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बिहार के जल संसाधन विभाग पर आधारित एक विशेष गीत तैयार किया गया है। यह गीत राज्य के कुछ मुख्य बैराज अभियंताओं की जय-जयकार और उनके कार्यों का गुणगान करता है। इस गीत और संगीत को डी आनंद ने तैयार किया है, जबकि इसकी परिकल्पना संगीत आनंद द्वारा की गई है।
D Anand
बिहार के जल संसाधन विभाग पर आधारित एक विशेष गीत तैयार किया गया है। यह गीत राज्य के कुछ मुख्य बैराज अभियंताओं की जय-जयकार और उनके कार्यों का गुणगान करता है। इस गीत और संगीत को डी आनंद ने तैयार किया है, जबकि इसकी परिकल्पना संगीत आनंद द्वारा की गई है।
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- गीतकार डी आनंद ने रिश्तों में मिठास की गहरी इच्छा व्यक्त की है, जिसकी तुलना उन्होंने चीनी से की है। अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए, उन्होंने कहा कि संबंधों में चीनी जैसी मिठास होनी चाहिए, ठीक उसी तरह जैसे पारो को देवदास की आवश्यकता होती है।1
- एक भयंकर आर्थिक तूफ़ान सर पर मंडरा रहा है, जिसके लिए पिछले 12 सालों में मोदी जी द्वारा खड़ा किया गया ढाँचा ज़िम्मेदार बताया गया है। इस दावे के अनुसार, यह ढाँचा विशेष रूप से अडानी और अंबानी के लिए निर्मित किया गया था और अब यही ढाँचा भरभराकर ढहने वाला है। आशंका जताई गई है कि जब यह ढाँचा ढहेगा, तब अडानी और अंबानी को चोट नहीं पहुँचेगी, क्योंकि उनके पास इस स्थिति से निकलने के रास्ते मौजूद हैं। हालाँकि, इसका सीधा और बुरा असर आम जनता पर पड़ेगा। इसमें युवाओं, ग़रीबों, मध्यमवर्ग के लोगों, किसानों, मज़दूरों और छोटे व्यापारियों को चोट पहुँचने की बात कही गई है, जिन्हें इस ढाँचे का कभी हिस्सा नहीं माना गया।1
- बिहार के पश्चिमी चंपारण जिले के मधुबनी प्रखंड में जीवन तेली और बंशीधर तेली नामक दो सगे भाइयों की जमीन कथित तौर पर हड़प ली गई है। शिकायतकर्ता का दावा है कि उनकी जमीन, जिसका जमाबंदी संख्या 357 है, पर सुखल सा सुखालसा और राजेंद्र शाह के बच्चों ने अवैध रूप से कब्जा कर घर बना लिए हैं। इस मामले में सभी अधिकारियों और जिलाधिकारी (डीएम साहब) से आवेदन किया गया है कि वे जमीन की जांच कर उचित कार्रवाई करें। आवेदक ने सोशल मीडिया पर भी इस पूरे मामले की जांच-पड़ताल कर दोषियों के खिलाफ कदम उठाने की पुरजोर मांग की है।2
- अहिरौली में 22 वर्षीय संदीप यादव की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई है, जिससे यह मामला रहस्यमयी बना हुआ है। जानकारी के अनुसार, संदीप रात करीब 11 बजे अपने घर से निकला था और बाद में उसे एक पुल पर घायल अवस्था में पाया गया। पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि उसने घटना से पहले अपने एक दोस्त को फोन किया था, और उनकी चैट में प्रेम-प्रसंग से जुड़ी बातें भी थीं। पुलिस अब इस पूरे मामले की गहनता से जांच कर रही है।1
