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इसलिए किसानों के खेत में आग लगता है इसे अब तक काट ले ना चाहिए था
Ajay News Network
इसलिए किसानों के खेत में आग लगता है इसे अब तक काट ले ना चाहिए था
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- प्रेस रिलीज 2/4/2026 बिहारशरीफ नालन्दा। अतिपिछड़ा/दलित/अल्पसंख्यक संघर्ष मोर्चा के प्रतिनिधि के लोग पीड़िता एवं पीड़ित परिवार से उनके गांव अजयपुर में मिलने का काम किये। बिहारशरीफः नालन्दा जिला नूरसराय प्रखंड अजयपुर गांव में एक अतिपिछड़ा महिला के साथ जिस तरह का अमानवीय दुराचार जैसा व्यवहार किया गया वो महाभारत में द्रौपदी की चीर हरण हो या मणिपुर में महिला को नंगा कर सरेआम रोड पर परेड जैसी अमानवीय घटना को याद दिला कर सामान्य इंसान मन को बेचैन और झकझोर देता है । इतना होने के बाद भी उस महिला को हीं यहां के पुरुष प्रधान समाज महिला के पीछे छिपकर दूसरी महिला द्वारा लगातार चीर हरण करवाया जा रहा है जो निंदनीय है। कोई भी महिला कितना भी गलत क्यों न हो चाहे कोई कोठा के तवायफ ही क्यों न हो वो भी एक समय में एक पुरुष से ही मिलती है लेकिन ये तो एक सामान्य महिला है (इस पर इस तरह के गलत आरोप बिना कोई सबूत के कैसे लगा सकते है) जो बैठका/ दलान में वो जिस व्यक्ति से मिलने गई थी वो एक व्यवसाई था और सीएसपी चलाता है और उस महिला के घर पर जाकर महिला के पति के कहने पर कई बार महिला के अंधी सांस की वृद्धा पेंशन मशीन पर हांथ के अंगूठा लगाकर पैसा निकलने का काम किया था(पुरुषों का जलन के कारण यही है) और उस दिन भी पति के कहने पर हीं महिला ने ननिहाल में रह रही अपनी बेटी को पैसा भेजवाने के लिए उसके दुकान पर गई लेकिन उस समय उसके दुकान पर उसका छोटा भाई बैठा था और उसका भाई ने ही बोला कि सामने वाली बैठका/ दलान में मेरा भाई बैठा है वही जाकर मिल ले जिस कारण वो महिला ने वो बैठका/ दलान पर उस व्यवसाई व्यक्ति से मिलने गई थी और मजेदार बात ये है कि वो बैठका उस व्यक्ति का भी नहीं बल्कि किसी और का था और वहां पर एक पुरुष नहीं बल्कि तीन पुरुष लोग पहले से ही बैठा उसके अलावा उस बैठका के बाहर भी कुछ लोग बैठे थे । दूसरी बात जिस गेट से प्रवेश किया उस गेट को उस महिला या पहले से अंदर में जो तीन लोग थे उनमें से किसी ने बंद नहीं किया था। अगर गलत कार्य अंदर करना होता तो वो अंदर वाला व्यक्ति या वो महिला गेट जरूर बंद करती । इससे भी ज्यादा समझने वाली बात ये है कि जब महिला उस घर में गई थी तब जो लोग बाहर में बैठा था उसे महिला ने देखी थी लेकिन जब महिला घर के अंदर प्रवेश किया तो बाहर बैठे लोग गेट को बंद कर बाहर से कुंडी/ सिटीकिल लगा कर शोर मचाया और झूठा अफवाह फैलाया जिसके कारण लोग इक्कठा हुआ जिसका दुष्परिणाम से इस तरह की घटना हुआ। चुकी वो महिला सुंदर, गरीब , बिना पति के (पति बाहर) और जातीय समीकरण में अल्पसंख्यक क्यों की दो हजार घर में मात्र 5 घर उसके समाज का है । अब उस गांव के कुछ लोग अपने बेटा को तो कोई अपने भाई को तो कोई अपने पति को तो कोई अपने पिता को तो कोई अपने जाती के लोगों द्वारा किए गये कुकर्मों को दवाने , छिपाने और बचाने के लिए पीड़ित महिला को हीं रोज चीर हरण और मनोवैज्ञानिक शोषण कर रहा है । प्रतिनिधि मंडल में अतिपिछड़ा/ दलित/अल्पसंख्यक संघर्ष मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामदेव चौधरी जिला महासचिव उमेश पंडित सुबोध कुमार उर्फ प्रमोद कुमार अवधेश पंडित छोटे पंडित महेंद्र प्रसाद आदि दर्जनों लोग शामिल थे।1
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