शेखपुरा जिले के चेवाड़ा नगर पंचायत मुख्यालय स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में करोड़ों रुपये मूल्य की जीवनरक्षक दवाएं एक जर्जर भवन में रखी जा रही हैं, जिससे उनके खराब होने और चोरी होने का गंभीर खतरा बना हुआ है। भवन की हालत इतनी दयनीय है कि बारिश का पानी भीतर आ जाता है, छत से प्लास्टर गिरता है और खिड़कियों के शीशे भी टूटे हुए हैं। स्टोरकीपर आशुतोष कुमार ने बताया कि दवाओं के भंडारण के लिए पुराने पीएचसी भवन का इस्तेमाल किया जा रहा है, जबकि परिसर में ही लगभग साढ़े सात करोड़ रुपये की लागत से एक नया तीन मंजिला सीएचसी भवन तैयार खड़ा है। इसके बावजूद दवा स्टोर को नए और सुरक्षित भवन में स्थानांतरित नहीं किया गया है। कुमार ने यह भी बताया कि स्टोर में पंखा, फ्रिज, पर्याप्त रोशनी और सुरक्षा जैसी बुनियादी सुविधाएं भी नहीं हैं, और अकेले स्टोर का संचालन करने से दवाओं का उचित रखरखाव मुश्किल हो रहा है। उन्होंने जानकारी दी कि इस समस्या के बारे में सीएचसी प्रभारी और प्रबंधक को कई महीने पहले ही सूचित किया जा चुका है। वहीं, प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. एस.एन. झा ने इस बात की पुष्टि की कि विभाग को मामले से पहले ही अवगत करा दिया गया है। उन्होंने स्टोरकीपर की परेशानियों को स्वीकार करते हुए कहा कि भवन की मरम्मत या दवा स्टोर को नए भवन में स्थानांतरित करने की व्यवस्था केवल जिला स्तर पर ही संभव है। डॉ. झा ने जोर देकर कहा कि इस समस्या का स्थायी समाधान केवल जिलाधिकारी की पहल से ही निकल सकता है।
शेखपुरा जिले के चेवाड़ा नगर पंचायत मुख्यालय स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में करोड़ों रुपये मूल्य की जीवनरक्षक दवाएं एक जर्जर भवन में रखी जा रही हैं, जिससे उनके खराब होने और चोरी होने का गंभीर खतरा बना हुआ है। भवन की हालत इतनी दयनीय है कि बारिश का पानी भीतर आ जाता है, छत से प्लास्टर गिरता है और खिड़कियों के शीशे भी टूटे हुए हैं। स्टोरकीपर आशुतोष कुमार ने बताया कि दवाओं के भंडारण के लिए पुराने पीएचसी भवन का इस्तेमाल किया जा रहा है, जबकि परिसर में ही लगभग साढ़े सात करोड़ रुपये की लागत से एक नया तीन मंजिला सीएचसी भवन तैयार खड़ा है। इसके बावजूद दवा स्टोर को नए और सुरक्षित भवन में स्थानांतरित नहीं किया गया है। कुमार ने यह भी बताया कि
स्टोर में पंखा, फ्रिज, पर्याप्त रोशनी और सुरक्षा जैसी बुनियादी सुविधाएं भी नहीं हैं, और अकेले स्टोर का संचालन करने से दवाओं का उचित रखरखाव मुश्किल हो रहा है। उन्होंने जानकारी दी कि इस समस्या के बारे में सीएचसी प्रभारी और प्रबंधक को कई महीने पहले ही सूचित किया जा चुका है। वहीं, प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. एस.एन. झा ने इस बात की पुष्टि की कि विभाग को मामले से पहले ही अवगत करा दिया गया है। उन्होंने स्टोरकीपर की परेशानियों को स्वीकार करते हुए कहा कि भवन की मरम्मत या दवा स्टोर को नए भवन में स्थानांतरित करने की व्यवस्था केवल जिला स्तर पर ही संभव है। डॉ. झा ने जोर देकर कहा कि इस समस्या का स्थायी समाधान केवल जिलाधिकारी की पहल से ही निकल सकता है।
- 12वें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस–2026 के अवसर पर मोकामाघाट, बाढ़ स्थित ग्रुप केंद्र, सीआरपीएफ के कैंप परिसर के फुटबॉल ग्राउंड में एक भव्य सामूहिक योग कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य योग के प्रति जागरूकता बढ़ाना, स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देना तथा समाज के सभी वर्गों को योग से जोड़ना था। इसमें सीआरपीएफ के अधिकारियों, अधीनस्थ अधिकारियों, जवानों, विभिन्न शिक्षण संस्थानों के शिक्षकों, छात्र-छात्राओं और स्थानीय मीडिया