सावधान: बरेली के 'जिला बदर' अपराधी ऋषभ ठाकुर की पुरानी गिरफ्तारी का वीडियो फिर वायरल अक्टूबर 2023 की घटना को 'आज की कार्रवाई' बताकर सोशल मीडिया पर गुमराह कर रहे अराजक तत्व; सनसनी फैलाने की कोशिश #Apkiawajdigital बरेली/विशेष ब्यूरो। सोशल मीडिया पर इन दिनों बरेली के एक कथित नेता और अपराधी ऋषभ ठाकुर की गिरफ्तारी का वीडियो और खबर तेजी से साझा की जा रही है। वायरल पोस्ट में दावा किया जा रहा है कि यह 'अभी हाल ही की' घटना है और पुलिस ने रंगदारी मांगने वाले अपराधी का 'इलाज' कर उसे लंगड़ाने पर मजबूर कर दिया। हमारी पड़ताल में यह स्पष्ट हुआ है कि यह मामला पूरी तरह पुराना है और अराजक तत्व एक बार फिर भ्रामक सूचनाएं फैलाकर सनसनी पैदा करने का प्रयास कर रहे हैं। क्या है वायरल दावे का सच? पड़ताल के अनुसार, यह घटना अक्टूबर 2023 की है। आरोपी ऋषभ ठाकुर, जिसे गुंडा एक्ट के तहत बरेली से 'जिला बदर' किया गया था, वह चोरी-छिपे शहर में रहकर एक स्पा सेंटर संचालिका से रंगदारी मांग रहा था। उस समय बरेली की प्रेमनगर पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के दौरान लंगड़ाते हुए चलने का उसका वीडियो उस समय काफी चर्चित हुआ था। अराजक तत्वों का 'पुराना फॉर्मूला': साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि जानबूझकर 2 साल पुरानी पुलिसिया कार्रवाई के वीडियो को नई तारीखों के साथ वायरल किया जाता है। इसका उद्देश्य कानून-व्यवस्था के नाम पर या तो डर पैदा करना होता है या फिर पुराने सांप्रदायिक/राजनीतिक विवादों को हवा देना। वर्तमान में बरेली पुलिस द्वारा ऐसी किसी नई गिरफ्तारी की पुष्टि नहीं की गई है, यह केवल 2023 की 'बासी' खबर है। हमारी अपील: ऐसी किसी भी पोस्ट को फॉरवर्ड करने से पहले उसकी समय-सीमा (Date) की जांच अवश्य करें। पुरानी उपलब्धियों या अपराधों को 'ताज़ा' बताकर परोसना डिजिटल अपराध की श्रेणी में आता है। जागरूक नागरिक बनें और अफवाहों के इस 'वायरस' को रोकें।
सावधान: बरेली के 'जिला बदर' अपराधी ऋषभ ठाकुर की पुरानी गिरफ्तारी का वीडियो फिर वायरल अक्टूबर 2023 की घटना को 'आज की कार्रवाई' बताकर सोशल मीडिया पर गुमराह कर रहे अराजक तत्व; सनसनी फैलाने की कोशिश #Apkiawajdigital बरेली/विशेष ब्यूरो। सोशल मीडिया पर इन दिनों बरेली के एक कथित नेता और अपराधी ऋषभ ठाकुर की गिरफ्तारी का वीडियो और खबर तेजी से साझा की जा रही है। वायरल पोस्ट में दावा किया जा रहा है कि यह 'अभी हाल ही की' घटना है और पुलिस ने रंगदारी मांगने वाले अपराधी का 'इलाज' कर उसे लंगड़ाने पर मजबूर कर दिया। हमारी पड़ताल में यह स्पष्ट हुआ है कि यह मामला पूरी तरह पुराना है और अराजक तत्व एक बार फिर भ्रामक सूचनाएं फैलाकर सनसनी पैदा करने का प्रयास कर रहे हैं। क्या है वायरल दावे का सच? पड़ताल के अनुसार, यह घटना अक्टूबर 2023 की है। आरोपी ऋषभ ठाकुर, जिसे गुंडा एक्ट के तहत बरेली से 'जिला बदर' किया गया था, वह चोरी-छिपे शहर में रहकर एक स्पा सेंटर संचालिका से रंगदारी मांग रहा था। उस समय बरेली की प्रेमनगर पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के दौरान लंगड़ाते हुए चलने का उसका वीडियो उस समय काफी चर्चित हुआ था। अराजक तत्वों का 'पुराना फॉर्मूला': साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि जानबूझकर 2 साल पुरानी पुलिसिया कार्रवाई के वीडियो को नई तारीखों के साथ वायरल किया जाता है। इसका उद्देश्य