छह माह से बंद पड़ी सरकारी बस सेवा से लोग परेशान, शीघ्र बहाली की उठी मांग बंगाणा, कुटलैहड़ विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत थाना कलां से छपरौह कलां बाया रछोल–बूसल जाने वाली एकमात्र सरकारी बस सेवा पिछले लगभग छह महीनों से बंद पड़ी हुई है, जिससे क्षेत्र के लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि इस बस सेवा के बंद होने से स्कूली बच्चों, बुजुर्गों, महिलाओं तथा रोजाना कामकाज के लिए आने-जाने वाले लोगों को काफी दिक्कतें झेलनी पड़ रही हैं। ग्रामीणों ने बताया कि थाना कलां से गांव रछोल, बूसल और छपरौह कलां के लिए जनता की सुविधा को ध्यान में रखते हुए यह एकमात्र सरकारी बस सेवा चलाई जाती थी। इस बस सेवा से क्षेत्र के लोगों को अस्पताल, बाजार, स्कूल और सरकारी कार्यालयों तक पहुंचने में काफी सहूलियत मिलती थी। लेकिन विगत वर्ष बरसात शुरू होते ही सड़क कई स्थानों पर क्षतिग्रस्त हो गई थी, जिसके बाद से बस की आवाजाही बंद कर दी गई। हालांकि बरसात समाप्त हुए भी काफी समय बीत चुका है, लेकिन अब तक इस बस सेवा को दोबारा शुरू नहीं किया गया है। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क की स्थिति अब पहले से काफी बेहतर है और छोटे वाहन नियमित रूप से इस मार्ग पर चल रहे हैं, इसके बावजूद परिवहन विभाग द्वारा बस सेवा बहाल करने की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि विभागीय अधिकारियों की लापरवाही के कारण यह बस रूट अभी तक बहाल नहीं किया गया है। उनका कहना है कि यदि विभाग चाहे तो थोड़े बहुत मरम्मत कार्य के बाद बस सेवा दोबारा शुरू की जा सकती है, लेकिन इस दिशा में कोई पहल नहीं की जा रही। बस सेवा बंद होने का सबसे ज्यादा असर स्कूली बच्चों पर पड़ रहा है। कई बच्चों को रोजाना पैदल लंबी दूरी तय करनी पड़ती है, जबकि कुछ बच्चों को निजी वाहनों या टैक्सियों के सहारे स्कूल पहुंचना पड़ रहा है। इससे अभिभावकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है। इसके अलावा बुजुर्गों और बीमार लोगों को अस्पताल या अन्य जरूरी कार्यों के लिए आने-जाने में भी काफी कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि बस सेवा बंद होने के कारण उन्हें मजबूरी में निजी टैक्सियों का सहारा लेना पड़ रहा है, जो काफी महंगा पड़ता है। इससे आम लोगों का मासिक खर्च भी बढ़ गया है। लोगों का कहना है कि सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर परिवहन सुविधा देने की बात करती है, लेकिन इस तरह बस सेवा बंद रहने से ग्रामीणों को भारी असुविधा झेलनी पड़ रही है। इस संबंध में ग्रामीण हुक्म सिंह, रामपाल, जसमेर सिंह, संजय कुमार, अशोक, देसराज, सुभाष, रोमिता, ललिता, कांता, निशा, कमला, प्रेमचंद, राहुल, सृष्टि, प्रीतम, भोला, मानचंद, बीरबल, करतार सिंह, जगदीश, मुख्तायार, सतीश, लेखराज, कुशल, अमर चंद, गुरदयाल, राजेंद्र, कैप्टन राकेश, प्यार चंद, अनिल, रोशन लाल, सुरेंद्र, कमल सहित अन्य ग्रामीणों ने प्रदेश सरकार और परिवहन विभाग से मांग की है कि इस बस सेवा को शीघ्र दोबारा शुरू किया जाए, ताकि क्षेत्र के लोगों को राहत मिल सके। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही बस सेवा बहाल नहीं की गई तो उन्हें आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। उन्होंने प्रदेश सरकार से मांग की है कि जनता की सुविधा को ध्यान में रखते हुए थाना कलां से छपरौह कलां बाया रछोल–बूसल बस रूट को जल्द से जल्द सुचारु किया जाए, ताकि क्षेत्र के लोगों को आने-जाने में किसी प्रकार की परेशानी न हो।
