*राजनीति विश्लेषण,,,,* बेगानी शादी में अब्दुल्ला दीवाना : जब पत्रकारों के मंच पर ही पत्रकारिता कटघरे में खड़ी हो गई.... सूरजपुर,पत्रकार—वह शब्द, जिसे सुनते ही अच्छे-अच्छों की पेशानी पर बल आ जाता है। पत्रकार वही होता है जो सत्ता से सवाल करे, व्यवस्था को आईना दिखाए और गलत को गलत कहने का साहस रखे। लेकिन आज विडंबना यह है कि वही पत्रकार अपने ही मंच पर बोले गए एक वाक्य का अर्थ, कारण और पात्र खोजने में असहाय दिखाई दे रहा है। 👉 बीते दिनों सूरजपुर जिले के प्रतापपुर मुख्यालय में पत्रकार भवन के लोकार्पण का आयोजन किया गया। मंच सजा हुआ था, उद्देश्य बड़ा था और अतिथियों की सूची भी कम प्रभावशाली नहीं थी। क्षेत्रीय विधायक प्रतापपुर शकुंतला सिंह पोर्ते मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद थीं, कार्यक्रम की अध्यक्षता श्रमजीवी पत्रकार संघ के प्रदेश अध्यक्ष अरविंद अवस्थी ने की, विशिष्ट अतिथि के रूप में जिला अध्यक्ष मुकेश गर्ग उपस्थित रहे। 👉 इनके साथ जनपद पंचायत अध्यक्ष सुखमनीय अयाम, नगर पंचायत अध्यक्ष मानती योगेंद्र सिंह और श्रमजीवी पत्रकार संघ प्रतापपुर के अध्यक्ष कृष्ण मुरारी शुक्ला भी मंच पर विराजमान थे। जिले के हर कोने से पत्रकार इस आयोजन में शामिल हुए और अपना समय, सम्मान और सहभागिता दी। 👉 लेकिन जिस आयोजन को पत्रकारिता की एकजुटता और सम्मान का प्रतीक बनना था, वही आयोजन कुछ लोगों की संकीर्ण सोच और अहंकार की भेंट चढ़ गया। सम्मान समारोह के दौरान कई पत्रकारों को जानबूझकर नजरअंदाज किया गया। नाम मंच से पुकारे गए, लेकिन कई चेहरे चुपचाप बैठकर यह सोचते रहे कि जब उन्हें महत्व ही नहीं देना था तो बुलाया क्यों गया। क्या यह पत्रकार भवन का कार्यक्रम था या किसी व्यक्ति विशेष अथवा गुट विशेष का निजी आयोजन? यह सवाल उसी क्षण खड़ा हो गया। 👉 मामला यहीं नहीं रुका। भोजन व्यवस्था ने जैसे आग में घी डालने का काम किया। कई पत्रकारों ने आरोप लगाया कि उन्हें कीड़े वाला चावल परोसा गया। कुछ ने इसका विरोध किया, तो कुछ ने सामाजिक मजबूरी में मुंह छिपाकर वही भोजन ग्रहण किया। जानकारी यह भी सामने आई कि भोजन की व्यवस्था संबंधित विभाग द्वारा की जानी थी, लेकिन कुछ स्वयंभू सर्वशक्तिमान लोगों ने यह जिम्मेदारी अपने हाथ में ले ली, पैसे का इंतजाम किया और बदले में पत्रकारों के लिए घटिया स्तर का भोजन परोस दिया। सवाल यह है कि जब कार्यक्रम में विधायक जैसी गरिमामयी उपस्थिति थी, तो ऐसी अपमानजनक व्यवस्था किसके इशारे पर की गई और क्यों? 