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मध्य प्रदेश में जनता को राशन मिलने की जगह सिर्फ आश्वासन दिया जा रहा है, वहीं पेंशन की जगह उन्हें केवल टेंशन मिल रही है।
Satyanarayan tiwari
मध्य प्रदेश में जनता को राशन मिलने की जगह सिर्फ आश्वासन दिया जा रहा है, वहीं पेंशन की जगह उन्हें केवल टेंशन मिल रही है।
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- राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत किशोर ka कशोर कार्यक्रम राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत किशोरी का शोर कार्यक्रम करवाया गया और इस कार्यक्रम में 10 19 साल तक के बच्चे उपस्थित हुए कार्यक्रम की विस्तृत चर्चा हुई और कुछ खेल गतिविधि करवाई गई आफ्टर ट्रेनर अंकित चौबे साथिया आकाश पटेल अंजलि पटेल ग्राम matwara4
- सतना जिले के मैहर अंतर्गत गोरैया गांव में पंचायत द्वारा डाली गई मोटर का बिल जमा न करने के कारण कनेक्शन काट दिया गया है। इस कनेक्शन के कट जाने की वजह से गांव के लोगों को बेहद गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। इस असुविधा से परेशान होकर ग्रामीणों ने इस गंभीर समस्या का जल्द से जल्द कोई हल निकालने की गुहार लगाई है।1
- मैहर के शासकीय पूर्व माध्यमिक विद्यालय, पकरिया में 'नशे से दूरी है ज़रूरी 2.0' अभियान के अंतर्गत थाना अमदरा पुलिस द्वारा एक जन जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम के दौरान बच्चों को विभिन्न मनोरंजक एवं सहभागितापूर्ण खेलों के माध्यम से नशे के दुष्परिणामों की जानकारी दी गई। खेल-खेल में विद्यार्थियों को समझाया गया कि नशा उनके स्वास्थ्य, शिक्षा और उज्ज्वल भविष्य के लिए हानिकारक है। इसके साथ ही, बच्चों को सदैव नशे से दूर रहकर एक सकारात्मक जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित किया गया।1
- मध्य प्रदेश के सतना जिले के मैहर अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत लोधोती में विकास कार्यों को लेकर सरपंच साहब के योगदान की जमकर सराहना की जा रही है। सरपंच साहब गाँव में बहुत ही बेहतरीन नाली निर्माण का कार्य करवा रहे हैं, जिसमें उनकी भूमिका बेहद सराहनीय है। उनके इस बेहतरीन कार्य को देखते हुए उन्हें मेडल दिए जाने की मांग उठाई गई है।1
- मध्य प्रदेश में जनता को राशन मिलने की जगह सिर्फ आश्वासन दिया जा रहा है, वहीं पेंशन की जगह उन्हें केवल टेंशन मिल रही है।1
- मैहर के जनसेवक प्रभात द्विवेदी 'दद्दा' ने दिल्ली की सड़कों पर हुए खूनी संघर्ष को लेकर बीजेपी और मोदी सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि बीजेपी और मोदी सरकार के इशारे पर यह खूनी संघर्ष हुआ है और यह दिन इतिहास में काले दिन के रूप में लिखा जाएगा। उन्होंने आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि जहाँ संवाद होना चाहिए था, वहाँ लाठी-डंडे बरसाए गए। प्रभात द्विवेदी के अनुसार, इन लाठी-डंडों ने सिर्फ छात्रों के सिर नहीं फोड़े, बल्कि लोकतंत्र की परंपरा को भी कलंकित करने का काम किया है।1