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झांसी के चिरगांव में डॉक्टर अंबेडकर की प्रतिमा को क्षतिग्रस्त कर दिया गया है। इस घटना के सामने आने के बाद से स्थानीय लोगों में गहरा जनाक्रोश व्याप्त है।
अतुल वर्मा
झांसी के चिरगांव में डॉक्टर अंबेडकर की प्रतिमा को क्षतिग्रस्त कर दिया गया है। इस घटना के सामने आने के बाद से स्थानीय लोगों में गहरा जनाक्रोश व्याप्त है।
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- झांसी के चिरगांव में डॉक्टर अंबेडकर की प्रतिमा को क्षतिग्रस्त कर दिया गया है। इस घटना के सामने आने के बाद से स्थानीय लोगों में गहरा जनाक्रोश व्याप्त है।1
- झांसी के सीपरी बाजार स्थित दीनदयाल नगर में एक धार्मिक स्थल, माता मंदिर में, भक्तों द्वारा सवा करोड़ शिवलिंग बनाने का संकल्प लिया गया है। मंदिर के मुख्य संयोजक भीष्म देव मिश्रा और रेल सेवा निवृत ओमप्रकाश प्रजापति सहित सभी भक्तगणों ने जानकारी दी कि यह संकल्प 8 मार्च से शुरू हुआ था। इस पुनीत कार्य में देश भर के भक्तगणों ने सक्रिय रूप से भाग लिया।1
- झाँसी के बबीना स्थित गणेश मंदिर परिसर में गहोई महिला मंडल द्वारा भारतीय वायु सेना की फ्लाइंग ऑफिसर एकता गुप्ता के सम्मान में एक विशेष समारोह आयोजित किया गया। इस अवसर पर, श्रीमती प्रीति नौगरैया और श्री जय-जय गुप्ता की सुपुत्री, फ्लाइंग ऑफिसर एकता गुप्ता को उनकी गौरवपूर्ण उपलब्धि के लिए पुष्पमालाएँ पहनाकर सम्मानित किया गया। उन्हें एक प्रशस्ति-पत्र के साथ ₹1100 की नगद सम्मान राशि भी भेंट की गई। गहोई महिला मंडल की अध्यक्ष सीमा गुप्ता और कोषाध्यक्ष रीना गुप्ता ने फ्लाइंग ऑफिसर एकता गुप्ता का सम्मान करते हुए कहा कि उनकी सफलता समाज की बेटियों के लिए एक बड़ी प्रेरणा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह उपलब्धि प्रत्येक बेटी को बड़े सपने देखने और उन्हें साकार करने का महत्वपूर्ण संदेश देती है। इस समारोह में गहोई महिला मंडल की कई सदस्याएँ जैसे पूनम गुप्ता, कीर्ति गुप्ता, अर्चना गुप्ता, संध्या गुप्ता, प्रियंका गुप्ता, रुचि गुप्ता, सुमन गुप्ता, रजनी गुप्ता, रूबी गुप्ता, सुधा गुप्ता, स्वीटी गुप्ता, नेहा गुप्ता, कीर्ति नौगरइया और दीप्ति गुप्ता उपस्थित रहीं। सभी ने फ्लाइंग ऑफिसर एकता गुप्ता को उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएँ दीं और उनकी राष्ट्रसेवा के लिए मंगलकामनाएँ व्यक्त कीं।1
- उत्तर प्रदेश के झांसी में जल संकट के बीच एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है। शहर में जहां एक तरफ लोग पीने के पानी के लिए त्रस्त हैं, वहीं हैवट मार्केट के सामने कई घंटों पहले एक पानी की पाइपलाइन टूट गई है। इस लापरवाही के कारण हजारों लीटर स्वच्छ पानी सड़कों पर लगातार बह रहा है, जिससे भारी जल बर्बादी हो रही है। इस गंभीर स्थिति के बावजूद, जल संस्थान और जल निगम के जिम्मेदार अधिकारी तथा कर्मचारी मौके से नदारद बताए जा रहे हैं। लोगों का आरोप है कि उनकी निष्क्रियता के चलते यह समस्या विकराल रूप ले रही है और बहुमूल्य पानी व्यर्थ जा रहा है।1
- झाँसी के हैवट मार्केट में मोहर्रम का जुलूस निकाला गया। यह जुलूस निर्धारित स्थल पर शांतिपूर्वक सम्पन्न हुआ।4
