छोटे सट्टा-पट्टी वालों पर कार्रवाई, बड़े खाईवालों पर सवाल 500-1000 रुपये की पट्टी पकड़कर खानापूर्ति का आरोप, लाखों के कथित नेटवर्क पर कब होगी बड़ी कार्रवाई? बलौदाबाजार। जिले में अवैध सट्टा कारोबार को लेकर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं। शहर से लेकर आसपास के ग्रामीण अंचलों तक सट्टा-पट्टी के कथित संचालन की चर्चाएं लगातार सामने आ रही हैं। पुलिस समय-समय पर सट्टा लिखने वालों के खिलाफ कार्रवाई करती दिखाई देती है, लेकिन इन कार्रवाइयों को लेकर अब यह सवाल उठ रहा है कि क्या पुलिस की कार्रवाई केवल छोटे स्तर पर सट्टा लिखने वालों तक ही सीमित है? स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि कुछ स्थानों पर प्रतिदिन बड़ी रकम का सट्टा कारोबार संचालित होने का दावा किया जाता है। ऐसे में यदि वास्तव में बड़े स्तर पर यह अवैध कारोबार चल रहा है, तो उसके पीछे मौजूद कथित खाईवालों, संचालकों और पूरे नेटवर्क तक पुलिस की कार्रवाई क्यों नहीं पहुंच रही है—यह सवाल लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। छोटी रकम की जब्ती, बड़ी तस्वीर पर सवाल पुलिस द्वारा सट्टा कारोबार के खिलाफ की जाने वाली कार्रवाई निश्चित तौर पर कानून-व्यवस्था की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। लेकिन जब कार्रवाई में महज कुछ सौ या एक-दो हजार रुपये की सट्टा-पट्टी और रकम बरामद होने की जानकारी सामने आती है, तब स्वाभाविक रूप से यह सवाल उठता है कि क्या यही इस पूरे अवैध कारोबार की वास्तविक तस्वीर है? यदि जिले में बड़े पैमाने पर सट्टा कारोबार संचालित होने की शिकायतें और सूचनाएं मिल रही हैं, तो जांच का दायरा केवल पट्टी लिखने वाले व्यक्ति तक सीमित न रहकर उस व्यक्ति तक पहुंचना चाहिए, जिसके माध्यम से कथित तौर पर रकम का बड़ा लेन-देन संचालित होता है। ‘खाईवाल’ तक पहुंचना पुलिस के लिए बड़ी चुनौती सट्टा कारोबार की कथित व्यवस्था में छोटे स्तर पर पट्टी लिखने वाले व्यक्ति और बड़े स्तर पर कारोबार को संचालित करने वाले लोगों के बीच अंतर होता है। ऐसे में केवल मौके पर मौजूद व्यक्ति को पकड़ लेना पूरे नेटवर्क पर कार्रवाई नहीं माना जा सकता। स्थानीय लोगों का कहना है कि पुलिस को यह पता लगाने की जरूरत है कि पकड़ी गई रकम किसके पास पहुंचती थी, सट्टे के लेन-देन का हिसाब कौन रखता था और इसके पीछे कौन लोग सक्रिय हैं। यदि जांच तकनीकी और वित्तीय स्तर पर की जाए तो बड़े नेटवर्क तक पहुंचने की संभावना बढ़ सकती है। हालांकि, इन दावों और चर्चाओं की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए संबंधित पुलिस अधिकारियों की जांच और आधिकारिक कार्रवाई ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट कर सकती है। युवाओं और परिवारों पर पड़ रहा असर अवैध सट्टा केवल कानून-व्यवस्था से जुड़ा विषय नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर सामाजिक और आर्थिक जीवन पर भी पड़ सकता है। जल्दी पैसा कमाने की उम्मीद में लोग अपनी मेहनत की कमाई दांव पर लगा देते हैं। शुरुआत में छोटी रकम से शुरू होने वाला यह सिलसिला कई बार बड़ी आर्थिक क्षति में बदल सकता है। विशेषकर युवाओं के बीच ऑनलाइन और ऑफलाइन सट्टे की बढ़ती पहुंच चिंता का विषय मानी जा रही है। आर्थिक नुकसान के साथ परिवारों में तनाव, कर्ज और विवाद जैसी परिस्थितियां भी पैदा हो सकती हैं। ऐसे में प्रशासन और पुलिस के सामने केवल सट्टा-पट्टी पकड़ने की चुनौती नहीं है, बल्कि इसके पूरे नेटवर्क