पत्रकार योगेन्द्र प्रताप सिंह की खास रिपोर्ट जलेसर। एटा। उत्तर प्रदेश। जनपद एटा में जलेसर क्षेत्र के दरोगा की मनमानी से हजारों जिंदगियां लगी दांव पर, 25 फीट गहरे गड्डे के किनारे भारी वाहनों की लम्बी दौड़, जिले के एटा-बरहन रेलवे लाइन पर गेट संख्या 22 सी (समपार क्रॉसिंग) के पास फ्लाईओवर (रेलवे ओवर ब्रिज) निर्माण कार्य के दौरान एक चौंकाने वाली लापरवाही और मनमानी का मामला आया सामने। स्थानीय दरोगा ने बिना किसी उच्चाधिकारी के आदेश, बिना लिखित अनुमति और बिना सुरक्षा मानकों का पालन किए रास्ते को पूरी तरह खोल दिया, जिससे भारी-भरकम वाहनों और अन्य यानों का आवागमन किया जा रहा है। यह फैसला इतना जोखिम भरा है, कि विशेषज्ञों की मानें तो किसी भी क्षण बड़ा हादसा हो सकता है। मौके पर मौजूद वीडियो और तस्वीरों में साफ दिख रहा है, कि निर्माण स्थल पर 25 फीट गहरा गड्ढा खोदा गया है, जिसमें फ्लाईओवर के लिए आरसीसी सरिया (रॉड) का जाल बिछाया जा रहा है। इसी गड्ढे के ठीक किनारे से सड़क गुजर रही है, जहां भारी वाहन, ट्रैक्टर-ट्रॉली और अन्य यातायात बिना किसी बैरिकेडिंग या सुरक्षा व्यवस्था के आवाजाही कर रहे हैं। आसपास की भीड़ में हजारों लोग की भीड़ जमा दिखाई दे रही है, जिनमें स्थानीय निवासी, स्कूली छात्र-छात्राएं और अभिभावक शामिल हैं। पुलिस के जवान भी मौके पर मौजूद हैं, लेकिन कोई सख्त कार्यवाही नजर नहीं आ रही। सबसे बड़ा सवाल: है, कि दरोगा जी ने यह निर्णय अकेले कैसे ले लिया? उत्तर मध्य रेलवे निर्माण खंड कानपुर या उपजिलाधिकारी जलेसर जैसी उच्च स्तरीय अनुमति के बिना रास्ता खोलना क्या नियमों का खुला उल्लंघन नहीं है? निर्माण कार्य के दौरान सड़क को पूरी तरह बंद रखने और वैकल्पिक मार्ग की व्यवस्था करने के प्रावधान हैं, लेकिन यहां तो उल्टा हो रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है, कि स्कूली छात्र-छात्राओं की मुख्य मांग थी, कि परीक्षा के दौरान (फरवरी-मार्च 2026 सत्र चल रहा है) दोपहिया वाहनों के लिए सुरक्षित निकासी हो, लेकिन दरोगा के इस फैसले ने स्थिति को और खतरनाक बना दिया है। अब भारी वाहन गुजर रहे हैं, जिससे गड्ढे में गिरने या दुर्घटना का खतरा कई गुना बढ़ गया है। एक छोटी सी चूक भी दर्जनों जिंदगियों को तहस-नहस कर सकती है। यह निर्माण उत्तर मध्य रेलवे के तहत एटा-बरहन खंड पर चल रहा है, जहां कुल 6 समपार फाटकों पर आरओबी बनाए जा रहे हैं। गेट 22 पर काम 2025-26 में तेजी से शुरू हुआ, लेकिन सुरक्षा और स्थानीय सुविधाओं की अनदेखी हो रही है। पहले से ही सड़क अवरुद्ध होने से स्कूली बच्चों का भविष्य दांव पर था, अब यह मनमानी फैसला मौत को दावत दे रहा है। प्रशासन से सवाल है: बिना आदेश के रास्ता खोलने वाले दरोगा पर क्या कार्यवाही होगी? क्या सुरक्षा मानकों की जांच होगी? क्या तत्काल बैरिकेडिंग, साइनेज और वैकल्पिक व्यवस्था की जाएगी? स्थानीय लोग आक्रोशित हैं, और यदि जल्द समाधान नहीं निकाला गया तो जनहित याचिका तक पहुंचने की चेतावनी दी जा रही है। यह मामला न केवल निर्माण की लापरवाही का है, बल्कि आम जनता की जान से खिलवाड़ का भी है। प्रशासन को तुरंत हस्तक्षेप कर इस मौत के गड्ढे को सुरक्षित बनाना होगा, वरना कोई बड़ा हादसा होने पर जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।
