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मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने कपड़ा मंत्री गिरिराज सिंह से की मुलाकात l उमरिया से मुकेश कुमार के संवाददाता की खास रिपोर्ट l
मुकेश कुमार दुबे (MJ *CC)
मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने कपड़ा मंत्री गिरिराज सिंह से की मुलाकात l उमरिया से मुकेश कुमार के संवाददाता की खास रिपोर्ट l
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- NH 43 जो उमरिया से शहडोल जोड़ है इस समय लोगो के लिए बान मुसीबत NH43 का विकास रेल लाइन मे जो ओबर ब्रिज का काम कछुया की चल से चल रहा इस ब्रिज के चलते काई लोगो की जान चली गईं क्यों की सड़क बनी तो है लेकिन जहाँ जहाँ ब्रिज बनाना है वहां छोड़ी गई इस लेकिन सड़क मौत का कुआं बन गया आए दिन कोई ना कोई हद से होते रहते हैं नेता सरकारी अमला आप 9 10 सालों में कितनी बार वहां से निकले होंगे लेकिन अब तो जनता को भी लगने लगा है की कमीशन का खेल चल रहा है इन 10 सालों में तीन ओवर ब्रिज बने थे जो 9 10 सालों में पूरे नहीं हुए अब तो सड़क भी अपना दम तोड़ रही है जब तक ब्रिज बनेगा तब तक तू रोड ही नहीं रहेगी4
- उमरिया में नेशनल लोक अदालत का आयोजन 11 खंडपीठों में मामलों का हुआ निराकरण राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण जबलपुर के निर्देशानुसार “न्याय आपके द्वार” की अवधारणा को साकार करने के उद्देश्य से कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष माननीय प्रियदर्शन शर्मा के मार्गदर्शन में आयोजित हुआ। 📍 स्थान: उमरिया, मध्य प्रदेश 📺 NEWS 24 PUBLIC TV सच की आवाज1
- मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने कपड़ा मंत्री गिरिराज सिंह से की मुलाकात l उमरिया से मुकेश कुमार के संवाददाता की खास रिपोर्ट l1
- मध्य प्रदेश का उमरिया जिला के अधिकतर गांव में अवैध मुरूम खनन का खेल, हम बात कर रहे हैं उमरिया जिले के जनपद पंचायत पाली अंतर्गत ग्राम बरबस पुर की जहां NH43 में ओवर ब्रिज के काम के लिए हफ्तों से बिना खनिज विभाग के परमीशन के राजस्व भूमि से पोकलेन से धरती का सीना चीरते हुए लाल मुरुम निकालने का काम चल रहा था , और सूचना के बाद भी खनिज विभाग और पाली का राजस्व विभाग सोया रहा है बिरसिंहपुर --पाली जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम बरबसुर में पोकलेन मशीन और बड़े बड़े हाईवा से मुरूम का अवैध उत्खनन और परिवहन धड़ल्ले से चल रहा है। खनिज माफिया ठेकेदार बेखौफ होकर रात-दिन मुरूम निकालकर खनिज संपदा का दोहन कर रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार विभाग के अधिकारी शिकायत के बावजूद मौके पर पहुंचने की जहमत नहीं उठा रहे हैं। इससे साफ जाहिर होता है कि अवैध खनन को कहीं न कहीं विभागीय संरक्षण मिल रहा है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, ग्राम बरबसुर के ग्रामीणों ने शनिवार को पोकलेन मशीन से हो रहे अवैध मुरूम उत्खनन और बड़े बड़े हाईवा ट्रकों से हो रहे परिवहन की सूचना जिला माइनिंग अधिकारी एवं माइनिंग क्षेत्र अधिकारी पाली के राजस्व अधिकारियों को फोन पर दी। अधिकारियों ने ग्रामीणों को आश्वासन दिया कि मामले को दिखवाया जाएगा और जल्द-से-जल्द कार्रवाई होगी। लेकिन अधिकारियों की कार्यप्रणाली की पोल तब खुल गई, जब फोन लगाने के 8 से 10 घंटे बीत जाने के बाद भी विभाग का कोई अमला या अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा। ग्रामीणों का कहना है कि अवैध खनन करने वाले इतने बेखौफ हैं कि दिन-दहाड़े पोकलेन मशीन लगाकर मुरूम का उत्खनन करते हैं। खनन स्थल से ट्रैक्टर-ट्रॉलियों हाईवा के माध्यम से मुरूम का परिवहन भी निरंतर जारी है। अवैध खनन से गांव के आसपास के पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंच रहा है। वहीं, खनन के कारण गांव की सड़कें भी क्षतिग्रस्त हो रही हैं। ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने कई बार इस संबंध में शिकायत करने की सोची, लेकिन खनन माफियाओं के दबदबे के चलते लोग सामने आने से डरते हैं। उल्लेखनीय है कि मुरूम खनन के लिए शासन से खनन पट्टा या अनुज्ञप्ति लेना अनिवार्य है। बिना अनुमति के मुरूम निकालना खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम के तहत दंडनीय अपराध है। इसके बावजूद विभाग के अधिकारी शिकायत मिलने पर भी कार्रवाई से कतराते नजर आ रहे हैं। सवाल यह उठता है कि जब शिकायत के घंटों बाद तक विभाग का कोई अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा, तो आखिर कब पहुंचेगा? क्या विभाग अवैध खननकर्ताओं को खुली छूट दे रहा है? ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि खनिज विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत के बिना इतने बड़े पैमाने पर अवैध खनन संभव ही नहीं है। उनका कहना है कि पोकलेन जैसी बड़ी मशीन से घंटों खनन होता रहा, लेकिन विभाग को इसकी भनक तक नहीं लगी, यह अपने आप में संदेहास्पद है। उन्होंने जिला प्रशासन से मांग की है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और अवैध खनन में संलिप्त लोगों के साथ-साथ लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई की जाए। इधर, इस संबंध में जब जिला माइनिंग अधिकारी से संपर्क करने का प्रयास किया गया, तो उन्होंने मामले को दिखवाने की बात कही। लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि आश्वासन तो पहले भी मिला था, पर कार्रवाई के नाम पर कुछ नहीं हुआ। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो वे जिला कलेक्टर को शिकायत करने को बाध्य होंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि अवैध मुरूम खनन से न केवल शासन को करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान होता है, बल्कि पर्यावरणीय असंतुलन भी पैदा होता है। मध्य प्रदेश का उमरिया जिला के अधिकतर गांव में अवैध मुरूम खनन का खेल, हम बात कर रहे हैं उमरिया जिले के जनपद पंचायत पाली अंतर्गत ग्राम बरबस पुर की जहां NH43 में ओवर ब्रिज के काम के लिए हफ्तों से बिना खनिज विभाग के परमीशन के राजस्व भूमि से पोकलेन से धरती का सीना चीरते हुए लाल मुरुम निकालने का काम चल रहा था , और सूचना के बाद भी खनिज विभाग और पाली का राजस्व विभाग सोया रहा है बिरसिंहपुर --पाली जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम बरबसुर में पोकलेन मशीन और बड़े बड़े हाईवा से मुरूम का अवैध उत्खनन और परिवहन धड़ल्ले से चल रहा है। खनिज माफिया ठेकेदार बेखौफ होकर रात-दिन मुरूम निकालकर खनिज संपदा का दोहन कर रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार विभाग के अधिकारी शिकायत के बावजूद मौके पर पहुंचने की जहमत नहीं उठा रहे हैं। इससे साफ जाहिर होता है कि अवैध खनन को कहीं न कहीं विभागीय संरक्षण मिल रहा है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, ग्राम बरबसुर के ग्रामीणों ने शनिवार को पोकलेन मशीन से हो रहे अवैध मुरूम उत्खनन और बड़े बड़े हाईवा ट्रकों से हो रहे परिवहन की सूचना जिला माइनिंग अधिकारी एवं माइनिंग क्षेत्र अधिकारी पाली के राजस्व अधिकारियों को फोन पर दी। अधिकारियों ने ग्रामीणों को आश्वासन दिया कि मामले को दिखवाया जाएगा और जल्द-से-जल्द कार्रवाई होगी। लेकिन अधिकारियों की