कानून-व्यवस्था के नाम पर या तो डर पैदा करना होता है या फिर पुराने सांप्रदायिक/राजनीतिक विवादों को हवा देना। वर्तमान में बरेली पुलिस द्वारा ऐसी किसी नई गिरफ्तारी की पुष्टि नहीं की गई है, यह केवल 2023 की 'बासी' खबर है। हमारी अपील: ऐसी किसी भी पोस्ट को फॉरवर्ड करने से पहले उसकी समय-सीमा (Date) की जांच अवश्य करें। पुरानी उपलब्धियों या अपराधों को 'ताज़ा' बताकर परोसना डिजिटल अपराध की श्रेणी में आता है। जागरूक नागरिक बनें और अफवाहों के इस 'वायरस' को रोकें।
- Post by Raj dwivedi1
- 25 व्यापारियों के खिलाफ कथित रूप से फर्जी FIR दर्ज किए जाने से प्रदेश भर के व्यापारियों में आक्रोश है।1
- #Apkiawajdigital लखनऊ, विशेष ब्यूरो। उत्तर प्रदेश के उप-मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक द्वारा कांग्रेस और राहुल गांधी पर किए गए एक पुराने तीखे हमले को इन दिनों सोशल मीडिया पर 'ताजा बयान' बताकर तेजी से प्रसारित किया जा रहा है। व्हाट्सएप और फेसबुक पर वायरल हो रहे इस संदेश में डिप्टी सीएम को राहुल गांधी के नाम की परिभाषा (र-राग, ह-हुड़दंग...) समझाते और चीन से फंडिंग के आरोप लगाते हुए सुना जा सकता है। पड़ताल में सामने आया है कि यह प्रेस कॉन्फ्रेंस 11 जून 2024 की है, जिसे अब फरवरी 2026 में जानबूझकर नया बताकर साझा किया जा रहा है। साजिश का पर्दाफाश: क्यों फैलाया जा रहा है पुराना बयान? डिजिटल विशेषज्ञों के अनुसार, अराजक तत्व अक्सर पुराने तीखे राजनीतिक बयानों को मौजूदा माहौल में तनाव पैदा करने के लिए दोबारा सक्रिय करते हैं। इस 20 महीने पुराने वीडियो को 'अभी-अभी' (Breaking News) के टैग के साथ पेश किया जा रहा है ताकि आम जनता को लगे कि यह हालिया राजनीतिक घटनाक्रम का हिस्सा है। इस तरह की कोशिशें न केवल भ्रामक हैं, बल्कि जनता के बीच गलत धारणा बनाने की एक सोची-समझी साजिश है। क्या था असली संदर्भ? यह बयान जून 2024 में उस समय दिया गया था जब एआई (AI) समिट और विपक्षी नेताओं के विदेशी दौरों को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच जुबानी जंग तेज थी। ब्रजेश पाठक ने उस दौरान कांग्रेस की नीतियों और राहुल गांधी के बयानों की कड़ी आलोचना की थी। वर्तमान में डिप्टी सीएम की ऐसी कोई नई प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं हुई है, जिसमें इन पुराने शब्दों का प्रयोग किया गया हो। प्रशासन की अपील: न हों गुमराह साइबर सेल ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी वीडियो या प्रेस विज्ञप्ति को साझा करने से पहले उसकी तारीख और समय की पुष्टि आधिकारिक न्यूज़ पोर्टल्स या सरकारी हैंडल्स से अवश्य करें। पुराने बयानों को नया बताकर समाज में राजनीतिक विद्वेष फैलाना कानूनी रूप से दंडनीय है।1
- बांदा पुलिस अधीक्षक पलाश बंसल के निर्देशन तथा क्षेत्राधिकारी यातायात सुश्री प्रतीज्ञा सिंह के पर्यवेक्षण में यातायात नियमों के पालन को सुनिश्चित करने तथा अपराध नियंत्रण एवं सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ करने तथा असामाजिक गतिविधियों पर अंकुश लगाये जाने के उद्देश्य से आज यातायात पुलिस द्वारा जनपद में वाहनों में अवैध रूप से लगी *काली फिल्म के विरुद्ध एक सघन चेकिंग अभियान* चलाया गया । जिसमें चारपहिया वाहनों मे अवैध रुप से लगी लगी काली फिल्मों को हटवाया गया और वाहन चालकों को काली फिल्म के दुष्परिणामों व कानून प्रावधानों के बारे में जानकारी देकर जागरुक किया गया । साथ ही आम जनमानस से भी अपील की गई कि यातायात नियमों का पालन करें एवं अपने वाहनों में किसी भी प्रकार की काली फिल्म ना लगाए तथा जनपद में यातायात व कानून व्यवस्था बनाये रखने में सहयोग प्रदान करें ।1