छह माह से बंद पड़ी सरकारी बस सेवा से लोग परेशान, शीघ्र बहाली की उठी मांग बंगाणा, कुटलैहड़ विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत थाना कलां से छपरौह कलां बाया रछोल–बूसल जाने वाली एकमात्र सरकारी बस सेवा पिछले लगभग छह महीनों से बंद पड़ी हुई है, जिससे क्षेत्र के लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि इस बस सेवा के बंद होने से स्कूली बच्चों, बुजुर्गों, महिलाओं तथा रोजाना कामकाज के लिए आने-जाने वाले लोगों को काफी दिक्कतें झेलनी पड़ रही हैं। ग्रामीणों ने बताया कि थाना कलां से गांव रछोल, बूसल और छपरौह कलां के लिए जनता की सुविधा को ध्यान में रखते हुए यह एकमात्र सरकारी बस सेवा चलाई जाती थी। इस बस सेवा से क्षेत्र के लोगों को अस्पताल, बाजार, स्कूल और सरकारी कार्यालयों तक पहुंचने में काफी सहूलियत मिलती थी। लेकिन विगत वर्ष बरसात शुरू होते ही सड़क कई स्थानों पर क्षतिग्रस्त हो गई थी, जिसके बाद से बस की आवाजाही बंद कर दी गई। हालांकि बरसात समाप्त हुए भी काफी समय बीत चुका है, लेकिन अब तक इस बस सेवा को दोबारा शुरू नहीं किया गया है। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क की स्थिति अब पहले से काफी बेहतर है और छोटे वाहन नियमित रूप से इस मार्ग पर चल रहे हैं, इसके बावजूद परिवहन विभाग द्वारा बस सेवा बहाल करने की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि विभागीय अधिकारियों की लापरवाही के कारण यह बस रूट अभी तक बहाल नहीं किया गया है। उनका कहना है कि यदि विभाग चाहे तो थोड़े बहुत मरम्मत कार्य के बाद बस सेवा दोबारा शुरू की जा सकती है, लेकिन इस दिशा में कोई पहल नहीं की जा रही। बस सेवा बंद होने का सबसे ज्यादा असर स्कूली बच्चों पर पड़ रहा है। कई बच्चों को रोजाना पैदल लंबी दूरी तय करनी पड़ती है, जबकि कुछ बच्चों को निजी वाहनों या टैक्सियों के सहारे स्कूल पहुंचना पड़ रहा है। इससे अभिभावकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है। इसके अलावा बुजुर्गों और बीमार लोगों को अस्पताल या अन्य जरूरी कार्यों के लिए आने-जाने में भी काफी कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि बस सेवा बंद होने के कारण उन्हें मजबूरी में निजी टैक्सियों का सहारा लेना पड़ रहा है, जो काफी महंगा पड़ता है। इससे आम लोगों का मासिक खर्च भी बढ़ गया है। लोगों का कहना है कि सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर परिवहन सुविधा देने की बात करती है, लेकिन इस तरह बस सेवा बंद रहने से ग्रामीणों को भारी असुविधा झेलनी पड़ रही है। इस संबंध में ग्रामीण हुक्म सिंह, रामपाल, जसमेर सिंह, संजय कुमार, अशोक, देसराज, सुभाष, रोमिता, ललिता, कांता, निशा, कमला, प्रेमचंद, राहुल, सृष्टि, प्रीतम, भोला, मानचंद, बीरबल, करतार सिंह, जगदीश, मुख्तायार, सतीश, लेखराज, कुशल, अमर चंद, गुरदयाल, राजेंद्र, कैप्टन राकेश, प्यार चंद, अनिल, रोशन लाल, सुरेंद्र, कमल सहित अन्य ग्रामीणों ने प्रदेश सरकार और परिवहन विभाग से मांग की है कि इस बस सेवा को शीघ्र दोबारा शुरू किया जाए, ताकि क्षेत्र के लोगों को राहत मिल सके। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही बस सेवा बहाल नहीं की गई तो उन्हें आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। उन्होंने प्रदेश सरकार से मांग की है कि जनता की सुविधा को ध्यान में रखते हुए थाना कलां से छपरौह कलां बाया रछोल–बूसल बस रूट को जल्द से जल्द सुचारु किया जाए, ताकि क्षेत्र के लोगों को आने-जाने में किसी प्रकार की परेशानी न हो।
- हमीरपुर हमीरपुर ज़िला के उपमंडल भोरंज की ग्राम पंचायत नंदन के गांव बल्ह हरिजन बस्ती नारकीय जीवन जी रही है। इस बस्ती की विडंबना यह है कि अपनी जमीन देने के उपरांत भी सडक़ गांव तक नहीं पहुंच पाई। करीब 500 मीटर सडक़ निकलने के बाद इसे बंद कर दिया गया जिस वजह से यह बस्ती भारी मुसीबतें झेल रही है। यहां के रास्ते तक टूट चुके हैं तथा मार्ग चलने योग्य नहीं बचे हैं। यदि कोई व्यक्ति बीमार पड़ जाए तो उसे चारपाई पर उठाकर ले जाना पड़ता है। इस बस्ती के लोगों ने आरोप जड़े हैं कि जहां से सडक़ मार्ग बल्ह गांव के लिए निकला है वहां पर इनकी जमीन है। उसी जमीन से मार्ग बल्ह गांव के लिए निकला है। इन्होंने तो जमीन दे दी लेकिन वायदे मुताबिक बल्ह गांव के सामान्य वर्ग ने सिर्फ अपना फायदा देखा तथा इनकी बस्ती को मार्ग नहीं निकलने दिया। वर्ष 2020 में सडक़ मार्ग का निर्माण कार्य किया गया है। जब सडक़ का टै्रक बना तो बताया गया कि सामान्य वर्ग व हरिजन बस्ती के लिए इस मार्ग का निर्माण किया जा रहा है। हरिजन बस्ती के ग्रामीणों ने बताया कि सडक़ का निर्माण अनुसूचित जाति उपयोग में हुआ है। ग्रामीणों ने अनुसार बरसात के दिनों में उन्हें भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उन्हें अपने बच्चे स्कूल भेजने में भी हिचकिचाहट हो रही है। ग्रामीणों ने बताया कि अब तो इनके गांव तक का मार्ग साईकिल योग्य भी नहीं बचा है। ग्रामीणों ने यह भी आरोप जड़ा है कि प्रशासन के कई मर्तबा चक्कर काट चुके हैं तथा हर बार समस्या के समाधान का आश्वसान देकर पल्ला झाड़ दिया जाता है। इन ग्रामीणों का कहना है कि यदि मार्ग इनकी बस्ती तक नहीं निकाला गया तो फिर मार्ग को उस जगह पर बंद कर देंगे जहां से इनकी जमीन को लिया गया है। इन्होंने बताया कि मार्ग निकालने के लिए इनसे जमीन की कोई एनओसी नहीं ली गई है तथा मार्ग लोकनिर्माण विभाग ने निकाला है। ऐसे में अब ये लोग मजबूरीवश मार्ग को उस जगह से बंद करने की बात कह रहे हैं जहां इनकी जमीन का इस्तेमाल किया गया है। शनिवार को उपायुक्त के दरबार पहुंचे ग्रामीणों ने गुहार लगाई है कि उनकी समस्या का जल्द समाधान कर राहत पहुंचाई जाए। वर्तमान में इनका गांव विकास की दृष्टि से दूर हो चला है। यदि आज इनकी आवाज को दबाया गया तो फिर आने वाले समय में पूरा गांव सडक़ समस्या का सामना करेगा। उपायुक्त हमीरपुर ने बताया कि प्रतिनिधिमंडल उनके पास पहुंचा था। समस्या के समाधान का प्रयास किया जा रहा है। ग्रामीण पवन कुमार का कहना है कि वर्ष 2021 से प्रशासन के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन इनकी समस्या का समाधान नहीं हो