कार्यप्रणाली की पोल तब खुल गई, जब फोन लगाने के 8 से 10 घंटे बीत जाने के बाद भी विभाग का कोई अमला या अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा। ग्रामीणों का कहना है कि अवैध खनन करने वाले इतने बेखौफ हैं कि दिन-दहाड़े पोकलेन मशीन लगाकर मुरूम का उत्खनन करते हैं। खनन स्थल से ट्रैक्टर-ट्रॉलियों हाईवा के माध्यम से मुरूम का परिवहन भी निरंतर जारी है। अवैध खनन से गांव के आसपास के पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंच रहा है। वहीं, खनन के कारण गांव की सड़कें भी क्षतिग्रस्त हो रही हैं। ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने कई बार इस संबंध में शिकायत करने की सोची, लेकिन खनन माफियाओं के दबदबे के चलते लोग सामने आने से डरते हैं। उल्लेखनीय है कि मुरूम खनन के लिए शासन से खनन पट्टा या अनुज्ञप्ति लेना अनिवार्य है। बिना अनुमति के मुरूम निकालना खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम के तहत दंडनीय अपराध है। इसके बावजूद विभाग के अधिकारी शिकायत मिलने पर भी कार्रवाई से कतराते नजर आ रहे हैं। सवाल यह उठता है कि जब शिकायत के घंटों बाद तक विभाग का कोई अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा, तो आखिर कब पहुंचेगा? क्या विभाग अवैध खननकर्ताओं को खुली छूट दे रहा है? ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि खनिज विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत के बिना इतने बड़े पैमाने पर अवैध खनन संभव ही नहीं है। उनका कहना है कि पोकलेन जैसी बड़ी मशीन से घंटों खनन होता रहा, लेकिन विभाग को इसकी भनक तक नहीं लगी, यह अपने आप में संदेहास्पद है। उन्होंने जिला प्रशासन से मांग की है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और अवैध खनन में संलिप्त लोगों के साथ-साथ लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई की जाए। इधर, इस संबंध में जब जिला माइनिंग अधिकारी से संपर्क करने का प्रयास किया गया, तो उन्होंने मामले को दिखवाने की बात कही। लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि आश्वासन तो पहले भी मिला था, पर कार्रवाई के नाम पर कुछ नहीं हुआ। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो वे जिला कलेक्टर को शिकायत करने को बाध्य होंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि अवैध मुरूम खनन से न केवल शासन को करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान होता है, बल्कि पर्यावरणीय असंतुलन भी पैदा होता है। खनन के बाद गड्ढे खुले छोड़ दिए जाते हैं, जिससे बारिश के मौसम में जान-माल का खतरा भी बना रहता है। ऐसे में जरूरत है कि जिला प्रशासन इस मामले को गंभीरता से ले और अवैध खनन पर प्रभावी अंकुश लगाए।4
- अवैध उत्खनन खनिज विभाग को शिकायत मिलने के बाद भी नहीं होती करवाई अवैध मुरूम खनन का खेल, पोकलेन से चल रहा था उत्खनन, खनिज विभाग सोया रहा बिरसिंहपुर --पाली जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम बरबसुर में पोकलेन मशीन से मुरूम का अवैध उत्खनन धड़ल्ले से चल रहा था। खनिज माफिया बेखौफ होकर रात-दिन मुरूम निकालकर खनिज संपदा का दोहन कर रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार विभाग के अधिकारी शिकायत के बावजूद मौके पर पहुंचने की जहमत नहीं उठा रहे हैं। इससे साफ जाहिर होता है कि अवैध खनन को कहीं न कहीं विभागीय संरक्षण मिल रहा है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, ग्राम बरबसुर के ग्रामीणों ने शनिवार को पोकलेन मशीन से हो रहे अवैध मुरूम उत्खनन की सूचना जिला माइनिंग अधिकारी एवं माइनिंग क्षेत्र