- आज दिनांक 26 जून 2026 को झाँसी स्थित जन अधिकार पार्टी कार्यालय में छत्रपति शाहू जी महाराज की जयंती का भव्य आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम जन अधिकार पार्टी के संस्थापक माननीय श्री बाबू सिंह कुशवाहा जी और राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीमती शिवकन्या कुशवाहा जी के दिशा-निर्देश पर संपन्न हुआ। समारोह में सुंदर कुशवाहा मंडल अध्यक्ष ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की, जबकि प्रदेश महासचिव मधु कुशवाहा विशिष्ट अतिथि रहीं। कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉक्टर बालचंद कुशवाहा जी ने की और संचालन जिला प्रभारी मनोज कुशवाहा ने किया। सर्वप्रथम सभी उपस्थित लोगों ने तथागत गौतम बुद्ध के चित्र पर पुष्प अर्पित किए, तत्पश्चात छत्रपति शाहू जी महाराज के चित्र पर भी फूल माला और पुष्प चढ़ाए गए। इस अवसर पर सभी वक्ताओं ने छत्रपति शाहू जी महाराज के जीवन और उनके आदर्शों पर प्रकाश डाला। इसके बाद पार्टी के सदस्यता अभियान को लेकर विस्तार से चर्चा की गई, और निष्क्रिय पदों पर विचार-विमर्श करके नए पदाधिकारी नियुक्त किए गए। इसी क्रम में श्री कैलाश कुशवाहा जी को झाँसी विधानसभा का विधानसभा अध्यक्ष बनाए जाने पर सभी ने उन्हें हार्दिक शुभकामनाएँ दीं। पार्टी ने अपने मूल सिद्धांतों को दोहराया, जिसमें 'गरीब हो या धनवान, सब की शिक्षा एक समान' और 'जिसकी जितनी जनसंख्या, उसकी उतनी हिस्सेदारी' जैसे नारों पर जोर दिया गया। इस महत्वपूर्ण अवसर पर चुन्नीलाल, धन सिंह फौजी, इंजीनियर बिहारी लाल, मनोज कुशवाहा, श्रीमती फूलवती, श्रीमती उर्मिला देवी, हितेंद्र कुशवाहा बंगरा, सतीश, चंद्रभान सिंह, कैलाश कुशवाहा, कालीचरण कुशवाहा चेयरमेन, डॉ बालचंद, बाबूलाल कुशवाहा रानीपुर, शिव दीन फौजी, दीपक कुशवाहा, श्रीमती लक्ष्मी, पी डी कुशवाहा, रामनरेश पटेल पूर्व जिला अध्यक्ष सम्यक पार्टी, शिव शंकर पटेल, मातादीन कुशवाहा, रामप्रसाद, बृज किशोर कुशवाहा, मोतीलाल कुशवाहा, श्रीमती कौसा देवी, रामकुमार कुशवाहा विधानसभा अध्यक्ष मऊरानीपुर, डॉ शंकर लाल कुशवाहा मऊरानीपुर, तुलसीराम कुशवाहा टोड़ी फतेहपुर, राजू कुशवाहा टोड़ी फतेहपुर, दिनेश प्रताप सिंह कुशवाहा, कालीचरण कुशवाहा मऊरानीपुर, आर के फौजी, सुंदर सिंह, श्रीमती मधु कुशवाहा, श्रीमती प्रेमवती कुशवाहा, उमाशंकर कुशवाहा, अखिलेश कुशवाहा सकरार, हरमेंद्र सिंह कुशवाहा, रामकुमार कुशवाहा एडवोकेट, परमलाल कुशवाहा बंगरा, प्रदीप कुमार कुशवाहा,धीरुभाई, बनवारी लाल, चंद्रभान कुशवाहा बगरा, सुरेंद्र, रामेश्वर कुशवाहा सहित भारी संख्या में कार्यकर्ता और पदाधिकारी उपस्थित रहे। पूरे कार्यक्रम के दौरान 'जन अधिकार पार्टी जिंदाबाद', 'माननीय श्री बाबू सिंह कुशवाहा जिंदाबाद', और 'माननीया श्रीमती शिवकन्या कुशवाहा जिंदाबाद' के जोरदार नारे गूँजते रहे, जो पार्टी की एकजुटता और उत्साह को दर्शाता है।1
- मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 27 जून को उज्जैन में आयोजित 'सिंहस्थ 2016 का अनुभव, सिंहस्थ 2028 का संकल्प' कार्यशाला में शामिल हुए। उन्होंने दीप प्रज्ज्वलन कर इसका शुभारंभ किया। इस कार्यशाला में उन अधिकारियों और लोगों ने भाग लिया, जिन्हें पिछले कुंभ मेलों का अनुभव था, और उन्होंने अपने अनुभव साझा किए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भी कुंभ मेलों से जुड़े अपने रोचक अनुभव सुनाए। उन्होंने बताया कि इस बार के सिंहस्थ में सारी सुविधाएं मुहैया कराई जाएंगी, ताकि आम नागरिकों को कोई परेशानी न हो, और इसके लिए आसपास के राज्यों से भी समन्वय स्थापित करने की आवश्यकता