औरैया जनपद में झोलाछाप डॉक्टरों और अवैध क्लीनिकों का एक बड़ा नेटवर्क संचालित है, जिसकी बानगी पाता रोड पर बाबा रामनरेश कोल्ड स्टोर के पास एक कथित क्लीनिक में देखने को मिली। यहां बिना किसी पंजीकरण या लाइसेंस के मरीजों की जान से खुलेआम खिलवाड़ किया जा रहा है, जहाँ उन्हें बेड या स्ट्रेचर के बजाय लकड़ी के तख्त पर लिटाकर ग्लूकोज की बोतलें चढ़ाई जा रही हैं। क्लीनिक के भीतर का नजारा बेहद चौंकाने वाला था, जहां मेज पर दवाओं का ढेर लगा था और दीवार पर ड्रिप लगाने के लिए कीलें ठुकी हुई थीं। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, इस जगह पर मरीजों को भर्ती करने से लेकर ड्रिप लगाने तक का काम नियमित रूप से किया जा रहा है। सबसे गंभीर बात यह है कि इस क्लीनिक के पास स्वास्थ्य विभाग का कोई वैध पंजीकरण या मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय की अनुमति नहीं है। नियमों के अनुसार, बिना लाइसेंस के मरीजों को भर्ती करना, ड्रिप लगाना और उनका इलाज करना पूरी तरह से गैर-कानूनी है, फिर भी यह क्लीनिक कई महीनों से लगातार चल रहा है। स्थानीय निवासियों ने आरोप लगाया है कि स्वास्थ्य विभाग की मिलीभगत के बिना इतने बड़े पैमाने पर अवैध क्लीनिक का संचालन संभव नहीं है। नागरिकों ने जिलाधिकारी और मुख्य चिकित्सा अधिकारी से तत्काल इस क्लीनिक पर छापा मारने और उसे सील करने की मांग की है। लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते कोई कार्रवाई नहीं हुई, तो किसी मरीज की जान भी जा सकती है। जिले में पहले भी कई अवैध क्लीनिक पकड़े जा चुके हैं जो कुछ दिनों बाद फिर से खुल जाते हैं, जिससे स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। अब देखना होगा कि इस खुलासे के बाद विभाग हरकत में आता है या मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ का यह खेल चलता रहता है।
औरैया जनपद में झोलाछाप डॉक्टरों और अवैध क्लीनिकों का एक बड़ा नेटवर्क संचालित है, जिसकी बानगी पाता रोड पर बाबा रामनरेश कोल्ड स्टोर के पास एक कथित क्लीनिक में देखने को मिली। यहां बिना किसी पंजीकरण या लाइसेंस के मरीजों की जान से खुलेआम खिलवाड़ किया जा रहा है, जहाँ उन्हें बेड या स्ट्रेचर के बजाय लकड़ी के तख्त पर लिटाकर ग्लूकोज की बोतलें चढ़ाई जा रही हैं। क्लीनिक के भीतर का नजारा बेहद चौंकाने वाला था, जहां मेज पर दवाओं का ढेर लगा था और दीवार पर ड्रिप लगाने के लिए कीलें ठुकी हुई थीं। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, इस जगह पर मरीजों को भर्ती करने से लेकर ड्रिप लगाने तक का काम नियमित रूप से किया जा रहा है। सबसे गंभीर बात यह है कि इस क्लीनिक के पास स्वास्थ्य विभाग का कोई वैध पंजीकरण या मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय की अनुमति नहीं है। नियमों के अनुसार, बिना लाइसेंस के मरीजों को भर्ती करना, ड्रिप लगाना और उनका इलाज करना पूरी तरह से गैर-कानूनी है, फिर भी यह क्लीनिक कई महीनों से लगातार चल रहा है। स्थानीय निवासियों ने आरोप लगाया है कि स्वास्थ्य विभाग की मिलीभगत के बिना इतने बड़े पैमाने पर अवैध क्लीनिक का संचालन संभव नहीं है। नागरिकों ने जिलाधिकारी और मुख्य चिकित्सा अधिकारी से तत्काल इस क्लीनिक पर छापा मारने और उसे सील करने की मांग की है। लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते कोई कार्रवाई नहीं हुई, तो किसी मरीज की जान भी जा सकती है। जिले में पहले भी कई अवैध क्लीनिक पकड़े जा चुके हैं जो कुछ दिनों बाद फिर से खुल जाते हैं, जिससे स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। अब देखना होगा कि इस खुलासे के बाद विभाग हरकत में आता है या मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ का यह खेल चलता रहता है।