- कुशीनगर पुलिस ने एक बड़ी सफलता हासिल करते हुए नेपाल के नागरिकों को पढ़ाई, नौकरी और बेहतर कमाई का झांसा देकर ठगी करने वाले एक अंतर्राष्ट्रीय गिरोह का पर्दाफाश किया है। इस संयुक्त कार्रवाई में पुलिस ने कुल 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनमें 8 पुरुष और 2 महिलाएं शामिल हैं। पुलिस ने गिरोह के चंगुल से 453 नेपाली नागरिकों को सुरक्षित मुक्त भी कराया है। कसया थाना क्षेत्र में पिछले कुछ दिनों से लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि नेपाली नागरिकों को नौकरी और पढ़ाई के नाम पर कुशीनगर बुलाकर उनसे मोटी रकम वसूली जा रही है। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक केशव कुमार के निर्देश पर विशेष टीमों का गठन किया गया था। इस अभियान के तहत कसया पुलिस, सर्विलांस सेल, स्वाट टीम और एसटीएफ गोरखपुर की संयुक्त टीम ने छापेमारी कर इन 10 सदस्यों को धर दबोचा। पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों के कब्जे से फर्जी आधार कार्ड, 60 बॉन्ड पेपर, एक लैपटॉप, सोने-चांदी जैसे आभूषण, भारतीय और नेपाली मुद्रा सहित बड़ी मात्रा में आपत्तिजनक सामग्री बरामद की है। पूछताछ में खुलासा हुआ कि यह गिरोह नेपाल के गरीब और कम पढ़े-लिखे लोगों को नौकरी, पढ़ाई और नेटवर्क मार्केटिंग के जरिए लाखों रुपये कमाने का सपना दिखाता था। इसके बाद उन्हें कुशीनगर बुलाकर फर्जी दस्तावेजों और बॉन्ड पेपर के सहारे ठगी का शिकार बनाया जाता था। ठगी से कमाए गए पैसों को गिरोह के सदस्य आपस में बांट लेते थे। पुलिस ने इस मामले में विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी है, साथ ही गिरोह के अन्य सदस्यों और इसके नेटवर्क की तलाश भी जारी है। नेपाल दूतावास ने भी एक्स पर एक पोस्ट जारी कर कुशीनगर में नौकरी दिलाने के नाम पर ठगे गए 453 नेपाली नागरिकों को छुड़ाने और सुरक्षित नेपाल भेजने की जानकारी दी। नेपाल दूतावास ने इस कार्रवाई के लिए यूपी सरकार और यूपी पुलिस की सराहना करते हुए उन्हें धन्यवाद दिया। पुलिस अधीक्षक केशव कुमार ने भी इस सिंडिकेट के भंडाफोड़ की जानकारी दी है और फिलहाल गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ जारी है, जिससे कई अहम खुलासे होने की संभावना है।1
- शिक्षकों के सम्मान को लेकर एक बार फिर से बहस तेज हो गई है, जिसकी मुख्य वजह एक विवादित बयान है। इस बयान के बाद से सोशल मीडिया पर भारी बवाल मचा हुआ है और लोग इस मुद्दे पर अपनी राय रख रहे हैं। यह बहस इस सवाल पर केंद्रित है कि क्या शिक्षकों को ‘दो कौड़ी का’ कहना वास्तव में सही है। एक तरफ जहाँ इस विवादित टिप्पणी को लेकर हंगामा है, वहीं दूसरी तरफ लाखों छात्रों को शिक्षा देने वाले शिक्षकों के समर्थन में भी आवाज़ें उठ रही हैं। इस पूरे मामले पर लोगों से उनकी राय मांगी गई है कि क्या वे शिक्षकों के सम्मान के पक्ष में हैं और इस बयान के बारे में उनके विचार क्या हैं।1
- Post by Raviteja Rajbhar1
- बिहार के जल संसाधन विभाग पर आधारित एक विशेष गीत तैयार किया गया है। यह गीत राज्य के कुछ मुख्य बैराज अभियंताओं की जय-जयकार और उनके कार्यों का गुणगान करता है। इस गीत और संगीत को डी आनंद ने तैयार किया है, जबकि इसकी परिकल्पना संगीत आनंद द्वारा की गई है।1