झालावाड़ पुलिस ने एक बड़े अंतर्राज्यीय मानव तस्करी रैकेट का भंडाफोड़ किया है, जिसके तहत 10 लड़कियों को सुरक्षित मुक्त कराया गया है, जिनमें से 7 नाबालिग हैं। इस कार्रवाई में अब तक 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि एक अन्य को डिटेन किया गया है। इस सफल अभियान में झालावाड़ पुलिस के सहायक उप निरीक्षक (एएसआई) मदनलाल और हेड कांस्टेबल बाबूलाल की भूमिका सबसे अहम रही। पुलिस अधीक्षक अमित कुमार के निर्देशन में जब मानव तस्करी से जुड़ी खबरों के आधार पर जांच शुरू हुई, तब सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि सामाजिक दबाव, डर और बदनामी के भय से पीड़ित परिवार पुलिस को जानकारी देने से बच रहे थे। ऐसे कठिन हालात में एएसआई मदनलाल और हेड कांस्टेबल बाबूलाल को गोपनीय जांच की जिम्मेदारी सौंपी गई। दोनों पुलिसकर्मियों ने कंजर समुदाय के डेरों और बस्तियों में लगातार संपर्क स्थापित किया और पुलिस अधिकारी की भूमिका में नहीं, बल्कि समाज के भरोसेमंद सहयोगी बनकर लोगों से संवाद किया। उनकी जांच में पता चला कि स्थानीय एजेंट आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की नाबालिग लड़कियों को रोजगार, बेहतर जीवन और अच्छी परवरिश का झांसा देकर अपने साथ ले जाते थे, और बाद में इन लड़कियों को मुंबई व अन्य महानगरों में सक्रिय एजेंटों के हाथों बेच देते थे। जवानों ने यह भी उजागर किया कि गिरोह फर्जी आधार कार्ड और अन्य दस्तावेज बनाकर नाबालिग लड़कियों को बालिग साबित करता था, जिससे वे कानून की आंखों में धूल झोंकते थे। मामले में एक महत्वपूर्ण मोड़ तब आया जब मुंबई पुलिस द्वारा मुक्त कराई गई लड़कियों को उनके परिजनों को सौंपने के लिए राजस्थान लाया जा रहा था। इसी दौरान, मदनलाल और बाबूलाल को सूचना मिली कि गिरोह के सदस्य दोबारा इन लड़कियों को अपने कब्जे में लेने की कोशिश कर सकते हैं। इस तत्काल और सटीक सूचना के आधार पर पुलिस ने रणनीति तैयार की, लड़कियों की सुरक्षा सुनिश्चित की और गिरोह के एजेंटों को दबोच लिया, जिससे मुक्त कराई गई लड़कियां फिर से उसी दलदल में धकेले जाने से बच गईं। पुलिस का मानना है कि यह बड़ी कार्रवाई भविष्य में मानव तस्करी के खिलाफ एक मिसाल बनेगी। इस पूरे ऑपरेशन में कई अधिकारियों और पुलिस टीमों ने योगदान दिया, लेकिन एएसआई मदनलाल और हेड कांस्टेबल बाबूलाल की सतर्कता, समर्पण और साहस विशेष रूप से उल्लेखनीय रहा, जिनकी जमीनी स्तर पर की गई गोपनीय मेहनत ने एक संगठित अपराधी नेटवर्क को बेनकाब किया और कई मासूम लड़कियों का जीवन बर्बाद होने से बचाया।
झालावाड़ पुलिस ने एक बड़े अंतर्राज्यीय मानव तस्करी रैकेट का भंडाफोड़ किया है, जिसके तहत 10 लड़कियों को सुरक्षित मुक्त कराया गया है, जिनमें से 7 नाबालिग हैं। इस कार्रवाई में अब तक 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि एक अन्य को डिटेन किया गया है। इस सफल अभियान में झालावाड़ पुलिस के सहायक उप निरीक्षक (एएसआई) मदनलाल और हेड कांस्टेबल बाबूलाल की भूमिका सबसे अहम रही। पुलिस अधीक्षक अमित कुमार के निर्देशन में जब मानव तस्करी से जुड़ी खबरों के आधार पर जांच शुरू हुई, तब सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि सामाजिक दबाव, डर और बदनामी के भय से पीड़ित परिवार पुलिस को जानकारी