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किशनगंज के बहादुरगंज में लोगों को सावधान रहने की चेतावनी दी जा रही है। इसके साथ ही यह सवाल भी पूछा जा रहा है कि क्या अन्य लोगों के यहाँ भी ऐसा प्रवेश हो चुका है और अब आगे क्या होगा।
Afsana Khan
किशनगंज के बहादुरगंज में लोगों को सावधान रहने की चेतावनी दी जा रही है। इसके साथ ही यह सवाल भी पूछा जा रहा है कि क्या अन्य लोगों के यहाँ भी ऐसा प्रवेश हो चुका है और अब आगे क्या होगा।
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- टेढ़ागाछ/बहादुरगंज विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत किशनगंज जिले की धनगढ़ा पंचायत के वार्ड संख्या-14 में बदहाल सड़क ने एक बार फिर विकास के दावों की पोल खोल दी है। यहाँ सड़क न होने की वजह से दूल्हे की बारात को कीचड़ और जलभराव से भरे कच्चे रास्ते से गुजरना पड़ा। इस दौरान दूल्हा मोटरसाइकिल पर और ज्यादातर बाराती पैदल ही कीचड़ के बीच से होकर विवाह समारोह के लिए रवाना हुए। इस दृश्य ने गाँव की वर्षों पुरानी समस्या को दोबारा उजागर कर दिया है। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि बरसात शुरू होते ही इस वार्ड का संपर्क मार्ग पूरी तरह कीचड़ में तब्दील हो जाता है। सड़क निर्माण की माँग को लेकर सांसद, विधायक और जिला प्रशासन को दर्जनों बार आवेदन दिया जा चुका है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। ग्रामीणों को डर है कि मानसून की शुरुआत में ही जब यह हाल है, तो आने वाले दिनों में स्थिति और भी भयावह हो सकती है। इस बदहाली के कारण सबसे ज्यादा परेशानी स्कूली बच्चों को होती है, जिन्हें कीचड़ भरे रास्ते से जाना पड़ता है और कई बार वे स्कूल जाने से वंचित रह जाते हैं। इसके अलावा, गांव में कोई बीमार पड़ जाए तो एंबुलेंस नहीं पहुँच पाती और मरीज को खाट पर लिटाकर मुख्य सड़क तक ले जाना पड़ता है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन, जनप्रतिनिधियों और संबंधित विभाग से तुरंत सड़क निर्माण की माँग की है ताकि उन्हें सम्मानपूर्वक आवागमन का अधिकार मिल सके।1
- बिहार के किशनगंज जिले के टेढ़ागाछ अंतर्गत कास्त खर्रा में लगातार हो रही भारी बारिश से हालात बिगड़ गए हैं। मूसलाधार बारिश के चलते पूरा कास्त खर्रा क्षेत्र जलमग्न हो गया है, जिसके कारण किसानों की धान की फसल पूरी तरह पानी में डूब गई है। इस जलजमाव और बाढ़ जैसी स्थिति के चलते स्थानीय ग्रामीण बेहद परेशान और बेहाल हैं।1
- किशनगंज जिले के दिघलबैंक प्रखंड क्षेत्र और बहादुरगंज विधानसभा अंतर्गत धनगढ़ा पंचायत के वार्ड 14 में कीचड़ भरी सड़क के कारण दूल्हे की बारात को पैदल ही निकालना पड़ा। सड़क पर फैले भारी कीचड़ के बीच बारात को पैदल सफर तय करने के लिए मजबूर होना पड़ा, जिससे ग्रामीणों में गहरा आक्रोश व्याप्त है। ग्रामीणों ने रोष जताते हुए आरोप लगाया है कि देश की आज़ादी के दशकों बाद भी उन्हें सड़क जैसी मूलभूत सुविधा तक नहीं मिल सकी है। इस समस्या से परेशान होकर ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और स्थानीय जनप्रतिनिधियों से इस कीचड़ भरी सड़क का शीघ्र पक्कीकरण कराने की मांग की है।1
- शिक्षा के क्षेत्र में अब बड़े बदलाव यानी 'क्रांति' (Revolution) का वक्त आ गया है। देहरादून में आगामी 17 जुलाई 2026 को इस मुहिम से जुड़ने के लिए सभी लोगों से एकजुट होने का आह्वान किया गया है। 'अब बहुत हुआ' के कड़े और आक्रामक संदेश के साथ शिक्षा व्यवस्था को बदलने की इस बड़ी मांग के लिए लोगों से जुड़ने की अपील की जा रही है, और लोग राहुल गांधी के साथ इस बदलाव की मुहिम का हिस्सा बनने के लिए संकल्पित हैं।1
- Post by Md Raju1
- अररिया के फारबिसगंज में कुछ ऐसा हुआ है जिसने पूरे शहर के जश्न मनाने का अंदाज़ ही पूरी तरह से बदल कर रख दिया है।1
- बिहार के किशनगंज जिले के टेढ़ागाछ प्रखंड की चिल्हनियां पंचायत के वार्ड संख्या-5 स्थित कास्त खर्रा गांव में लगातार हो रही बारिश ने ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। गांव के कई घरों, आंगनों और खेतों में पानी भर जाने से जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो गया है। जलभराव के कारण जहां लोगों का दैनिक जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है, वहीं खेतों में लगी धान की फसल पूरी तरह पानी में डूबने से किसानों के सामने भारी आर्थिक नुकसान का संकट खड़ा हो गया है। ग्रामीणों के अनुसार, बारिश के पानी की निकासी की समुचित व्यवस्था नहीं होने के कारण यह पानी गांव और कृषि भूमि में जमा हो गया है। कई दिनों से जलभराव बने रहने के कारण खेतों में लगी धान की फसल सड़ने लगी है और किसानों का कहना है कि यदि जल्द पानी की निकासी नहीं कराई गई तो इस वर्ष की पूरी फसल बर्बाद हो जाएगी, जिससे उनकी आजीविका पर गहरा असर पड़ेगा। जलभराव का असर केवल खेती तक ही सीमित नहीं है। घरों के आसपास लंबे समय से पानी जमा रहने के कारण मच्छरों का प्रकोप भी काफी बढ़ गया है, जिससे डेंगू, मलेरिया और अन्य संक्रामक बीमारियों के फैलने की आशंका भी बढ़ गई है। इन विकट परिस्थितियों से परेशान होकर ग्रामीणों ने प्रशासन से त्वरित जल निकासी की व्यवस्था करने की मांग की है ताकि फसलों को बचाया जा सके और बीमारियों के खतरे को कम किया जा सके।1
- किशनगंज के बहादुरगंज में लोगों को सावधान रहने की चेतावनी दी जा रही है। इसके साथ ही यह सवाल भी पूछा जा रहा है कि क्या अन्य लोगों के यहाँ भी ऐसा प्रवेश हो चुका है और अब आगे क्या होगा।2