देश को आजाद हुए 78 साल बीत जाने के बाद भी, भीमपुर विकासखंड की ग्राम पंचायत कुंनखेड़ी के अंतर्गत आने वाले पालंगा और भट्टबोरी गाँव के सैकड़ों ग्रामीण आज भी बिजली जैसी मूलभूत सुविधा से वंचित हैं। सरकार के गांव-गांव तक विकास पहुँचाने के दावों के बावजूद, पालंगा गाँव के लोग आज भी अंधेरे में जीवन जीने को मजबूर हैं। ग्रामीणों का कहना है कि आजादी के बाद से लेकर आज तक उनके गाँव में नियमित बिजली व्यवस्था शुरू नहीं हो पाई है। भीमपुर मुख्यालय से लगभग 50 से 60 किलोमीटर दूर स्थित पालंगा गाँव में लगभग 500 से 1000 लोग रहते हैं। ग्रामीणों के अनुसार, वर्ष 2017 में गाँव में बिजली के पोल तो लगा दिए गए थे, जिससे उनमें जल्द ही बिजली आने की उम्मीद जगी थी। हालांकि, नौ साल बीत जाने के बाद भी न तो इन खंभों पर बिजली के तार लगाए गए हैं और न ही गाँव में बिजली आपूर्ति शुरू हो सकी है। ग्रामीणों ने अनेक बार जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों और जिला प्रशासन के सामने अपनी समस्या उठाई है, लेकिन आज तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला है। बिजली न होने का सबसे अधिक असर बच्चों की शिक्षा पर पड़ रहा है, जहाँ छोटे बच्चे दिन के उजाले में पढ़ाई करते नजर आते हैं, क्योंकि शाम होते ही पूरा गाँव अंधेरे में डूब जाता है। एक छात्र ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा कि बिजली होती तो वे रात में भी पढ़ पाते और आगे बढ़ने की इच्छा रखते हैं, लेकिन अंधेरा उनकी पढ़ाई में सबसे बड़ी बाधा है। आंगनवाड़ी के बच्चों ने भी बताया कि वे मोबाइल, टीवी देखना और उजाले में खेलना चाहते हैं, लेकिन बिजली न होने से उन्हें जल्दी सोना पड़ता है, जिससे उनका बचपन और शिक्षा दोनों प्रभावित हो रहे हैं। ग्रामीणों को मोबाइल चार्ज करने के लिए भी कई किलोमीटर दूर दूसरे गांवों पर निर्भर रहना पड़ता है, और रात के समय मोबाइल की टॉर्च ही उनके लिए अस्थायी रोशनी का एकमात्र साधन है। बिजली के अभाव का सामाजिक जीवन पर भी गहरा असर पड़ रहा है; एक महिला ने भावुक होकर बताया कि उनकी बेटी ने बिजली न होने के कारण ससुराल से वापस अपने गाँव आने से मना कर दिया है। महिलाओं का यह भी कहना है कि गाँव में बिजली न होने के कारण कई परिवारों को विवाह संबंधों में भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। गाँव के बुजुर्गों ने तो बिजली मिलने की उम्मीद छोड़ दी है, लेकिन वे चाहते हैं कि आने वाली पीढ़ी को अंधेरे में न रहना पड़े, क्योंकि बच्चों की पढ़ाई और गाँव का विकास बिजली के बिना संभव नहीं है। पालंगा के ग्रामीणों ने जिला प्रशासन, विद्युत विभाग और क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों से शीघ्र बिजली के पोलों पर तार बिछाकर आपूर्ति शुरू करने की मांग की है। उनका कहना है कि बिजली केवल एक सुविधा नहीं, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और विकास का आधार है। ग्रामीणों को उम्मीद है कि प्रशासन उनकी वर्षों पुरानी समस्या को गंभीरता से लेगा ताकि आजादी के 78 वर्ष बाद भी अंधेरे में जीवन गुजार रहे पालंगा गाँव के लोगों को भी उजाले का अधिकार मिल सके।