अधिकारी को फोन पर दी। अधिकारियों ने ग्रामीणों को आश्वासन दिया कि मामले को दिखवाया जाएगा और जल्द कार्रवाई होगी। लेकिन अधिकारियों की कार्यप्रणाली की पोल तब खुल गई, जब फोन लगाने के 8 से 10 घंटे बीत जाने के बाद भी विभाग का कोई अमला या अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा। ग्रामीणों का कहना है कि अवैध खनन करने वाले इतने बेखौफ हैं कि दिन-दहाड़े पोकलेन मशीन लगाकर मुरूम का उत्खनन करते हैं। खनन स्थल से ट्रैक्टर-ट्रॉलियों हाईवा के माध्यम से मुरूम का परिवहन भी निरंतर जारी है। अवैध खनन से गांव के आसपास के पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंच रहा है। वहीं, खनन के कारण गांव की सड़कें भी क्षतिग्रस्त हो रही हैं। ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने कई बार इस संबंध में शिकायत करने की सोची, लेकिन खनन माफियाओं के दबदबे के चलते लोग सामने आने से डरते हैं। उल्लेखनीय है कि मुरूम खनन के लिए शासन से खनन पट्टा या अनुज्ञप्ति लेना अनिवार्य है। बिना अनुमति के मुरूम निकालना खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम के तहत दंडनीय अपराध है। इसके बावजूद विभाग के अधिकारी शिकायत मिलने पर भी कार्रवाई से कतराते नजर आ रहे हैं। सवाल यह उठता है कि जब शिकायत के घंटों बाद तक विभाग का कोई अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा, तो आखिर कब पहुंचेगा? क्या विभाग अवैध खननकर्ताओं को खुली छूट दे रहा है? ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि खनिज विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत के बिना इतने बड़े पैमाने पर अवैध खनन संभव ही नहीं है। उनका कहना है कि पोकलेन जैसी बड़ी मशीन से घंटों खनन होता रहा, लेकिन विभाग को इसकी भनक तक नहीं लगी, यह अपने आप में संदेहास्पद है। उन्होंने जिला प्रशासन से मांग की है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और अवैध खनन में संलिप्त लोगों के साथ-साथ लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई की जाए। इधर, इस संबंध में जब जिला माइनिंग अधिकारी से संपर्क करने का प्रयास किया गया, तो उन्होंने मामले को दिखवाने की बात कही। लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि आश्वासन तो पहले भी मिला था, पर कार्रवाई के नाम पर कुछ नहीं हुआ। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो वे जिला कलेक्टर को शिकायत करने को बाध्य होंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि अवैध मुरूम खनन से न केवल शासन को करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान होता है, बल्कि पर्यावरणीय असंतुलन भी पैदा होता है। खनन के बाद गड्ढे खुले छोड़ दिए जाते हैं, जिससे बारिश के मौसम में जान-माल का खतरा भी बना रहता है। ऐसे में जरूरत है कि जिला प्रशासन इस मामले को गंभीरता से ले और अवैध खनन पर प्रभावी अंकुश लगाए।1
- *मुख्यमंत्री जन् विश्वास अभियान* ग्रामीण क्षेत्रों में पहुंचा प्रशासन, कलेक्टर ने परखी योजनाओं की जमीनी हकीकत *मुख्यमंत्री जन् विश्वास अभियान* ग्रामीण क्षेत्रों में पहुंचा प्रशासन, कलेक्टर ने परखी योजनाओं की जमीनी हकीकत आंगनबाड़ी में कम उपस्थिति और अव्यवस्था पर नोटिस, 15 दिन में हर घर पानी पहुंचाने के निर्देश (आशुतोष त्रिपाठी/जनचिंगारी -उमरिया) मुख्यमंत्री जन विश्वास अभियान के तहत कलेक्टर श्रीमती राखी सहाय ने वरिष्ठ प्रशासनिक एवं विभागीय अधिकारियों के साथ मानपुर जनपद के दूरस्थ अमरपुर क्षेत्र के विभिन्न ग्रामों का भ्रमण कर शासकीय योजनाओं और संस्थाओं की जमीनी स्थिति का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने ग्रामीणों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याएं सुनीं और संबंधित अधिकारियों को समय-सीमा में निराकरण के निर्देश दिए। असोढ़ ग्राम पंचायत के आंगनबाड़ी केंद्र के निरीक्षण के दौरान बच्चों की कम उपस्थिति और अव्यवस्था सामने आने पर कलेक्टर ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ता शांति बाई कहार, सीडीपीओ राज नारायण सिंह एवं सुपरवाइजर अभिलाषा सौंधिया को कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए। उन्होंने बच्चों का अपने समक्ष वजन भी कराया तथा प्राथमिक शाला की बाउंड्रीवाल निर्माण के निर्देश दिए। महरोई में गौशाला का निरीक्षण करते हुए कलेक्टर ने सामने एवं पीछे उपलब्ध रिक्त भूमि पर चारागाह विकसित करने के निर्देश दिए। वहीं 15वें वित्त आयोग से निर्माणाधीन पार्क का निरीक्षण कर उन्होंने इसे बेहतर पिकनिक कॉम्प्लेक्स के रूप में विकसित करने की संभावना जताई। कलेक्टर एवं सीईओ जिला पंचायत ने पार्क परिसर में पौधरोपण भी किया। बराटोला के ग्रामीणों ने घरों में पानी नहीं पहुंचने की शिकायत की। कलेक्टर ने जल निगम के अधिकारियों को चोक पाइपलाइन दुरुस्त कर 15 दिन के भीतर हर घर पानी पहुंचाने के निर्देश दिए। शासकीय हाई स्कूल असोढ़ में कक्षाओं का संचालन अलग-अलग कमरों में करने, पानी का कनेक्शन लेने तथा लंबे समय से बंद जिम के उपकरणों को विद्यार्थियों के उपयोग में लाने के निर्देश दिए गए। टिकुरी में वेयरहाउस एवं नाली निर्माण, कोटरी आरोग्य केंद्र में ओपीडी व्यवस्था, खलौंध हाई स्कूल में पठन-पाठन, आदिवासी बालक सीनियर छात्रावास तथा ग्राम पंचायत कुड़ी और बचहा के विद्यालयों का भी निरीक्षण किया गया। कुड़ी में ग्रामीणों की सड़क एवं नाली निर्माण की मांग पर कलेक्टर ने कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। साथ ही ग्रामीणों को अवैध विद्युत कनेक्शन नहीं लेने की चेतावनी देते हुए कहा कि ऐसा पाए जाने पर नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इस दौरान सीईओ जिला पंचायत अभय सिंह, अपर कलेक्टर प्रमोद कुमार सेन गुप्ता, एसडीएम मानपुर हरनीत कौर कलसी, सीईओ जनपद मानपुर अमित सिरौठिया सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे। --- 2. अमरपुर में कलेक्टर ने सुनीं ग्रामीणों की समस्याएं, मौके पर दिए समाधान के निर्देश जन संवाद शिविर में हितलाभ वितरण, युवाओं और प्रतिभावान विद्यार्थियों से भी किया संवाद मुख्यमंत्री जन विश्वास अभियान के अंतर्गत मानपुर जनपद की ग्राम पंचायत अमरपुर में जन संवाद शिविर आयोजित किया गया। कलेक्टर श्रीमती राखी सहाय, पुलिस अधीक्षक विजय कुमार भागवानी, सीईओ जिला पंचायत अभय सिंह एवं अपर कलेक्टर प्रमोद कुमार सेन गुप्ता ने ग्रामीणों से सीधा संवाद कर उनकी समस्याएं सुनीं तथा संबंधित अधिकारियों को समय-सीमा में निराकरण के निर्देश दिए। कलेक्टर ने बसोर मोहल्ले में सड़क निर्माण की मांग पर सरपंच से जानकारी ली। उन्हें बताया गया कि सड़क निर्माण का प्रस्ताव तैयार किया जा चुका है। उन्होंने नल-जल योजना के संचालन की स्थिति की जानकारी भी ग्रामीणों से प्राप्त की। कलेक्टर ने कहा कि मुख्यमंत्री जन विश्वास अभियान का उद्देश्य शासन को आमजन के करीब लाकर उनकी समस्याओं का त्वरित निराकरण सुनिश्चित करना है। शिविरों में प्राप्त आवेदनों का परीक्षण कर पात्र हितग्राहियों को योजनाओं का लाभ दिलाया जाए। जिन शिकायतों का निराकरण मौके पर संभव है, उन्हें तत्काल निराकृत किया जाए। 