को चिन्हित कर उसे जड़ से खत्म करने की जिम्मेदारी भी महत्वपूर्ण हो जाती है। क्या केवल कार्रवाई की संख्या बढ़ाना पर्याप्त है? किसी भी अवैध कारोबार के खिलाफ कार्रवाई की सफलता केवल इस बात से तय नहीं होती कि कितने लोगों को पकड़ा गया। असली सवाल यह होता है कि उस कारोबार की मुख्य कड़ी तक कार्रवाई पहुंची या नहीं। यदि छोटे स्तर के ऑपरेटर लगातार पकड़े जाते रहें और उनके पीछे काम करने वाला कथित नेटवर्क सक्रिय बना रहे, तो कार्रवाई का स्थायी असर सीमित रह सकता है। इसलिए पुलिस के सामने चुनौती यह भी है कि गिरफ्तार या पकड़े गए लोगों से पूछताछ के आधार पर पूरे नेटवर्क की कड़ियों की जांच की जाए। शहर से गांव तक निगरानी की जरूरत बलौदाबाजार शहर के साथ-साथ आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में भी अवैध गतिविधियों की शिकायतों पर निगरानी बढ़ाने की मांग उठ रही है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि पुलिस को संवेदनशील इलाकों की पहचान कर नियमित निगरानी करनी चाहिए। साथ ही संदिग्ध वित्तीय लेन-देन, मोबाइल नंबरों, डिजिटल भुगतान और सट्टे से जुड़े संभावित संपर्कों की कानूनी प्रक्रिया के तहत जांच की जाए तो बड़े नेटवर्क का पता लगाने में मदद मिल सकती है। पुलिस की कार्रवाई पर अब जनता की नजर सट्टा कारोबार को लेकर उठ रहे सवालों के बीच अब लोगों की नजर बलौदाबाजार पुलिस की अगली कार्रवाई पर है। क्या पुलिस छोटे स्तर के सट्टा लिखने वालों तक कार्रवाई सीमित रखेगी या फिर कथित बड़े संचालकों तक भी जांच का दायरा पहुंचाएगी? जनता की अपेक्षा है कि यदि जिले में वास्तव में बड़े पैमाने पर अवैध सट्टा कारोबार संचालित हो रहा है, तो उसके खिलाफ निष्पक्ष और प्रभावी कार्रवाई हो। साथ ही यदि किसी व्यक्ति पर लगाए जा रहे आरोप निराधार हैं, तो जांच के माध्यम से स्थिति भी स्पष्ट की जानी चाहिए। निष्पक्ष जांच से ही सामने आएगी सच्चाई अवैध सट्टा कारोबार के संबंध में सामने आ रही चर्चाओं और आरोपों की पुष्टि सक्षम जांच एजेंसी की कार्रवाई से ही हो सकती है। इसलिए आवश्यक है कि पुलिस शिकायतों और स्थानीय सूचनाओं को गंभीरता से लेते हुए तथ्यात्मक जांच करे। सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या कार्रवाई केवल 500-1000 रुपये की सट्टा-पट्टी और छोटे ऑपरेटरों तक सीमित रहेगी, या फिर कथित बड़े खाईवालों और पूरे नेटवर्क तक पुलिस की जांच पहुंचेगी? अब देखना होगा कि आने वाले दिनों में बलौदाबाजार पुलिस इस दिशा में क्या कदम उठाती है और क्या जिले में अवैध सट्टा कारोबार के कथित बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश हो पाता है। नोट: इस समाचार में अवैध सट्टा कारोबार से जुड़े आरोपों और स्थानीय चर्चाओं को आरोप/दावे के रूप में प्रस्तुत किया गया है। किसी व्यक्ति या समूह की संलिप्तता को प्रमाणित तथ्य नहीं माना गया है। संबंधित पुलिस जांच और आधिकारिक बयान के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।