रहा। स्वर्ण समाज ने अपने घरों तक सडक़ मार्ग को निकलने दिया तथा आगे का रास्ता बंद कर दिया है। यदि ऐसा ही रहा तो यह मजबूरी में वहां से रास्ता बंद कर देंगे जहां पर सडक़ मार्ग के लिए इनकी जमीन ली गई है। राकेश कुमार का कहना है कि सडक़ सुविधा के आभाव में ग्रामीण भारी परेशानियों झेल रहे हैं। बस्ती के रास्ते तक ध्वस्त हो चुके हैं तथा कई घरों को सडक़ मार्ग के लिए बनाए ट्रैक से नुकसान हो चुका है। बरसात के दिनों में अधिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सुषमा देवी ने बताया कि बच्चों को स्कूल जाने में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। सडक़ मार्ग की सुविधा न मिलने से काफी दिक्कत झेलनी पड़ रही है। पहले दोपहिया किसी तरह घरों तक पहुंच जाता था लेकिन अब तो रास्ते साईकिल चलाने के योग्य भी नहीं है।3
- सुजानपुर सुजानपुर विधानसभा क्षेत्र के विधायक कैप्टन रणजीत सिंह बजट सत्र की समाप्ति के तुरंत बाद देर रात अपने क्षेत्र में पहुंचे और पहुंचते ही जनहित कार्यों में सक्रिय नजर आए। उन्होंने गाव समोना के लिए बन रही सड़क का औचक निरीक्षण किया और निर्माण कार्य की गुणवत्ता का जायजा लिया। यह सड़क लंबे समय से क्षेत्रवासियों की प्रमुख मांग रही है। बरसात के मौसम में खड्ड (नाले) के उफान पर होने के कारण समोना के लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता था। स्थिति इतनी गंभीर होती थी कि लोग अपनी गाड़ियां बगेहरा या अपने गांव में ही खड़ी कर देते थे और समोना तक पैदल पहुंचना पड़ता था। यहां तक कि गौशाला के लिए आवश्यक खाद्य सामग्री भी लोगों को सिर पर उठाकर ले जानी पड़ती थी। विधायक कैप्टन रणजीत सिंह ने जनता की इस गंभीर समस्या को प्राथमिकता देते हुए सड़क निर्माण कार्य शुरू करवाया है। निरीक्षण के दौरान उन्होंने अधिकारियों और निर्माण एजेंसी को स्पष्ट निर्देश दिए कि कार्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और गुणवत्ता के साथ कोई समझौता नहीं होगा। उन्होंने कहा कि यह सड़क बनने से न केवल समोना के लोगों को राहत मिलेगी, बल्कि क्षेत्र के विकास को भी नई गति मिलेगी। विधायक ने आश्वासन दिया कि उनकी प्राथमिकता हमेशा जनहित के कार्यों को समयबद्ध और गुणवत्ता के साथ पूरा करवाना है।1
- भराड़ी ग्रीष्मोत्सव मेला हिमाचली जोड़ी की धूम रही1
- हिमाचल की हैंडबॉल महिला टीम खिलाड़ियों ने एक बार फिर प्रतिभा का लोहा मनवाया है। टीम ने उत्तर प्रदेश के बरेली में 54वीं वूमंस नेशनल हैंडबॉल चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीता है। फाइनल मैच में हिमाचल ने मेजबान उत्तर प्रदेश की टीम को 17-12 के स्कोर से हराकर जीत दर्ज की। उधर, महिला हैंडबॉल टीम ने नेशनल में स्वर्ण पदक विजेता बनने पर हैंडबॉल एसोसिएशन की ओर से विजेताओं के साथ ही प्रशिक्षकों को भी बधाई दी है। हिमाचल की टीम में दीक्षा गोलकीपर रही। शालिनी, भावना, मिताली, प्रियंका, गुलशन, जागृति, संजना, शिवानी, मुस्कान, चेतना, शिक्षा, बबीता, कृतिका, कनिष्का, कृतिका, दीपा ने बेहतर प्रदर्शन कर खिताब हासिल किया। हिमाचल ने शुरुआती वि मैच में तेलंगाना को एक तरफा मुकाबले ज में 30-0, जम्मू-कश्मीर को 20-3 के स्कोर से हराया। वहीं, प्री क्वार्टर फाइनल में ओडिशा को 32-5, क्वार्टर फाइनल में बेस्ट बंगाल को 29-6 के स्कोर से हराया। सेमीफाइनल मैच में हिमाचल की टीम ने छत्तीसगढ़ को 32-18 के स्कोर में हराकर फाइनल के लिए प्रवेश किया। फाइनल मुकाबले में 17-12 अंक से उत्तर प्रदेश की टीम को हराकर जीत हासिल की।3
