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स्वार कोतवाली पुलिस की बड़ी कार्यवाई गौवंशीय अवशेष मिलने के मामले का किया खुलासा रामपुर की स्वार कोतवाली क्षेत्र में गेहूं कटे खाली खेत में निराश्रित गौवंशीय पशु का कटा हुआ सिर मिलने की सनसनीखेज घटना का पुलिस ने खुलासा कर दिया है। इस मामले में पुलिस ने एक आरोपी को गिरफ्तार किया है, जबकि उसका एक साथी अभी फरार बताया जा रहा है।
रवि सैनी
स्वार कोतवाली पुलिस की बड़ी कार्यवाई गौवंशीय अवशेष मिलने के मामले का किया खुलासा रामपुर की स्वार कोतवाली क्षेत्र में गेहूं कटे खाली खेत में निराश्रित गौवंशीय पशु का कटा हुआ सिर मिलने की सनसनीखेज घटना का पुलिस ने खुलासा कर दिया है। इस मामले में पुलिस ने एक आरोपी को गिरफ्तार किया है, जबकि उसका एक साथी अभी फरार बताया जा रहा है।
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- रामपुर की स्वार कोतवाली क्षेत्र में गेहूं कटे खाली खेत में निराश्रित गौवंशीय पशु का कटा हुआ सिर मिलने की सनसनीखेज घटना का पुलिस ने खुलासा कर दिया है। इस मामले में पुलिस ने एक आरोपी को गिरफ्तार किया है, जबकि उसका एक साथी अभी फरार बताया जा रहा है।1
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- *मुरादाबाद: थाना कटघर क्षेत्र में पुलिस और गौ तस्करों के बीच मुठभेड़, दो गिरफ्तार* मुरादाबाद। थाना कटघर क्षेत्र के अंतर्गत काशीपुर तिराहा चौकी पर पुलिस की सक्रियता के चलते गौ तस्करों के साथ मुठभेड़ का मामला सामने आया है। चेकिंग के दौरान संदिग्ध बाइक सवार बदमाशों ने पुलिस टीम पर फायरिंग कर दी, जिसके बाद हुई जवाबी कार्रवाई में दो तस्कर घायल हो गए और उन्हें पुलिस ने मौके से गिरफ्तार कर लिया। पुलिस टीम क्षेत्र में नियमित चेकिंग कर रही थी। इस दौरान संदिग्ध बाइक सवारों को रुकने का इशारा किया गया, जिस पर उन्होंने पुलिस टीम पर जानलेवा फायरिंग शुरू कर दी। आत्मरक्षा में पुलिस द्वारा की गई जवाबी फायरिंग में दो बदमाश घायल हुए, जिन्हें पुलिस ने घेराबंदी कर मौके से ही दबोच लिया। *एस पी सिटी कुमार रणविजय सिंह* ने बताया कि दोनों आरोपी मुरादाबाद के मुंडापांडे थाना क्षेत्र के निवासी हैं: जुनैद: निवासी- सिरसखेड़ा। कयूम: निवासी- खानपुर लक्की। बदमाशों के पास से अवैध असलहा, कारतूस और गोकशी में इस्तेमाल होने वाले उपकरण बरामद किए गए हैं। मुठभेड़ में घायल हुए दोनों आरोपियों को पुलिस अभिरक्षा में जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहाँ उनका इलाज चल रहा है। रिपोर्ट *जय हिन्द मीडिया* के लिए नूर मोहम्मद मुरादाबाद मुंढ़ापांडे से1
