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Land Lease Bill introduced by Tanveer Sadiq is to revalidate the lease of NEDOS, which is the property of Omar Abdullah. Besides that, it favours the property tycoons of Kashmir only says Sajad Lone
Sanam Aijaz
Land Lease Bill introduced by Tanveer Sadiq is to revalidate the lease of NEDOS, which is the property of Omar Abdullah. Besides that, it favours the property tycoons of Kashmir only says Sajad Lone
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- He had introduced a Private Member's Bill to amend the J&K Reservation Policy to address imbalances and safeguard "Open Merit". However, his bill was rejected/opposed by the government, which reportedly triggered his breakdown in the House. Stand for Youth: He stated that he had promised first-time voters in his constituency that he would speak up for them regardless of the consequences.1
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- जनजातीय क्षेत्र पांगी घाटी के साच स्थित राजकीय प्राथमिक केंद्रीय विद्यालय में शिक्षा व्यवस्था गंभीर संकट से गुजर रही है। विद्यालय में प्री-प्राइमरी सहित कुल 27 बच्चे शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं, लेकिन उनके भविष्य की जिम्मेदारी इस समय मात्र एक अस्थायी SMC (स्कूल प्रबंधन समिति) अध्यापक के कंधों पर टिकी हुई है। जानकारी के अनुसार, यह विद्यालय पिछले कई वर्षों से अध्यापकों की कमी से जूझ रहा है। बीते वर्ष यहां एक केंद्रीय मुख्य अध्यापक सहित एक अन्य मुख्य अध्यापक की तैनाती की गई थी। हालांकि, नवंबर माह में एक अध्यापक सेवानिवृत्त हो गए, जिन्हें चार माह का सेवा विस्तार दिया गया था। अब इसी माह उनकी सेवाएं पूरी तरह समाप्त हो चुकी हैं। वहीं, दूसरे अध्यापक का भी तबादला हो जाने से विद्यालय पूरी तरह खाली हो गया है। वर्तमान स्थिति यह है कि पूरे विद्यालय की शैक्षणिक व्यवस्था केवल एक SMC अध्यापक के भरोसे चल रही है, जो न तो स्थायी है और न ही पर्याप्त। इससे बच्चों की पढ़ाई पर गंभीर असर पड़ रहा है। विद्यालय, राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय साच के अंतर्गत आता है, लेकिन वहां से भी किसी अध्यापक की अस्थायी या स्थायी तैनाती नहीं की गई है। इस लापरवाही ने अभिभावकों की चिंता और आक्रोश दोनों बढ़ा दिए हैं। स्कूल प्रबंधन समिति के अध्यक्ष रविंद्र सिंह ने प्रशासन और शिक्षा विभाग पर सवाल उठाते हुए कहा कि विद्यालय पिछले एक वर्ष से शिक्षकों की भारी कमी से जूझ रहा है। अब हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि विद्यालय बंद होने के कगार पर पहुंच गया है और बच्चों का भविष्य अंधकार में डूबता नजर आ रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि विद्यालय में न तो पर्याप्त शिक्षक हैं और न ही कोई चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी, जिससे स्कूल संचालन और अधिक प्रभावित हो रहा है। रविंद्र सिंह ने स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि यदि एक सप्ताह के भीतर विद्यालय में अध्यापकों की नियुक्ति नहीं की जाती है, तो सभी अभिभावक अपने बच्चों के साथ किलाड़ मुख्यालय में धरना-प्रदर्शन करने को मजबूर होंगे। यह मामला जनजातीय क्षेत्र में शिक्षा व्यवस्था की जमीनी हकीकत को उजागर करता है, जहां मूलभूत सुविधाओं के अभाव में बच्चों का भविष्य दांव पर लगा हुआ है।1
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