छोटे सट्टा-पट्टी वालों पर कार्रवाई, बड़े खाईवालों पर सवाल 500-1000 रुपये की पट्टी पकड़कर खानापूर्ति का आरोप, लाखों के कथित नेटवर्क पर कब होगी बड़ी कार्रवाई? बलौदाबाजार। जिले में अवैध सट्टा कारोबार को लेकर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं। शहर से लेकर आसपास के ग्रामीण अंचलों तक सट्टा-पट्टी के कथित संचालन की चर्चाएं लगातार सामने आ रही हैं। पुलिस समय-समय पर सट्टा लिखने वालों के खिलाफ कार्रवाई करती दिखाई देती है, लेकिन इन कार्रवाइयों को लेकर अब यह सवाल उठ रहा है कि क्या पुलिस की कार्रवाई केवल छोटे स्तर पर सट्टा लिखने वालों तक ही सीमित है? स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि कुछ स्थानों पर प्रतिदिन बड़ी रकम का सट्टा कारोबार संचालित होने का दावा किया जाता है। ऐसे में यदि वास्तव में बड़े स्तर पर यह अवैध कारोबार चल रहा है, तो उसके पीछे मौजूद कथित खाईवालों, संचालकों और पूरे नेटवर्क तक पुलिस की कार्रवाई क्यों नहीं पहुंच रही है—यह सवाल लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। छोटी रकम की जब्ती, बड़ी तस्वीर पर सवाल पुलिस द्वारा सट्टा कारोबार के खिलाफ की जाने वाली कार्रवाई निश्चित तौर पर कानून-व्यवस्था की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। लेकिन जब कार्रवाई में महज कुछ सौ या एक-दो हजार रुपये की सट्टा-पट्टी और रकम बरामद होने की जानकारी सामने आती है, तब स्वाभाविक रूप से यह सवाल उठता है कि क्या यही इस पूरे अवैध कारोबार की वास्तविक तस्वीर है? यदि जिले में बड़े पैमाने पर सट्टा कारोबार संचालित होने की शिकायतें और सूचनाएं मिल रही हैं, तो जांच का दायरा केवल पट्टी लिखने वाले व्यक्ति तक सीमित न रहकर उस व्यक्ति तक पहुंचना चाहिए, जिसके माध्यम से कथित तौर पर रकम का बड़ा लेन-देन संचालित होता है। ‘खाईवाल’ तक पहुंचना पुलिस के लिए बड़ी चुनौती सट्टा कारोबार की कथित व्यवस्था में छोटे स्तर पर पट्टी लिखने वाले व्यक्ति और बड़े स्तर पर कारोबार को संचालित करने वाले लोगों के बीच अंतर होता है। ऐसे में केवल मौके पर मौजूद व्यक्ति को पकड़ लेना पूरे नेटवर्क पर कार्रवाई नहीं माना जा सकता। स्थानीय लोगों का कहना है कि पुलिस को यह पता लगाने की जरूरत है कि पकड़ी गई रकम किसके पास पहुंचती थी, सट्टे के लेन-देन का हिसाब कौन रखता था और इसके पीछे कौन लोग सक्रिय हैं। यदि जांच तकनीकी और वित्तीय स्तर पर की जाए तो बड़े नेटवर्क तक पहुंचने की संभावना बढ़ सकती है। हालांकि, इन दावों और चर्चाओं की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए संबंधित पुलिस अधिकारियों की जांच और आधिकारिक कार्रवाई ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट कर सकती है। युवाओं और परिवारों पर पड़ रहा असर अवैध सट्टा केवल कानून-व्यवस्था से जुड़ा विषय नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर सामाजिक और आर्थिक जीवन पर भी पड़ सकता है। जल्दी पैसा कमाने की उम्मीद में लोग अपनी मेहनत की कमाई दांव पर लगा देते हैं। शुरुआत में छोटी रकम से शुरू होने वाला यह सिलसिला कई बार बड़ी आर्थिक क्षति में बदल सकता है। विशेषकर युवाओं के बीच ऑनलाइन और ऑफलाइन सट्टे की बढ़ती पहुंच चिंता का विषय मानी जा रही है। आर्थिक नुकसान के साथ परिवारों में तनाव, कर्ज और विवाद जैसी परिस्थितियां भी पैदा हो सकती हैं। ऐसे में प्रशासन और पुलिस के सामने केवल सट्टा-पट्टी पकड़ने की चुनौती नहीं है, बल्कि इसके पूरे नेटवर्क को चिन्हित कर उसे जड़ से खत्म करने की जिम्मेदारी भी महत्वपूर्ण हो जाती है। क्या केवल कार्रवाई की संख्या बढ़ाना पर्याप्त है? किसी भी अवैध कारोबार के खिलाफ कार्रवाई की सफलता केवल इस बात से तय नहीं होती कि कितने लोगों को पकड़ा गया। असली सवाल यह होता है कि उस कारोबार की मुख्य कड़ी तक कार्रवाई पहुंची या नहीं। यदि छोटे स्तर के ऑपरेटर लगातार पकड़े जाते रहें और उनके पीछे काम करने वाला कथित नेटवर्क सक्रिय बना रहे, तो कार्रवाई का स्थायी असर