- बिलासपुर में सपाईयों ने स्मार्ट मीटरों के विरोध में शनिवार को तहसील भवन पर प्रदर्शन किया। आक्रोशित कार्यकर्ताओं ने तहसीलदार के माध्यम से राज्यपाल को ज्ञापन भेजा, जिसमें पुरानी मीटर व्यवस्था बहाल करने की मांग की गई है। पार्टी ने चेतावनी दी है कि यदि मांग पूरी नहीं हुई,तो स्मार्ट मीटर उखाड़कर भाजपा नेताओं के घरों के आगे फेंके जाएंगे।तराई किसान यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष और वरिष्ठ सपा नेता तजिंदर सिंह विर्क के नेतृत्व में बड़ी संख्या में कार्यकर्ता तहसील गेट के बाहर एकत्र हुए। उन्होंने जुलूस निकालकर तहसील परिसर में प्रवेश किया और मुख्य भवन के सामने स्मार्ट मीटर तथा भाजपा सरकार के विरोध में नारे लगाए।कार्यकर्ताओं ने स्मार्ट मीटरों के विरोध में लिखे नारों वाली तख्तियां भी लहराईं।प्रदर्शन के दौरान उप जिलाधिकारी अरुण कुमार संपूर्ण समाधान दिवस में उपस्थित थे।उन्होंने तहसीलदार शिव कुमार शर्मा को ज्ञापन लेने के लिए भेजा।तहसीलदार ने सपा नेता विर्क से राज्यपाल को संबोधित ज्ञापन प्राप्त किया। ज्ञापन में स्मार्ट मीटर व्यवस्था को निरस्त कर पुरानी पोस्टपेड मीटर व्यवस्था बहाल करने की मांग कीगई है।सपा नेता विर्क ने कहा कि स्मार्ट मीटर व्यवस्था भारतीय जनमानस के विरुद्ध, अव्यवहारिक और विद्युत उपभोक्ता नियमों के प्रतिकूल है।उन्होंने भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि स्मार्ट सिटी बनाने की बजाय घर-घर स्मार्ट मीटर लगाकर जनता को लूटा जा रहा है।विर्क ने कहा कि बुलेट ट्रेन चलाने की घोषणा करने वाली सरकार में स्मार्ट मीटर बुलेट से भी तेज चल रहे हैं।विर्क ने कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि यदि पुरानी पोस्टपेड मीटर व्यवस्था बहाल नहीं की गई, तो जनता स्मार्ट मीटरों को उखाड़कर भाजपा नेताओं के घरों के आगे फेंक देगी।इस दौरान सपा नेता मोहम्मद याकूब खां और व्यापार मंडल के नगराध्यक्ष मोहम्मद अनस खां ने कहा कि यह मीटर गरीब-निर्धनों के लिए परेशानियों का सबब बने हुए हैं जबकि लगातार इन्हें बदलवाने की शिकायती की जा रही,तथा जनता सड़कों पर है, परन्तु कोई समाधान नही होना सरकार की तानाशाही का सबूत है।प्रदर्शन में सांसद प्रतिनिधि अथर अली खां,साहब सिंह कोटिया,प्रेमशंकर दिवाकर, नदीमयार खां,नजीब खां, सद्दाम पाशा, हरदीप सिंह, पंकज यादव सहित लगभग दो सौ कार्यकर्ता शामिल थे।4
- बिलारी पार्ट नंबर 10 बहुत कूड़ा अधिक से ज्यादा कूड़ा डालता है यहां पर इस कूड़े की शिकायत पोर्टल पर बिकी थी पर कोई समाधान नहींनिकाला इससे बीमारियां होती हैं यहां पर कपड़े फेक जाते हैं और कूड़ा भी अधिक से ज्यादा फेंकाजाता है1
- विषय: अल्पसंख्यकों और कमज़ोर वर्गों के खिलाफ हो रही हिंसा एवं पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर चिंता। समाजवादी पार्टी के लोकप्रिय सांसद मौलाना मोहिबुल्लाह नदवी ने उत्तर प्रदेश पुलिस और केंद्र सरकार की कार्यशैली पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा है कि जहाँ-जहाँ भाजपा की सरकारें हैं, वहाँ मुसलमानों की 'लक्षित हत्याओं' (Target Killing) को महज़ एक 'हादसा' या 'एक्सीडेंट' बताकर दबाने की कोशिश की जाती है। सांसद ने किशनगंज की घटना का ज़िक्र करते हुए कहा कि समाज में एक ऐसी ज़ालिमाना और 