चीफ)
    पत्रकार Dudhi, Sonbhadra•
    8 hrs ago
  • खनन कटान के चलते कच्ची सड़क है कुलसारी गाँव में हो गई है बुरी दशा आने जाने में हो रही गारमिडो को भारी परेशानिया खनन कटान रुकने का नाम नहीं ले रहा जिला बाँदा के अधिकारी है चुप पूर्व में बल्देव पुरवा के बच्चा यादव वा राजेंद्र की हो चुकी है हत्या दारू के नशे में चलाते है टैक्टर बीच गाँव से कभी भी कोई घटना हो सकती है माफियो की पकड़ पहुंच के चलते गरमीडो की नहीं हो रही सुनाई
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    खनन कटान के चलते कच्ची सड़क है कुलसारी गाँव में हो गई है बुरी दशा आने जाने में हो रही गारमिडो को भारी परेशानिया खनन कटान रुकने का नाम नहीं ले रहा जिला बाँदा के अधिकारी है चुप पूर्व में बल्देव पुरवा के बच्चा यादव वा राजेंद्र की हो चुकी है हत्या दारू के नशे में चलाते है टैक्टर बीच गाँव से कभी भी कोई घटना हो सकती है माफियो की पकड़ पहुंच के चलते गरमीडो की नहीं हो रही सुनाई
    user_Shiv Singh rajput dahiya journalist MP
    Shiv Singh rajput dahiya journalist MP
    Court reporter Dudhi, Sonbhadra•
    23 hrs ago
  • Post by Kishan Kumar
    1
    Post by Kishan Kumar
    user_Kishan Kumar
    Kishan Kumar
    धुरकी, गढ़वा, झारखंड•
    3 hrs ago
  • खरौंधी प्रखंड थाना खरोधी झूरीबांध बीपीओ साहब के डीसी महोदय दो बार जांच लिखें 10 दिन के बाद बीपीओ साहब जांच किया और जांच करने के बाद हम लोग के सामने गुरुजी विष्णु देव गुप्ता गलत को स्वीकार किया कि हम फर्जी हस्ताक्षर किए हैं और स्कूल बंद का क्या हम लोग चले गए थे नहीं थे सारा चीज करने के बावजूद भी इस पर बीपीओ सहायक उल्टा पलता जो है की रिपोर्ट बनाकर भेज दिए डीसी महोदय से आगरा है कि सर इस पर बढ़िया से संज्ञान लिया जाए स्कूल का फोटो भी सर हम आपको दिखा चुके हैं जो की जर्जर बना हुआ है स्कूल में पानी भी नहीं है सर जो कि खाना खाता है स्कूल में बच्चा तक पानी पीने जाता है घर पर जाकर पानी पीता है सर इसको पूरा जांच करके संज्ञा में लिया जाए पैसा जितना भी स्कूल का फंड का आता है सब मास्टर निकाल कर खत्म कर देता है सर आपकी कार्रवाई तक आश्वासन मुझे मिले सर धन्यवाद
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    खरौंधी प्रखंड थाना खरोधी झूरीबांध बीपीओ साहब के डीसी महोदय दो बार जांच लिखें 10 दिन के बाद बीपीओ साहब जांच किया और जांच करने के बाद हम लोग के सामने गुरुजी विष्णु देव गुप्ता गलत को स्वीकार किया कि हम फर्जी हस्ताक्षर किए हैं और स्कूल बंद का क्या हम लोग चले गए थे नहीं थे सारा चीज करने के बावजूद भी इस पर बीपीओ सहायक उल्टा पलता जो है की रिपोर्ट बनाकर भेज दिए डीसी महोदय से आगरा है कि सर इस पर बढ़िया से संज्ञान लिया जाए स्कूल का फोटो भी सर हम आपको दिखा चुके हैं जो की जर्जर बना हुआ है स्कूल में पानी भी नहीं है सर जो कि खाना खाता है स्कूल में बच्चा तक पानी पीने जाता है घर पर जाकर पानी पीता है सर इसको पूरा जांच करके संज्ञा में लिया जाए पैसा जितना भी स्कूल का फंड का आता है सब मास्टर निकाल कर खत्म कर देता है सर आपकी कार्रवाई तक आश्वासन मुझे मिले सर धन्यवाद