पत्रकार योगेन्द्र प्रताप सिंह की खास रिपोर्ट जलेसर। एटा। उत्तर प्रदेश। जनपद एटा में जलेसर क्षेत्र के दरोगा की मनमानी से हजारों जिंदगियां लगी दांव पर, 25 फीट गहरे गड्डे के किनारे भारी वाहनों की लम्बी दौड़, जिले के एटा-बरहन रेलवे लाइन पर गेट संख्या 22 सी (समपार क्रॉसिंग) के पास फ्लाईओवर (रेलवे ओवर ब्रिज) निर्माण कार्य के दौरान एक चौंकाने वाली लापरवाही और मनमानी का मामला आया सामने। स्थानीय दरोगा ने बिना किसी उच्चाधिकारी के आदेश, बिना लिखित अनुमति और बिना सुरक्षा मानकों का पालन किए रास्ते को पूरी तरह खोल दिया, जिससे भारी-भरकम वाहनों और अन्य यानों का आवागमन किया जा रहा है। यह फैसला इतना जोखिम भरा है, कि विशेषज्ञों की मानें तो किसी भी क्षण बड़ा हादसा हो सकता है। मौके पर मौजूद वीडियो और तस्वीरों में साफ दिख रहा है, कि निर्माण स्थल पर 25 फीट गहरा गड्ढा खोदा गया है, जिसमें फ्लाईओवर के लिए आरसीसी सरिया (रॉड) का जाल बिछाया जा रहा है। इसी गड्ढे के ठीक किनारे से सड़क गुजर रही है, जहां भारी वाहन, ट्रैक्टर-ट्रॉली और अन्य यातायात बिना किसी बैरिकेडिंग या सुरक्षा व्यवस्था के आवाजाही कर रहे हैं। आसपास की भीड़ में हजारों लोग की भीड़ जमा दिखाई दे रही है, जिनमें स्थानीय निवासी, स्कूली छात्र-छात्राएं और अभिभावक शामिल हैं। पुलिस के जवान भी मौके पर मौजूद हैं, लेकिन कोई सख्त कार्यवाही नजर नहीं आ रही। सबसे बड़ा सवाल: है, कि दरोगा जी ने यह निर्णय अकेले कैसे ले लिया? उत्तर मध्य रेलवे निर्माण खंड कानपुर या उपजिलाधिकारी जलेसर जैसी उच्च स्तरीय अनुमति के बिना रास्ता खोलना क्या नियमों का खुला उल्लंघन नहीं है? निर्माण कार्य के दौरान सड़क को पूरी तरह बंद रखने और वैकल्पिक मार्ग की व्यवस्था करने के प्रावधान हैं, लेकिन यहां तो उल्टा हो रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है, कि स्कूली छात्र-छात्राओं की मुख्य मांग थी, कि परीक्षा के दौरान (फरवरी-मार्च 2026 सत्र चल रहा है) दोपहिया वाहनों के लिए सुरक्षित निकासी हो, लेकिन दरोगा के इस फैसले ने स्थिति को और खतरनाक बना दिया है। अब भारी वाहन गुजर रहे हैं, जिससे गड्ढे में गिरने या दुर्घटना का खतरा कई गुना बढ़ गया है। एक छोटी सी चूक भी दर्जनों जिंदगियों को तहस-नहस कर सकती है। यह निर्माण उत्तर मध्य रेलवे के तहत एटा-बरहन खंड पर चल रहा है, जहां कुल 6 समपार फाटकों पर आरओबी बनाए जा रहे हैं। गेट 22 पर काम 2025-26 में तेजी से शुरू हुआ, लेकिन सुरक्षा और स्थानीय सुविधाओं की अनदेखी हो रही है। पहले से ही सड़क अवरुद्ध होने से स्कूली बच्चों का भविष्य दांव पर था, अब यह मनमानी फैसला मौत को दावत दे रहा