'गैर-मुस्लिम' सोच पनप रही है जो भारत की जड़ों को खोखला कर रही है। इंसानियत का कत्ल इतना आम कर दिया गया है कि अब किसी भी शरीफ और इज़्ज़तदार इंसान की जान-माल सुरक्षित नहीं है। यह सिलसिला रेहड़ी-पटरी वालों और कूड़ा बीनने वाले गरीब इंसानों से शुरू हुआ था, लेकिन अब हमारे सम्मानित मौलाना और धार्मिक व्यक्तित्व भी सुरक्षित नहीं हैं। मौलाना का कत्ल महज़ एक मौत नहीं, बल्कि एक 'लिंचिंग' और सोची-समझी साज़िश है। बरेली शरीफ और धार्मिक आस्था में मौलाना अहमद रज़ा खां (रहमतुल्लाह अलैहि) के मज़ार और बरेली की ज़ियारत का उल्लेख करते हुए बताया गया है कि जिस तरह से एक मौलाना की हत्या हुई और उनके 'डाइंग डिक्लेरेशन' (मृत्युपूर्व बयान) के बावजूद पुलिस उचित कार्रवाई नहीं कर रही है, वह बेहद निंदनीय है। जांच पर सवाल: पुलिस प्रशासन पर सवाल उठाते हुए कहा गया कि आख़िर पुलिस फोरेंसिक जांच क्यों नहीं करती? यात्रियों के बयान दर्ज क्यों नहीं किए जा रहे? क्या प्रशासन मुसलमानों के खून को इतना सस्ता समझता है सांसद ने कड़े शब्दों में कहा कि जो लोग मज़लूमों, दलितों और कमज़ोरों के कत्ल को एक आम बात समझते हैं, उन्हें इस दुनिया में और इसके बाद की अदालतो में भी जवाब देना पड़ेगा। इससे ज़्यादा शर्मनाक बात और कुछ नहीं हो सकती। किसी नागरिक की हत्या उसके पहनावे (लिबास) या उसकी पहचान (ID) के आधार पर की जाती है, तो यह सिर्फ़ एक व्यक्ति का कत्ल नहीं बल्कि संविधान का कत्ल है। देश के कमज़ोर, दलित और मुस्लिम समाज इसे बर्दाश्त नहीं करेंगे। "किसी न किसी दिन उस इंसाफ को हासिल करने के लिए हम सड़कों पर भी उतरेंगे और अदालतों का दरवाजा भी खटखटाएंगे। कानून और लोकतंत्र ने हमें जो अधिकार दिए हैं, आखिर उनके लिए हमें खड़ा होना ही पड़ेगा। यह केवल एक अपराध नहीं, बल्कि इंसानियत का कत्ल है। आखिर कब तक ट्रेनों में इस तरह मासूमों को मारा जाता रहेगा? आखिर कब तक उनका कत्ल होता रहेगा? मैं प्रशासन, उत्तर प्रदेश सरकार, रेलवे पुलिस और माननीय गृह मंत्री जी से गुजारिश करता हूँ कि इस मामले की जांच के लिए एक विशेष 'इन्वेस्टिगेशन टीम' गठित की जाए, ताकि इस हत्याकांड की निष्पक्ष जांच हो सके। यह सिलसिला यहीं रुकना चाहिए; इस तरह की घटनाएं समाज में नहीं होनी चाहिए।अगर मानवता ही गिर गई, तो संविधान की कोई हैसियत नहीं रह जाएगी। फिर मुल्क में क्या बचेगा? हमारी साझा विरासत, हमारी इंसानियत और हमारे स्कूलों का क्या होगा? आखिर हमारे नौजवानों को इससे क्या संदेश मिलेगा? जुल्म करके कभी कोई 'जालिम' पनप नहीं सकता। अगर हम अपने समाज से इस 'ना-इंसाफी' को खत्म नहीं करेंगे, तो हमारा पनपना और खुशहाल तरक्की करना कोई मायने नहीं रखता। वेदों और सभी मजहबी (धार्मिक) किताबों में भी यही लिखा है कि जालिम कभी कामयाब नहीं हो सकता। मैं चाहता हूँ कि यह जुल्म, चाहे वह किसी भी किस्म का हो, पूरी तरह खत्म होना चाहिए। यह जानकारी सांसद मीडिया प्रभारी एडवोकेट महबूब अली पाशा ने दी1