अपनी जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष स्वामी प्रसाद मौर्य ने स्पष्ट किया है कि किसी भी व्यक्ति की पहचान उसके बाहरी पहनावे या वेशभूषा से नहीं, बल्कि उसके आचरण और कर्मों से होती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यदि कोई व्यक्ति साधु-संत का भेष धारण कर हिंसा, आतंक, नफरत या कानून-विरोधी गतिविधियों में लिप्त पाया जाता है, तो उसे कतई साधु नहीं माना जा सकता। स्वामी प्रसाद मौर्य ने सीधे शब्दों में कहा, "जो साधु-संत के भेष में आतंकवादियों जैसा आचरण करेगा, वह साधु हो ही नहीं सकता, वह केवल आतंकवादी होगा।" उन्होंने धर्म के मूल उद्देश्य को मानवता, शांति, प्रेम और सद्भाव का संदेश देना बताया। उनके अनुसार, जो व्यक्ति धार्मिक वेशभूषा का दुरुपयोग कर समाज में भय, हिंसा या वैमनस्य फैलाने का प्रयास करता है, वह धर्म के साथ-साथ संत परंपरा दोनों को बदनाम करता है। मौर्य ने यह भी रेखांकित किया कि किसी भी अपराधी या हिंसक व्यक्ति का मूल्यांकन उसके धर्म, जाति या वेशभूषा के आधार पर नहीं, बल्कि उसके अपराध और आचरण के आधार पर होना चाहिए। उन्होंने कहा कि कानून सभी के लिए समान है और अपराध करने वाले किसी भी व्यक्ति के विरुद्ध निष्पक्ष तथा कठोर कार्रवाई अनिवार्य है। अंत में, उन्होंने समाज से भी सतर्क रहने का आह्वान किया, कि वे किसी व्यक्ति का सम्मान केवल उसके पहनावे के आधार पर न करें, बल्कि उसके चरित्र, व्यवहार और सामाजिक योगदान को महत्व दें।
अपनी जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष स्वामी प्रसाद मौर्य ने स्पष्ट किया है कि किसी भी व्यक्ति की पहचान उसके बाहरी पहनावे या वेशभूषा से नहीं, बल्कि उसके आचरण और कर्मों से होती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यदि कोई व्यक्ति साधु-संत का भेष धारण कर हिंसा, आतंक, नफरत या कानून-विरोधी गतिविधियों में लिप्त पाया जाता है, तो उसे कतई साधु नहीं माना जा सकता। स्वामी प्रसाद मौर्य ने सीधे शब्दों में कहा, "जो साधु-संत के भेष में आतंकवादियों जैसा आचरण करेगा, वह साधु हो ही नहीं सकता, वह केवल आतंकवादी होगा।" उन्होंने धर्म के मूल उद्देश्य को मानवता, शांति, प्रेम और सद्भाव का संदेश देना बताया। उनके अनुसार, जो व्यक्ति धार्मिक वेशभूषा का दुरुपयोग कर समाज में भय, हिंसा या वैमनस्य फैलाने का प्रयास करता है, वह धर्म के साथ-साथ संत परंपरा दोनों को बदनाम करता है। मौर्य ने यह भी रेखांकित किया कि किसी भी अपराधी या हिंसक व्यक्ति का मूल्यांकन उसके धर्म, जाति या वेशभूषा के आधार पर नहीं, बल्कि उसके अपराध और आचरण के आधार पर होना चाहिए। उन्होंने कहा कि कानून सभी के लिए समान है और अपराध करने वाले किसी भी व्यक्ति के विरुद्ध निष्पक्ष तथा कठोर कार्रवाई अनिवार्य है। अंत में, उन्होंने समाज से भी सतर्क रहने का आह्वान किया, कि वे किसी व्यक्ति का सम्मान केवल उसके पहनावे के आधार पर न करें, बल्कि उसके चरित्र, व्यवहार और सामाजिक योगदान को महत्व दें।
- उत्तर प्रदेश के ग़ाज़ीपुर जिले में स्थित कुचौरा गांव की हालत पिछले 4 से 5 सालों से जस की तस बनी हुई है। गांव की इस बदहाल स्थिति को देखते हुए, यह सवाल उठाया गया है कि क्या यही 'स्वच्छ भारत' अभियान की वास्तविकता है।1
