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जैतसर में मगववार दोपहर बाद हुई मूसलाधार बरसात के कारण लोगों को गर्मी से राहत मिली है। इस तेज बारिश के परिणामस्वरूप इलाके की सड़कें जलमग्न हो गईं।
सोहन लाल
जैतसर में मगववार दोपहर बाद हुई मूसलाधार बरसात के कारण लोगों को गर्मी से राहत मिली है। इस तेज बारिश के परिणामस्वरूप इलाके की सड़कें जलमग्न हो गईं।
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- जैतसर में मगववार दोपहर बाद हुई मूसलाधार बरसात के कारण लोगों को गर्मी से राहत मिली है। इस तेज बारिश के परिणामस्वरूप इलाके की सड़कें जलमग्न हो गईं।1
- आर्मी के लिए चयनित हुए हिमांशु माक्कड का जैतसर पहुँचने पर ग्रामीणों, दुकानदारों और परिवार के सदस्यों ने भव्य स्वागत किया। इस दौरान हिमांशु माक्कड को माला पहनाकर उनका उत्साहवर्धन किया गया।1
- राजस्थान के श्रीगंगानगर जिले के अनूपगढ़ में स्थित वृद्ध आश्रम ने अपना गूगल पे नंबर सार्वजनिक किया है। आश्रम से संबंधित यह गूगल पे नंबर 9672185366 है।1
- एक ग्रामीण सेवा शिविर में स्थानीय लोगों की पेयजल समस्या का समाधान किया गया है। इस पहल से प्रभावित होकर, ग्रामीणों ने संबंधित अधिकारियों और आयोजकों के प्रति अपना आभार व्यक्त किया है।1
- छत्तरगढ़ सत्तासर क्षेत्र की आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को गत चार माह से मानदेय नहीं मिला है, जिसके कारण उनकी आर्थिक स्थिति दिनों-दिन खराब होती जा रही है। मानदेय के अभाव में कार्यकर्ताओं के लिए गुजारा करना मुश्किल हो गया है। इस गंभीर समस्या के बावजूद, बाल विकास अधिकारी इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं कर रहे हैं और मौन बने हुए हैं, जिससे यह प्रश्न उठ रहा है कि काम कैसे चलेगा। स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने जिला प्रशासन को एक ज्ञापन सौंपा है, जिसमें तुरंत प्रभाव से बकाया मानदेय के भुगतान की मांग की गई है। जयपुर में भी जनप्रतिनिधियों ने इस बात पर प्रकाश डाला है कि न केवल पिछले चार माह का मानदेय बकाया है, बल्कि पूर्व में कई महीनों का मानदेय भी आधा-अधूरा ही जमा किया गया था।1
- श्रीगंगानगर में 'स्वच्छ भारत अभियान' और जल स्रोतों को बचाने के बड़े-बड़े सरकारी दावों के विपरीत, ज़मीनी हकीकत बिल्कुल अलग है, जहाँ एक बड़ी और एक छोटी नहर के ठीक बीच के हिस्से को डंपिंग ग्राउंड में बदल दिया गया है। इस स्थान पर कचरे और मलबे का एक बहुत बड़ा पहाड़ खड़ा हो गया है, जो स्थानीय पर्यावरण की सुरक्षा और प्रशासनिक दावों पर गंभीर सवाल खड़ा करता है। मौके से सामने आई तस्वीरों में स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है कि जहाँ कभी यह नहरों के बीच का हिस्सा साफ-सुथरा होना चाहिए था, वहाँ आज भारी मात्रा में प्लास्टिक की थैलियाँ, घरेलू कचरा, निर्माण कार्य का मलबा जैसे ईंट-पत्थर, सूखे पेड़-पौधे और यहाँ तक कि पूजा सामग्री भी फेंकी जा रही है। नहर के ठीक किनारे इस तरह के डंपिंग यार्ड के बनने से पानी के दूषित होने का खतरा बढ़ गया है, जो प्रशासन की घोर लापरवाही को उजागर करता है।4
- श्री करनपुर नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी संदीप बिश्नोई ने सार्वजनिक रूप से जानकारी दी है कि लोग मात्र ₹1 में अपना पट्टा बनवा सकते हैं।1