है। प्रशासन से सवाल है: बिना आदेश के रास्ता खोलने वाले दरोगा पर क्या कार्यवाही होगी? क्या सुरक्षा मानकों की जांच होगी? क्या तत्काल बैरिकेडिंग, साइनेज और वैकल्पिक व्यवस्था की जाएगी? स्थानीय लोग आक्रोशित हैं, और यदि जल्द समाधान नहीं निकाला गया तो जनहित याचिका तक पहुंचने की चेतावनी दी जा रही है। यह मामला न केवल निर्माण की लापरवाही का है, बल्कि आम जनता की जान से खिलवाड़ का भी है। प्रशासन को तुरंत हस्तक्षेप कर इस मौत के गड्ढे को सुरक्षित बनाना होगा, वरना कोई बड़ा हादसा होने पर जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।
- एटा जिले के जलेसर थाना क्षेत्र के सरसेला गांव मे ं गुरुवार को उस वक्त सनसनी फैल गई, जब गांव के बाहर एक पेड़ पर युवक का शव लटका देखा गया। सुबह ग्रामीणो ं की नजर पेड़ पर झूलते शव पर पड़ी तो पूरे गांव में अफरा-तफरी मच गई। देखते ही देखते मौके पर लोगों की भीड ़ जमा हो गई। ग्रामीणो ं ने तत्काल मृतक के परिजनों को सूचना दी। खबर मिलते ही परिजन बदहवास हालत मे ं मौके पर पहुंच े और शव को पेड़ से नीच े उतारा। परिजनो ं का रो-रोकर बुरा हाल था। गांव का माहौल गमगीन हो गया। पुलिस ने संभाला मोर्चा, शुरू की कार्रवाई घटना की जानकारी मिलते ही जलेसर थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण किया, आवश्यक साक्ष्य जुटाए और शव का पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। शुक्रवार को शव का पोस्टमार्टम1
- पत्रकार योगेन्द्र प्रताप सिंह की खास रिपोर्ट एटा में जीटी रोड पर छ्छेना फ्लाईओवर के पास अज्ञात ट्रक ने ऑटो के मारी टक्कर कई लोग गंभीर हालत में हुए घायल1
- प्रजापति समाज सेवक गिरीश दक्ष सेनाध्यक्ष जलेसर1
- *दरोगा की मनमानी से हजारों जिंदगियां दांव पर, 25 फीट गहरे खड्डे के किनारे भारी वाहनों का दौड़ना, मौत का खेल बन गया निर्माण स्थल* एटा, 6 फरवरी 2026 जिले के एटा-बरहन रेलवे लाइन पर गेट संख्या 22सी (समपार क्रॉसिंग) के पास फ्लाईओवर (रेलवे ओवर ब्रिज) निर्माण कार्य के दौरान एक चौंकाने वाली लापरवाही और मनमानी का मामला सामने आया है। स्थानीय दरोगा ने बिना किसी उच्चाधिकारी के आदेश, बिना लिखित अनुमति और बिना सुरक्षा मानकों का पालन किए रास्ते को पूरी तरह खोल दिया, जिससे भारी-भरकम वाहनों, ट्रकों और अन्य यानों का आवागमन हो रहा है। यह फैसला इतना जोखिम भरा है कि विशेषज्ञों की मानें तो किसी भी क्षण बड़ा हादसा हो सकता है। मौके पर मौजूद वीडियो और तस्वीरों में साफ दिख रहा है कि निर्माण स्थल पर *25 फीट गहरा गड्ढा* खोदा गया है, जिसमें फ्लाईओवर के लिए आरसीसी सरिया (रॉड) का जाल बिछाया जा रहा है। इसी गड्ढे के ठीक किनारे से सड़क गुजर रही है, जहां भारी वाहन, ट्रैक्टर-ट्रॉली और अन्य यातायात बिना किसी बैरिकेडिंग या सुरक्षा व्यवस्था के आवाजाही कर रहे हैं। आसपास की भीड़ में हजारों लोग जमा दिखाई दे रहे हैं, जिनमें स्थानीय निवासी, स्कूली *छात्र-छात्राएं* और अभिभावक शामिल हैं। पुलिस