है। उन्होंने विश्वास दिलाया कि इस बार का सिंहस्थ भव्य होगा। इस अवसर पर, उज्जैन में जारी अधोसंरचना विकास कार्यों पर एक केंद्रीय लघु फिल्म का प्रदर्शन भी किया गया। सिंहस्थ 2028 में 40 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं के आने का अनुमान है, जिनमें से 4 करोड़ श्रद्धालु अमृत स्नान करेंगे। इस महाकुंभ के लिए क्षिप्रा नदी पर 22 नए पुलों का निर्माण किया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उज्जैन से अपने संबंध को सौभाग्यशाली बताते हुए कहा कि महाकाल की नगरी उज्जैन से जुड़ने पर जीवन धन्य होता है। उन्होंने कहा कि मनुष्य ही नहीं, देवताओं की भी कामना होती है कि उन्हें उज्जैन में निवास का अवसर मिले। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हो रहे बदलावों का जिक्र करते हुए कहा कि अब बड़े दिनों-त्योहारों का इंतजार नहीं करना पड़ता, बल्कि "12 महीने बसंत है, आनंद का उत्सव है"। मुख्यमंत्री ने धार्मिक पर्यटन के बढ़ते आकर्षण पर जोर दिया और कहा कि सरकार की मंशा दूरगामी परिणामों वाले काम करने की है। उन्होंने यह भी कहा कि महाकाल की कृपा से कोई व्यक्ति इस तरह के शहर से निकलकर सरकार के सर्वोच्च पद पर बैठता है, और सभी का महाकाल नगरी से जुड़ना एक "अमृत कुंभ" जैसा संयोग है। अपने अनुभवों को साझा करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बताया कि 80 के दशक के कुंभ में वे स्काउट गाइड के सदस्य के रूप में सेवा कर रहे थे, और 1992 के कुंभ में वे सिंहस्थ समिति में थे। उन्होंने एक किस्सा सुनाया कि कैसे एक बार एक बुजुर्ग कार्यालय सहायक ने उन्हें दरवाजे पर रोक दिया था। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि उस समय सिंहस्थ समिति में सभी लोगों को जोड़ा जाता था। उन्होंने बताया कि अभी तक कुछ समितियों का गठन नहीं हुआ है और वे चाहते हैं कि इनमें केवल उज्जैन के प्रतिनिधि ही नहीं, बल्कि अन्य लोगों को भी शामिल किया जाए ताकि सभी के अनुभवों का लाभ मिल सके। डॉ. मोहन यादव ने कहा कि सिंहस्थ सबका है और पुराने तथा अभी के समय में काफी अंतर है। उन्होंने बताया कि पहले उज्जैन में एक-दो ही होटल होते थे, जिनमें से कुंभ के बाद एक बंद भी हो जाती थी, लेकिन अब लोगों को ठहराना एक बड़ी चुनौती है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि उज्जैन का समय बदल गया है और सरकार पुराने दौर के सारे दबावों को दूर करने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि सभी सड़कें चौड़ी की गई हैं ताकि बाहर से आने वालों को कोई समस्या न हो, और स्नान की चुनौती भी लगभग पूरी कर ली गई है। सारे देव स्थानों को बड़ा किया गया है। मुख्यमंत्री ने बताया कि नदी की धारा का मिट्टी के कारण कभी दाएं-कभी बाएं मुड़ जाना एक बड़ी चुनौती थी, लेकिन अब घाट पक्के होने से यह समस्या दूर हो गई है। उन्होंने यह भी सुनिश्चित किया कि इस बार धर्मशालाएँ उन लोगों को मिलेंगी जिन्हें उनकी आवश्यकता है। इसके अतिरिक्त, रेलवे में हुए बदलावों का भी लाभ मिलेगा। उन्होंने पड़ोसी राज्यों से समन्वय बनाने की आवश्यकता पर बल दिया ताकि अव्यवस्था न फैले, और 2028 का सिंहस्थ भव्य रूप से संपन्न होने की शुभकामनाएँ दीं।1
- झांसी में जिलाधिकारी अब स्वयं यातायात व्यवस्था की निगरानी करेंगे। इस पहल का मुख्य उद्देश्य उन खतरनाक मार्गों को बंद करना है, जिन्हें 'मौत के रास्ते' के तौर पर चिह्नित किया गया है।1