    user_Men of jharkhand
    Men of jharkhand
    Court reporter धुरकी, गढ़वा, झारखंड•
    4 hrs ago
  • Post by अहिरन किंग अजीत Jat
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    Post by अहिरन किंग अजीत Jat
    user_अहिरन किंग अजीत Jat
    अहिरन किंग अजीत Jat
    धुरकी, गढ़वा, झारखंड•
    18 hrs ago
  • सोनभद्र की यह हृदयविदारक घटना वाकई रोंगटे खड़े कर देने वाली है। जिस घाट पर सूर्य देव को अर्घ्य देकर जीवन की मंगलकामना की जाती है, वहीं एक नवजात का इस अवस्था में मिलना हमारी सामूहिक चेतना पर एक गहरा घाव है। ​आपने जो सवाल उठाया है—"क्या आज भी बेटियों को लेकर समाज में वही पुरानी कुरीतियाँ फैली हुई हैं?"—इसका उत्तर काफी जटिल और कड़वा है। ​1. आधुनिकता और पिछड़ती सोच का द्वंद्व ​हम मंगल ग्रह पर पहुँच चुके हैं, लेकिन आज भी समाज का एक बड़ा हिस्सा 'वंश' चलाने के नाम पर केवल बेटों को प्राथमिकता देता है। सोनभद्र जैसी घटनाएँ यह दर्शाती हैं कि शिक्षा के बावजूद पितृसत्तात्मक सोच (Patriarchal mindset) अभी भी जड़ों में जमी हुई है। बेटियों को आज भी कई जगहों पर "पराया धन" या आर्थिक बोझ के रूप में देखा जाता है। ​2. केवल लिंगभेद नहीं, लोक-लाज का डर भी ​अक्सर ऐसी घटनाओं के पीछे केवल बेटा-बेटी का भेद नहीं होता, बल्कि अवैध संबंधों या सामाजिक लोक-लाज का डर भी होता है। समाज का इतना क्रूर होना कि एक माँ या परिवार अपनी संतान को कुत्तों के नोचने के लिए छोड़ दे, यह दिखाता है कि हमारे समाज में 'बदनामी' का डर 'मानवता' से कहीं बड़ा हो गया है। ​3. प्रशासनिक और सामाजिक विकल्पों का अभाव ​जैसा कि आपने उल्लेख किया, सुरक्षित विकल्प (जैसे 'पालना योजना' या अनाथालय) मौजूद हैं, लेकिन: ​जागरूकता की कमी: ग्रामीण या पिछड़े इलाकों में लोगों को नहीं पता कि वे कानूनी रूप से बच्चे को छोड़ सकते हैं। ​गोपनीयता का अभाव: लोगों को डर रहता है कि अगर वे सरकारी संस्थान जाएँगे, तो उनसे सवाल पूछे जाएँगे या पुलिस केस होगा। ​4. गरिमापूर्ण विदाई का सवाल ​प्रशासन द्वारा आनन-फानन में अंतिम संस्कार कर देना प्रक्रियात्मक हो सकता है, लेकिन आपकी बात सही है—मृत्यु के बाद गरिमा हर मनुष्य का अधिकार है। बिना गहन जांच या डीएनए सुरक्षित किए अंतिम संस्कार करना कहीं न कहीं अपराधियों को बचाने का अनचाहा रास्ता भी बन जाता है। ​निष्कर्ष ​यह बच्ची का मिलना केवल एक व्यक्तिगत अपराध नहीं, बल्कि सामाजिक विफलता (Social Failure) है। जब तक समाज में "बेटी" को एक स्वतंत्र और मूल्यवान इकाई के रूप में स्वीकार नहीं किया जाएगा, और जब तक हम लोक-लाज से ऊपर उठकर जीवन को महत्व नहीं देंगे, तब तक ऐसे 'छठ घाट' हमारी संवेदनाओं को झकझोरते रहेंगे।
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    सोनभद्र की यह हृदयविदारक घटना वाकई रोंगटे खड़े कर देने वाली है। जिस घाट पर सूर्य देव को अर्घ्य देकर जीवन की मंगलकामना की जाती है, वहीं एक नवजात का इस अवस्था में मिलना हमारी सामूहिक चेतना पर एक गहरा घाव है।