42 लाख रुपये का हितलाभ शिविर में मानपुर निवासी अजीत कुमार त्रिपाठी को डॉ. भीमराव अंबेडकर कामधेनु योजना के अंतर्गत 42 लाख रुपये का हितलाभ प्रदान किया गया। महिला उद्यमी से संवाद कलेक्टर ने अमरपुर निवासी उद्यमी खुर्शिदा बानो से भी संवाद किया। उन्हें उद्यान विभाग की पीएमएफएमई योजना के तहत मुर्गी दाना उद्यम स्थापित करने के लिए 26 लाख रुपये की सहायता प्रदान की गई है। कलेक्टर ने कहा कि युवा एवं नव उद्यमी शासकीय योजनाओं का लाभ लेकर आत्मनिर्भर बनें और दूसरों के लिए भी रोजगार के अवसर पैदा करें। प्रतिभावान विद्यार्थियों से किया संवाद कलेक्टर ने पीएम श्री विद्यालय अमरपुर के प्रतिभावान विद्यार्थियों से संवाद कर उन्हें उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने विद्यार्थियों को मेहनत और लगन से पढ़ाई कर अपने माता-पिता एवं क्षेत्र का नाम रोशन करने के लिए प्रेरित किया। शिविर में इंदवार निवासी इन्फ्लुएंसर श्रुति जायसवाल से भी संवाद करते हुए कलेक्टर ने सोशल मीडिया के माध्यम से शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं को आमजन तक पहुंचाने में सहयोग की अपेक्षा की। --- 3. सेवा संकल्प अभियान की कमान सीईओ जिला पंचायत को 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक जिलेभर में होंगी विभिन्न गतिविधियां जिले में 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक सेवा संकल्प अभियान आयोजित किया जाएगा। अभियान के तहत विभिन्न गतिविधियों के सफल संचालन एवं विभागों के बीच समन्वय के लिए कलेक्टर श्रीमती राखी सहाय ने सीईओ जिला पंचायत अभय सिंह को नोडल अधिकारी नियुक्त किया है। नोडल अधिकारी को शासन के दिशा-निर्देशों के अनुरूप अभियान की रूपरेखा तैयार करने, सभी विभागों से समन्वय स्थापित करने तथा गतिविधियों का सफल क्रियान्वयन सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। --- 4. ‘मां तुझे प्रणाम’ योजना: अनुभव यात्रा के लिए 22 सितंबर तक आवेदन 15 से 25 वर्ष के युवक-युवतियों को मिलेगा अवसर, विकासखंड स्तर पर होगा चयन खेल एवं युवा कल्याण विभाग की राष्ट्रभावना से जुड़ी महत्वाकांक्षी ‘मां तुझे प्रणाम’ योजना के तहत वर्ष 2026-27 में अनुभव यात्रा के लिए जिले के तीनों विकासखंडों के युवक-युवतियों से आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। इच्छुक युवा 22 सितंबर तक जिला खेल एवं युवा कल्याण अधिकारी कार्यालय में आवेदन जमा कर सकते हैं। योजना के तहत युवक वर्ग में एनसीसी, एनएसएस, मेधावी छात्र एवं स्काउट-गाइड वर्ग से तथा युवती वर्ग में एनसीसी, एनएसएस, खिलाड़ी, मेधावी छात्र एवं स्काउट-गाइड वर्ग से युवाओं का चयन किया जाएगा। निर्धारित पात्रता के अनुसार आवेदक की आयु 31 दिसंबर 2027 तक 15 से 25 वर्ष के बीच होनी चाहिए। --- 5. श्रमिकों के हक की निगरानी करेगा ‘श्रम प्रहरी’ अपंजीकृत प्रतिष्ठानों और श्रम कानूनों के उल्लंघन की सूचना दे सकेंगे जागरूक नागरिक श्रमिकों की सुरक्षा एवं उनके अधिकारों की रक्षा के उद्देश्य से श्रम विभाग ने ‘श्रम प्रहरी’ पहल शुरू की है। इसके तहत कोई भी जागरूक नागरिक अपने आसपास संचालित अपंजीकृत कारखानों, संस्थानों अथवा निर्माण कार्यों की जानकारी श्रम विभाग तक पहुंचा सकता है। श्रम विभाग ने स्पष्ट किया है कि ‘श्रम प्रहरी’ कोई सरकारी पद अथवा नियुक्ति नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी और जनभागीदारी पर आधारित पहल है। नागरिक श्रम कानूनों के उल्लंघन अथवा अपंजीकृत प्रतिष्ठानों की जानकारी विभाग के ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से दे सकते हैं। इसके अलावा टोल फ्री श्रमिक हेल्पलाइन 1800-233-8888 पर भी सूचना दी जा सकती है। विभाग ने नागरिकों से अपील की है कि श्रमिकों से जुड़े नियमों के उल्लंघन की जानकारी सामने आने