नागरिक संघर्ष मोर्चा ने सहरसा स्टेडियम में पूर्व प्रस्तावित सिंथेटिक एथलेटिक्स ट्रैक, फुटबॉल और क्रिकेट मैदान के स्थान पर तीरंदाजी मैदान तथा अन्य खेल अवसंरचनाओं के निर्माण की योजना पर गहरी चिंता व्यक्त की है। मोर्चा ने जिला पदाधिकारी से इस निर्णय पर तत्काल पुनर्विचार करने की मांग की है। सहरसा के विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं के एक शिष्टमंडल ने नागरिक संघर्ष मोर्चा के बैनर तले इस संबंध में जिला पदाधिकारी को ज्ञापन सौंपा है। ज्ञापन में स्पष्ट किया गया है कि सहरसा और संपूर्ण कोशी प्रमंडल में एथलेटिक्स, फुटबॉल, हॉकी, क्रिकेट, कबड्डी, कराटे, कुश्ती, बैडमिंटन, टेबल टेनिस सहित विभिन्न खेलों का एक मजबूत आधार है, जहाँ सैकड़ों खिलाड़ी राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर चुके हैं। इसमें यह भी उल्लेख किया गया है कि जिला प्रशासन ने 1 अप्रैल 2026 को एथलेटिक्स बालिका एकलव्य प्रशिक्षण केंद्र की शुरुआत की थी, जहाँ वर्तमान में 30 बालिकाएं प्रशिक्षण प्राप्त कर रही हैं। साथ ही, 26 जनवरी 2026 को लगभग 40 राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ियों को सम्मानित भी किया गया था। ऐसी स्थिति में, एथलेटिक्स प्रशिक्षण केंद्र के सक्रिय संचालन के बावजूद एथलेटिक्स ट्रैक को समाप्त कर तीरंदाजी मैदान बनाने का निर्णय खेल के व्यापक हित में नहीं माना जा सकता। मोर्चा ने यह भी तर्क दिया है कि सहरसा और कोशी प्रमंडल में तीरंदाजी खेल का कोई व्यापक आधार या प्रशिक्षण व्यवस्था उपलब्ध नहीं है, जबकि एथलेटिक्स, फुटबॉल और क्रिकेट जैसे खेलों से जुड़े सैकड़ों खिलाड़ी वर्षों से बेहतर खेल मैदानों की लगातार मांग कर रहे हैं। स्टेडियम परिसर में चल रहे निर्माण कार्यों के कारण क्रिकेट, कबड्डी, वॉलीबॉल, हैंडबॉल और वुशू जैसे खेलों का नियमित अभ्यास बुरी तरह प्रभावित हुआ है, जिससे लगभग 300 खिलाड़ी अभ्यास के लिए पर्याप्त स्थान न मिलने से परेशान हैं। आवेदन में यह भी बताया गया है कि सहरसा स्टेडियम परिसर में पहले से ही कारू खिरहर इंडोर स्टेडियम, खेल भवन, बैडमिंटन एवं टेबल टेनिस हॉल, कुश्ती-कबड्डी प्रशिक्षण स्थल, जिम तथा खेल पदाधिकारी कार्यालय जैसी सुविधाएँ मौजूद हैं। इन सुविधाओं के बावजूद, खुले खेल मैदानों के विकास की बजाय अन्य निर्माण कार्यों को प्राथमिकता देना खिलाड़ियों के हित के विरुद्ध है। नागरिक संघर्ष मोर्चा ने जिला प्रशासन से मांग की है कि सहरसा स्टेडियम में पूर्व प्रस्तावित सिंथेटिक एथलेटिक्स ट्रैक, फुटबॉल एवं क्रिकेट मैदान का निर्माण अविलंब कराया जाए। इसके अतिरिक्त, स्टेडियम के पूर्वी भाग को अतिक्रमण मुक्त कर खिलाड़ियों के अभ्यास हेतु उपलब्ध कराया जाए और किसी भी खेल अवसंरचना के निर्माण