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बुढींडीह के ग्रामीणों के सहमति के बाद छाई लदाई कार्य करने में बनी सहमति। दुगदा मिडलिंग वर्कर्स कमेटी ट्रेड यूनियन के बैनर तले बुढींडीह गांव के विभिन्न टोलों के ग्रामीणों की बैठक शनिवार को 5 बजे दुगदा रेलवे साइडिंग परिसर में संपन्न हुई। जिसकी अध्यक्षता ट्रेड यूनियन के अध्यक्ष रंजित हांसदा ने की। यहां बुढींडीह गांव के महिला - पुरुष के अलावे यूनियन के पदाधिकारी एवं सदस्यों ने भाग लिया। उपस्थित सभी ग्रामीणों ने एक स्वर में दुगदा रेल साइडिंग से छाई ढुलाई का समर्थन करते हुए रविवार से छाई ट्रांसपोर्टिंग प्रारंभ करने पर सहमति बनी। इस दौरान काफी संख्या में लोग शामिल हुए थे।
Churaman Thakur Press
बुढींडीह के ग्रामीणों के सहमति के बाद छाई लदाई कार्य करने में बनी सहमति। दुगदा मिडलिंग वर्कर्स कमेटी ट्रेड यूनियन के बैनर तले बुढींडीह गांव के विभिन्न टोलों के ग्रामीणों की बैठक शनिवार को 5 बजे दुगदा रेलवे साइडिंग परिसर में संपन्न हुई। जिसकी अध्यक्षता ट्रेड यूनियन के अध्यक्ष रंजित हांसदा ने की। यहां बुढींडीह गांव के महिला - पुरुष के अलावे यूनियन के पदाधिकारी एवं सदस्यों ने भाग लिया। उपस्थित सभी ग्रामीणों ने एक स्वर में दुगदा रेल साइडिंग से छाई ढुलाई का समर्थन करते हुए रविवार से छाई ट्रांसपोर्टिंग प्रारंभ करने पर सहमति बनी। इस दौरान काफी संख्या में लोग शामिल हुए थे।
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- गिरिडीह: झारखंड सरकार के नगर विकास एवं आवास, उच्च एवं तकनीकी शिक्षा तथा पर्यटन, कला-संस्कृति, खेलकूद एवं युवा कार्य विभाग के मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू का निधन हो गया। उन्होंने गिरिडीह के एक निजी अस्पताल में अंतिम सांस ली मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू की तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें गिरिडीह के निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इलाज के दौरान उनकी स्थिति गंभीर बनी हुई थी। आखिरकार उन्होंने दम तोड़ दिया। शिक्षक दिवस कार्यक्रम में हुए थे शामिल1
- बड़ी खबर: नही रहे मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू, गिरीडीह में हार्ट अटैक से हुई मौत झारखंड की राजनीति से एक शोक भरी खबर आई है. राज्य सरकार के मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू अब इस दुनिया में नहीं रहे. झारखंड सरकार के नगर विकास, आवास, उच्च एवं तकनीकी शिक्षा तथा पर्यटन, कला-संस्कृति, खेलकूद एवं युवा कार्य विभाग के मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू का निधन हो गया. उन्होंने गिरिडीह के एक निजी अस्पताल में अंतिम सांस ली. मंत्री सुदिव्य सोनू की तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें गिरिडीह के निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था. इलाज के दौरान उनकी स्थिति गंभीर बनी हुई थी. आखिरकार उन्होंने दम तोड़ दिया. इस से पहले हेमंत सरकार में मंत्री रहते, हाजी हुसेन अंसारी, जगरनाथ महतो और रामदास सोरेन का भी निधन हो चुका है.1
- मंईयां योजनाः बंद हो सकती है आपकी अगली किश्त ! Share l मंईयां योजनाः बंद हो सकती है आपकी अगली किश्त ! ब्लॉक के चक्कर काटने से पहले जान लें ये 4 जरूरी बातें शेयर1
