बाराबंकी के झांसा गांव में शनिवार दोपहर उस समय माहौल और गमगीन हो गया, जब पोस्टमार्टम के बाद एक ही परिवार के चार सदस्यों के शव गांव पहुंचे। शवों के घर पहुंचते ही परिजनों की चीख-पुकार मच गई और पूरे गांव में मातम छा गया। इस हृदयविदारक दृश्य ने वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम कर दीं। कुछ देर बाद, जब परिजन और ग्रामीण अंतिम संस्कार के लिए चारों शवों को श्मशान घाट ले जा रहे थे, तभी मृतकों के परिजनों और ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। उन्होंने डंफर चालक के खिलाफ कठोर कार्रवाई करने और गंभीर रूप से घायल पत्नी आरती को उचित मुआवजा दिलाने की मांग को लेकर फतेहपुर-महमूदाबाद मार्ग पर शव रखकर जाम लगाने का प्रयास किया। अचानक सड़क पर शव रखे जाने से कुछ देर के लिए आवागमन बाधित हो गया और सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। सूचना मिलते ही उपजिलाधिकारी कार्तिकेय सिंह, क्षेत्राधिकारी जगतराम कनौजिया और तहसीलदार वैशाली अहलावत सहित प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने परिजनों से बातचीत कर उन्हें शांत कराया और पीड़ित परिवार को हर संभव सरकारी सहायता तथा मामले में निष्पक्ष कार्रवाई का आश्वासन दिया। काफी समझाने-बुझाने के बाद परिजन मान गए और शवों को सड़क से हटाकर श्मशान घाट ले जाया गया। गौरतलब है कि यह हादसा बीती रात हुआ था, जब बार-बार हो रही बिजली कटौती के कारण नीरज अपने परिवार के साथ घर के बाहर सो रहा था। इसी दौरान एक तेज रफ्तार डंफर अनियंत्रित होकर परिवार को कुचलता हुआ निकल गया। इस भीषण हादसे में नीरज, उनके बेटे अनुराग और बेटियों अंशिका व आंशू की मौत हो गई, जबकि उनकी पत्नी आरती गंभीर रूप से घायल हैं और लखनऊ के एक निजी अस्पताल में भर्ती हैं।
बाराबंकी के झांसा गांव में शनिवार दोपहर उस समय माहौल और गमगीन हो गया, जब पोस्टमार्टम के बाद एक ही परिवार के चार सदस्यों के शव गांव पहुंचे। शवों के घर पहुंचते ही परिजनों की चीख-पुकार मच गई और पूरे गांव में मातम छा गया। इस हृदयविदारक दृश्य ने वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम कर दीं। कुछ देर बाद, जब परिजन और ग्रामीण अंतिम संस्कार के लिए चारों शवों को श्मशान घाट ले जा रहे थे, तभी मृतकों के परिजनों और ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। उन्होंने डंफर चालक के खिलाफ कठोर कार्रवाई करने और गंभीर रूप से घायल पत्नी आरती को उचित मुआवजा दिलाने की मांग को लेकर फतेहपुर-महमूदाबाद मार्ग पर शव रखकर जाम लगाने का प्रयास किया। अचानक सड़क पर शव रखे जाने से कुछ देर के लिए आवागमन बाधित हो गया और सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। सूचना मिलते ही उपजिलाधिकारी कार्तिकेय सिंह, क्षेत्राधिकारी जगतराम कनौजिया और तहसीलदार वैशाली अहलावत सहित प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने परिजनों से बातचीत कर उन्हें शांत कराया और पीड़ित परिवार को हर संभव सरकारी सहायता तथा मामले में निष्पक्ष कार्रवाई का आश्वासन दिया। काफी समझाने-बुझाने के बाद परिजन मान गए और शवों को सड़क से हटाकर श्मशान घाट ले जाया गया। गौरतलब है कि यह हादसा बीती रात हुआ था, जब बार-बार हो रही बिजली कटौती के कारण नीरज अपने परिवार के साथ घर के बाहर सो रहा था। इसी दौरान एक तेज रफ्तार डंफर अनियंत्रित होकर परिवार को कुचलता हुआ निकल गया। इस भीषण हादसे में नीरज, उनके बेटे अनुराग और बेटियों अंशिका व आंशू की मौत हो गई, जबकि उनकी पत्नी आरती गंभीर रूप से घायल हैं और लखनऊ के एक निजी अस्पताल में भर्ती हैं।