पर विभाग को सूचित कर सुरक्षित कार्य वातावरण और श्रमिक अधिकारों की रक्षा में सहयोग करें। --- 6. किसान की मर्जी के बिना खाद की टैगिंग की तो होगी कार्रवाई यूरिया-डीएपी के साथ जिंक, सल्फर या जैव उर्वरक जबरन थोपने पर विक्रेताओं पर कसेगा शिकंजा जिले में खाद की बिक्री को लेकर कृषि विभाग ने उर्वरक विक्रेताओं को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि किसानों की मांग के अनुसार ही उर्वरक उपलब्ध कराया जाए। उप संचालक कृषि संग्राम सिंह मरावी ने कहा कि किसान की इच्छा के विरुद्ध किसी अन्य उर्वरक की टैगिंग कर बिक्री करना स्वीकार नहीं किया जाएगा। जिला प्रशासन के संज्ञान में आया है कि कुछ विक्रेताओं द्वारा यूरिया और डीएपी जैसे मुख्य उर्वरकों के साथ जिंक, सल्फर अथवा जैव उर्वरक लेने के लिए किसानों पर दबाव बनाया जा रहा है। कृषि विभाग ने स्पष्ट किया है कि किसान अपनी फसल और आवश्यकता के अनुसार जिस खाद की मांग करे, उसे वही उर्वरक उपलब्ध कराया जाए। जबरन अन्य उत्पाद लेने के लिए बाध्य करने वाले निजी अथवा शासकीय विक्रेताओं के विरुद्ध नियमानुसार कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। किसान ऐसी स्थिति में अपने नजदीकी वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी, विकासखंड कार्यालय अथवा जिला कृषि कार्यालय में लिखित शिकायत कर सकते हैं। इसके अलावा किसान कॉल सेंटर के टोल फ्री नंबर 155253 पर भी शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।2
- धनपुरी में बने वाटर पार्क को जल्द से जल्द प्रारंभ कराएं- कलेक्टर === कलेक्टर एवं पुलिस अधीक्षक ने वाटर पार्क की सुविधाओं का लिया जायजा === शहडोल 12 सितम्बर 2026- कलेक्टर श्री पार्थ जायसवाल एवं पुलिस अधीक्षक श्री संजय अग्रवाल ने आज धनपुरी में 11 एकड़ भूमि में लगभग 20 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित वाटर पार्क का निरीक्षण कर वहां उपलब्ध सुविधाओं एवं व्यवस्थाओं का जायजा लिया। कलेक्टर श्री पार्थ जायसवाल ने मुख्य नगरपालिका अधिकारी को निर्देश दिए कि धनपुरी वाटर पार्क को यथाशीघ्र प्रारंभ कराया जाए, जिससे नागरिकों को यहां निर्मित जिम, क्लब सहित अन्य सुविधाओं का लाभ मिल सके। उन्होंने वाटर पार्क की व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने तथा नागरिकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए आवश्यक तैयारियां पूर्ण करने के निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान कलेक्टर को बताया गया कि वाटर पार्क में जिम, क्लब, तैराकी, रेस्टोरेंट, मीटिंग हॉल सहित अन्य आधुनिक सुविधाओं को समाहित किया गया है। वाटर पार्क के प्रारंभ होने से क्षेत्र के नागरिकों को मनोरंजन एवं विभिन्न सुविधाओं का लाभ मिल सकेगा। निरीक्षण के दौरान मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत श्री शिवम प्रजापति, नगर पालिका अध्यक्ष श्रीमती रविंदर कौर, उपाध्यक्ष श्री हनुमान खंडेलवाल, अनुविभागीय अधिकारी राजस्व श्री दीपक मंडावी सहित अन्य अधिकारी एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।1
- सागर की जहरीली शराब त्रासदी ने पूरे मध्य प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। बंडा और शाहगढ़ क्षेत्र के आठ गांवों में मौतों का आंकड़ा 28 तक पहुंच चुका है और डेढ़ सौ से अधिक लोग अस्पतालों में जिंदगी और मौत की जंग लड़ रहे हैं। एक ओर मुख्यमंत्री ने जिम्मेदारों पर कठोर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं, वहीं दूसरी ओर प्रभावित क्षेत्रों में बंद कराई गई सात शराब दुकानों को दोबारा खोलने का आदेश भी चर्चा में है। इन खबरों के बीच