देने से बच रहे थे। ऐसे कठिन हालात में एएसआई मदनलाल और हेड कांस्टेबल बाबूलाल को गोपनीय जांच की जिम्मेदारी सौंपी गई। दोनों पुलिसकर्मियों ने कंजर समुदाय के डेरों और बस्तियों में लगातार संपर्क स्थापित किया और पुलिस अधिकारी की भूमिका में नहीं, बल्कि समाज के भरोसेमंद सहयोगी बनकर लोगों से संवाद किया। उनकी जांच में पता चला कि स्थानीय एजेंट आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की नाबालिग लड़कियों को रोजगार, बेहतर जीवन और अच्छी परवरिश का झांसा देकर अपने साथ ले जाते थे, और बाद में इन लड़कियों को मुंबई व अन्य महानगरों में सक्रिय एजेंटों के हाथों बेच देते थे। जवानों ने यह भी उजागर किया कि गिरोह फर्जी आधार कार्ड और अन्य दस्तावेज बनाकर नाबालिग लड़कियों को बालिग साबित करता था, जिससे वे कानून की आंखों में धूल झोंकते थे। मामले में एक महत्वपूर्ण मोड़ तब आया जब मुंबई पुलिस द्वारा मुक्त कराई गई लड़कियों को उनके परिजनों को सौंपने के लिए राजस्थान लाया जा रहा था। इसी दौरान, मदनलाल और बाबूलाल को सूचना मिली कि गिरोह के सदस्य दोबारा इन लड़कियों को अपने कब्जे में लेने की कोशिश कर सकते हैं। इस तत्काल और सटीक सूचना के आधार पर पुलिस ने रणनीति तैयार की, लड़कियों की सुरक्षा सुनिश्चित की और गिरोह के एजेंटों को दबोच लिया, जिससे मुक्त कराई गई लड़कियां फिर से उसी दलदल में धकेले जाने से बच गईं। पुलिस का मानना है कि यह बड़ी कार्रवाई भविष्य में मानव तस्करी के खिलाफ एक मिसाल बनेगी। इस पूरे ऑपरेशन में कई अधिकारियों और पुलिस टीमों ने योगदान दिया, लेकिन एएसआई मदनलाल और हेड कांस्टेबल बाबूलाल की सतर्कता, समर्पण और साहस विशेष रूप से उल्लेखनीय रहा, जिनकी जमीनी स्तर पर की गई गोपनीय मेहनत ने एक संगठित अपराधी नेटवर्क को बेनकाब किया और कई मासूम लड़कियों का जीवन बर्बाद होने से बचाया।
- कोटा-झालावाड़ राष्ट्रीय राजमार्ग 52 पर स्थित दरा अभ्यारण्य क्षेत्र में एक बार फिर भीषण जाम लग गया। गुरुवार रात को अभ्यारण्य क्षेत्र में एक ट्रक खराब हो जाने से एक लेन बंद हो गई, जिसके कारण राजमार्ग पर दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लगनी शुरू हो गईं। बीती रात से हो रही लगातार बारिश ने स्थिति को और भी खराब कर दिया। इसके बाद दरा नाल के पास भूसे से लदी एक पिकअप गाड़ी भी खराब हो गई, जिसने जाम को और बढ़ा दिया। इस गंभीर जाम के कारण भटवाड़ा अमझार सड़क पर 10 किलोमीटर लंबी वाहनों की कतार लग गई, वहीं कोटा-झालावाड़ सड़क पर भी 7-7 किलोमीटर तक वाहन फंसे रहे। वाहन रेंग-रेंग कर चल रहे थे, जिससे सैकड़ों यात्रियों को घंटों तक इंतजार करना पड़ा और उन्हें भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।4
- झालावाड़ पुलिस ने एक बड़े और खौफनाक अंतरराज्यीय मानव तस्करी रैकेट का भंडाफोड़ करते हुए महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है। पुलिस ने मुंबई, ग्वालियर, बूंदी और टोंक तक फैले इस नेटवर्क के चंगुल से कुल 10 लड़कियों को सुरक्षित छुड़ाया है, जिनमें 7 नाबालिग लड़कियां शामिल हैं। पुलिस अधीक्षक अमित कुमार ने बताया कि एक मीडिया रिपोर्ट में झालावाड़ से गिरोह के तार जुड़ने के संकेत मिलने के बाद अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (महिला अनुसंधान