देश को आजाद हुए 78 साल बीत जाने के बाद भी, भीमपुर विकासखंड की ग्राम पंचायत कुंनखेड़ी के अंतर्गत आने वाले पालंगा और भट्टबोरी गाँव के सैकड़ों ग्रामीण आज भी बिजली जैसी मूलभूत सुविधा से वंचित हैं। सरकार के गांव-गांव तक विकास पहुँचाने के दावों के बावजूद, पालंगा गाँव के लोग आज भी अंधेरे में जीवन जीने को मजबूर हैं। ग्रामीणों का कहना है कि आजादी के बाद से लेकर आज तक उनके गाँव में नियमित बिजली व्यवस्था शुरू नहीं हो पाई है। भीमपुर मुख्यालय से लगभग 50 से 60 किलोमीटर दूर स्थित पालंगा गाँव में लगभग 500 से 1000 लोग रहते हैं। ग्रामीणों के अनुसार, वर्ष 2017 में गाँव में बिजली के पोल तो लगा दिए गए थे, जिससे उनमें जल्द ही बिजली आने की उम्मीद जगी थी। हालांकि, नौ साल बीत जाने के बाद भी न तो इन खंभों पर बिजली के तार लगाए गए हैं और न ही गाँव में बिजली आपूर्ति शुरू हो सकी है। ग्रामीणों ने अनेक बार जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों और जिला प्रशासन के सामने अपनी
समस्या उठाई है, लेकिन आज तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला है। बिजली न होने का सबसे अधिक असर बच्चों की शिक्षा पर पड़ रहा है, जहाँ छोटे बच्चे दिन के उजाले में पढ़ाई करते नजर आते हैं, क्योंकि शाम होते ही पूरा गाँव अंधेरे में डूब जाता है। एक छात्र ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा कि बिजली होती तो वे रात में भी पढ़ पाते और आगे बढ़ने की इच्छा रखते हैं, लेकिन अंधेरा उनकी पढ़ाई में सबसे बड़ी बाधा है। आंगनवाड़ी के बच्चों ने भी बताया कि वे मोबाइल, टीवी देखना और उजाले में खेलना चाहते हैं, लेकिन बिजली न होने से उन्हें जल्दी सोना पड़ता है, जिससे उनका बचपन और शिक्षा दोनों प्रभावित हो रहे हैं। ग्रामीणों को मोबाइल चार्ज करने के लिए भी कई किलोमीटर दूर दूसरे गांवों पर निर्भर रहना पड़ता है, और रात के समय मोबाइल की टॉर्च ही उनके लिए अस्थायी रोशनी का एकमात्र साधन है। बिजली के अभाव का सामाजिक जीवन पर भी गहरा असर पड़ रहा है; एक महिला ने भावुक
होकर बताया कि उनकी बेटी ने बिजली न होने के कारण ससुराल से वापस अपने गाँव आने से मना कर दिया है। महिलाओं का यह भी कहना है कि गाँव में बिजली न होने के कारण कई परिवारों को विवाह संबंधों में भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। गाँव के बुजुर्गों ने तो बिजली मिलने की उम्मीद छोड़ दी है, लेकिन वे चाहते हैं कि आने वाली पीढ़ी को अंधेरे में न रहना पड़े, क्योंकि बच्चों की पढ़ाई और गाँव का विकास बिजली के बिना संभव नहीं है। पालंगा के ग्रामीणों ने जिला प्रशासन, विद्युत विभाग और क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों से शीघ्र बिजली के पोलों पर तार बिछाकर आपूर्ति शुरू करने की मांग की है। उनका कहना है कि बिजली केवल एक सुविधा नहीं, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और विकास का आधार है। ग्रामीणों को उम्मीद है कि प्रशासन उनकी वर्षों पुरानी समस्या को गंभीरता से लेगा ताकि आजादी के 78 वर्ष बाद भी अंधेरे में जीवन गुजार रहे पालंगा गाँव के लोगों को भी उजाले का अधिकार मिल सके।
- देश को आजाद हुए 78 साल बीत जाने के बाद भी, भीमपुर विकासखंड की ग्राम पंचायत कुंनखेड़ी के अंतर्गत आने वाले पालंगा और भट्टबोरी गाँव के सैकड़ों ग्रामीण आज भी बिजली जैसी मूलभूत सुविधा से वंचित हैं। सरकार के गांव-गांव तक विकास पहुँचाने के दावों के बावजूद, पालंगा गाँव के लोग आज भी अंधेरे में जीवन जीने को मजबूर हैं। ग्रामीणों का कहना है कि आजादी के बाद से लेकर आज तक उनके गाँव में नियमित बिजली व्यवस्था शुरू नहीं हो पाई है। भीमपुर मुख्यालय से लगभग 50 से 60 किलोमीटर दूर स्थित पालंगा गाँव में लगभग 500 से 1000 लोग रहते हैं। ग्रामीणों के अनुसार, वर्ष 2017 में गाँव में बिजली के पोल तो लगा दिए गए थे, जिससे उनमें जल्द ही बिजली आने की उम्मीद जगी थी। हालांकि, नौ साल बीत जाने के बाद भी न तो इन खंभों पर बिजली के तार लगाए गए हैं