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सदन में गूंजी यूपी के राशन डीलरों की आवाज: चंद्रशेखर आज़ाद ने उठाई ₹3 प्रति किलो कमीशन की मांग! "सिर्फ 90 पैसे में कैसे चलेगा काम?" चंद्रशेखर आज़ाद ने संसद में यूपी सरकार और केंद्र को घेरा।
Afzal pathan patrakaar
सदन में गूंजी यूपी के राशन डीलरों की आवाज: चंद्रशेखर आज़ाद ने उठाई ₹3 प्रति किलो कमीशन की मांग! "सिर्फ 90 पैसे में कैसे चलेगा काम?" चंद्रशेखर आज़ाद ने संसद में यूपी सरकार और केंद्र को घेरा।
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- Post by Afzal pathan patrakaar1
- Post by Saini sahab1
- Post by रंजना हडिया प्रयागराज मोबाइल नंबर,84169043591
- प्रयागराज। धूमनगंज के कोड़रा, उमरपुर, नींवा इलाके से सामने आया एक वायरल वीडियो गैस चोरी के उस काले खेल की परतें खोल रहा है, जो अब तक परदे के पीछे चल रहा था। यह कोई साधारण दृश्य नहीं—यह एक ऐसा सबूत है, जो सीधे-सीधे बताता है कि किस तरह गैस सिलेंडरों के साथ छेड़छाड़ कर ‘पलटी’ के नाम पर चोरी को अंजाम दिया जा रहा है। वीडियो में साफ दिखाई देता है—एक शख्स सिलेंडर के ऊपर सवार है, दोनों टंकियों के मुंह को कसकर जोड़ता है और फिर शुरू होता है गैस का खेल… एक टंकी से दूसरी टंकी में ‘ट्रांसफर’ नहीं, बल्कि कथित तौर पर सुनियोजित ‘चोरी’। यह तरीका जितना खतरनाक है, उतना ही चौंकाने वाला भी। यह दृश्य किसी एक पल की गलती नहीं लगता, बल्कि पूरी तैयारी और तकनीक के साथ किया जा रहा कार्य प्रतीत होता है। हर हरकत, हर एंगल यही संकेत देता है कि यह ‘हाथ की सफाई’ नहीं,बल्कि गैस की बूंद-बूंद पर नजर गड़ाए एक सुनियोजित धंधा हो सकता है। सबसे बड़ा सवाल—अगर वीडियो में इतना साफ नजर आ रहा है, तो क्या इसे नजरअंदाज किया जा सकता है? क्या यह कहा जा सकता है कि कोई गड़बड़ी नहीं हुई? जवाब खुद वीडियो दे रहा है।—ग्राहकों के हिस्से पर ‘साइलेंट वार’—यदि इस तरह सिलेंडरों की ‘पलटी’ की जा रही है, तो इसका सीधा असर आम उपभोक्ता पर पड़ना तय है। हर सिलेंडर में पहुंचने वाली गैस की मात्रा पर सवाल खड़ा होना लाजिमी है। यानी जो हक जनता का है, वही धीरे-धीरे ‘कट’ किया जा रहा है—बिना शोर, बिना आवाज।—अब वक्त है—जांच और कार्रवाई का— जरूरत है कि सक्षम अधिकारी इस वायरल वीडियो को ठोस आधार मानते हुए तत्काल संज्ञान लें। तकनीकी और प्रशासनिक स्तर पर इसकी गहराई से जांच हो, वीडियो की सच्चाई की पुष्टि की जाए और जो भी इस खेल में शामिल हों, उन पर सख्त से सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि इस तरह के कृत्यों पर तुरंत प्रभाव से रोक लगे, ताकि आगे किसी भी उपभोक्ता के हक पर इस तरह ‘चुपचाप डाका’ न डाला जा सके। यह सिर्फ एक वीडियो नहीं—यह एक खुलासा है। सवाल उठ चुका है, अब जवाब देना जरूरी है।1
- Post by गुरु ज्ञान1
