भागलपुर जिले के पीरपैंती प्रखंड स्थित सवैया गांव में प्रकृति कल्याण परिषद् ने पर्यावरण संरक्षण के लिए एक जन-जागरूकता सह वृक्षारोपण कार्यक्रम का आयोजन किया। यह कार्यक्रम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की योजना "एक पेड़ मां के नाम" अभियान के तहत संपन्न हुआ। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रकृति कल्याण परिषद् के राज्य निदेशक अमित सिंह ने बढ़ते प्रदूषण और सिकुड़ते हरित क्षेत्र को रोकने के लिए हर नागरिक को कम से कम एक पौधा लगाने का आह्वान किया। जिला वन अधिकारी ने भी वृक्षारोपण को आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य की नींव बताया। वक्ताओं ने प्रधानमंत्री के प्रकृति संरक्षण अभियान की सराहना करते हुए ग्रामीणों से इस अभियान से जुड़ने की अपील की। स्कूली बच्चों ने "पेड़ लगाओ, जीवन बचाओ" और "एक पेड़ मां के नाम, प्रकृति को दें नया मुकाम" जैसे नारों के साथ एक जागरूकता रैली निकाली, जिसमें हाथों में तख्तियां और बैनर लिए बच्चों ने ग्रामीणों को पर्यावरण के प्रति सजग किया। कार्यक्रम के समापन पर किसान नवल सिंह की भूमि पर एक हजार फलदार एवं छायादार पौधे लगाए गए। साथ ही, आसपास के क्षेत्र में भी वृक्षारोपण कर उपस्थित लोगों को पर्यावरण संरक्षण का संकल्प दिलाया गया। इस अवसर पर शाषिकेश पाण्डेय, किसान नवल सिंह, अनूप गुप्ता, चंदन सिंह, प्रधानाध्यापक सौरभ कुमार सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।
भागलपुर जिले के पीरपैंती प्रखंड स्थित सवैया गांव में प्रकृति कल्याण परिषद् ने पर्यावरण संरक्षण के लिए एक जन-जागरूकता सह वृक्षारोपण कार्यक्रम का आयोजन किया। यह कार्यक्रम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की योजना "एक पेड़ मां के नाम" अभियान के तहत संपन्न हुआ। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रकृति कल्याण परिषद् के राज्य निदेशक अमित सिंह ने बढ़ते प्रदूषण और सिकुड़ते हरित क्षेत्र को रोकने के लिए हर नागरिक को कम से कम एक पौधा लगाने का आह्वान किया। जिला वन अधिकारी ने भी वृक्षारोपण को आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य की नींव बताया। वक्ताओं ने प्रधानमंत्री के प्रकृति संरक्षण अभियान की सराहना करते हुए ग्रामीणों से इस
अभियान से जुड़ने की अपील की। स्कूली बच्चों ने "पेड़ लगाओ, जीवन बचाओ" और "एक पेड़ मां के नाम, प्रकृति को दें नया मुकाम" जैसे नारों के साथ एक जागरूकता रैली निकाली, जिसमें हाथों में तख्तियां और बैनर लिए बच्चों ने ग्रामीणों को पर्यावरण के प्रति सजग किया। कार्यक्रम के समापन पर किसान नवल सिंह की भूमि पर एक हजार फलदार एवं छायादार पौधे लगाए गए। साथ ही, आसपास के क्षेत्र में भी वृक्षारोपण कर उपस्थित लोगों को पर्यावरण संरक्षण का संकल्प दिलाया गया। इस अवसर पर शाषिकेश पाण्डेय, किसान नवल सिंह, अनूप गुप्ता, चंदन सिंह, प्रधानाध्यापक सौरभ कुमार सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।