- गूंज परिवार सिल्ली की ओर से शिक्षक सम्मान समारोह का आयोजन किया गया सिल्ली:-गूंज परिवार की ओर से किसान भवन सिल्ली में शनिवार के दिन शिक्षक सम्मान समारोह का आयोजन किया गया।इस सम्मान समारोह में मुख्य अतिथि झारखंड सरकार के पूर्व उपमुख्यमंत्री सुदेश कुमार महतो उपस्थित रहे।कार्यक्रम का संचालन गूंज परिवार के सुनील सिंह के द्वारा किया गया।कार्यक्रम की शुरुआत सर्वप्रथम देश के प्रथम उपराष्ट्रपति एवं महान शिक्षाविद डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन को नमन करते हुए द्वीप प्रज्वलित कर एवं केक काटकर किया गया।मुख्य अतिथि ने शिक्षकों को संबोधित करते हुए कहा कि आप लोगों के द्वारा ही शिक्षा देकर समाज को गढ़ने का काम किया जाता है एवं आपके अच्छे मार्गदर्शन से ही विद्यार्थी अपने जीवन में नई-नई कीर्तिमान स्थापित करते हुए आगे बढ़ते हैं।उन्होंने शिक्षकों से यह अपील भी किया कि हमलोग सामूहिक रूप से अच्छे शिक्षा के तहत शिक्षा को बढ़ावा देंगे ताकि राज्य के साथ-साथ हमारा देश भी विकसित हो सके।कार्यक्रम के अंत में मुख्य अतिथि के द्वारा शिक्षक दिवस के महत्व पर प्रकाश डालते हुए सभी सम्मानित शिक्षक शिक्षिकाओं को शुभकामनाएं देते हुए उन्हें उपहार देकर सम्मानित भी किया।इस मौके पर पूर्व जिप सदस्य गौतम कृष्ण साहू, सुशील महतो,ब्रजेश्वर प्रसाद, पूर्व शिक्षक विजय चंद्र महतो, समीर सिंह,विकास महतो, नीतीश महतो एवं नीरज समेत आसपास के सैकड़ो शिक्षक गण मौजूद रहे।3
- रिपोर्ट - राजन सिन्हा लोकेशन - गिरिडीह गिरिडीह से इस वक्त बेहद दुखद खबर सामने आई है। गिरिडीह विधायक और झारखंड सरकार के मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू का दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया है। बताया जा रहा है कि रविवार देर रात गिरिडीह के एक निजी अस्पताल में उन्होंने अंतिम सांस ली। जैसे ही उनके निधन की खबर लोगों तक पहुंची, बड़ी संख्या में समर्थक, शुभचिंतक और आम लोग अस्पताल पहुंचने लगे। मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू के निधन की खबर से पूरे गिरिडीह में शोक की लहर है। अस्पताल के बाहर लोगों की भीड़ जुटने लगी है। हर कोई इस खबर से स्तब्ध है और लोगों के लिए यकीन करना बेहद मुश्किल हो रहा है कि उनके लोकप्रिय नेता अब उनके बीच नहीं रहे। सुदिव्य कुमार सोनू गिरिडीह विधानसभा क्षेत्र से विधायक होने के साथ झारखंड सरकार में मंत्री के रूप में अपनी जिम्मेदारी निभा रहे थे। उनके निधन से राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र में गहरा शोक है। फिलहाल अस्पताल के बाहर बड़ी संख्या में लोग मौजूद हैं और सभी अपने प्रिय नेता के अंतिम दर्शन का इंतजार कर रहे हैं।1
- सुदीव्य कुमार सोनू मंत्री झारखंड सरकार दिल का दौरा पड़ने से की मृत्यु हो गई। झारखंड सरकार मंत्री सुदीव्य कुमार सोनू गिरिडीह में मर्सी हॉस्पिटल में भर्ती कराया जहां डॉक्टरों की टीम ने सुबह 4:30 बजे जानकारी दी की उनका निधन हो गया।1
- शिक्षक दिवस पर बगोदर घाघरा इंटर साइंस कॉलेज के शिक्षकों का धरना, झारखंड वित्त रहित शिक्षा संयुक्त संघर्ष मोर्चा के आह्वान पर मुख्य गेट पर धरना प्रदर्शन बगोदर : शिक्षक दिवस के मौके पर जहां देशभर में शिक्षकों के सम्मान में कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, वहीं बगोदर के घाघरा इंटर साइंस कॉलेज में शिक्षक-शिक्षिकाओं और शिक्षकेतर कर्मचारियों ने अपनी मांगों को लेकर एकदिवसीय धरना दिया। झारखंड वित्त रहित शिक्षा संयुक्त संघर्ष मोर्चा के बैनर तले आयोजित धरने में वित्तीय वर्ष 2025-26 के 223 संस्थानों का रोका गया अनुदान जारी करने, सेवा शर्त नियमावली लागू करने, अनुदान में वृद्धि तथा सावित्रीबाई फुले बालिका समृद्धि योजना का लाभ छात्राओं को दिलाने समेत अन्य मांगें उठाई गईं। रांची के लोक भवन में प्रस्तावित धरना कार्यक्रम की अनुमति नहीं मिलने के बाद मोर्चा के आह्वान पर राज्यभर के वित्त रहित शिक्षण संस्थानों में संस्थान के मुख्य द्वार पर धरना दिया गया। घाघरा इंटर साइंस कॉलेज में भी शिक्षकों और कर्मचारियों ने मांगों के समर्थन में नारेबाजी करते हुए सरकार से लंबित मांगों पर शीघ्र निर्णय लेने की मांग की।1
