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देश में जुलाई का महीना चल रहा है, लेकिन भारत के कई हिस्सों में अब भी मॉनसून की बारिश काफी नाकाफी साबित हो रही है। सक्रिय मॉनसून सिस्टम होने के बावजूद उत्तर भारत के ज्यादातर इलाकों में आसमान में बादल नजर नहीं आ रहे हैं। इसके विपरीत, पूर्वी भारत के राज्यों जैसे पश्चिम बंगाल, बिहार, ओडिशा और पूर्वी उत्तर प्रदेश में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। ऐसे में यह सवाल बना हुआ है कि आखिर सक्रिय मानसून के बीच भी बादल कहां गायब हो गए हैं और इसके पीछे मौसम विज्ञान की क्या वजह है।
Rahul Goswami journalist
देश में जुलाई का महीना चल रहा है, लेकिन भारत के कई हिस्सों में अब भी मॉनसून की बारिश काफी नाकाफी साबित हो रही है। सक्रिय मॉनसून सिस्टम होने के बावजूद उत्तर भारत के ज्यादातर इलाकों में आसमान में बादल नजर नहीं आ रहे हैं। इसके विपरीत, पूर्वी भारत के राज्यों जैसे पश्चिम बंगाल, बिहार, ओडिशा और पूर्वी उत्तर प्रदेश में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। ऐसे में यह सवाल बना हुआ है कि आखिर सक्रिय मानसून के बीच भी बादल कहां गायब हो गए हैं और इसके पीछे मौसम विज्ञान की क्या वजह है।
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- देश में जुलाई का महीना चल रहा है, लेकिन भारत के कई हिस्सों में अब भी मॉनसून की बारिश काफी नाकाफी साबित हो रही है। सक्रिय मॉनसून सिस्टम होने के बावजूद उत्तर भारत के ज्यादातर इलाकों में आसमान में बादल नजर नहीं आ रहे हैं। इसके विपरीत, पूर्वी भारत के राज्यों जैसे पश्चिम बंगाल, बिहार, ओडिशा और पूर्वी उत्तर प्रदेश में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। ऐसे में यह सवाल बना हुआ है कि आखिर सक्रिय मानसून के बीच भी बादल कहां गायब हो गए हैं और इसके पीछे मौसम विज्ञान की क्या वजह है।1
- भोपाल के नगर निगम जोन 3 में नगर निगम की गाड़ियों का उपयोग निजी कार्य के लिए किए जाने का मामला सामने आया है। यह पूरा मामला सीधे तौर पर नगर निगम जोन 3 के एक अधिकारी से जुड़ा हुआ है, जहाँ सरकारी वाहनों का इस्तेमाल व्यक्तिगत और निजी कामों के लिए किया जा रहा है।1
- मध्य प्रदेश के रायसेन जिले में एस बी आई कियोस्क गबन मामले में पीड़ित पक्ष आखिरकार मान गया है। इस गबन मामले को लेकर पीड़ित काफी असमंजस में थे, जिन्हें एसडीओपी द्वारा दी गई समझाइश के बाद शांत कराया गया। एसडीओपी की समझाइश और हस्तक्षेप के बाद ही पीड़ित पक्ष आखिरकार मानने को तैयार हुआ।1
- बदायूं के समाज सेवी आराम सिंह लोगों के लिए एक मिसाल पेश कर रहे हैं। वे पिछले 3.5 साल से जरूरतमंदों को निशुल्क ई-रिक्शा सेवा दे रहे हैं।1
- भोपाल में हज 2027 के आवेदन फॉर्म भरने के लिए अब सिर्फ 7 दिन बचे हैं। यहाँ से अब तक लगभग 800 फॉर्म भरे जा चुके हैं। इन फॉर्मों को भरने की आखिरी तारीख 20 जुलाई 2026 है।1