सीमित रह सकता है। इसलिए पुलिस के सामने चुनौती यह भी है कि गिरफ्तार या पकड़े गए लोगों से पूछताछ के आधार पर पूरे नेटवर्क की कड़ियों की जांच की जाए। शहर से गांव तक निगरानी की जरूरत बलौदाबाजार शहर के साथ-साथ आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में भी अवैध गतिविधियों की शिकायतों पर निगरानी बढ़ाने की मांग उठ रही है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि पुलिस को संवेदनशील इलाकों की पहचान कर नियमित निगरानी करनी चाहिए। साथ ही संदिग्ध वित्तीय लेन-देन, मोबाइल नंबरों, डिजिटल भुगतान और सट्टे से जुड़े संभावित संपर्कों की कानूनी प्रक्रिया के तहत जांच की जाए तो बड़े नेटवर्क का पता लगाने में मदद मिल सकती है। पुलिस की कार्रवाई पर अब जनता की नजर सट्टा कारोबार को लेकर उठ रहे सवालों के बीच अब लोगों की नजर बलौदाबाजार पुलिस की अगली कार्रवाई पर है। क्या पुलिस छोटे स्तर के सट्टा लिखने वालों तक कार्रवाई सीमित रखेगी या फिर कथित बड़े संचालकों तक भी जांच का दायरा पहुंचाएगी? जनता की अपेक्षा है कि यदि जिले में वास्तव में बड़े पैमाने पर अवैध सट्टा कारोबार संचालित हो रहा है, तो उसके खिलाफ निष्पक्ष और प्रभावी कार्रवाई हो। साथ ही यदि किसी व्यक्ति पर लगाए जा रहे आरोप निराधार हैं, तो जांच के माध्यम से स्थिति भी स्पष्ट की जानी चाहिए। निष्पक्ष जांच से ही सामने आएगी सच्चाई अवैध सट्टा कारोबार के संबंध में सामने आ रही चर्चाओं और आरोपों की पुष्टि सक्षम जांच एजेंसी की कार्रवाई से ही हो सकती है। इसलिए आवश्यक है कि पुलिस शिकायतों और स्थानीय सूचनाओं को गंभीरता से लेते हुए तथ्यात्मक जांच करे। सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या कार्रवाई केवल 500-1000 रुपये की सट्टा-पट्टी और छोटे ऑपरेटरों तक सीमित रहेगी, या फिर कथित बड़े खाईवालों और पूरे नेटवर्क तक पुलिस की जांच पहुंचेगी? अब देखना होगा कि आने वाले दिनों में बलौदाबाजार पुलिस इस दिशा में क्या कदम उठाती है और क्या जिले में अवैध सट्टा कारोबार के कथित बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश हो पाता है। नोट: इस समाचार में अवैध सट्टा कारोबार से जुड़े आरोपों और स्थानीय चर्चाओं को आरोप/दावे के रूप में प्रस्तुत किया गया है। किसी व्यक्ति या समूह की संलिप्तता को प्रमाणित तथ्य नहीं माना गया है। संबंधित पुलिस जांच और आधिकारिक बयान के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।
- *धान-चावल के बीजों से सजेगी इस बार राखी, भाई-बहन के स्नेह के साथ मिलेगा हरियाली का संदेश* *कलेक्टर, एसपी और डीएफओ को बिहान दीदियों ने पहनाई बीज राखी* ताराचंद कठोत्रे बलौदाबाजार-भाटापारा, 25 अगस्त 2026/ जिले में इस बार रक्षाबंधन पर्व भाई-बहन के स्नेह के साथ हरियाली और पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी देगा। बिहान से जुड़ी स्व-सहायता समूह की महिलाएं धान, चावल, लौकी, करेला, सेमी सहित स्थानीय बीजों से आकर्षक और पर्यावरण हितैषी राखियां तैयार कर रही हैं। ग्राम लाहोद की महिलाओं द्वारा तैयार इन बीज राखियों की बिक्री से उन्हें अतिरिक्त आमदनी भी हो रही है। इसी क्रम में बिहान की महिलाओं ने मंगलवार को संयुक्त जिला कार्यालय में बिक्री हेतु स्टॉल लगाया।स्टॉल का अवलोकन करने पहुंचे कलेक्टर कुलदीप शर्मा, पुलिस अधीक्षक गौरव राय, वनमंडलाधिकारी पंकज कुमार कमल एवं जिला पंचायत सीईओ सुश्री दिव्या अग्रवाल को दीदियों ने अपने हाथों से तैयार बीज राखियां पहनाईं। कलेक्टर श्री कुलदीप शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की मंशानुरूप महिलाओं को नवाचार और आजीविका से जोड़ने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने बिहान दीदियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि बीज राखी महिलाओं के हुनर और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के साथ पर्यावरण संरक्षण का सुंदर संदेश भी देती है।4