के जवान भी मौके पर मौजूद हैं, लेकिन कोई सख्त कार्रवाई नजर नहीं आ रही। *सबसे बड़ा सवाल:* दरोगा जी ने यह निर्णय अकेले कैसे ले लिया? उत्तर मध्य रेलवे निर्माण खंड कानपुर या एसडीएम जलेसर जैसी उच्च स्तरीय अनुमति के बिना रास्ता खोलना क्या नियमों का खुला उल्लंघन नहीं है? निर्माण कार्य के दौरान सड़क को पूरी तरह बंद रखने और वैकल्पिक मार्ग की व्यवस्था करने के प्रावधान हैं, लेकिन यहां तो उल्टा हो रहा है।स्थानीय लोगों का कहना है कि स्कूली *छात्र-छात्राओं* की मुख्य मांग थी कि परीक्षा के दौरान (फरवरी-मार्च 2026 सत्र चल रहा है) दोपहिया वाहनों के लिए सुरक्षित निकासी हो, लेकिन *दरोगा* के इस फैसले ने स्थिति को और *खतरनाक* बना दिया है। अब भारी वाहन गुजर रहे हैं, जिससे गड्ढे में गिरने या दुर्घटना का खतरा कई गुना बढ़ गया है। एक छोटी सी चूक भी दर्जनों जिंदगियों को तहस-नहस कर सकती है।यह निर्माण उत्तर मध्य रेलवे के तहत एटा-बरहन खंड पर चल रहा है, जहां कुल 6 समपार फाटकों पर आरओबी बनाए जा रहे हैं। गेट 22 पर काम 2025-26 में तेजी से शुरू हुआ, लेकिन सुरक्षा और स्थानीय सुविधाओं की अनदेखी हो रही है। पहले से ही सड़क अवरुद्ध होने से स्कूली बच्चों का भविष्य दांव पर था, अब यह मनमानी फैसला मौत को दावत दे रहा है। *प्रशासन से सवाल है:* 👉बिना आदेश के रास्ता खोलने वाले दरोगा पर क्या कार्रवाई होगी? 👉क्या सुरक्षा मानकों की जांच होगी? 👉क्या तत्काल बैरिकेडिंग, साइनेज और वैकल्पिक व्यवस्था की जाएगी? स्थानीय लोग आक्रोशित हैं और यदि जल्द समाधान नहीं निकाला गया तो जनहित याचिका तक पहुंचने की चेतावनी दी जा रही है। यह मामला न केवल निर्माण की लापरवाही का है, बल्कि आम जनता की जान से खिलवाड़ का भी है। प्रशासन को तुरंत हस्तक्षेप कर इस मौत के गड्ढे को सुरक्षित बनाना होगा, वरना कोई बड़ा हादसा होने पर जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।2
- *दरोगा की मनमानी से हजारों जिंदगियां दांव पर, 25 फीट गहरे खड्डे के किनारे भारी वाहनों का दौड़ना, मौत का खेल बन गया निर्माण स्थल* *रवेन्द्र जादौन की खास रिपोर्ट✍️* एटा/जलेसर ~ 6 फरवरी 2026 जिले के एटा-बरहन रेलवे लाइन पर गेट संख्या 22सी (समपार क्रॉसिंग) के पास फ्लाईओवर (रेलवे ओवर ब्रिज) निर्माण कार्य के दौरान एक चौंकाने वाली लापरवाही और मनमानी का मामला सामने आया है। स्थानीय दरोगा ने बिना किसी उच्चाधिकारी के आदेश, बिना लिखित अनुमति और बिना सुरक्षा मानकों का पालन किए रास्ते को पूरी तरह खोल दिया, जिससे भारी-भरकम वाहनों, ट्रकों और अन्य यानों का आवागमन हो रहा है। यह फैसला इतना जोखिम भरा है कि विशेषज्ञों की मानें तो किसी भी क्षण बड़ा हादसा हो सकता है। मौके पर मौजूद वीडियो और तस्वीरों में साफ दिख रहा है कि निर्माण स्थल पर *25 फीट गहरा गड्ढा* खोदा गया है, जिसमें फ्लाईओवर के लिए आरसीसी सरिया (रॉड) का जाल बिछाया जा रहा है। इसी गड्ढे के ठीक किनारे से सड़क गुजर रही है, जहां भारी