सेल) श्योराजमल मीणा के नेतृत्व में एक विशेष जांच टीम (SIT) का गठन किया गया था। इस मामले में सनसनीखेज खुलासे तब हुए जब 2 जून को मुंबई पुलिस की एक टीम कुछ लड़कियों को पुनर्वास के लिए राजस्थान लेकर आई और झालावाड़ पुलिस को सूचना मिली कि तस्कर गिरोह इन लड़कियों को दोबारा अगवा करने की फिराक में है। झालावाड़ पुलिस ने तुरंत मुंबई पुलिस के साथ समन्वय स्थापित कर मोर्चा संभाला। रेस्क्यू की गई लड़कियों के दस्तावेजों की जांच में पता चला कि गिरोह नाबालिग लड़कियों के पहचान पत्रों में हेरफेर कर उनकी उम्र बढ़ा देता था और कागजों में उन्हें बालिग दिखाकर डांस बार तथा अनैतिक धंधों में धकेल देता था। उनकी असली पहचान छिपाने के लिए लड़कियों के नाम और पते तक बदल दिए जाते थे। पुलिस की गिरफ्त में आए पांच आरोपियों और एक हिरासत में लिए गए संदिग्ध ने पूछताछ में खुलासा किया कि यह रैकेट तीन शातिर स्तरों पर काम करता था। पहले स्तर पर, स्थानीय दलाल ग्रामीण इलाकों में अत्यधिक गरीबी या भारी कर्ज में डूबे परिवारों को चिह्नित करते थे। दूसरे स्तर पर, बिचौलिए इन लाचार परिवारों को बेहतर भविष्य और रोजगार का झांसा देकर तथा पैसों का लालच देकर उनकी बेटियों को अपने साथ ले जाते थे। इसके बाद तीसरे स्तर पर, इन लड़कियों को ग्वालियर और मुंबई जैसे महानगरों के बड़े एजेंटों और डांस बार संचालकों को बेच दिया जाता था, जो उन्हें इस नर्क में फंसा देते थे। तस्करी के इस घिनौने खेल में क्रूरता की सारी हदें तब पार हो गईं जब पुलिस ने छापेमारी के दौरान सौदेबाजी के कुछ एग्रीमेंट बरामद किए। इन दस्तावेजों में एक खौफनाक शर्त लिखी थी कि पीड़ित लड़की के परिवार पर चढ़ा कर्ज केवल तभी माफ माना जाएगा जब लड़की आत्महत्या कर ले या उसकी मौत हो जाए। पुलिस का कहना है कि मानव तस्करी के खिलाफ यह एक ऐतिहासिक कामयाबी है और इस नेटवर्क की अन्य कड़ियों तथा मुंबई-ग्वालियर से जुड़े बाकी आरोपियों तक पहुंचने के लिए अलग-अलग राज्यों में छापेमारी और जांच की कार्रवाई लगातार जारी है।1
- राजस्थान के झालावाड़ जिले की ग्राम पंचायत सुमर के एक नागरिक ने आरोप लगाया है कि उनके घर के रास्ते में, जहाँ एक नव निर्मित आंगनबाड़ी केंद्र भी स्थित है, वहाँ रामेश्वर कटारिया ने मकान का गेट लगाकर रास्ते पर सीढ़ी का निर्माण कर लिया है। शिकायतकर्ता के अनुसार, यह रास्ता उनके परिवार द्वारा लगभग 50 वर्ष से अधिक समय से उपयोग किया जा रहा है। इस अतिक्रमण के कारण आंगनबाड़ी केंद्र में पोषाहार पहुँचाने वाली गाड़ी के साथ-साथ आमजन के वाहनों को आने-जाने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने इस संबंध में ग्राम पंचायत, पंचायत समिति और एसडीएम को भी शिकायतें दी थीं, लेकिन अभी तक इस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है। इस सीढ़ी की समस्या के चलते आए दिन लोगों के बीच लड़ाई-झगड़े और गाली-गलौज की घटनाएँ होती रहती हैं, जिसके मद्देनजर आम रास्ते से अतिक्रमण हटाने की मांग की गई है।2