और न ही गाँव में बिजली आपूर्ति शुरू हो सकी है। ग्रामीणों ने अनेक बार जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों और जिला प्रशासन के सामने अपनी समस्या उठाई है, लेकिन आज तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला है। बिजली न होने का सबसे अधिक असर बच्चों की शिक्षा पर पड़ रहा है, जहाँ छोटे बच्चे दिन के उजाले में पढ़ाई करते नजर आते हैं, क्योंकि शाम होते ही पूरा गाँव अंधेरे में डूब जाता है। एक छात्र ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा कि बिजली होती तो वे रात में भी पढ़ पाते और आगे बढ़ने की इच्छा रखते हैं, लेकिन अंधेरा उनकी पढ़ाई में सबसे बड़ी बाधा है। आंगनवाड़ी के बच्चों ने भी बताया कि वे मोबाइल, टीवी देखना और उजाले में खेलना चाहते हैं, लेकिन बिजली न होने से उन्हें जल्दी सोना पड़ता है, जिससे उनका बचपन और शिक्षा दोनों प्रभावित हो रहे हैं। ग्रामीणों को मोबाइल चार्ज करने के लिए भी कई किलोमीटर दूर दूसरे गांवों पर निर्भर रहना पड़ता है, और रात के समय मोबाइल की टॉर्च ही उनके लिए अस्थायी रोशनी का एकमात्र साधन है। बिजली के अभाव का सामाजिक जीवन पर भी गहरा असर पड़ रहा है; एक महिला ने भावुक होकर बताया कि उनकी बेटी ने बिजली न होने के कारण ससुराल से वापस अपने गाँव आने से मना कर दिया है। महिलाओं का यह भी कहना है कि गाँव में बिजली न होने के कारण कई परिवारों को विवाह संबंधों में भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। गाँव के बुजुर्गों ने तो बिजली मिलने की उम्मीद छोड़ दी है, लेकिन वे चाहते हैं कि आने वाली पीढ़ी को अंधेरे में न रहना पड़े, क्योंकि बच्चों की पढ़ाई और गाँव का विकास बिजली के बिना संभव नहीं है। पालंगा के ग्रामीणों ने जिला प्रशासन, विद्युत विभाग और क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों से शीघ्र बिजली के पोलों पर तार बिछाकर आपूर्ति शुरू करने की मांग की है। उनका कहना है कि बिजली केवल एक सुविधा नहीं, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और विकास का आधार है। ग्रामीणों को उम्मीद है कि प्रशासन उनकी वर्षों पुरानी समस्या को गंभीरता से लेगा ताकि आजादी के 78 वर्ष बाद भी अंधेरे में जीवन गुजार रहे पालंगा गाँव के लोगों को भी उजाले का अधिकार मिल सके।3
- आज, 21 जून रविवार को बैतूल गंज के जवाहर वार्ड में स्थित पीपलेश्वर शिवशक्ति हनुमान मंदिर में अपना 61वां जन्मदिन अत्यंत सादगी के साथ मनाया गया। इस अवसर पर जन्मदिन मनाने वाले व्यक्ति ने अपने अन्य साथियों के साथ मिलकर मंदिर में पूजन और आरती की।2
- अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर आज बैतूल के पुलिस चिकित्सालय में एक योग कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों ने उत्साहपूर्वक सामूहिक योगाभ्यास में भाग लिया और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने का संकल्प लिया। कार्यक्रम में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री कमलेश कुमार खरपुसे और सूबेदार श्री नवीन सोनकर सहित पुलिस विभाग के कई अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे। योग प्रशिक्षकों ने विभिन्न योगासनों और प्राणायामों का अभ्यास कराया, साथ ही योग के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य संबंधी लाभों के बारे में विस्तृत जानकारी दी। इस अवसर पर, पुलिस अधीक्षक बैतूल श्री वीरेन्द्र जैन ने अपने संदेश में योग को भारत की प्राचीन एवं अमूल्य धरोहर बताया, जो शरीर, मन और आत्मा के बीच संतुलन स्थापित करती है। उन्होंने कहा