- आगरा में MG रोड स्थित आगरा कॉलेज के पास बनी बरसों पुरानी एक मजार को आज शांतिपूर्वक हटाकर दूसरी जगह स्थानांतरित कर दिया गया है। यह मजार यातायात में अवरोध उत्पन्न कर रही थी, जिसके कारण इसे हटाने का निर्णय लिया गया। आगरा पुलिस आयुक्त की उपस्थिति में यह प्रक्रिया पूरी की गई।1
- उत्तर प्रदेश के फतेहपुर सीकरी स्थित उंदेरा गांव में पट्टे की जमीन को लेकर हुए विवाद के बाद दो पक्षों के बीच जमकर मारपीट हुई, जिसमें तीन लोग घायल हो गए। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। जानकारी के अनुसार, गांव उंदेरा निवासी लाखन सिंह पुत्र भवानी सिंह ने पुलिस को दी तहरीर में आरोप लगाया है कि खसरा संख्या-28, खाता संख्या-663 की उनकी पट्टे की भूमि को कुछ लोगों ने जोतकर अपने खेत में मिला लिया था। जब उन्होंने इसका विरोध किया तो दोनों पक्षों में कहासुनी के बाद मारपीट शुरू हो गई। इस मारपीट में जगदीश सिंह पुत्र मावसी, सूरज पुत्र लाखन सिंह और नीरज पुत्र लाखन सिंह घायल हो गए। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और घायलों को उपचार के लिए अस्पताल भिजवाया। थाना प्रभारी निरीक्षक आनंद वीर सिंह ने बताया कि मामले में प्राप्त तहरीर के आधार पर जांच की जा रही है। उन्होंने आश्वस्त किया कि जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके अनुसार आगे की विधिक कार्रवाई की जाएगी। पुलिस ने यह भी बताया कि घटना में किसी को गंभीर चोट नहीं आई है।1
- आगरा के शमशाबाद में लगे एक स्वास्थ्य शिविर में बच्चों की जान के साथ बड़े खिलवाड़ का गंभीर मामला सामने आया है। शिविर के दौरान मासूम बच्चों को एक्सपायरी दवाएं बांटी गईं, जिससे ग्रामीणों में भारी आक्रोश फैल गया। इस बड़ी लापरवाही का खुलासा होते ही ग्रामीणों ने मौके पर जमकर हंगामा किया।1
- आगरा के सदर थाना क्षेत्र की साउथ रेलवे कॉलोनी में एक परिवार पर हुए कथित हमले ने कानून-व्यवस्था और पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। पीड़िता कशिश पुत्री पूरन सिंह ने आरोप लगाया है कि पड़ोसी मयंक पुत्र उमेश (असिस्टेंट ड्राइवर रेलवे) ने उसकी छोटी बहन पर अभद्र टिप्पणियां की थीं, जिसका विरोध करने पर विवाद हिंसक हो गया। आरोप के अनुसार, मयंक अपनी मां पूजा, बहन जानवी, पिता उमेश और अन्य लोगों के साथ पहले पीड़ित परिवार के घर पहुंचा और विवाद किया। इसके बाद, रात करीब 1 बजे मयंक 8 से 10 अज्ञात लोगों को लेकर दोबारा घर पर धावा बोल दिया। पीड़ित परिवार का कहना है कि हमलावरों ने घर के गेट तोड़ दिए, जान से मारने की धमकियां दीं और दरवाजा खुलने पर महिलाओं तक को नहीं बख्शा। परिवार का आरोप है कि हमलावरों ने कशिश की मां को बेरहमी से पीटा और लोहे की रॉड से उनके सिर पर वार किया, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गईं और उन्हें तत्काल अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। पीड़ितों ने यह भी बताया कि मारपीट के दौरान महिला के कपड़े तक फाड़ दिए गए। इस घटना के बाद से पुलिस की भूमिका पर सबसे बड़ा सवाल उठ रहा है। परिवार का कहना है कि वे लगातार थाना सदर पुलिस के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन अब तक आरोपियों के खिलाफ कोई मुकदमा दर्ज नहीं किया गया है। पीड़ितों का आरोप है कि पुलिस केवल आश्वासन दे रही है, जबकि आरोपी खुलेआम घूम रहे हैं। न्याय न मिलने से परेशान परिवार ने अब पुलिस कमिश्नर से गुहार लगाई है और आरोपियों मयंक, उमेश, पूजा, जानवी व अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।1