​आपने जो सवाल उठाया है—"क्या आज भी बेटियों को लेकर समाज में वही पुरानी कुरीतियाँ फैली हुई हैं?"—इसका उत्तर काफी जटिल और कड़वा है।
​1. आधुनिकता और पिछड़ती सोच का द्वंद्व
​हम मंगल ग्रह पर पहुँच चुके हैं, लेकिन आज भी समाज का एक बड़ा हिस्सा 'वंश' चलाने के नाम पर केवल बेटों को प्राथमिकता देता है। सोनभद्र जैसी घटनाएँ यह दर्शाती हैं कि शिक्षा के बावजूद पितृसत्तात्मक सोच (Patriarchal mindset) अभी भी जड़ों में जमी हुई है। बेटियों को आज भी कई जगहों पर "पराया धन" या आर्थिक बोझ के रूप में देखा जाता है।
​2. केवल लिंगभेद नहीं, लोक-लाज का डर भी
​अक्सर ऐसी घटनाओं के पीछे केवल बेटा-बेटी का भेद नहीं होता, बल्कि अवैध संबंधों या सामाजिक लोक-लाज का डर भी होता है। समाज का इतना क्रूर होना कि एक माँ या परिवार अपनी संतान को कुत्तों के नोचने के लिए छोड़ दे, यह दिखाता है कि हमारे समाज में 'बदनामी' का डर 'मानवता' से कहीं बड़ा हो गया है।
​3. प्रशासनिक और सामाजिक विकल्पों का अभाव
​जैसा कि आपने उल्लेख किया, सुरक्षित विकल्प (जैसे 'पालना योजना' या अनाथालय) मौजूद हैं, लेकिन:
​जागरूकता की कमी: ग्रामीण या पिछड़े इलाकों में लोगों को नहीं पता कि वे कानूनी रूप से बच्चे को छोड़ सकते हैं।
​गोपनीयता का अभाव: लोगों को डर रहता है कि अगर वे सरकारी संस्थान जाएँगे, तो उनसे सवाल पूछे जाएँगे या पुलिस केस होगा।
​4. गरिमापूर्ण विदाई का सवाल
​प्रशासन द्वारा आनन-फानन में अंतिम संस्कार कर देना प्रक्रियात्मक हो सकता है, लेकिन आपकी बात सही है—मृत्यु के बाद गरिमा हर मनुष्य का अधिकार है। बिना गहन जांच या डीएनए सुरक्षित किए अंतिम संस्कार करना कहीं न कहीं अपराधियों को बचाने का अनचाहा रास्ता भी बन जाता है।
​निष्कर्ष
​यह बच्ची का मिलना केवल एक व्यक्तिगत अपराध नहीं, बल्कि सामाजिक विफलता (Social Failure) है। जब तक समाज में "बेटी" को एक स्वतंत्र और मूल्यवान इकाई के रूप में स्वीकार नहीं किया जाएगा, और जब तक हम लोक-लाज से ऊपर उठकर जीवन को महत्व नहीं देंगे, तब तक ऐसे 'छठ घाट' हमारी संवेदनाओं को झकझोरते रहेंगे।
    user_कालचिंतन समाचार
    कालचिंतन समाचार
    Obra, Sonbhadra•
    4 hrs ago
  • Post by Buro chief Sonbhadra Kameshwar Buro Chief
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    Post by Buro chief Sonbhadra Kameshwar Buro Chief
    user_Buro chief Sonbhadra Kameshwar Buro Chief
    Buro chief Sonbhadra Kameshwar Buro Chief
    आवाज न्यूज़ 24X7 ब्यूरो चीफ ओबरा, सोनभद्र, उत्तर प्रदेश•
    13 hrs ago
  • सिद्ध संत मच्छेंद्र नाथ की गुफा, मच्छरमारा सोनभद्र यहां अनुभूति होती है आध्यात्मिक ऊर्जा की , देखे वीडियो में
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    सिद्ध संत मच्छेंद्र नाथ की गुफा, मच्छरमारा सोनभद्र यहां अनुभूति होती है आध्यात्मिक ऊर्जा की , देखे वीडियो में
    user_संजय श्रीवास्तव ( ब्यूरो चीफ)
    संजय श्रीवास्तव ( ब्यूरो चीफ)
    पत्रकार Dudhi, Sonbhadra•
    12 hrs ago
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