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सतना के स्टेशन रोड पर ग्रीन टॉकीज के सामने खुलेआम सट्टे की पर्चियां काटी जा रही हैं, जिसका पूरा काम आशीष रैकवार का बताया जा रहा है। आशीष रैकवार को पुराने मशहूर सटोरिया कल्लू रैकवार का बेटा बताया गया है। लोगों ने कई बार थाना प्रभारी को इन गतिविधियों के वीडियो भेजकर इसे बंद कराने की मांग की है, लेकिन कोतवाली पुलिस आज तक इस सट्टे को बंद नहीं कर पाई है। आज जब थाना प्रभारी को सट्टे का एक वीडियो दिखाया गया, तो वे भड़क उठे और बोले कि "मुझे जलाने वाला वीडियो मत दिखाओ।" इस प्रतिक्रिया से यह साफ साबित होता है कि यह सारा अवैध खेल थाना प्रभारी की जानकारी में चल रहा है और उन्हें उनका हिस्सा समय पर मिल रहा है। इसी कारण सटोरिया खुलेआम यह भी कहता है कि पुलिस का खर्च उसके दम पर चलता है।
ऋषिकेश त्रिपाठी
सतना के स्टेशन रोड पर ग्रीन टॉकीज के सामने खुलेआम सट्टे की पर्चियां काटी जा रही हैं, जिसका पूरा काम आशीष रैकवार का बताया जा रहा है। आशीष रैकवार को पुराने मशहूर सटोरिया कल्लू रैकवार का बेटा बताया गया है। लोगों ने कई बार थाना प्रभारी को इन गतिविधियों के वीडियो भेजकर इसे बंद कराने की मांग की है, लेकिन कोतवाली पुलिस आज तक इस सट्टे को बंद नहीं कर पाई है। आज जब थाना प्रभारी को सट्टे का एक वीडियो दिखाया गया, तो वे भड़क उठे और बोले कि "मुझे जलाने वाला वीडियो मत दिखाओ।" इस प्रतिक्रिया से यह साफ साबित होता है कि यह सारा अवैध खेल थाना प्रभारी की जानकारी में चल रहा है और उन्हें उनका हिस्सा समय पर मिल रहा है। इसी कारण सटोरिया खुलेआम यह भी कहता है कि पुलिस का खर्च उसके दम पर चलता है।
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- सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र रामपुर बघेलान में रोगी कल्याण समिति द्वारा हर मरीज से लिए जा रहे ₹15 के शुल्क को लेकर पारदर्शिता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। यह पूछा जा रहा है कि क्या यह राशि वास्तव में मरीजों की सुविधाओं पर खर्च हो रही है या केवल कागजों में ही विकास दिखाया जा रहा है। इन्हीं सवालों के जवाब जानने के लिए एक व्यक्ति ने वर्ष 2020 से आज तक की रोगी कल्याण समिति की आय-व्यय, खर्चों का विवरण, बैठकों की जानकारी और शासन के दिशा-निर्देशों की जानकारी सूचना का अधिकार (RTI) के माध्यम से मांगी थी। हालांकि, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र रामपुर बघेलान के लोक सूचना अधिकारी ने इस महत्वपूर्ण जानकारी को उपलब्ध नहीं कराया। जानकारी छिपाए जाने पर सवाल और भी बड़े हो गए, जिसके बाद प्रथम अपील प्रस्तुत कर दी गई है। अब सभी की निगाहें मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, सतना पर हैं कि वे इस मामले में पारदर्शिता दिखाते हैं या नहीं। यह बताया गया है कि रोगी कल्याण समिति में स्थानीय विधायक अध्यक्ष होते हैं, विभिन्न सदस्य होते हैं, और नियमित बैठकें होती हैं, जहाँ जनता से वसूले गए धन का हिसाब-किताब रखा जाना चाहिए। लेकिन यदि यह जानकारी सार्वजनिक नहीं होगी, तो जनता यह कैसे जानेगी कि उनका पैसा कहाँ और किस तरह खर्च हो रहा है। तथ्यों और दस्तावेजों को जनता के सामने रखते हुए, यह विश्लेषण करने का आह्वान किया गया है कि क्या जनता के पैसे का सदुपयोग हो रहा है या दुरुपयोग। यह भी स्पष्ट किया गया है कि बिना जवाबदेही मांगे व्यवस्था में सुधार संभव नहीं है और सूचना छिपाना सीधे तौर पर भ्रष्टाचार को बढ़ावा देना है।1
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