- राजस्थान के बारां जिले के सेटकोलू गांव की मुख्य पुलिया, जिसका निर्माण कार्य कुछ महीने पहले ही पूरा हुआ था, मात्र चार महीने में ही धंस गई है। यह पुलिया बीचों-बीच 2-3 इंच नीचे बैठ गई है और इस पर बड़े-बड़े गड्ढे बन गए हैं। जानकारी के अनुसार, कुछ गाड़ियों के दबाव से ही यह स्थिति उत्पन्न हुई है, जिससे यहाँ से गुजरने वाले भारी वाहनों और आम जनता की जान पर हर वक्त खतरा मंडरा रहा है। इस घटना से लाखों रुपये के सरकारी बजट से बनी इस पुलिया के निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं, और प्रशासन से सीधे पूछा गया है कि इस भ्रष्टाचार के लिए कौन-कौन जिम्मेदार है।1
- छबड़ा नगर पालिका क्षेत्र में करोड़ों रुपये की सरकारी भूमि पर हुए अवैध कब्जों को लेकर कांग्रेस ने मोर्चा खोल दिया है। पूर्व विधायक करण सिंह राठौड़ के नेतृत्व में, ब्लॉक अध्यक्ष मनोज भार्गव और नगर अध्यक्ष हरीश माहेश्वरी के मार्गदर्शन में, गुरुवार को कांग्रेस का एक प्रतिनिधिमंडल उपखंड अधिकारी छबड़ा और नगर पालिका अधीक्षक को ज्ञापन सौंपने पहुंचा। ज्ञापन में मांग की गई कि छबड़ा क्षेत्र की कीमती सरकारी भूमि को तुरंत अवैध कब्जों से मुक्त कराया जाए और भूमाफियाओं के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। प्रतिनिधिमंडल ने प्रशासन को यह भी चेतावनी दी कि यदि समय पर कार्रवाई नहीं हुई, तो सरकारी संपत्ति को भारी नुकसान हो सकता है। कांग्रेस नेताओं ने स्पष्ट किया कि अगर अगले 15 दिनों के भीतर प्रशासन ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया, तो 23 जून 2026 को छबड़ा में बड़े पैमाने पर घेराव और प्रदर्शन किया जाएगा। ज्ञापन के साथ प्रशासन को क्षेत्र में सक्रिय प्रमुख भूमाफियाओं की एक सूची भी सौंपी गई है। इस अवसर पर पूर्व विधायक करण सिंह राठौड़, ब्लॉक अध्यक्ष मनोज भार्गव, नगर अध्यक्ष हरीश माहेश्वरी, गोविंद सोनी दरबार, पार्षद नवीन उपाध्याय, मंडल अध्यक्ष गौरीशंकर नागर, मुकेश मीणा, फूलसिंह मीणा, लाखन सिंह यादव, नंदकिशोर लोधा, सरपंच राधेश्याम मीणा, पार्षद खादिल राणा, दीपक त्यागी, केसरी सिंह बना, रामदयाल नागर, मानसिंह गुर्जर, सतीश मालव, संजय सेन, वसीम खान, सब्बू यादव, दीप तेलनी, हिम्मत गुर्जर, प्रकाश चाचौड़ा, हरगोविंद, सुगनचंद, राजू गुर्जर, रामनरेश मीणा, मुरली मीणा, घनश्याम मीणा, रवि लोधा, जगदीश तेजस्वी, सतीश चाचौड़ा, योगेश नामदेव, राहुल, कुलदीप गुर्जर, लालजी राम लोधा, जुनेद खान सहित दर्जनों कांग्रेस कार्यकर्ता उपस्थित रहे।3
- विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर स्थानीय श्री प्रेम सिंह सिंघवी महाविद्यालय, छीपाबड़ौद में नोडल प्राचार्य जोधराज नागर के निर्देशन में 'एक पेड़ लोकतंत्र के नाम' गतिविधि का सफल आयोजन किया गया। इस दौरान कार्यक्रम प्रभारी श्री दारा सिंह मीणा ने प्रकृति के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि प्रकृति स्वस्थ रहेगी तभी हम सभी स्वस्थ रह पाएंगे। इस विशेष अवसर पर महाविद्यालय परिसर में चंपा का पौधा लगाया गया, साथ ही आम के गुठली, नीम के निंबोली और बेलपत्र के बीजों सहित कई पौधों का बीज रोपण भी किया गया। आयोजन के दौरान समस्त स्टाफ सदस्यों, जिनमें राकेश मालव, प्रियंका नामा और मीनाक्षी शर्मा प्रमुख थे, ने पेड़-पौधों को सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी ली। इस पर्यावरण-संरक्षण गतिविधि में छात्र-छात्राएं भी सक्रिय रूप से उपस्थित रहे।2
- अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस की तैयारियों के क्रम में छिपबड़ौद स्टेडियम में भस्त्रिका प्राणायाम का अभ्यास किया गया।1