- अवैध शराब पर बिल्हा पुलिस का प्रहार 60 नग देशी शराब बिक्री करते अपचारी बालक पर क अवैध शराब पर बिल्हा पुलिस का प्रहार 60 नग देशी शराब बिक्री करते अपचारी बालक पर की गयी विधि सम्मत कार्यवाही आज मंगलवार की दोपहर 3. 15 बजे बिल्हा पुलिस द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति से मिली जानकारी अनुसार मामले का संक्षिप्त विवरण इस प्रकार है कि उमनि एवं वपुअ महोदय श्री रजनेश सिंह बिलासपुर (भा.पु.से.) द्वारा जिले के सभी थाना/चौंकी की प्रभारीयों को अवैध शराब ब्रिकी/शराब परिवहन करने वाले व्यक्तियों पर अंकुश लगाने हेतु निर्देशित किया गया था, आदेश के परिपालन मे अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक महोदया मधुलिका सिंह एवं नगर पुलिस अधीक्षक महोदय चकरभाठा श्री राजेश जोशी के मार्गदर्शन मे थाना प्रभारी द्वारा थाना स्तर पर सिविल टीम गठित कर बिल्हा क्षेत्र के ग्रामीणो से सम्पर्क कर अवैध शराब ब्रिकी एवं परिवहन करने वाले व्यक्तियों के बारे मे जानकारी प्राप्त कर विश्वस्त मुखबीर के माध्यम से अवैध गतिविधियों पर नजर रखी जा रही थी इसी क्रम मे दिनांक 24.08.2026 कोे मुखबीर सूचना मिला कि वार्ड क्र. 09 बिल्हा मे मनोज गेंदले का लडका घर मे भारी मात्रा मे शराब रख कर ब्रिकी कर रहा है सूचना पर तत्काल थाना प्रभारी बिल्हा द्वारा सिविल टीम गठित कर वार्ड क्रमांक 09 बिल्हा के पते पर जाकर तस्दीक किया जहाॅ अपचारी बालक मिला जिसके समक्ष घर की तलाशी लेने पर एक सफेद रंग के प्लास्टिक बोरी मे 30 नग देशी प्लेन व 30 नग देशी मसाला कुल मात्रा 10.800 लीटर कीमती जुमला 5400 रूपये व अपचारी बालक के जेब मे रखे शराब ब्रिकी रकम 500 रूपये रखा मिला जिसे जप्त कर अपचारी बालक को माननीय किशोर न्यायबोर्ड बिलासपुर पेश किया गया है। आगे भी अवैध गतिविधियों पर लगातार कार्यवाही जारी रहेगी। उक्त कार्यवाही मे थाना प्रभारी निरीक्षक तोपसिंह नवरंग, प्र.आर. 786 अनिल बंजारे, आरक्षक 1390 संतोष मरकाम, 1431 अर्जुन जांगडे का विशेष योगदान रहा।1
- जिले में सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए कलेक्टर एसपी ने दिए कड़े निर्देश1
- तिरंगा लेकर शिक्षकों ने सड़क पर किया प्रदर्शन, पांच सूत्री मांग पूरी नहीं हुई तो आगे होगा आंदोलन! बिलासपुर में साझा मंच के बैनर तले सैकड़ों शिक्षक अपनी विभिन्न मांगों को लेकर सड़क पर उतर आए। शिक्षकों ने टीईटी की अनिवार्यता समाप्त करने, मोदी की गारंटी लागू करने और वेतन विसंगति दूर करने समेत कई मांगों को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदेशभर के सभी जिला मुख्यालयों में शिक्षकों ने एकजुट होकर अपनी आवाज बुलंद की। बिलासपुर में भी बड़ी संख्या में शिक्षक एकत्र हुए और अपनी मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ नाराजगी जताई।1