से पहले खिलाड़ियों, खेल संघों एवं खेल विशेषज्ञों से व्यापक परामर्श लिया जाए। मोर्चा ने आशा व्यक्त की है कि जिला प्रशासन खेल और खिलाड़ियों के व्यापक हित को ध्यान में रखते हुए आवश्यक कार्रवाई करेगा, ताकि सहरसा भविष्य में खेल के क्षेत्र में अपनी विशिष्ट पहचान को और मजबूत कर सके। शिष्टमंडल में मनीष कुमार, सागर सिंह नन्हे, वार्ड पार्षद प्रतिनिधि ताबिश मेहर, धीरज सम्राट, शंकर शशी और प्रिंस कुमार जैसे सदस्य शामिल थे।
नागरिक संघर्ष मोर्चा ने सहरसा स्टेडियम में पूर्व प्रस्तावित सिंथेटिक एथलेटिक्स ट्रैक, फुटबॉल और क्रिकेट मैदान के स्थान पर तीरंदाजी मैदान तथा अन्य खेल अवसंरचनाओं के निर्माण की योजना पर गहरी चिंता व्यक्त की है। मोर्चा ने जिला पदाधिकारी से इस निर्णय पर तत्काल पुनर्विचार करने की मांग की है। सहरसा के विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं के एक शिष्टमंडल ने नागरिक संघर्ष मोर्चा के बैनर तले इस संबंध में जिला पदाधिकारी को ज्ञापन सौंपा है। ज्ञापन में स्पष्ट किया गया है कि सहरसा और संपूर्ण कोशी प्रमंडल में एथलेटिक्स, फुटबॉल, हॉकी, क्रिकेट, कबड्डी, कराटे, कुश्ती, बैडमिंटन, टेबल टेनिस सहित विभिन्न खेलों का एक मजबूत आधार है, जहाँ सैकड़ों खिलाड़ी राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर चुके हैं। इसमें यह भी उल्लेख किया गया है कि जिला प्रशासन ने 1 अप्रैल 2026 को एथलेटिक्स बालिका एकलव्य प्रशिक्षण केंद्र की शुरुआत की थी, जहाँ वर्तमान में 30 बालिकाएं प्रशिक्षण प्राप्त कर रही हैं। साथ ही, 26 जनवरी 2026 को लगभग 40 राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ियों को सम्मानित भी किया गया था। ऐसी स्थिति में, एथलेटिक्स प्रशिक्षण केंद्र के सक्रिय संचालन के बावजूद एथलेटिक्स ट्रैक को समाप्त कर तीरंदाजी मैदान बनाने का निर्णय खेल के व्यापक हित में नहीं माना जा सकता। मोर्चा ने यह भी तर्क दिया है कि सहरसा और कोशी प्रमंडल में तीरंदाजी खेल का कोई व्यापक आधार या प्रशिक्षण व्यवस्था उपलब्ध नहीं है, जबकि एथलेटिक्स, फुटबॉल और क्रिकेट जैसे खेलों से जुड़े सैकड़ों खिलाड़ी वर्षों से बेहतर खेल मैदानों की लगातार मांग कर रहे हैं। स्टेडियम परिसर में चल रहे निर्माण कार्यों के कारण क्रिकेट, कबड्डी, वॉलीबॉल, हैंडबॉल और वुशू जैसे खेलों का नियमित अभ्यास बुरी तरह प्रभावित हुआ है, जिससे लगभग 300 खिलाड़ी अभ्यास के लिए पर्याप्त स्थान न मिलने से परेशान हैं। आवेदन में यह भी बताया गया है कि सहरसा स्टेडियम परिसर में पहले से ही कारू खिरहर इंडोर स्टेडियम, खेल भवन, बैडमिंटन एवं टेबल टेनिस हॉल, कुश्ती-कबड्डी प्रशिक्षण स्थल, जिम तथा खेल पदाधिकारी कार्यालय जैसी सुविधाएँ मौजूद हैं। इन सुविधाओं के बावजूद, खुले