- भोपाल के आनंद नगर में अपना कार्यालय टूटने के बाद बीजेपी पार्षद राजेश चौकसे सड़क पर ही बैठ गए हैं और खुले आसमान के नीचे सड़क पर बैठकर ही क्षेत्रवासियों की समस्याएं सुन रहे हैं। नगर निगम ने शुक्रवार सुबह पुलिस की मौजूदगी में सरकारी दुकानों के ऊपर बने उनके कार्यालय को अवैध निर्माण बताते हुए ध्वस्त कर दिया था। वार्ड-62 का यह मामला अब पूरी तरह से सियासी चर्चा का विषय बन चुका है। इस कार्रवाई को लेकर पार्षद राजेश चौकसे का दावा है कि इस निर्माण के लिए उन्होंने मौखिक अनुमति ली थी, वहीं दूसरी तरफ नगर निगम का कहना है कि यह निर्माण अवैध था, इसलिए ही यह कार्रवाई की गई। इससे पहले पार्षद ने एक मंत्री पर भी उनका कार्यालय तुड़वाने का आरोप लगाया था। फिलहाल, सड़क पर खुले इस कार्यालय की तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही हैं और नगर निगम की इस कार्रवाई तथा पार्षद के आरोपों को लेकर विवाद लगातार जारी है।4
- भोपाल के आनंद नगर में नगर निगम की कार्रवाई के बाद छिड़ा विवाद अब तेजी से सियासी रंग लेता जा रहा है। वार्ड-62 के बीजेपी पार्षद राजेश चौकसे का कार्यालय अवैध निर्माण बताकर तोड़े जाने के बाद उन्होंने सड़क पर ही अपना नया जनसुनवाई कार्यालय शुरू कर दिया है। खुले आसमान के नीचे कुर्सी-टेबल लगाकर पार्षद द्वारा क्षेत्रवासियों की समस्याएं सुनने की तस्वीरें सोशल मीडिया पर लगातार वायरल हो रही हैं और पूरे मामले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। शुक्रवार सुबह नगर निगम की बिल्डिंग परमिशन शाखा ने पुलिस बल की भारी मौजूदगी में आनंद नगर स्थित सरकारी दुकानों के ऊपर बने इस कार्यालय को अवैध निर्माण बताते हुए ध्वस्त कर दिया था। नगर निगम का स्पष्ट कहना है कि यह निर्माण बिना किसी वैध अनुमति के किया गया था, इसलिए नियमानुसार कार्रवाई की गई है। कार्रवाई के दौरान मौके पर पुलिस बल इसलिए तैनात किया गया था ताकि किसी भी तरह का विरोध या कानून-व्यवस्था बिगड़ने की स्थिति पैदा न हो। इस कार्रवाई के बाद बीजेपी पार्षद राजेश चौकसे ने हार मानने के बजाय सड़क किनारे ही अपना अस्थायी कार्यालय शुरू कर दिया। उन्होंने टेबल-कुर्सी लगाकर लोगों से मुलाकात करना शुरू कर दिया और कहा कि जनता की सेवा किसी भवन की मोहताज नहीं है। पार्षद का दावा है कि उन्होंने इस निर्माण के लिए मौखिक अनुमति ली थी और कार्यालय को तोड़ना पूरी तरह से अन्यायपूर्ण है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह कार्रवाई नियमों के तहत नहीं बल्कि राजनीतिक दबाव में की गई है। इससे पहले उन्होंने एक मंत्री पर भी उनका कार्यालय तुड़वाने का आरोप लगाया था। हालांकि, नगर निगम ने इन आरोपों को खारिज करते हुए साफ किया है कि कार्रवाई नियमों के अनुसार हुई है, लेकिन फिलहाल यह मामला शहर की राजनीति में भारी चर्चा का विषय बना हुआ है।1
- भोपाल में घरेलू इंडियन गैस सिलेंडर ग्राहकों के साथ सरेआम धोखा और षड्यंत्र पूर्वक खिलवाड़ चल रहा है। यहां सिलेंडर के अंदर गैस के बदले पानी डालकर दिया जा रहा है, जिसे सीधे तौर पर देखा जा सकता है। कंपनियों द्वारा किए जा रहे इस कृत्य से गरीब, मजदूर और आम जनता को हर जगह से पीसा जा रहा है। इस गंभीर समस्या को लेकर गहरा आक्रोश व्यक्त किया गया है और माननीय मोहन यादव जी से इस पूरे खेल को तुरंत संज्ञान में लेने की मांग की गई है।1