👉 इसी बीच सम्मान समारोह के दौरान खुले मंच से कुछ लोगों द्वारा एक व्यंग्यात्मक तंज उछाला गया—बेगानी शादी में अब्दुल्ला दीवाना। यही वह वाक्य था जिसने पूरे आयोजन की गरिमा को कटघरे में खड़ा कर दिया। सवाल उठता है कि आखिर वह अब्दुल्ला कौन था? क्या वह क्षेत्रीय विधायक थीं? क्या वह प्रदेश अध्यक्ष थे? क्या वह जिला अध्यक्ष, जनपद अध्यक्ष, नगर पंचायत अध्यक्ष या स्थानीय ग्रामीण थे? जब इस आयोजन में जनप्रतिनिधि, पत्रकार, सामाजिक कार्यकर्ता और स्थानीय नागरिक सभी आमंत्रित थे, तो फिर बेगानी शादऔर बिना बुलाया कौन था? 👉 सबसे हैरानी की बात यह है कि कार्यक्रम को दो दिन बीत जाने के बाद भी उन सर्वशक्तिमान लोगों ने इस पर कोई स्पष्टीकरण देना उचित नहीं समझा। आखिर किसकी मौजूदगी से वे असहज हो गए थे? किसके लिए मंच से ऐसा तंज कसा गया? और क्यों एक अच्छे, उद्देश्यपूर्ण आयोजन को बदनामी के मोड़ पर लाकर खड़ा कर दिया गया? 👉 पत्रकारिता सवाल पूछने का नाम है, चुप्पी साधने का नहीं। अगर सवाल अपने ही घर से उठ रहे हों, तो जवाब भी वहीं से आने चाहिए। वरना यह मान लिया जाएगा कि आज का पत्रकार दूसरों से तो सवाल पूछता है, लेकिन जब सवाल खुद पर आए, तो मौन धारण कर लेता है। जब तक यह स्पष्ट नहीं किया जाता कि बेगानी शादी में अब्दुल्ला दीवाना आखिर था कौन, तब तक यह सवाल उस आयोजन के माथे पर एक स्थायी दाग की तरह चिपका रहेगा और पत्रकारिता की आत्मा बार-बार यही पूछती रहेगी—क्या हम सच में सवाल पूछने का साहस अब भी रखते हैं....????
*राजनीति विश्लेषण,,,,* बेगानी शादी में अब्दुल्ला दीवाना : जब पत्रकारों के मंच पर ही पत्रकारिता कटघरे में खड़ी हो गई.... सूरजपुर,पत्रकार—वह शब्द, जिसे सुनते ही अच्छे-अच्छों की पेशानी पर बल आ जाता है। पत्रकार वही होता है जो सत्ता से सवाल करे, व्यवस्था को आईना दिखाए और गलत को गलत कहने का साहस रखे। लेकिन आज विडंबना यह है कि वही पत्रकार अपने ही मंच पर बोले गए एक वाक्य का अर्थ, कारण और पात्र खोजने में असहाय दिखाई दे रहा है। 👉 बीते दिनों सूरजपुर जिले के प्रतापपुर मुख्यालय में पत्रकार भवन के लोकार्पण का आयोजन किया गया। मंच सजा हुआ था, उद्देश्य बड़ा था और अतिथियों की सूची भी कम प्रभावशाली नहीं थी। क्षेत्रीय विधायक प्रतापपुर शकुंतला सिंह पोर्ते मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद थीं, कार्यक्रम की अध्यक्षता श्रमजीवी पत्रकार संघ के प्रदेश अध्यक्ष अरविंद अवस्थी ने की, विशिष्ट अतिथि के रूप में जिला अध्यक्ष मुकेश गर्ग उपस्थित रहे। 👉 इनके साथ जनपद पंचायत अध्यक्ष सुखमनीय अयाम, नगर पंचायत अध्यक्ष मानती योगेंद्र सिंह और श्रमजीवी पत्रकार संघ प्रतापपुर के अध्यक्ष कृष्ण मुरारी शुक्ला भी मंच पर विराजमान थे। जिले के हर कोने से पत्रकार इस आयोजन में शामिल हुए और अपना समय, सम्मान और सहभागिता दी। 