उमरिया जिले के बिरसिंहपुर पाली गांव और शहर में पैकारी के जरिए अवैध शराब बेचे जाने के आरोपों ने नया सवाल खड़ा कर दिया है। बिरसिंहपुर पाली में क्या हैं आरोप? स्थानीय ग्रामीणों और सूत्रों के आरोप हैं कि बिरसिंहपुर पाली में लाइसेंसी ठेकेदार के जरिए पैकारी कर गांव-गांव में अवैध शराब बेचवाई जा रही है। आरोप है कि दुकानों के अलावा गुप्त ठिकानों से शराब की सप्लाई की जा रही है और इस अवैध नेटवर्क पर प्रभावी अंकुश नहीं लगाया जा रहा। सागर की जहरीली शराब त्रासदी ने पूरे मध्य प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। बंडा और शाहगढ़ क्षेत्र के आठ गांवों में मौतों का आंकड़ा 28 तक पहुंच चुका है और डेढ़ सौ से अधिक लोग अस्पतालों में जिंदगी और मौत की जंग लड़ रहे हैं। एक ओर मुख्यमंत्री ने जिम्मेदारों पर कठोर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं, वहीं दूसरी ओर प्रभावित क्षेत्रों में बंद कराई गई सात शराब दुकानों को दोबारा खोलने का आदेश भी चर्चा में है। इन खबरों के बीच उमरिया जिले के बिरसिंहपुर पाली गांव और शहर में पैकारी के जरिए अवैध शराब बेचे जाने के आरोपों ने नया सवाल खड़ा कर दिया है। बिरसिंहपुर पाली में क्या हैं आरोप? स्थानीय ग्रामीणों और सूत्रों के आरोप हैं कि बिरसिंहपुर पाली में लाइसेंसी ठेकेदार के जरिए पैकारी कर गांव-गांव में अवैध शराब बेचवाई जा रही है। आरोप है कि दुकानों के अलावा गुप्त ठिकानों से शराब की सप्लाई की जा रही है और इस अवैध नेटवर्क पर प्रभावी अंकुश नहीं लगाया जा रहा। ग्रामीणों का कहना है कि सागर जैसे हादसे का इंतजार है पुनरावृत्ति को रोकने के लिए प्रशासन को तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए। हालांकि ये आरोप स्थानीय स्तर के दावों पर आधारित हैं, जिनकी आधिकारिक पुष्टि प्रशासन की जांच के बाद ही संभव होगी। क्या लग सकता है प्रतिबंध? नियमों के मुताबिक शराब ठेका क्षेत्र में अवैध बिक्री पर जिला आबकारी अधिकारी और कलेक्टर को कार्रवाई के अधिकार प्राप्त हैं। आबकारी अधिनियम के तहत अवैध शराब के निर्माण, भंडारण और बिक्री पर छापेमारी, जब्ती, जुर्माना और आपराधिक मुकदमे का प्रावधान है। यदि आरोपों में सच्चाई मिलती है तो ठेकेदार का लाइसेंस निलंबित या निरस्त करने का नियम है और संबंधित क्षेत्र में शराब की बिक्री पर अस्थायी या स्थायी प्रतिबंध भी संभव है। सागर कांड के बाद राज्य भर में आबकारी विभाग अलर्ट पर है, ऐसे में उमरिया प्रशासन पर भी दबाव बढ़ गया है। प्रशासन की चुनौती सबसे बड़ी चुनौती आरोपों की सत्यता की जांच है। पैकारी नेटवर्क अक्सर रात के अंधेरे में और गुप्त ठिकानों से चलता है, जिसे पकड़ना आसान नहीं होता। साथ ही स्थानीय स्तर पर राजनीतिक संरक्षण के आरोप भी लगते रहे हैं। सागर मामले में कांग्रेस ने भाजपा पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं की संलिप्तता का आरोप लगाया था, जिससे शराब माफिया और सत्ता के गठजोड़ की बहस तेज हुई है। उमरिया में भी इसी तरह के संदेहों से इनकार नहीं किया जा सकता। आगे क्या? अब गेंद उमरिया जिला प्रशासन के पाले में है। ग्रामीणों की मांग है कि बिरसिंहपुर पाली में विशेष छापेमार अभियान चलाया जाए, ठेकेदार के लेन-देन की जांच हो और दोषी पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई की जाए। सागर की 28 मौतें इस बात की गवाही हैं कि अवैध शराब पर नरमी कितनी भारी पड़ सकती है। सवाल यह है कि क्या उमरिया प्रशासन इन आरोपों को गंभीरता से लेकर ठोस कार्रवाई करेगा, या यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा। समय रहते कदम उठाए गए तो एक बड़ी त्रासदी टल सकती है।4