- Post by दैनिक झारखण्ड1
- झारखंड सरकार के मंत्री एवं गिरिडीह के लोकप्रिय विधायक श्री सुदिव्य कुमार सोनू जी के असामयिक निधन की खबर स्तब्ध एवं मर्माहत करने वाली है। उनके निधन से झारखंड के राजनीतिक एवं सामाजिक जीवन को एक ऐसी क्षति हुई है, जिसकी भरपाई निकट भविष्य में संभव नहीं है। सुदिव्य जी ने अपने सार्वजनिक जीवन में जिस समर्पण, सक्रियता और प्रतिबद्धता के साथ जनता की आवाज को उठाया, वह सदैव स्मरणीय रहेगा। एक युवा और कर्मठ जनप्रतिनिधि के रूप में उन्होंने अपने क्षेत्र और राज्य के विकास के प्रति निरंतर प्रतिबद्धता दिखाई। गठबंधन की जब भी बात होती , नोक झोंक के बावजूद वो निष्कर्ष पर पहुंचना चाहते थे। माननीय मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन जी जब भी कोई गंभीर मसला होता, उनसे विमर्श करते थे। उनका अचानक हमारे बीच से चले जाना न केवल उनके परिवार और समर्थकों के लिए, बल्कि पूरे झारखंड के लिए एक गहरा आघात है। सुदिव्य जी के निधन की इस दुखद घड़ी में मैं उनके परिवार, परिजनों, मित्रों, सहयोगियों और झारखंड मुक्ति मोर्चा के समस्त साथियों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करता हूँ। मैं ईश्वर से प्रार्थना करता हूँ कि दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें और शोकाकुल परिवार को इस असहनीय दुःख को सहन करने की शक्ति प्रदान करें। सुदिव्य जी का संघर्ष, उनकी जनसेवा और उनकी स्मृतियाँ लंबे समय तक झारखंड के राजनीतिक जीवन में जीवित रहेंगी। झारखंड सरकार के मंत्री एवं गिरिडीह के लोकप्रिय विधायक श्री सुदिव्य कुमार सोनू जी के असामयिक निधन की खबर स्तब्ध एवं मर्माहत करने वाली है। उनके निधन से झारखंड के राजनीतिक एवं सामाजिक जीवन को एक ऐसी क्षति हुई है, जिसकी भरपाई निकट भविष्य में संभव नहीं है। सुदिव्य जी ने अपने सार्वजनिक जीवन में जिस समर्पण, सक्रियता और प्रतिबद्धता के साथ जनता की आवाज को उठाया, वह सदैव स्मरणीय रहेगा। एक युवा और कर्मठ जनप्रतिनिधि के रूप में उन्होंने अपने क्षेत्र और राज्य के विकास के प्रति निरंतर प्रतिबद्धता दिखाई। गठबंधन की जब भी बात होती , नोक झोंक के बावजूद वो निष्कर्ष पर पहुंचना चाहते थे। माननीय मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन जी जब भी कोई गंभीर मसला होता, उनसे विमर्श करते थे। उनका अचानक हमारे बीच से चले जाना न केवल उनके परिवार और समर्थकों के लिए, बल्कि पूरे झारखंड के लिए एक गहरा आघात है। सुदिव्य जी के निधन की इस दुखद घड़ी में मैं उनके परिवार, परिजनों, मित्रों, सहयोगियों और झारखंड मुक्ति मोर्चा के समस्त साथियों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करता हूँ। मैं ईश्वर से प्रार्थना करता हूँ कि दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें और शोकाकुल परिवार को इस असहनीय दुःख को सहन करने की शक्ति प्रदान करें। सुदिव्य जी का संघर्ष, उनकी जनसेवा और उनकी स्मृतियाँ लंबे समय तक झारखंड के राजनीतिक जीवन में जीवित रहेंगी।1