👉 लेकिन जिस आयोजन को पत्रकारिता की एकजुटता और सम्मान का प्रतीक बनना था, वही आयोजन कुछ लोगों की संकीर्ण सोच और अहंकार की भेंट चढ़ गया। सम्मान समारोह के दौरान कई पत्रकारों को जानबूझकर नजरअंदाज किया गया। नाम मंच से पुकारे गए, लेकिन कई चेहरे चुपचाप बैठकर यह सोचते रहे कि जब उन्हें महत्व ही नहीं देना था तो बुलाया क्यों गया। क्या यह पत्रकार भवन का कार्यक्रम था या किसी व्यक्ति विशेष अथवा गुट विशेष का निजी आयोजन? यह सवाल उसी क्षण खड़ा हो गया। 👉 मामला यहीं नहीं रुका। भोजन व्यवस्था ने जैसे आग में घी डालने का काम किया। कई पत्रकारों ने आरोप लगाया कि उन्हें कीड़े वाला चावल परोसा गया। कुछ ने इसका विरोध किया, तो कुछ ने सामाजिक मजबूरी में मुंह छिपाकर वही भोजन ग्रहण किया। जानकारी यह भी सामने आई कि भोजन की व्यवस्था संबंधित विभाग द्वारा की जानी थी, लेकिन कुछ स्वयंभू सर्वशक्तिमान लोगों ने यह जिम्मेदारी अपने हाथ में ले ली, पैसे का इंतजाम किया और बदले में पत्रकारों के लिए घटिया स्तर का भोजन परोस दिया। सवाल यह है कि जब कार्यक्रम में विधायक जैसी गरिमामयी उपस्थिति थी, तो ऐसी अपमानजनक व्यवस्था किसके इशारे पर की गई और क्यों? 👉 इसी बीच सम्मान समारोह के दौरान खुले मंच से कुछ लोगों द्वारा एक व्यंग्यात्मक तंज उछाला गया—बेगानी शादी में अब्दुल्ला दीवाना। यही वह वाक्य था जिसने पूरे आयोजन की गरिमा को कटघरे में खड़ा कर दिया। सवाल उठता है कि आखिर वह अब्दुल्ला कौन था? क्या वह क्षेत्रीय विधायक थीं? क्या वह प्रदेश अध्यक्ष थे? क्या वह जिला अध्यक्ष, जनपद अध्यक्ष, नगर पंचायत अध्यक्ष या स्थानीय ग्रामीण थे? जब इस आयोजन में जनप्रतिनिधि, पत्रकार, सामाजिक कार्यकर्ता और स्थानीय नागरिक सभी आमंत्रित थे, तो फिर बेगानी शादऔर बिना बुलाया कौन था? 👉 सबसे हैरानी की बात यह है कि कार्यक्रम को दो दिन बीत जाने के बाद भी उन सर्वशक्तिमान लोगों ने इस पर कोई स्पष्टीकरण देना उचित नहीं समझा। आखिर किसकी मौजूदगी से वे असहज हो गए थे? किसके लिए मंच से ऐसा तंज कसा गया? और क्यों एक अच्छे, उद्देश्यपूर्ण आयोजन को बदनामी के मोड़ पर लाकर खड़ा कर दिया गया? 👉 पत्रकारिता सवाल पूछने का नाम है, चुप्पी साधने का नहीं। अगर सवाल अपने ही घर से उठ रहे हों, तो जवाब भी वहीं से आने चाहिए। वरना यह मान लिया जाएगा कि आज का पत्रकार दूसरों से तो सवाल पूछता है, लेकिन जब सवाल खुद पर आए, तो मौन धारण कर लेता है। जब तक यह स्पष्ट नहीं किया जाता कि बेगानी शादी में अब्दुल्ला दीवाना आखिर था कौन, तब तक यह सवाल उस आयोजन के माथे पर एक स्थायी दाग की तरह चिपका रहेगा और पत्रकारिता की आत्मा बार-बार यही पूछती रहेगी—क्या हम सच में सवाल पूछने का साहस अब भी रखते हैं....????