- मजदूरों के गुलामी के दस्तावेज है चारो श्रमिक कोड बिल* -- *मनोज पांडेय* प्रयागराज। केंद्रीय ट्रेंड यूनियंस और इंडियन रेलवे इम्पलाइज फेडरेशन के राष्ट्रीय आह्वान पर आज भारतीय रेलवे से सभी जोनो/उत्पादन इकाइयो में न्यू पेन्शन स्किम, चार श्रम सहिंता और निजीकरण/निगमीकरण का ज़ोरदार विरोध कर प्रदर्शन किया | उत्तर मध्य रेलवे के प्रयागराज मण्डल में नार्थ सेंट्रल रेलवे वर्कर्स यूनियन के नेतृत्व रेलवे कर्मचारियों ने प्रयागराज जं हाबड़ा इंड पर न्यू पेन्शन स्किम एवं चारों श्रमिक कोड बिल के विरोध में शांतिपूर्ण व लोकतांत्रिक तरीक़े बाह में काली पट्टी बांधकर विरोध प्रदर्शन किया, विरोध प्रदर्शन को सम्बोधित करते हुए *इंडियन रेलवे इम्पलाइज फेडरेशन IREF व नार्थ सेंट्रल रेलवे वर्कर्स यूनियन NCRWU केंद्रीय महामंत्री कॉमरेड मनोज पाण्डेय ने कहा कि* चारो श्रमिक कोड़ बिल आधुनिक ग़ुलामी के प्रतीक है, उन्होंने कहा वर्षों के संघर्ष और शहादत के बाद जो कानून मजदूरों के हित में बनाए गए थे उन्हें देश बेचवा सरकार कारपोरेट घरानों के पक्ष में खत्म करके चार श्रमिक कोड़ बिल 2020 बनाई है इन चारों श्रम संहिता जिसे आज से देश भर में लागू किया जा रहा है, 1-औद्योगिक संबंध संहिता 2020, 2-व्यवसायिक संरक्षा, स्वास्थ्य और कार्यदशा संहिता 2020, 3-सामाजिक सुरक्षा संहिता 2020, 4-वेतन संहिता 2020, का हम विरोध करते है, कामरेड मनोज ने कहा कि सरकारी कर्मचारियों के लिए न्यू पेन्शन स्किम (एन पी एस ) आत्मघाती योजना है इस लिए संगठन इसका विरोध करता है और पुरानी पेन्शन स्किम (ओ पी एस ) लागु होने तक आन्दोलन के लिए प्रतिबद्ध है | विरोध प्रदर्शन को सम्बोधित करते हुए *इंडियन रेलवे इम्पलाइज फेडरेशन IREF व नार्थ सेंट्रल रेलवे वर्कर्स यूनियन NCRWU केंद्रीय संगठन मंत्री डॉ कमल उसरी ने कहा कि* पूर्व में मजदूरों कर्मचारियों के हित के लिए जो कानून बनाए गए थे उनमें से 29 केंद्रीय कानूनो का स्वतंत्र अस्तित्व स्वतः समाप्त हो गया, शेष 15 कानूनों में बदलाव किया है यानी कि अब तक जो 44 श्रमिक कानून लागू थे खत्म हो गए है मुख्य रूप अब मजदूरों के सामान्य कार्य दिवस 10 घण्टे से 12 घण्टे अथवा कुछ भी हो सकते है, अब श्रम विभाग के निरीक्षक की भूमिका सिर्फ मदद कर्ता अथवा फेसिलेटर तक़ सीमित कर दी गई है, सामाजिक सुरक्षा में कर्मचारी भविष्य निधि ( ई पी एफ़) में योगदान को 12%से घटाकर 10% कर दिया गया है| लेकिन हम लोग सरकार की तानाशाही रवैये के खिलाफ संघर्ष जारी रखेंगे, विरोध प्रदर्शन का संचालन नार्थ सेंट्रल रेलवे वर्कर्स यूनियन के केंद्रीय सहायक महामंत्री कॉमरेड शिवेंद्र प्रताप सिंह ने किया और अध्यक्षता नार्थ सेंट्रल रेलवे वर्कर्स यूनियन के केंद्रीय संयुक्त महामंत्री कॉमरेड संजय तिवारी ने किया, विरोध प्रदर्शन में मुख्य रूप से कॉमरेड मनोज पाण्डेय, डॉ कमल उसरी, कॉमरेड संजय तिवारी, श्रीमती सुधा देवी जोनल अध्यक्ष महिला मोर्चा, शिवेंद्र प्रताप सिंह, सैय्यद इरफ़ात अली ,संदीप सिंह, दीपक कुमार , सुनील गुप्ता , गोपाल शर्मा, नितिन कुमार, राजू यादव, , पी एन सिंह, पीयूष सोनी, सिद्धार्थ शर्मा, इफ़्तेख़ार अहमद , राजकुमार , सुनील आर्यन आदि मौजूद रहे।1
- Post by Sanjay Lal1
- Post by Saini sahab1