- 📍 भराड़ी से बड़ी खबर | Ajmerpur Summer Festival 2026 बारिश भी नहीं रोक पाई उत्साह! 🌧️🔥 अजमेरपुर ग्रीष्मोत्सव मेला भराड़ी की दूसरी सांस्कृतिक संध्या रही पूरी तरह धमाकेदार 🎤🎶 हिमाचल जोड़ी (अर्जुन गोपाल, रंजना रघुवंशी) और गायिका दीक्षा ने अपने सुपरहिट पहाड़ी और फिल्मी गीतों से ऐसा रंग जमाया कि पूरा पंडाल देर रात तक झूमता रहा 💃🕺 स्थानीय कलाकारों ने भी शानदार प्रस्तुतियों से समां बांध दिया 🎭👏 हालांकि बारिश के कारण कार्यक्रम देर से शुरू हुआ और मुख्य अतिथि नहीं पहुंच सके, लेकिन उत्साह में कोई कमी नहीं दिखी 🙌 👉 कुल मिलाकर भराड़ी में संगीत, संस्कृति और जोश का जबरदस्त संगम देखने को मिला!1
- Crafted in wood, designed for timeless living. This wooden dining table blends warmth, durability, and modern elegance—perfect for everyday moments and special gatherings. For interior design ideas and customized solutions, contact Decoory Interiors 📩 DM for inquiries 📞 Contact us: 9821545511 📍Location: GF -71, Gaur City Center, Greater Noida West, Gautam Buddha Nagar, Uttar Pradesh 2013181
- हमीरपुर, आर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन के संस्थापक श्री श्री रविशंकर द्वारा सोमनाथ मंदिर में प्राचीन खंडित शिवलिंग की पुनर्स्थापना की पहल के तहत निकाली जा रही पवित्र ज्योतिर्लिंग यात्रा हमीरपुर पहुंची। गांधी चौक पर पहुंचने पर स्थानीय लोगों ने फूलों की वर्षा कर ज्योतिर्लिंग का भव्य स्वागत किया और विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई।इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे, जिससे पूरे क्षेत्र में धार्मिक और आध्यात्मिक वातावरण बन गया। यह यात्रा पूरे भारत में आयोजित की जा रही है, जिसमें सभी 12 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन शामिल हैं। बताया जा रहा है कि यह पवित्र अवशेष लगभग 1000 वर्षों से संरक्षित थे, जिन्हें अब पुनः स्थापित करने की प्रक्रिया शुरू की गई है। वहीं स्थानीय निवासी कपिल मोहन शामा ने इस अवसर को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि यह दिन हमीरपुर जिला के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।उन्होंने कहा कि “1000 वर्ष पुराना ज्योतिर्लिंग हमारे शहर के गांधी चौक पर पहुंचा है, जो हमारे लिए गर्व और आस्था का विषय है।” उन्होंने बताया कि यह यात्रा लगभग 10 दिनों तक हिमाचल प्रदेश में रहेगी। यात्रा इससे पहले चंबा और धर्मशाला में सफलतापूर्वक पूरी की जा चुकी है। हमीरपुर के बाद यह यात्रा अगले पड़ाव के रूप में ऊना जिला पहुंचेगी।श्रद्धालुओं में इस यात्रा को लेकर खासा उत्साह देखा जा रहा है और लोग बड़ी संख्या में दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं।2
- बैजनाथ मॉक ड्रिल 2026 | कांगड़ा भूकंप 121वीं बरसी पर बड़ा अभ्यास | Himachal Earthquake Drill1
- देवभूमि कुल्लू हिमाचल प्रदेश1