वाहन, ट्रैक्टर-ट्रॉली और अन्य यातायात बिना किसी बैरिकेडिंग या सुरक्षा व्यवस्था के आवाजाही कर रहे हैं। आसपास की भीड़ में हजारों लोग जमा दिखाई दे रहे हैं, जिनमें स्थानीय निवासी, स्कूली *छात्र-छात्राएं* और अभिभावक शामिल हैं। पुलिस के जवान भी मौके पर मौजूद हैं, लेकिन कोई सख्त कार्रवाई नजर नहीं आ रही। *सबसे बड़ा सवाल:* दरोगा जी ने यह निर्णय अकेले कैसे ले लिया? उत्तर मध्य रेलवे निर्माण खंड कानपुर या एसडीएम जलेसर जैसी उच्च स्तरीय अनुमति के बिना रास्ता खोलना क्या नियमों का खुला उल्लंघन नहीं है? निर्माण कार्य के दौरान सड़क को पूरी तरह बंद रखने और वैकल्पिक मार्ग की व्यवस्था करने के प्रावधान हैं, लेकिन यहां तो उल्टा हो रहा है।स्थानीय लोगों का कहना है कि स्कूली *छात्र-छात्राओं* की मुख्य मांग थी कि परीक्षा के दौरान (फरवरी-मार्च 2026 सत्र चल रहा है) दोपहिया वाहनों के लिए सुरक्षित निकासी हो, लेकिन *दरोगा* के इस फैसले ने स्थिति को और *खतरनाक* बना दिया है। अब भारी वाहन गुजर रहे हैं, जिससे गड्ढे में गिरने या दुर्घटना का खतरा कई गुना बढ़ गया है। एक छोटी सी चूक भी दर्जनों जिंदगियों को तहस-नहस कर सकती है।यह निर्माण उत्तर मध्य रेलवे के तहत एटा-बरहन खंड पर चल रहा है, जहां कुल 6 समपार फाटकों पर आरओबी बनाए जा रहे हैं। गेट 22 पर काम 2025-26 में तेजी से शुरू हुआ, लेकिन सुरक्षा और स्थानीय सुविधाओं की अनदेखी हो रही है। पहले से ही सड़क अवरुद्ध होने से स्कूली बच्चों का भविष्य दांव पर था, अब यह मनमानी फैसला मौत को दावत दे रहा है। *प्रशासन से सवाल है:* 👉बिना आदेश के रास्ता खोलने वाले दरोगा पर क्या कार्रवाई होगी? 👉क्या सुरक्षा मानकों की जांच होगी? 👉क्या तत्काल बैरिकेडिंग, साइनेज और वैकल्पिक व्यवस्था की जाएगी? स्थानीय लोग आक्रोशित हैं और यदि जल्द समाधान नहीं निकाला गया तो जनहित याचिका तक पहुंचने की चेतावनी दी जा रही है। यह मामला न केवल निर्माण की लापरवाही का है, बल्कि आम जनता की जान से खिलवाड़ का भी है। प्रशासन को तुरंत हस्तक्षेप कर इस मौत के गड्ढे को सुरक्षित बनाना होगा, वरना कोई बड़ा हादसा होने पर जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।2
- Post by Rajput Boy1
- हाथरस नगर पालिका में तैनात चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी शिवकुमार भारद्वाज की सोमवार को ड्यूटी के दौरान अचानक हालत बिगड़ गई। सहकर्मियों द्वारा उन्हें गंभीर अवस्था में जिला अस्पताल ले जाया गया। जिला अस्पताल की इमरजेंसी वार्ड में इलाज के दौरान शिवकुमार भारद्वाज की मौत हो गई। कर्मचारी की मौत की खबर से नगर पालिका कार्यालय में शोक की लहर दौड़ गई।1