- प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय शिव दर्शन भवन, काका कॉलोनी, खिलचीपुर द्वारा पर्यावरण संरक्षण और प्रकृति संवर्धन के लिए एक महत्वपूर्ण जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अवसर पर, ब्रह्माकुमारी नीलम दीदी ने वृक्षारोपण और जल संरक्षण के महत्व पर विशेष प्रकाश डाला। उन्होंने जोर दिया कि स्वच्छ और हरित पर्यावरण ही मानव जीवन की आधारशिला है, जिसमें शुद्ध वायु, स्वच्छ जल, उपजाऊ भूमि, पेड़-पौधे और जीव-जंतु सभी शामिल हैं। नीलम दीदी ने स्पष्ट किया कि यदि पर्यावरण सुरक्षित रहेगा, तभी मानव जीवन भी सुरक्षित रह पाएगा। हालांकि, वर्तमान में बढ़ते प्रदूषण, वनों की कटाई, प्लास्टिक के अत्यधिक उपयोग और प्राकृतिक संसाधनों के दोहन के कारण पर्यावरण को गंभीर नुकसान पहुँच रहा है। विश्व पर्यावरण दिवस के संदेश को दोहराते हुए, कार्यक्रम में यह बताया गया कि प्रकृति की रक्षा करना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। लोगों से अधिक से अधिक वृक्ष लगाने, जल बचाने, प्लास्टिक का उपयोग कम करने और अपने आसपास स्वच्छता बनाए रखने का आग्रह किया गया, क्योंकि छोटी-छोटी आदतें भी बड़े सकारात्मक बदलाव ला सकती हैं। इसके साथ ही, बाहरी पर्यावरण की शुद्धता के साथ-साथ मन और विचारों की शुद्धता को भी आवश्यक बताया गया, ताकि सकारात्मक विचार हमें प्रकृति के प्रति संवेदनशील बना सकें और पर्यावरण संरक्षण में योगदान दे सकें। इस प्रेरणादायक अवसर पर, सभी ने 'एक व्यक्ति – एक पौधा' अभियान अपनाने, प्रकृति का सम्मान करने और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक स्वच्छ, हरा-भरा और स्वस्थ वातावरण सुनिश्चित करने का संकल्प लिया। कार्यक्रम में ब्रह्माकुमारी मधु प्रेम जी मालाकार, श्याम जी दांगी, गणपत लाल जी पिपलोटिया, बलवंत पिपलोटिया, राजेंद्र टेलर, पूनमचंद जी सहित संस्था से जुड़े कई भाई-बहन उपस्थित रहे।1
- कोटा जिले के चेचट क्षेत्र से गुजर रहे दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे के यातायात को गलत तरीके से मोड़ने के कारण गंभीर समस्याएँ पैदा हो रही हैं। 8-लेन से आने वाले वाहनों को भटवाड़ा-अमझार सड़क से निकाला जा रहा है, जबकि कोटा की ओर जाने वाले वाहनों के लिए ढाबादेह-मोड़क मार्ग निर्धारित है। हालांकि, अमझार सड़क पर तैनात गार्ड अक्सर 8-लेन के वाहनों को गलत तरीके से अमझार-भटवाड़ा की सिंगल-लाइन सड़क पर मोड़ देते हैं, जिसके कारण इस सड़क पर आए दिन दुर्घटनाएँ हो रही हैं। बीती रात भी इसी वजह से भटवाड़ा में एक वाहन गलत दिशा से आते हुए दुर्घटना का शिकार हो गया और एक दीवार तोड़कर अंदर घुस गया। इस घटना के बाद, ग्रामीणों ने सड़क जाम कर दी। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुँची और लोगों को समझा-बुझाकर जाम खुलवाया। पुलिस ने यह आश्वासन भी दिया कि अब से 8-लेन पर जाने वाले वाहनों को केवल ढाबादेह से होकर ही निकाला जाएगा। हालांकि, पुलिस द्वारा दिए गए इस आश्वासन के बावजूद, गुरुवार को फिर से वही स्थिति देखने को मिली। इस लगातार गलत डायवर्जन के कारण भटवाड़ा में बार-बार जाम लग रहा है, जिससे अमझार-भटवाड़ा सड़क पर गलत दिशा से आने वाले वाहनों से हादसों का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है।2