प्रतिनिधियों ने सक्रिय भागीदारी की। इस वर्ष अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस "Yoga for Healthy Ageing" थीम के साथ मनाया गया, जहाँ योग के महत्व, उसके वैज्ञानिक एवं स्वास्थ्य संबंधी लाभों तथा दैनिक जीवन में योग को अपनाने की आवश्यकता पर विशेष प्रकाश डाला गया। पुलिस उप महानिरीक्षक (डीआईजी) श्री रविन्द्र भगत की पहल पर योगाचार्य हरि नारायण के मार्गदर्शन में पिछले लगभग 10 दिनों से संचालित योग शिविर का भी उल्लेख किया गया, जिसने जवानों एवं प्रतिभागियों को मानसिक एवं शारीरिक रूप से स्वस्थ रहने का संदेश दिया। अपने संबोधन में डीआईजी श्री रविन्द्र भगत ने योग को जीवन को संतुलित और सकारात्मक बनाने वाली जीवन पद्धति बताया, नियमित अभ्यास से तनावमुक्ति, मानसिक शांति और शरीर-मन के बेहतर समन्वय की बात कही, और लोगों से दैनिक जीवन में योग अपनाने की अपील की। कार्यक्रम में उपस्थित सभी लोगों ने सामूहिक रूप से विभिन्न योगासन एवं प्राणायाम का अभ्यास किया, जिससे पूरे परिसर में अनुशासन, ऊर्जा और सकारात्मक वातावरण देखने को मिला। इस अवसर पर केंद्रीय विद्यालय, डीएवी स्कूल और भारद्वाज पब्लिक स्कूल के प्राचार्यों/डायरेक्टर के साथ-साथ कार्यक्रम में शामिल पत्रकारों को विशेष सम्मान देकर उनके शिक्षा और मीडिया क्षेत्र के योगदान को सराहा गया, उनकी सकारात्मक भूमिका को रेखांकित किया गया। डॉ. सुरेन्द्र प्रसाद यादव (उप महानिरीक्षक–चिकित्सा), अन्य अधिकारीगण, सीआरपीएफ के जवान, स्थानीय मीडिया कर्मी एवं विभिन्न विद्यालयों के छात्र-छात्राएं भी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समापन सभी प्रतिभागियों के स्वस्थ, जागरूक और योगमय जीवन की कामना के साथ किया गया।1
- एक भक्त मंगल मूर्ति राम दुलारे के द्वारे पर पहुंचा है।1
- बिहार राज्य में लगभग 19 हजार किलोमीटर तक की खराब सड़कों की मरम्मत का कार्य शीघ्र ही शुरू होगा। इस महत्वपूर्ण परियोजना के लिए निविदा प्रक्रिया पूरी कर ली गई है, जिसके बाद अब इन सड़कों के सुधार का रास्ता साफ हो गया है।1
- भाजपा के दिग्गज नेता और बाढ़ विधानसभा से लगातार चार बार विधायक रहे पूर्व विधायक ज्ञानेंद्र कुमार सिंह ज्ञानू सोमवार को अपनी पत्नी के साथ बाढ़ पहुंचे। उन्होंने बाबा उमानाथ मंदिर में पूजा-अर्चना की और ईश्वर से सुख-समृद्धि तथा अच्छे स्वास्थ्य की कामना की। इस अवसर पर मीडिया से बात करते हुए ज्ञानू ने बताया कि अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने बाढ़ में डेढ़ सौ से दो सौ करोड़ रुपये के विकास कार्य कराए। उन्होंने यह भी कहा कि कई कार्य अभी भी जारी हैं और जो परियोजनाएं शुरू हो चुकी हैं, वे पूरी भी होंगी। ज्ञानू ने कहा कि हालांकि वे अब विधायक नहीं हैं, फिर भी महीने में तीन-चार बार बाढ़ के लोगों से मिलने आते हैं, बाबा उमानाथ में पूजा करते हैं और चल रहे विकास कार्यों का निरीक्षण भी करते हैं। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि विधायक न होने पर भी, जहाँ भी बाढ़ के लोगों को कोई दिक्कत होगी, उसके समाधान के लिए वे कार्य करते रहेंगे, हालांकि विधायक होते तो उन्हें अधिक अधिकार मिलता।1
- बिहार शरीफ, नालंदा में एक प्रेस वार्ता के दौरान दलित नेता अमर आज़ाद पासवान ने राजगीर में हुई एक गंभीर घटना का खुलासा किया। उन्होंने बताया कि 15 जून 2026 को राजगीर थाना क्षेत्र के झुनकिया बाबा मंदिर परिसर के पास मंदिर के पुजारी कुंज बिहारी शरण और कुछ अन्य लोगों ने लाठी-डंडों से पीट-पीटकर दो दलित युवकों की कथित तौर पर हत्या कर दी। पासवान ने राजगीर थाना कांड संख्या 411/26 और 412/26 के सभी अभियुक्तों को जल्द से जल्द जेल भेजने की मांग की है। दलित नेता ने आरोप लगाया कि राजगीर की इस घटना सहित