खेल मैदानों के विकास की बजाय अन्य निर्माण कार्यों को प्राथमिकता देना खिलाड़ियों के हित के विरुद्ध है। नागरिक संघर्ष मोर्चा ने जिला प्रशासन से मांग की है कि सहरसा स्टेडियम में पूर्व प्रस्तावित सिंथेटिक एथलेटिक्स ट्रैक, फुटबॉल एवं क्रिकेट मैदान का निर्माण अविलंब कराया जाए। इसके अतिरिक्त, स्टेडियम के पूर्वी भाग को अतिक्रमण मुक्त कर खिलाड़ियों के अभ्यास हेतु उपलब्ध कराया जाए और किसी भी खेल अवसंरचना के निर्माण से पहले खिलाड़ियों, खेल संघों एवं खेल विशेषज्ञों से व्यापक परामर्श लिया जाए। मोर्चा ने आशा व्यक्त की है कि जिला प्रशासन खेल और खिलाड़ियों के व्यापक हित को ध्यान में रखते हुए आवश्यक कार्रवाई करेगा, ताकि सहरसा भविष्य में खेल के क्षेत्र में अपनी विशिष्ट पहचान को और मजबूत कर सके। शिष्टमंडल में मनीष कुमार, सागर सिंह नन्हे, वार्ड पार्षद प्रतिनिधि ताबिश मेहर, धीरज सम्राट, शंकर शशी और प्रिंस कुमार जैसे सदस्य शामिल थे।
- नागरिक संघर्ष मोर्चा ने सहरसा स्टेडियम में पूर्व प्रस्तावित सिंथेटिक एथलेटिक्स ट्रैक, फुटबॉल और क्रिकेट मैदान के स्थान पर तीरंदाजी मैदान तथा अन्य खेल अवसंरचनाओं के निर्माण की योजना पर गहरी चिंता व्यक्त की है। मोर्चा ने जिला पदाधिकारी से इस निर्णय पर तत्काल पुनर्विचार करने की मांग की है। सहरसा के विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं के एक शिष्टमंडल ने नागरिक संघर्ष मोर्चा के बैनर तले इस संबंध में जिला पदाधिकारी को ज्ञापन सौंपा है। ज्ञापन में स्पष्ट किया गया है कि सहरसा और संपूर्ण कोशी प्रमंडल में एथलेटिक्स, फुटबॉल, हॉकी, क्रिकेट, कबड्डी, कराटे, कुश्ती, बैडमिंटन, टेबल टेनिस सहित विभिन्न खेलों का एक मजबूत आधार है, जहाँ सैकड़ों खिलाड़ी राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर चुके हैं। इसमें यह भी उल्लेख किया गया है कि जिला प्रशासन ने 1 अप्रैल 2026 को एथलेटिक्स बालिका एकलव्य प्रशिक्षण केंद्र की शुरुआत की थी, जहाँ वर्तमान में 30 बालिकाएं प्रशिक्षण प्राप्त कर रही हैं। साथ ही, 26 जनवरी 2026 को लगभग 40 राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ियों को सम्मानित भी किया गया था। ऐसी स्थिति में, एथलेटिक्स प्रशिक्षण केंद्र के सक्रिय संचालन के बावजूद एथलेटिक्स ट्रैक को समाप्त कर तीरंदाजी मैदान बनाने का निर्णय खेल के व्यापक हित में नहीं माना जा सकता। मोर्चा ने यह भी तर्क दिया है कि सहरसा और कोशी प्रमंडल में तीरंदाजी खेल का कोई व्यापक आधार या प्रशिक्षण व्यवस्था उपलब्ध नहीं है, जबकि एथलेटिक्स, फुटबॉल और क्रिकेट जैसे खेलों से जुड़े सैकड़ों खिलाड़ी वर्षों से बेहतर खेल मैदानों की लगातार मांग कर रहे हैं। स्टेडियम परिसर में चल रहे निर्माण कार्यों के कारण