- हाईकोर्ट बोला- थानों के CCTV हर समय चालू रहें:18 महीने का बैकअप जरूरी; NDPS केस में फुटेज डिलीट होने पर पुलिस को दिए निर्देश छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने प्रदेश के पुलिस थानों में लगे CCTV कैमरों की कार्यप्रणाली और रिकॉर्डिंग सुरक्षित रखने को लेकर सख्त निर्देश दिए हैं। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र अग्रवाल की डिवीजन बैंच ने कहा कि थानों में केवल कैमरे लगाना पर्याप्त नहीं है।सीसीटीवी हर समय चालू रहना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के अनुसार कम से कम 18 महीने तक के फुटेज सुरक्षित रखना जरूरी है। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और पुलिस अधिकारियों को सीसीटीवी व्यवस्था की नियमित मॉनिटरिंग करने के साथ पर्याप्त स्टोरेज और पावर बैकअप सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।कोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी भी प्रशासनिक या तकनीकी लापरवाही के कारण इलेक्ट्रॉनिक सबूत नष्ट नहीं होना चाहिए। अगर ऐसा होता है तो संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय कर कार्रवाई की जाए।1
- तंत्र-मंत्र का यंत्र को प्राप्त करने परमहंस योगीराज श्री शक्तिपुत्र जी महाराज जिनका तंत्र मंत्र यंत्र बाल बाका नहीं कर सकता वह है श्री शक्तिपुत्र जी महाराज1
- महेशराम टंडन दिबयांग कवि ।ग्राम पंडरीखार तेंदूकोना जिला महासमुंद छत्तीसगढ़ । राष्ट्रीय गीत-बलिदानों का बलिदान ।कभी ना भुलेगा हिंदुस्तान ।1
- चकरभाठा पुलिस का अवैध शराब बिक्री के विरुद्ध कार्यवाही आरोपी गौरी शंकर बघेल निवा चकरभाठा पुलिस का अवैध शराब बिक्री के विरुद्ध कार्यवाही आरोपी गौरी शंकर बघेल निवासी पिरैया को गिरफ्तार कर भेजा गया जेल सोमवार की रात 9:00 बजे चकरभाठा पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार ⚡✨ *आरोपी के कब्जे से कुल 60 लीटर कच्ची महुवा शराब कुल कीमती 12000 रुपए किया गया जप्त* ⚡✨ *आरोपी के विरुद्ध आबकारी अधिनियम की धारा 34(2) के तहत की गई कार्यवाही* *नाम आरोपी -* * 01.गौरी शंकर बघेल पिता बोधराम बघेल उम्र 21वर्ष निवासी पिरैया थाना चकरभाठा जिला बिलासपुर। *घटना का विवरण -* मामले का संक्षिप्त विवरण इस प्रकार है कि उप पुलिस महानिरीक्षक एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक महोदय बिलासपुर श्री रजनेश सिंह (भा.पु.से.) द्वारा जिले में नशे के अवैध कारोबार एवं असामाजिक तत्वों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाही के निर्देश दिए गए हैं. उक्त निर्देश के परिपालन में श्रीमान् अति.पुलिस अधीक्षक महोदय ग्रामीण बिलासपुर श्रीमति मधुलिका सिंह एवं नगर पुलिस अधीक्षक चकरभाठा पुलिस श्री राजेश कुमार जोशी के मार्गदर्शन में थाना प्रभारी चकरभाठा को मुखबीर के माध्यम से दिनाक 23.08.2026 को अवैध रूप से अधिक मात्रा में कच्ची महुवा शराब बिक्री करने व रखने के संबंध में सूचना प्राप्त हुई. थाना पुलिस टीम द्वारा प्राप्त सूचना में त्वरित कार्रवाही कर गौरीशंकर बघेल उर्फ पोडो पिता बोधीराम बघेल उम्र 21 वर्ष निवासी ग्राम पिरैया मिडिल स्कूल के पास थाना चकरभाठा जिला बिलासपुर के कब्जे से 04 नग पीले रंग के 15 बल्क लीटर क्षमता वाले प्लास्टिक के डिब्बा प्रत्येक में 15-15 लीटर हाथ भट्ठी से बना कच्ची महुंआ शराब कुल 60 लीटर कीमती 12,000/- रूपये को छत्तीसगढ आबकारी एक्ट के प्रावधानो के तहत जप्त कर आरोपी को गिरफ्तार कर माननीय न्यायालय के समक्ष पेश कर रिमाण्ड में जेल भेजा गया। 🚨 *चकरभाठा पुलिस की जनअपील - सभी नागरिकों से निवेदन है कि अवैध कार्य में लिप्त अपराधियों की सूचना तुरंत स्थानीय थाना या डायल 112 पर दें।*1