पूरे नालंदा जिले में दलित-पासवान और अतिपिछड़ा समाज के लोगों की लगातार हत्याएं हो रही हैं, लेकिन उन्हें न्याय नहीं मिल पा रहा है। इस हत्याकांड से पूरे बिहार के दलित समाज में गहरा आक्रोश व्याप्त है। इसी के मद्देनजर, 23 जून 2026 को सुबह 11 बजे श्रम कल्याण मैदान बिहार शरीफ से बिहार शरीफ समाहरणालय तक एक “दलित अतिपिछड़ा न्याय आक्रोश मार्च” निकाला जाएगा, जिसमें हजारों लोगों के शामिल होने की उम्मीद है। इस आंदोलन का आयोजन अमर आज़ाद पासवान के नेतृत्व में कौशल कुमार, प्रेम पासवान, सुबोध पासवान और रजनीश पासवान करेंगे। इस प्रेस वार्ता में, जहाँ अमर आज़ाद पासवान, कौशल कुमार, सतेंद्र पासवान, रजनीश पासवा प्रेम, सुबोध पासवान, सोना सरदार, बीरेंद्र पासवान, कमलेश पासवान और नरेश पासवान सहित कई लोग उपस्थित थे, निम्नलिखित प्रमुख मांगें उठाई गईं: पीड़ित परिवार को सुरक्षा मुहैया कराई जाए और उनके भरण-पोषण के लिए बिहार सरकार 50 लाख रुपये का मुआवजा दे; मृतक व्यक्तियों के परिजनों को एक-एक सरकारी नौकरी दी जाए; तथा घटना में संलिप्त दोषियों को स्पीडी ट्रायल के माध्यम से फांसी की सजा दी जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाएँ दोबारा न घटें।1
- वैशाली जिले के सर्वेश चौधरी ने बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और पूरे बिहार प्रशासन को सीधे तौर पर चुनौती दी है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में धमकी दी है कि यदि प्रशासन का कोई भी सदस्य उनके घर आता है, तो वे उसका एनकाउंटर कर देंगे।1
- यह पोस्ट भगवान हनुमान की महिमा का बखान करती है, जिन्होंने प्रभु राम के लिए सात समंदर पार करने का अतुलनीय कार्य किया। इसी श्रद्धा भाव से, सभी भक्तों से एक बार हनुमान के लिए जयकारा लगाने का आत्मीय आह्वान किया गया है।1
- पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार बिहार यात्रा पर निकलने वाले हैं। इस यात्रा के दौरान वे राज्य में चल रहे विकास कार्यों का जायजा लेंगे।1
- बिहार के बाढ़ अनुमंडल के बाढ़ शहर में सोमवार को दिवंगत भरत तिवारी के कथित फर्जी एनकाउंटर के विरोध में एक विशाल जनसैलाब सड़कों पर उमड़ पड़ा। न्याय की मांग को लेकर उनके समर्थकों द्वारा ‘न्याय यात्रा’ निकाली गई, जो अनुग्रह नारायण सिंह कॉलेज मैदान से शुरू होकर अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीओ) कार्यालय तक पहुंची। यात्रा में शामिल दर्जनों लोगों ने प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और हाथों में बैनर लेकर भरत तिवारी को न्याय दिलाने व पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की अपील की। समर्थकों का आरोप है कि पुलिस ने भरत तिवारी को सुनियोजित तरीके से एक फर्जी एनकाउंटर में मारा। उनके अनुसार, भरत तिवारी ने हथियार डाल दिए थे, इसके बावजूद पुलिस ने उन्हें गोली मार दी। गंभीर रूप से घायल होने के बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गई। बताया जाता है कि भरत तिवारी मूल रूप से आरा के बिलौटी गांव के निवासी थे और स्थानीय स्तर पर सामाजिक कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाते थे, जिन्हें समर्थक एक संघर्षशील और जनहित के मुद्दे उठाने वाले व्यक्ति के रूप में वर्णित करते हैं। उनकी मौत के बाद इलाके में भारी आक्रोश देखा गया था और पहले भी लोगों ने सड़क जाम कर विरोध प्रदर्शन किया था, जिसे नियंत्रित करने में पुलिस को काफी मशक्कत करनी पड़ी थी। न्याय यात्रा के दौरान वक्ताओं ने चेतावनी दी कि यदि मामले की उच्च स्तरीय जांच नहीं कराई गई और दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो आंदोलन को और अधिक तीव्र किया जाएगा। इस बीच, प्रशासन पूरे मामले पर अपनी नजर बनाए हुए है।1