क्रिकेट, कबड्डी, वॉलीबॉल, हैंडबॉल और वुशू जैसे खेलों का नियमित अभ्यास बुरी तरह प्रभावित हुआ है, जिससे लगभग 300 खिलाड़ी अभ्यास के लिए पर्याप्त स्थान न मिलने से परेशान हैं। आवेदन में यह भी बताया गया है कि सहरसा स्टेडियम परिसर में पहले से ही कारू खिरहर इंडोर स्टेडियम, खेल भवन, बैडमिंटन एवं टेबल टेनिस हॉल, कुश्ती-कबड्डी प्रशिक्षण स्थल, जिम तथा खेल पदाधिकारी कार्यालय जैसी सुविधाएँ मौजूद हैं। इन सुविधाओं के बावजूद, खुले खेल मैदानों के विकास की बजाय अन्य निर्माण कार्यों को प्राथमिकता देना खिलाड़ियों के हित के विरुद्ध है। नागरिक संघर्ष मोर्चा ने जिला प्रशासन से मांग की है कि सहरसा स्टेडियम में पूर्व प्रस्तावित सिंथेटिक एथलेटिक्स ट्रैक, फुटबॉल एवं क्रिकेट मैदान का निर्माण अविलंब कराया जाए। इसके अतिरिक्त, स्टेडियम के पूर्वी भाग को अतिक्रमण मुक्त कर खिलाड़ियों के अभ्यास हेतु उपलब्ध कराया जाए और किसी भी खेल अवसंरचना के निर्माण से पहले खिलाड़ियों, खेल संघों एवं खेल विशेषज्ञों से व्यापक परामर्श लिया जाए। मोर्चा ने आशा व्यक्त की है कि जिला प्रशासन खेल और खिलाड़ियों के व्यापक हित को ध्यान में रखते हुए आवश्यक कार्रवाई करेगा, ताकि सहरसा भविष्य में खेल के क्षेत्र में अपनी विशिष्ट पहचान को और मजबूत कर सके। शिष्टमंडल में मनीष कुमार, सागर सिंह नन्हे, वार्ड पार्षद प्रतिनिधि ताबिश मेहर, धीरज सम्राट, शंकर शशी और प्रिंस कुमार जैसे सदस्य शामिल थे।1
- कनाडिया थाना और गवैया के बीच एक सड़क की खराब स्थिति को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की गई है, जहाँ सुबह से लेकर लगभग 10 बजे तक बड़ी संख्या में बाइकें गुजरती हैं। हालांकि सड़क की स्थिति पूरी तरह से जर्जर नहीं बताई गई है, लेकिन जिस खास जगह पर यह खराब है, वहां यह बिल्कुल भी स्वीकार्य नहीं है। इस खराब सड़क के कारण बाइक सवारों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है, खासकर उन लोगों को जिनकी बाइक की हेडलाइट अच्छी नहीं होती, जिससे दुर्घटना का खतरा बढ़ जाता है। बेलवारा पंचायत के निवासी अखिलेश कुमार ने इस सड़क की तत्काल मरम्मत की मांग की है। उन्होंने जोर दिया कि सड़क को तुरंत ठीक किया जाना बेहद जरूरी है। इसके साथ ही उन्होंने इस मामले में जवाबदेह इंजीनियरों पर कार्रवाई करने और उन पर दबाव डालने की भी मांग की है, जो सड़क की मरम्मत की निगरानी के लिए जिम्मेदार हैं।1
- सहरसा पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए ₹10 हजार के इनामी अपराधी को गिरफ्तार कर लिया है।1
- सहरसा जिले के सौर बाजार प्रखंड क्षेत्र की अजगेबा पंचायत के गाढ़ी या गाँव में नाला निर्माण के नाम पर केवल खानापूर्ति की गई है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, गाँव में नाला बनाने का कार्य केवल औपचारिकता बनकर रह गया है, जिससे इसका उद्देश्य पूरा नहीं हो पा रहा है।1