- जिला अधिकारी अवचित निरीक्षण किया1
- Post by Shivam1
- बांदा। फिल्म “यादव जी की लव स्टोरी” को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। यादव महासभा के पदाधिकारियों एवं सदस्यों ने फिल्म की रिलीज पर रोक लगाए जाने की मांग को लेकर राष्ट्रपति के नाम संबोधित ज्ञापन जिला प्रशासन को सौंपा। ज्ञापन में फिल्म पर सांप्रदायिकता व धार्मिक उन्माद को बढ़ावा देने का आरोप लगाया गया है। यादव महासभा के प्रतिनिधियों का कहना है कि जाति विशेष को केंद्र में रखकर बनाई गई यह फिल्म सामाजिक विस्फोट की स्थिति उत्पन्न कर सकती है। उनका आरोप है कि फिल्म में यादव समाज की लड़की और मुस्लिम युवक के बीच प्रेम संबंध का कथानक दर्शाया गया है, जिससे समाज में गलत संदेश जा सकता है। महासभा के लोगों ने इसे तथाकथित “लव जिहाद” की ओर इशारा बताते हुए कड़ी आपत्ति जताई है। ज्ञापन में मांग की गई है कि सेंसर बोर्ड से फिल्म के रिलीज पर तत्काल रोक लगाई जाए, ताकि देश के अमन-चैन और सामाजिक सौहार्द का माहौल प्रभावित न हो। महासभा के पदाधिकारियों का कहना है कि इस प्रकार की फिल्मों से समाज में वैमनस्य फैलने की आशंका रहती है। राष्ट्रपति से हस्तक्षेप कर फिल्म की रिलीज पर रोक लगाने की मांग करते हुए महासभा के लोग डीएम कार्यालय पहुंचे। इस दौरान अधिवक्ता एवं अन्य सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे।1
- #Apkiawajdigital बरेली/विशेष ब्यूरो। सोशल मीडिया पर इन दिनों बरेली के एक कथित नेता और अपराधी ऋषभ ठाकुर की गिरफ्तारी का वीडियो और खबर तेजी से साझा की जा रही है। वायरल पोस्ट में दावा किया जा रहा है कि यह 'अभी हाल ही की' घटना है और पुलिस ने रंगदारी मांगने वाले अपराधी का 'इलाज' कर उसे लंगड़ाने पर मजबूर कर दिया। हमारी पड़ताल में यह स्पष्ट हुआ है कि यह मामला पूरी तरह पुराना है और अराजक तत्व एक बार फिर भ्रामक सूचनाएं फैलाकर सनसनी पैदा करने का प्रयास कर रहे हैं। क्या है वायरल दावे का सच? पड़ताल के अनुसार, यह घटना अक्टूबर 2023 की है। आरोपी ऋषभ ठाकुर, जिसे गुंडा एक्ट के तहत बरेली से 'जिला बदर' किया गया था, वह चोरी-छिपे शहर में रहकर एक स्पा सेंटर संचालिका से रंगदारी मांग रहा था। उस समय बरेली की प्रेमनगर पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के दौरान लंगड़ाते हुए चलने का उसका वीडियो उस समय काफी चर्चित हुआ था। अराजक तत्वों का 'पुराना फॉर्मूला': साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि जानबूझकर 2 साल पुरानी पुलिसिया कार्रवाई के वीडियो को नई तारीखों के साथ वायरल किया जाता है। इसका उद्देश्य कानून-व्यवस्था के नाम पर या तो डर पैदा करना होता है या फिर पुराने सांप्रदायिक/राजनीतिक विवादों को हवा देना। वर्तमान में बरेली पुलिस द्वारा ऐसी किसी नई गिरफ्तारी की पुष्टि नहीं की गई है, यह केवल 2023 की 'बासी' खबर है। हमारी अपील: ऐसी किसी भी पोस्ट को फॉरवर्ड करने से पहले उसकी समय-सीमा (Date) की जांच अवश्य करें। पुरानी उपलब्धियों या अपराधों को 'ताज़ा' बताकर परोसना डिजिटल अपराध की श्रेणी में आता है। जागरूक नागरिक बनें और अफवाहों के इस 'वायरस' को रोकें।1