- Post by Shivnath bagheL1
- Post by Editor In Chief vivekanand Pandey Swaranjali News1
- सीतापुर के लाल बहादुर शास्त्री स्टेडियम में 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस बड़े धूमधाम से मनाया गया। कार्यक्रम में हजारों की संख्या में लोग उपस्थित रहे। मुख्य अतिथि के रूप में सीतापुर विधायक रामकुमार टोप्पो शामिल हुए। उन्होंने ध्वजारोहण कर भव्य परेड की सलामी ली तथा शांति के प्रतीक श्वेत कबूतर को आसमान में उड़ाया। इसके बाद विधायक ने जनता को संबोधित करते हुए क्षेत्र में चल रहे विकास कार्यों की जानकारी दी। कार्यक्रम का आयोजन एम.एल.ए. एजुकेशन कोर, सीतापुर द्वारा किया गया। अंत में सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए और उत्कृष्ट कार्य करने वाले लोगों व प्रतिभागियों को सम्मानित किया गया। विधायक रामकुमार टोप्पो ने नर्तक दलों के साथ नृत्य कर उपस्थित जनसमूह का उत्साह बढ़ाया।4
- Post by Vikram toppo1
- सीतापुर के लाल बहादुर शास्त्री स्टेडियम में बड़ी धूम धाम से मनाया गया गणतंत्र दिवस,मुख्य अतिथि के तौर पहुंचे सीतापुर विधायक रामकुमार टोप्पो,,, आज सीतापुर के लाल बहादुर शास्त्री स्टेडियम में बड़ी धूम धाम से गणतंत्र दिवस मनाया गया,, जिसमें हजारों की संख्या में लोग उपस्थित थे,, वहीं सीतापुर विधायक रामकुमार टोप्पो कार्यक्रम के मुख्य अतिथि थे, जहां सीतापुर विधायक ने ध्वजारोहण कर भव्य परेड की सलामी ली, इसके उपरांत शांति के प्रतीक स्वेत कबूतर को आसमान में उड़ाया , इसके उपरांत सीतापुर विधायक रामकुमार टोप्पो ने जनता को संबोधित किया जिसमें उन्होंने क्षेत्र में हो रहे विकास कार्यों के विषय में जानकारी दी,, गणतंत्र दिवस कार्यक्रम का आयोजन एम एल ए एजुकेशन कोर सीतापुर के द्वारा किया गया था, अंत में भव्य रूप से सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन हुआ,, इसके उपरांत सीतापुर विधायक जी ने क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले लोगों, एवं कार्यक्रम में पार्टिसिपेट करने वाले लोगों को पुरस्कृत किया,,,, वहीं सीतापुर विधायक लालबहादुर शास्त्री स्टेडियम में नर्तक दलों के साथ मिलकर इस अवसर पर मनमोहक नृत्य किया ,जिससे लोगों में भारी उत्साह देखने को मिला बाइट रामकुमार टोप्पो,विधायक सीतापुर विधानसभा क्षेत्र1
- सिंगरौली: जिले के झारा गांव में शनिवार को उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब एक महिला 200 फीट ऊंचे हाईटेंशन बिजली टॉवर पर चढ़ गई। महिला को टॉवर पर चढ़ा देख ग्रामीणों में हड़कंप मच गया और तत्काल पुलिस व प्रशासन को सूचना दी गई। सूचना मिलते ही सरई थाना पुलिस, प्रशासनिक अधिकारी और बिजली विभाग की टीम मौके पर पहुंची। किसी भी बड़े हादसे को टालने के लिए एनटीपीसी की 36 हजार केवी की हाईटेंशन लाइन बंद कराई गई, जिससे दिल्ली जाने वाली बिजली सप्लाई करीब तीन घंटे तक प्रभावित रही। पुलिस जांच में सामने आया है कि महिला का पति गुजरात में प्राइवेट नौकरी करता है। शनिवार दोपहर करीब 3 बजे महिला बिना पति को बताए झारा गांव का मेला देखने पहुंची थी। मेले में नाव झूला झूलने के लिए महिला ने पति को फोन कर 250 रुपए मांगे। इसी दौरान फोन पर विवाद हो गया। आरोप है कि पति ने गुस्से में महिला से दोबारा सामने न आने की बात कह दी, जिससे महिला आहत हो गई।1
- के द्वारा काफी बढ़िया संदेश के बारे में एक डांस किया आज एक प्रदर्शित हो गया अपने वह बोली छेत्री बोली से एक संदेश है इसमें लिखा है लेकिन आज डिजिटल प्रदर्शित होने के न थी इसको मैसेज कहा जाता है कुछ ऐसे होते कि घर कब आओगे कब जाओगे ऐसा उन्होंने काफी बढ़िया इसमें लिखने थे उनके लिए मैं सदआभारी हूं आज कोई मैसेज देख रहा था खाने का मौका नहीं मिलता है मुझे ऑफिस जाना है मुझे घर जाना है उनके लिए मैं डबल ताली लगेअब मैं1
- Post by Dhanpati Singh1