- आगरा के शमशाबाद थाना क्षेत्र के नगला बीच गांव में बच्चों के लिए लगाए गए एक स्वास्थ्य कैंप में एक्सपायरी दवा बांटने का गंभीर मामला सामने आया है। टोरेंट UNM फाउंडेशन द्वारा आयोजित इस कैंप में 6 साल तक की उम्र के बच्चों को एक्सपायरी दवाएँ वितरित की गईं, जिससे ग्रामीणों में भारी हड़कंप मच गया। ग्रामीणों ने इस घटना को फाउंडेशन का एक 'बड़ा कारनामा' बताया है। ग्रामीणों की सतर्कता के कारण एक बड़ी घटना टल गई। एक्सपायरी दवाएँ देखकर ग्रामीणों ने तुरंत कार्रवाई की और फाउंडेशन की टीम को पकड़कर थाने ले गए। इसके बाद पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए ड्रग विभाग की टीम को जाँच के लिए मौके पर बुलाया है। ग्रामीण इस पूरे मामले में फाउंडेशन के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।1
- आगरा के एमजी रोड पर आगरा कॉलेज के सामने स्थित लगभग 200 वर्ष पुरानी मजार को बीच सड़क से हटा दिया गया है। इस कार्रवाई के बाद पुलिस कमिश्नर (आईपीएस) दीपक कुमार ने बयान जारी कर बताया कि यह कदम यातायात को सुचारु बनाने और मेट्रो निर्माण कार्य को आगे बढ़ाने के लिए उठाया गया है। प्रशासन और पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि मजार को स्थानांतरित करने का निर्णय मुस्लिम पक्ष से आपसी बातचीत और सहमति के बाद लिया गया था। मजार को पूरी गरिमा और धार्मिक मान्यता के साथ पास के एक ईदगाह परिसर में स्थानांतरित किया गया है। सड़क के बीचों-बीच होने के कारण यह मजार अक्सर जाम का कारण बनती थी और सड़क हादसों का खतरा बना रहता था। इन चिंताओं को देखते हुए, सुरक्षा के कड़े इंतजामों के बीच बुलडोजर की मदद से मजार हटाने की प्रक्रिया पूरी की गई। यह जानकारी 16 जून, 26 को AIN नेटवर्क द्वारा अपडेट की गई।1
- एमजी रोड स्थित आगरा कॉलेज के सामने सड़क के बीच बनी एक विवादित मजार को मंगलवार सुबह प्रशासन की निगरानी में हटाकर पास स्थित बड़ी मजार परिसर में स्थानांतरित कर दिया गया। इस दौरान क्षेत्र में भारी पुलिस बल तैनात रहा और सुरक्षा के मद्देनजर कुछ समय के लिए यातायात भी प्रभावित हुआ। एडीसीपी हिमांशु गौरव ने बताया कि मजार के स्थानांतरण को लेकर दोनों पक्षों के साथ कई दौर की वार्ताएं हुई थीं, जिसके बाद आपसी सहमति बनी और पूरी प्रक्रिया शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई। मौके पर पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे तथा इस दौरान किसी भी प्रकार के विरोध या तनाव की स्थिति नहीं बनी। यह मजार लंबे समय से एमजी रोड पर यातायात बाधित होने और जाम की समस्या का मुख्य कारण मानी जा रही थी। मामले को लेकर योगी यूथ बिग्रेड के प्रदेश अध्यक्ष कुंवर अजय तोमर द्वारा न्यायालय में वाद दायर किया गया था, जिसके बाद संबंधित विभागों और प्रशासन के बीच संवाद की प्रक्रिया शुरू हुई। प्रशासन का कहना है कि मजार हटने से एमजी रोड पर यातायात अधिक सुचारु होगा और दुर्घटनाओं की आशंका भी कम होगी। इस पूरी कार्रवाई में दोनों समुदायों के लोगों ने सहयोग किया, जिससे यह स्थानांतरण शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो सका और आगरा में सौहार्द की एक मिसाल पेश हुई।1
- शमशाबाद में आयोजित एक स्वास्थ्य कैंप पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं, जहाँ छोटे बच्चों को एक्सपायरी दवाएँ वितरित करने का मामला उजागर हुआ है। जानकारी के अनुसार, इस कैंप में 6 साल तक की उम्र के बच्चों को ऐसी दवाएँ दी गईं जिनकी मियाद खत्म हो चुकी थी। इस चौंकाने वाली घटना के बाद ग्रामीणों में भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है। मामले की गंभीरता को देखते हुए, ड्रग विभाग ने इसकी जांच शुरू कर दी है और सच्चाई का पता लगाने में जुटा हुआ है।1
- आगरा के सैंया में एक भीषण सड़क हादसा हो गया, जिसमें टायर फटने के कारण दो कारों के बीच जोरदार टक्कर हुई। इस हादसे में कई लोग गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं।1