- हाल ही में एक व्यक्ति द्वारा ₹5 लाख के इनाम की घोषणा या दिए गए किसी विवादित बयान को लेकर निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की मांग की गई है। मामले में यह जोर दिया गया है कि यदि आवश्यक समझा जाए, तो कानून के अनुसार सभी जांच प्रक्रियाएँ अपनाई जानी चाहिए ताकि सच्चाई सामने आ सके। इस संदर्भ में यह भी स्पष्ट किया गया है कि देश में कानून सर्वोपरि है और किसी भी व्यक्ति के खिलाफ गंभीर आरोप केवल ठोस साक्ष्यों के आधार पर ही लगाए जाने चाहिए। जनता इस पूरे प्रकरण में निष्पक्ष जांच और न्याय की अपेक्षा करती है।1
- स्कूलों की छुट्टियां समाप्त होने के बाद अब शिक्षण संस्थान फिर से खुल गए हैं। इस अवसर पर नन्हे-नन्हे बच्चे और उनकी माताएं दोनों ही काफी उत्साहित नजर आईं। विशेष रूप से, स्कूल खुलने के साथ ही माताओं में एक खास उत्साह देखने को मिला।1
- शिक्षक मंत्री के सिस्टम को सीधे तौर पर विफल बताया गया है, और इस आशंका पर सवाल उठाया गया है कि क्या मंत्री स्वयं इस 'खेल' में लिप्त हैं। यह गंभीर आरोप लगाया गया है कि सेना का उपयोग अपने व्यक्तिगत घोटालों को छिपाने की एक योजना प्रतीत होता है, जिससे भारतवर्ष को विदेश में चर्चा होने पर शर्मसार होना पड़ेगा। पोस्ट में इस बात पर कड़ी आपत्ति और शर्मिंदगी व्यक्त की गई है कि जिस सेना का मूल कार्य सरहदों की रक्षा करना है, अब उसे NEET परीक्षा के पेपरों की देखभाल (संचालन) करने की जिम्मेदारी दी जाएगी। इसे 'कितनी शर्म की बात' बताते हुए, इस स्थिति को बेहद निंदनीय करार दिया गया है।1
- मुख्यमंत्री ने अयोध्या धाम को भारत की सनातन आस्था का प्रतीक बताते हुए एक महत्वपूर्ण संदेश दिया है। उन्होंने दोहराया कि पहले ही विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया जा चुका है और रिपोर्ट आते ही कार्रवाई तुरंत शुरू कर दी जाएगी। मुख्यमंत्री ने विश्वास दिलाते हुए कहा कि जो उन्होंने वादा किया था, उसे पूरा करते हुए 'दूध का दूध और पानी का पानी' करके रहेंगे, जिसका अर्थ है कि पूरी पारदर्शिता और न्याय के साथ हर बात स्पष्ट की जाएगी।1
- चंदौली जिले के शहाबगंज ब्लॉक अंतर्गत बेन रजवाहा में चल रहे आदर्श नहर निर्माण कार्य में गंभीर खामियां सामने आई हैं। किसानों और किसान नेता राम अवध सिंह ने इस निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए इसमें भारी गड़बड़ी का आरोप लगाया है।1
- चंदौली जिले के धीना स्थित गुरैनी गांव में अंत्येष्टि स्थल के पास चल रहे गंगा कटान रोकने के कार्य को लेकर ग्रामीणों ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया है। ग्रामीणों ने कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि निर्धारित मानकों के अनुसार बोल्डर लगाने के बजाय ठेकेदार द्वारा बालू भरकर बोरे का उपयोग किया जा रहा है, जिससे कार्य की प्रभावशीलता पर संदेह पैदा हो गया है। ग्रामीणों ने बताया कि ठीक एक वर्ष पहले भी इसी स्थान पर गंगा कटान रोकने के लिए बोल्डर लगाए गए थे, लेकिन कार्य में अनियमितता के कारण वे सभी गंगा में समाहित हो गए थे। उनका