- बाराबंकी के झांसा गांव में शनिवार दोपहर उस समय माहौल और गमगीन हो गया, जब पोस्टमार्टम के बाद एक ही परिवार के चार सदस्यों के शव गांव पहुंचे। शवों के घर पहुंचते ही परिजनों की चीख-पुकार मच गई और पूरे गांव में मातम छा गया। इस हृदयविदारक दृश्य ने वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम कर दीं। कुछ देर बाद, जब परिजन और ग्रामीण अंतिम संस्कार के लिए चारों शवों को श्मशान घाट ले जा रहे थे, तभी मृतकों के परिजनों और ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। उन्होंने डंफर चालक के खिलाफ कठोर कार्रवाई करने और गंभीर रूप से घायल पत्नी आरती को उचित मुआवजा दिलाने की मांग को लेकर फतेहपुर-महमूदाबाद मार्ग पर शव रखकर जाम लगाने का प्रयास किया। अचानक सड़क पर शव रखे जाने से कुछ देर के लिए आवागमन बाधित हो गया और सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। सूचना मिलते ही उपजिलाधिकारी कार्तिकेय सिंह, क्षेत्राधिकारी जगतराम कनौजिया और तहसीलदार वैशाली अहलावत सहित प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने परिजनों से बातचीत कर उन्हें शांत कराया और पीड़ित परिवार को हर संभव सरकारी सहायता तथा मामले में निष्पक्ष कार्रवाई का आश्वासन दिया। काफी समझाने-बुझाने के बाद परिजन मान गए और शवों को सड़क से हटाकर श्मशान घाट ले जाया गया। गौरतलब है कि यह हादसा बीती रात हुआ था, जब बार-बार हो रही बिजली कटौती के कारण नीरज अपने परिवार के साथ घर के बाहर सो रहा था। इसी दौरान एक तेज रफ्तार डंफर अनियंत्रित होकर परिवार को कुचलता हुआ निकल गया। इस भीषण हादसे में नीरज, उनके बेटे अनुराग और बेटियों अंशिका व आंशू की मौत हो गई, जबकि उनकी पत्नी आरती गंभीर रूप से घायल हैं और लखनऊ के एक निजी अस्पताल में भर्ती हैं।1
- उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले में एक भीषण हादसे में घर के बाहर सो रहे एक परिवार को तेज रफ्तार डंपर ने कुचल दिया। इस दर्दनाक घटना में पिता और उनके तीन बच्चों की मौके पर ही मौत हो गई।1
- फतेहपुर तहसील के दौलतपुर गाँव में नालियों की बदहाल स्थिति से ग्रामीण परेशान हैं। लगातार शिकायत के बावजूद अभी तक कोई सुनवाई नहीं हुई है, जिससे गंदगी और बीमारियों का खतरा बढ़ गया है।1
- थाना सआदतगंज पुलिस से जुड़ा एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है, जहाँ न्याय की गुहार लगाने पहुँची एक पीड़ित महिला को पुलिस से मदद के बदले कथित तौर पर बर्बरता झेलनी पड़ी। महिला ने आरोप लगाया है कि जब वह सबूत दिखाने की कोशिश कर रही थी, तब उसके मोबाइल फोन जबरन छीनकर फॉर्मेट कर दिए गए। पीड़ित महिला के अनुसार, पहले उसे थाने के एक कमरे में बंद कर बर्बरता से मारपीट की गई। इसके बाद, उसके मोबाइल फोन फॉर्मेट कर दिए गए, जिससे उसके सभी पर्सनल डॉक्यूमेंट डिलीट हो गए। महिला ने इन गंभीर आरोपों के साथ उच्च अधिकारियों से दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।1
- सूरत स्टेशन के ठीक सामने स्थित जयपुर रेस्टोरेंट में रहने वाले लोगों ने सोशल मीडिया पर पाठकों से उन्हें फॉलो करने का आग्रह किया है।1
- उत्तर प्रदेश के आगरा में 'कॉकरोच जनता पार्टी' के नाम पर लोगों का एक अनोखा उत्साह देखने को मिला। इस कार्यक्रम के दौरान, पार्टी के समर्थकों ने जोर-शोर से 'कॉकरोच जनता पार्टी जिंदाबाद' के नारे लगाए। इस आयोजन में एक व्यक्ति कॉकरोच की वेशभूषा में भी नजर आया, वहीं समर्थक भगवान का आशीर्वाद लेने के लिए मंदिर भी पहुंचे। इस पूरे कार्यक्रम का वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।1
- बाराबंकी जिले में एक जमीन विवाद ने बवाल का रूप ले लिया है, जहाँ पीड़ितों पर ही पुलिस ने कार्रवाई की है। जानकारी के अनुसार, देवा क्षेत्र में मारपीट और धमकी की घटनाएँ सामने आई हैं, जिसके बाद यह स्थिति उत्पन्न हुई है। पुलिस द्वारा पीड़ित पक्ष पर ही की गई कार्रवाई पर गहरा असंतोष व्यक्त किया गया है।1
- छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर से इंसान की मजबूरी की एक मार्मिक तस्वीर सामने आई है, जहाँ एक बहू अपनी बुजुर्ग सास को पीठ पर बैठाकर बैंक ले जाती हुई दिखाई दी। इस प्रयास का मुख्य कारण यह था कि वृद्धा को अपनी पेंशन मिल सके। यह आवश्यक था क्योंकि बुजुर्ग महिला चलने-फिरने में असमर्थ हैं और बैंक में पेंशन के भुगतान के लिए उनकी स्वयं की उपस्थिति अनिवार्य थी। बताया गया है कि इस वृद्ध महिला को केवल ₹1500 की पेंशन मिलती है, जबकि परिवार की आर्थिक स्थिति भी बेहद कमजोर है। यह घटना मानवीय कठिनाइयों और संघर्षों की उस तस्वीर को दिखाती है जिसका सामना कई लोग अपनी बुनियादी ज़रूरतों को पूरा करने के लिए करते हैं।1