कि पुलिस कर्मियों का कार्य चुनौतीपूर्ण और तनावपूर्ण होता है, ऐसे में नियमित योग और प्राणायाम न केवल उन्हें शारीरिक रूप से स्वस्थ रखने में सहायक हैं, बल्कि मानसिक दृढ़ता, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा भी प्रदान करते हैं। श्री जैन ने अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर सभी अधिकारी-कर्मचारियों और नागरिकों से योग को अपनी दैनिक दिनचर्या का हिस्सा बनाकर स्वस्थ, संतुलित एवं तनावमुक्त जीवन की ओर अग्रसर होने की अपील की। कार्यक्रम के दौरान योग के महत्व और दैनिक जीवन में इसकी उपयोगिता पर भी प्रकाश डाला गया। उपस्थित सभी अधिकारियों और कर्मचारियों ने नियमित रूप से योग करने का संकल्प लिया। यह कार्यक्रम स्वस्थ एवं निरोगी जीवन के संदेश के साथ संपन्न हुआ, जिसे जिला पुलिस बैतूल, मध्य प्रदेश द्वारा जारी किया गया था।4
- अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने 21वें योग दिवस पर अपना वक्तव्य जारी किया। उन्होंने कहा कि योग ने भारत को वैश्विक स्तर पर एक विशेष पहचान दिलाई है।1
- कृषि विभाग ने किसानों को गुणवत्तायुक्त कृषि आदान उपलब्ध कराने के लिए सख्ती दिखाते हुए कदम उठाए हैं। इसी क्रम में, नवागत उपसंचालक कृषि श्री आर. जी. रजक ने एक जिला स्तरीय दल के साथ भैंसदेही क्षेत्र में स्थित कृषि आदान प्रतिष्ठानों का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान राठौर कृषि सेवा केंद्र और बालाजी ट्रेडर्स की दुकान व गोदाम की विशेष रूप से जांच की गई। निरीक्षण के दौरान, बालाजी ट्रेडर्स में उर्वरक और अन्य कृषि आदानों के भंडारण तथा विक्रय संबंधी गंभीर अनियमितताएं सामने आईं। इन अनियमितताओं के मद्देनजर, विभाग ने संबंधित प्रतिष्ठान के उर्वरकों के विक्रय पर तत्काल रोक लगा दी है और संचालक को कड़ी चेतावनी जारी की है। इसके अतिरिक्त, प्रतिष्ठान का लाइसेंस निरस्त करने और नियमानुसार वैधानिक कार्रवाई शुरू करने की प्रक्रिया भी प्रारंभ कर दी गई है। विभागीय टीम ने इस निरीक्षण के दौरान विभिन्न प्रतिष्ठानों से बीज और उर्वरक के नमूने भी एकत्र किए हैं, जिन्हें गुणवत्ता परीक्षण हेतु प्रयोगशाला भेजा जाएगा। उपसंचालक कृषि श्री रजक ने जोर देकर कहा कि किसानों को गुणवत्तायुक्त बीज एवं उर्वरक उपलब्ध कराना विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कृषि आदानों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने और नियमों का पालन करने में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने यह भी बताया कि किसानों के हितों की रक्षा के लिए इस तरह के औचक निरीक्षण लगातार जारी रहेंगे।1
- आठनेर विकासखंड क्षेत्र के मांडवी स्थित नरवरे पोल्ट्री फार्म पर उस समय हड़कंप मच गया जब मक्के के बोरों के बीच एक किंग कोबरा सांप फन फैलाए बैठा दिखाई दिया। सांप को देखते ही पोल्ट्री फार्म पर काम करने वाले कर्मचारियों ने तुरंत संचालक नरवरे को इसकी जानकारी दी। सूचना मिलने पर सर्प मित्र गुनवंत बरडे मौके पर पहुँचे और कड़ी मशक्कत के बाद किंग कोबरा का सुरक्षित रेस्क्यू किया। सर्प मित्र बरडे ने इस अवसर पर लोगों से अपील की है कि वन्यजीवों की सुरक्षा हम सभी का कर्तव्य है।1
- स्वास्थ्य मंत्री का एक योग से संबंधित वीडियो खूब वायरल हो रहा है। यह वीडियो तेजी से लोगों के बीच फैल रहा है।1
- भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल एक योगाभ्यास कार्यक्रम में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने कहा कि योग के माध्यम से भारत को वैश्विक स्तर पर एक विशेष पहचान मिली है।1