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Pramod Kumar Goswami. 13/03/2026
Pramod Kumar Goswami
Pramod Kumar Goswami. 13/03/2026
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- जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव जी सर्व प्रथम धरती अयोध्या रायगंज में हुआ । भगवान ऋषभदेव जन्म जयंती का समारोह जैन मंदिर रायगंज में भगवान ऋषभ की शोभा रथ यात्रा निकालकर विभिन्न प्रांतो से आए हुए उनके अनुयाई 30 फीट लंबी मूर्ति पंचामृतम् जलाभिषेक कर संगीत भजन धर्मशास्त्र अनुवाइयों ने अपने-अपने विचार व्यक्त किया उक्त कार्यक्रम के अंत में एक विशाल भंडारे का आयोजन किया गया3
- इराक और ईरान के बीच तनाव के कारण इसका असर अब भारत में भी देखने को मिलने लगा है घरेलू गैस को लेकर एजेंसीयो के बाहर लंबी लाइन1
- अयोध्या जिले में अयोध्या वाराणसी रेलखंड के गोसाईगंज रेलवे प्लेटफार्म नंबर पर बढ़ रही गर्मी के बीच यात्रियों को पीने के पानी की व्यवस्था का दिखा हाल बेहाल है पीने के पानी की टोटी जाली के अंदर लगी दिख रही है।1
- Post by A news 881
- यूपी- समाजवादी पार्टी के मेहनती कार्यकर्ता पूरी तरह एक्टिव हैं योगी सरकार को बदनाम करने के लिए यूपी के हापुड़ में सपा नेता "अब्दुल रेहान" के घर से 55 भरे और कई खाली सिलेंडर हुए बरामद हुए हैं। अगर आपके आसपास भी कोई गैस की कालाबाजारी कर रहा है तो उसकी गुप्त सूचना आप अपने नजदीकी थाने में या ऑनलाइन ट्विटर पर यूपी पुलिस को टैग कर सकते हैं,तत्काल ही सख्त कार्रवाई होगी। रमजान में भी काला बाजारी1
- Post by Dushyant Kumar Journalist1
- विशेष रिपोर्ट: अजीत मिश्रा (खोजी) बस्ती। उत्तर प्रदेश के बस्ती मंडल में निजी अस्पतालों की मनमानी और स्वास्थ्य विभाग की रहस्यमयी चुप्पी मासूम जिंदगियों पर भारी पड़ रही है। ताजा मामला शहर के महिला अस्पताल के ठीक सामने स्थित 'आइडियल मल्टी स्पेशलिटी एवं मेटरनिटी हॉस्पिटल' का है, जहां शुक्रवार, 13 मार्च 2026 की रात इलाज के नाम पर एक महिला की मौत हो गई। परिजनों का सीधा आरोप है कि डॉक्टरों की लापरवाही और समय पर इलाज न मिलना ही मौत का कारण बना। आधी रात को मचा कोहराम, सवालों के घेरे में सिस्टम रात के करीब 2:00 बजे जब पूरी दुनिया सो रही थी, तब आइडियल हॉस्पिटल में चीख-पुकार मची थी। परिजनों का कहना है कि उन्होंने मरीज को भरोसे के साथ भर्ती कराया था, लेकिन वहां डॉक्टरों की संवेदनहीनता ने उनकी दुनिया उजाड़ दी। घटना के बाद अस्पताल में हड़कंप मच गया और प्रबंधन पल्ला झाड़ने में जुट गया। सवाल यह है कि आखिर कब तक बस्ती की जनता इन 'कसाईखानों' में अपनी जान गंवाती रहेगी? फाइलों में दब रही हैं कार्रवाई की गूंज बस्ती मंडल में यह कोई पहली घटना नहीं है। यह सिलसिला पुराना है और इसके पीछे एक ही पैटर्न नजर आता है— मौत, हंगामा, जांच का आश्वासन और फिर 'ठंडा बस्ता'। मरियम हॉस्पिटल: हाल ही में यहां भी एक महिला की मौत हुई, भारी हंगामा हुआ, लेकिन नतीजा सिफर रहा। सिद्धार्थनगर: कुछ दिन पहले ही एक निजी अस्पताल में लापरवाही ने जान ली। इटवा (डॉ. अकलीमा खातून): करीब 10 महीने पहले जच्चा-बच्चा की मौत हुई। आरोप लगा कि अस्पताल बिना वैध रजिस्ट्रेशन के चल रहा था, लेकिन सिस्टम की मेहरबानी देखिए, मामला रफा-दफा हो गया। "क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है? या फिर इन अवैध संचालकों को मिलने वाला सफेदपोश संरक्षण इतना मजबूत है कि अफसरों की कलम वहां जाकर रुक जाती है?" डिग्री पर सवाल, कागजों का खेल स्थानीय लोगों का आरोप है कि शहर में दर्जनों ऐसे क्लीनिक और अस्पताल हैं जो केवल कागजी औपचारिकताओं के सहारे चल रहे हैं। डॉक्टरों की डिग्री से लेकर चिकित्सा मानकों तक, हर स्तर पर खेल हो रहा है। पैसे के दम पर एनओसी (NOC) ली जाती है और फिर शुरू होता है मौत का व्यापार। जो लोग इन अवैध कारोबारियों को संरक्षण देते हैं, उन्हें शायद यह एहसास तब होगा जब उनके अपने परिवार का कोई सदस्य इस अव्यवस्था की भेंट चढ़ेगा। कमिश्नर साहब, अब तो जागिए! आम जनमानस ने अब सीधे बस्ती कमिश्नर और अपर स्वास्थ्य निदेशक (AD Health) से गुहार लगाई है। जनता पूछ रही है कि आखिर निगरानी समितियां क्या कर रही हैं? क्या स्वास्थ्य विभाग का काम सिर्फ कागजी घोड़े दौड़ाना है या धरातल पर उतरकर इन मौत के सौदागरों पर कार्रवाई करना भी? अगर समय रहते इन फर्जी और लापरवाह अस्पतालों पर ताला नहीं जड़ा गया, तो बस्ती की सड़कों पर ऐसे ही लाशें बिछती रहेंगी और जिम्मेदार अपनी फाइलों को धूल से बचाते रहेंगे। निष्कर्ष: सख्त कार्रवाई की दरकार सरकार को बदनाम करने और जनता की जान से खिलवाड़ करने वाले इन तत्वों के खिलाफ 'बुलडोजर' वाली कार्रवाई की जरूरत है। क्या प्रशासन में इतना साहस है कि वह इन रसूखदारों के अस्पतालों की गहन जांच कर उन्हें सील कर सके?3
- Post by A news 881
- Post by UP 42 Ayodhya Live1