- पत्रकार योगेन्द्र प्रताप सिंह की खास रिपोर्ट जलेसर। एटा। उत्तर प्रदेश। जनपद एटा में जलेसर क्षेत्र के दरोगा की मनमानी से हजारों जिंदगियां लगी दांव पर, 25 फीट गहरे गड्डे के किनारे भारी वाहनों की लम्बी दौड़, जिले के एटा-बरहन रेलवे लाइन पर गेट संख्या 22 सी (समपार क्रॉसिंग) के पास फ्लाईओवर (रेलवे ओवर ब्रिज) निर्माण कार्य के दौरान एक चौंकाने वाली लापरवाही और मनमानी का मामला आया सामने। स्थानीय दरोगा ने बिना किसी उच्चाधिकारी के आदेश, बिना लिखित अनुमति और बिना सुरक्षा मानकों का पालन किए रास्ते को पूरी तरह खोल दिया, जिससे भारी-भरकम वाहनों और अन्य यानों का आवागमन किया जा रहा है। यह फैसला इतना जोखिम भरा है, कि विशेषज्ञों की मानें तो किसी भी क्षण बड़ा हादसा हो सकता है। मौके पर मौजूद वीडियो और तस्वीरों में साफ दिख रहा है, कि निर्माण स्थल पर 25 फीट गहरा गड्ढा खोदा गया है, जिसमें फ्लाईओवर के लिए आरसीसी सरिया (रॉड) का जाल बिछाया जा रहा है। इसी गड्ढे के ठीक किनारे से सड़क गुजर रही है, जहां भारी वाहन, ट्रैक्टर-ट्रॉली और अन्य यातायात बिना किसी बैरिकेडिंग या सुरक्षा व्यवस्था के आवाजाही कर रहे हैं। आसपास की भीड़ में हजारों लोग की भीड़ जमा दिखाई दे रही है, जिनमें स्थानीय निवासी, स्कूली छात्र-छात्राएं और अभिभावक शामिल हैं। पुलिस के जवान भी मौके पर मौजूद हैं, लेकिन कोई सख्त कार्यवाही नजर नहीं आ रही। सबसे बड़ा सवाल: है, कि दरोगा जी ने यह निर्णय अकेले कैसे ले लिया? उत्तर मध्य रेलवे निर्माण खंड कानपुर या उपजिलाधिकारी जलेसर जैसी उच्च स्तरीय अनुमति के बिना रास्ता खोलना क्या नियमों का खुला उल्लंघन नहीं है? निर्माण कार्य के दौरान सड़क को पूरी तरह बंद रखने और वैकल्पिक मार्ग की व्यवस्था करने के प्रावधान हैं, लेकिन यहां तो उल्टा हो रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है, कि स्कूली छात्र-छात्राओं की मुख्य मांग थी, कि परीक्षा के दौरान (फरवरी-मार्च 2026 सत्र चल रहा है) दोपहिया वाहनों के लिए सुरक्षित निकासी हो, लेकिन दरोगा के इस फैसले ने स्थिति को और खतरनाक बना दिया है। अब भारी वाहन गुजर रहे हैं, जिससे गड्ढे में गिरने या दुर्घटना का खतरा कई गुना बढ़ गया है। एक छोटी सी चूक भी दर्जनों जिंदगियों को तहस-नहस कर सकती है। यह निर्माण उत्तर मध्य रेलवे के तहत एटा-बरहन खंड पर चल रहा है, जहां कुल 6 समपार फाटकों पर आरओबी बनाए जा रहे हैं। गेट 22 पर काम 2025-26 में तेजी से शुरू हुआ, लेकिन सुरक्षा और स्थानीय सुविधाओं की अनदेखी हो रही है। पहले से ही सड़क अवरुद्ध होने से स्कूली बच्चों का भविष्य दांव पर था, अब यह मनमानी फैसला मौत को दावत दे रहा है। प्रशासन से सवाल है: बिना आदेश के रास्ता खोलने वाले दरोगा पर क्या कार्यवाही होगी? क्या सुरक्षा मानकों की जांच होगी? क्या तत्काल बैरिकेडिंग, साइनेज और वैकल्पिक व्यवस्था की जाएगी? स्थानीय लोग आक्रोशित हैं, और यदि जल्द समाधान नहीं निकाला गया तो जनहित याचिका तक पहुंचने की चेतावनी दी जा रही है। यह मामला न केवल निर्माण की लापरवाही का है, बल्कि आम जनता की जान से खिलवाड़ का भी है। प्रशासन को तुरंत हस्तक्षेप कर इस मौत के गड्ढे को सुरक्षित बनाना होगा, वरना कोई बड़ा हादसा होने पर जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।1