कहना है कि अब दोबारा किए जा रहे इस कार्य में भी बोल्डरों के ऊपर बालू से भरे बोरे रखे जा रहे हैं, जो भविष्य में फिर से कटान रोकने में विफल हो सकते हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन का ध्यान आकर्षित करते हुए मांग की है कि लगभग चार करोड़ रुपये की लागत से संचालित इस परियोजना को तकनीकी मानकों के अनुरूप कराया जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि गुणवत्तापूर्ण कार्य नहीं हुआ तो यह सरकारी धन की बर्बादी के साथ-साथ क्षेत्र को एक बार फिर से गंगा कटान का सामना करना पड़ सकता है। ग्रामीणों ने इस बात पर भी असंतोष व्यक्त किया कि हाल ही में चंदौली के जिलाधिकारी किसानों के धरना स्थल का निरीक्षण करने पहुंचे थे, जो कटानरोधी कार्यस्थल से महज एक किलोमीटर दूर था। ग्रामीणों द्वारा बार-बार आग्रह किए जाने के बावजूद, जिलाधिकारी ने समयाभाव का हवाला देते हुए कार्यस्थल का निरीक्षण नहीं किया। इसके बाद ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से इस पूरे मामले का संज्ञान लेकर निर्माण कार्य की गहन जांच कराने की मांग की है। ग्रामीण हरिओम मिश्रा ने भी बताया कि गंगा कटान रोकने के लिए लगाए जा रहे बोल्डरों के कार्य में भारी अनियमितता दिखाई दे रही है और चेतावनी दी कि यदि कार्य निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं कराया गया तो पूरी परियोजना प्रभावित हो सकती है। इस विरोध प्रदर्शन में बसदेव निषाद, संतोष निषाद, खरपत निषाद, राजेश निषाद, बब्लू, दशमी, महेंद्र, दिलीप, जोखन, रामशकल, रामअवध तथा बालकिशुन यादव सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।2
- अपनी जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष स्वामी प्रसाद मौर्य ने स्पष्ट किया है कि किसी भी व्यक्ति की पहचान उसके बाहरी पहनावे या वेशभूषा से नहीं, बल्कि उसके आचरण और कर्मों से होती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यदि कोई व्यक्ति साधु-संत का भेष धारण कर हिंसा, आतंक, नफरत या कानून-विरोधी गतिविधियों में लिप्त पाया जाता है, तो उसे कतई साधु नहीं माना जा सकता। स्वामी प्रसाद मौर्य ने सीधे शब्दों में कहा, "जो साधु-संत के भेष में आतंकवादियों जैसा आचरण करेगा, वह साधु हो ही नहीं सकता, वह केवल आतंकवादी होगा।" उन्होंने धर्म के मूल उद्देश्य को मानवता, शांति, प्रेम और सद्भाव का संदेश देना बताया। उनके अनुसार, जो व्यक्ति धार्मिक वेशभूषा का दुरुपयोग कर समाज में भय, हिंसा या वैमनस्य फैलाने का प्रयास करता है, वह धर्म के साथ-साथ संत परंपरा दोनों को बदनाम करता है। मौर्य ने यह भी रेखांकित किया कि किसी भी अपराधी या हिंसक व्यक्ति का मूल्यांकन उसके धर्म, जाति या वेशभूषा के आधार पर नहीं, बल्कि उसके अपराध और आचरण के आधार पर होना चाहिए। उन्होंने कहा कि कानून सभी के लिए समान है और अपराध करने वाले किसी भी व्यक्ति के विरुद्ध निष्पक्ष तथा कठोर कार्रवाई अनिवार्य है। अंत में, उन्होंने समाज से भी सतर्क रहने का आह्वान किया, कि वे किसी व्यक्ति का सम्मान केवल उसके पहनावे के आधार पर न करें, बल्कि उसके चरित्र, व्यवहार और सामाजिक योगदान को महत्व दें।1