- Post by Vijaykumar1
- समस्तीपुर जिले के हसनपुर प्रखंड स्थित प्राथमिक विद्यालय शोभैपुरा में शनिवार को जगन्नाथपुर गांव निवासी पूर्व प्रभारी प्रधानाध्यापक सह शिक्षक गुलाब चंद्र राय को उनकी सेवानिवृत्ति के उपरांत एक विदाई सह सम्मान समारोह आयोजित किया गया। इस समारोह की अध्यक्षता शिक्षक संघ के नेता माखन झा ने की, जबकि मंच संचालन प्रसिद्ध शिक्षक बैद्यनाथ रजक द्वारा किया गया। कार्यक्रम के दौरान, सेवानिवृत्त शिक्षक गुलाब चंद्र राय को चादर, पाग, माला, डायरी और कलम भेंट कर सम्मानित किया गया। उपस्थित सभी शिक्षकगण, स्थानीय गणमान्य जनप्रतिनिधियों और शोभैपुरा ग्रामवासियों ने उनके मिलनसार स्वभाव और मृदुभाषी व्यक्तित्व को सदैव याद रखने की बात कही। गुलाब चंद्र राय ने भी विद्यालय परिवार एवं ग्रामवासियों से मिले अपार स्नेह के प्रति अपना आभार व्यक्त किया और इसे हमेशा याद रखने की बात दोहराई। इस अवसर पर विद्यालय की छात्राओं ने सेवानिवृत्त शिक्षक के सम्मान में भावनात्मक गीत भी प्रस्तुत किए। बताया गया कि गुलाब चंद्र राय ने पूर्व प्रभारी प्रधानाध्यापक रहते हुए अपनी प्रशासनिक कुशलता एवं प्रबंधन के दम पर उक्त विद्यालय का बेहतर तरीके से संचालन किया, और वर्ष 2006 से एक शिक्षक के रूप में अपने सेवाकाल में उन्होंने छात्र-छात्राओं के बीच अपनी एक अलग पहचान बनाई थी। लोगों ने उनके संपूर्ण सेवाकाल के दौरान अर्जित प्रतिष्ठा को अन्य शिक्षकों के लिए काफी अनुकरणीय बताया। इस मौके पर बड़गांव पंचायत के पंस प्रतिनिधि गौरीशंकर यादव, पैक्स अध्यक्ष सह पूर्व मुखिया भिखरंजन यादव, शिक्षक संघ नेता माखन झा, गंगा प्रसाद सिंह, शंभू प्रसाद, प्रधानाध्यापक शंभूनाथ, राजकिशोर कौशल, बिजली पंडित, अवधेश कुमार, प्रफुल्लचंद्र राय, नवलकिशोर यादव, सेवानिवृत शिक्षक रूपचंद बैठा, गीता प्रसाद, प्रधान शिक्षक दीपनारायण रजक, अनिल कुमार यादव, रामकुमार यादव, प्रधान शिक्षिका नाजिया अंजुम, शिक्षक भवेश्वर कुमार, सुशील कुमार सिंह, सुशांत यादव, संतोष कुमार, रामाश्रय पोद्दार, मायाराम मोची, मोहम्मद दिलनवाज आलम, शिक्षिका रिंकू भूषण, सुप्रिया कुमारी, गुलाफ्शा, ग्रामीण मिथलेश यादव, रामदयाल यादव, विरंची यादव, हिरेंद्र यादव, मोहन शर्मा, साकेत कुमार, शंकर यादव सहित स्थानीय गणमान्य ग्रामीण और विद्यालय के छात्र-छात्राएं बड़ी संख्या में उपस्थित थे।1
- मधेपुरा के बनचोल्हा मोरकाही के वार्ड नंबर 12 में सड़क निर्माण के संबंध में एक शिकायत की अपील की गई है।1
- आम लोगों को जहाँ भीषण गर्मी से कुछ राहत मिली है, वहीं दूसरी ओर मक्का की फसल को भारी क्षति होने की आशंका जताई जा रही है।1