- मथुरापुर और प्यालापुर क्षेत्रों में सड़कें पूरी तरह से बारिश के पानी से भर गई हैं। यह स्थिति कल शाम लगभग 5:30 बजे आई जोरदार बारिश और आंधी-तूफान के कारण उत्पन्न हुई, जिसमें गरज के साथ पानी बरसा। लोगों और बच्चों को आंधी-तूफान और बारिश के दौरान विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है, साथ ही यह भी अपील की गई है कि बारिश होने पर घर से बाहर न निकलें।1
- राजस्थान के चूरू जिले में एक रेत का बवंडर देखा गया। यह जानकारी मगही शेर अभिषेक रंजन नामक हैंडल से साझा की गई है।1
- झारखंड के बड़ा तालबोना गाँव से एक घटना सामने आई है जहाँ एक गाय ने लात मारकर सारा दूध गिरा दिया। इस घटना के बाद, लोगों से सतर्क और सावधान रहने की अपील की जा रही है।1
- लोगों ने सरकार से अत्यंत भावुक निवेदन किया है कि उन्हें 'जाने आने की रस्म' प्रदान की जाए। यह मार्मिक अपील इसलिए की गई है क्योंकि उन्हें 'जाने आने' के लिए अनुमति नहीं दी जा रही है।2
- राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने पाकुड़ में बड़ा बयान देते हुए कहा है कि बांग्लादेशी घुसपैठ के कारण देश की राष्ट्रीय सुरक्षा और संस्कृति को गंभीर खतरा उत्पन्न हो गया है। उन्होंने जनसांख्यिकीय परिवर्तन की वास्तविकता जानने के लिए केंद्र सरकार द्वारा एक उच्च-स्तरीय समिति के गठन के फैसले को ऐतिहासिक बताया। मरांडी के अनुसार, यह कदम न केवल जनसांख्यिकीय परिवर्तन की हकीकत को उजागर करेगा, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा और संस्कृति को बचाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। पाकुड़ में आयोजित दो दिवसीय पंडित दीनदयाल उपाध्याय प्रशिक्षण अभियान के समापन सत्र में भाग लेते हुए बाबूलाल मरांडी ने आरोप लगाया कि जनसांख्यिकीय परिवर्तन की वजह से संथाल परगना प्रमंडल और झारखंड के कई जिलों में आदिवासियों की आबादी में भारी कमी आई है, जबकि मुस्लिम आबादी में अप्रत्याशित वृद्धि दर्ज की गई है। उन्होंने कहा कि बांग्लादेशी घुसपैठियों के कारण देश के कई हिस्सों, विशेष रूप से झारखंड और संथाल परगना में, आदिवासियों की संस्कृति, उनकी सुरक्षा और संपत्ति की रक्षा जैसे गंभीर मुद्दे खड़े हो गए हैं। मरांडी ने संथाल परगना प्रमंडल के आंकड़े देते हुए बताया कि 1951 में आदिवासियों की जो आबादी थी, वह जनसांख्यिकीय परिवर्तन के कारण घटकर आज 25 प्रतिशत रह गई है, जबकि मुसलमानों की आबादी इसी अवधि में 9 प्रतिशत से बढ़कर 22 प्रतिशत हो गई है। उन्होंने दृढ़ विश्वास व्यक्त किया कि केंद्र सरकार की यह उच्च-स्तरीय समिति मामले की गहनता से जांच करेगी और इसकी रिपोर्ट सौंपने के बाद बांग्लादेशी घुसपैठियों को निश्चित रूप से भागना पड़ेगा, जिससे आने वाले दिनों में आदिवासियों के जीवन में बदलाव आएगा। उन्होंने पश्चिम बंगाल में सुवेंदु अधिकारी के मुख्यमंत्री बनते ही बांग्लादेशी घुसपैठियों में भगदड़ मचने का भी जिक्र किया और कहा कि झारखंड में होने वाले एसआईआर (SIR) से भी इन घुसपैठियों की हकीकत सामने आएगी।1
- करोड़ों के एक्सप्रेसवे के व्यापक प्रचार और ढिंढोरे के बावजूद, यह सवाल उठाया गया है कि आखिर सरकारी बसों को चलाने के लिए भी जनता को क्यों धक्का लगाना पड़ रहा है।1
- ओडिशा के पुरी में एक घटना सामने आई है जहाँ अधिकारियों द्वारा एक ठेलेवाले को अवैध वेंडिंग के आरोप में हटाए जाने के बाद, स्थानीय लोगों ने उसकी खाजा मिठाइयों को लूट लिया।1