मंदिर में मछली-भात पर सियासत: अजय राय पर उठे सवाल के बाद अब बीजेपी नेताओं पर क्यों नहीं उठ रही आपत्ति? मंदिर में मछली-भात पर सियासत: अजय राय पर उठे सवाल के बाद अब बीजेपी नेताओं पर क्यों नहीं उठ रही आपत्ति? निषाद समाज की पार्टी के हनुमानगढ़ी में आयोजित एक कार्यक्रम को लेकर राजनीतिक विवाद एक बार फिर चर्चा में है। आरोप है कि पहले एक बैठक के दौरान उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कांग्रेस नेता अजय राय पर मछली-भात खाने को लेकर सवाल उठाए थे। अब सामने आए एक कार्यक्रम या वीडियो को लेकर विपक्ष और स्थानीय लोगों की ओर से सवाल उठाया जा रहा है कि जब बीजेपी से जुड़े लोग कथित तौर पर मंदिर परिसर या धार्मिक स्थल पर बैठकर मछली-भात खाते दिखाई दे रहे हैं, तो इस मामले पर वही आपत्ति क्यों नहीं जताई जा रही? मामले ने राजनीतिक गलियारों में दोहरे मापदंड को लेकर बहस छेड़ दी है। सवाल उठ रहा है कि यदि किसी राजनीतिक नेता के मछली-भात खाने से धार्मिक भावनाओं का मुद्दा बनता है, तो फिर उसी तरह की घटना में दूसरे नेताओं के लिए अलग पैमाना क्यों अपनाया जा रहा है? विरोधियों का कहना है कि राजनीति में धार्मिक भावनाओं का मुद्दा सभी के लिए समान होना चाहिए। उनका सवाल है कि क्या नियम और धार्मिक मर्यादाएं केवल विपक्षी नेताओं के लिए हैं, या फिर सत्तारूढ़ दल के नेताओं पर भी समान रूप से लागू होती हैं? हालांकि, इस पूरे मामले पर संबंधित बीजेपी नेताओं या प्रशासन की ओर से क्या आधिकारिक प्रतिक्रिया आती है, इस पर नजर बनी हुई है। फिलहाल यह मुद्दा सोशल मीडिया और राजनीतिक बहस में तेजी से चर्चा का विषय बनता जा रहा है। अब बड़ा सवाल यही है—अजय राय पर मछली-भात को लेकर सवाल उठाने वाली राजनीति, अपने ही लोगों के मामले में क्या जवाब देगी?
मंदिर में मछली-भात पर सियासत: अजय राय पर उठे सवाल के बाद अब बीजेपी नेताओं पर क्यों नहीं उठ रही आपत्ति? मंदिर में मछली-भात पर सियासत: अजय राय पर उठे सवाल के बाद अब बीजेपी नेताओं पर क्यों नहीं उठ रही आपत्ति? निषाद समाज की पार्टी के हनुमानगढ़ी में आयोजित एक कार्यक्रम को लेकर राजनीतिक विवाद एक बार फिर चर्चा में है। आरोप है कि पहले एक बैठक के दौरान उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कांग्रेस नेता अजय राय पर मछली-भात खाने को लेकर सवाल उठाए थे। अब सामने आए एक कार्यक्रम या वीडियो को लेकर विपक्ष और स्थानीय लोगों की ओर से सवाल उठाया जा रहा है कि जब बीजेपी से जुड़े लोग कथित तौर पर मंदिर परिसर या धार्मिक स्थल पर बैठकर मछली-भात खाते दिखाई दे रहे हैं, तो इस मामले पर वही आपत्ति क्यों नहीं जताई जा रही? मामले ने राजनीतिक गलियारों में दोहरे मापदंड को लेकर बहस छेड़ दी है। सवाल उठ रहा है कि यदि किसी राजनीतिक नेता के मछली-भात खाने से धार्मिक भावनाओं का मुद्दा बनता है, तो फिर उसी तरह की घटना में दूसरे नेताओं के लिए अलग पैमाना क्यों अपनाया जा रहा है? विरोधियों का कहना है कि राजनीति में धार्मिक भावनाओं का मुद्दा सभी के लिए समान होना चाहिए। उनका सवाल है कि क्या नियम और धार्मिक मर्यादाएं केवल विपक्षी नेताओं के लिए हैं, या फिर सत्तारूढ़ दल के नेताओं पर भी समान रूप से लागू होती हैं? हालांकि, इस पूरे मामले पर संबंधित बीजेपी नेताओं या प्रशासन की ओर से क्या आधिकारिक प्रतिक्रिया आती है, इस पर नजर बनी हुई है। फिलहाल यह मुद्दा सोशल मीडिया और राजनीतिक बहस में तेजी से चर्चा का विषय बनता जा रहा है। अब बड़ा सवाल यही है—अजय राय पर मछली-भात को लेकर सवाल उठाने वाली राजनीति, अपने ही लोगों के मामले में क्या जवाब देगी?
- कानपुर से लखनऊ जाने वाले ब्रिज बंथरा के पास ब में पुल का बड़ा सा टुकड़ा गिरा कानपुर से लखनऊ जाने वाले ब्रिज बंथरा के पास ब में पुल सरिया देखने के कारण बड़ा घोटाले का सामना नजर आय 4700 करोड़ की लागत से बना है बड़ा सवाल है इतनी लापरवाही कैसे कर सकता है @NHAI1
- बड़ी राहत! ₹2,000 तक UPI भुगतान पर अब कोई बैंक चार्ज नहीं! नई दिल्ली: सरकार ने डिजिटल भुगतान करने वालों को बड़ी राहत दी है। वित्त मंत्रालय ने सोमवार को अधिसूचना जारी कर कहा कि ₹2,000 तक के UPI ट्रांजैक्शन और RuPay डेबिट कार्ड से होने वाले भुगतान पर कोई बैंक चार्ज नहीं लगेगा। Payment and Settlement Systems Act के तहत जारी अधिसूचना में साफ किया गया कि कोई भी बैंक या सिस्टम प्रोवाइडर, सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से, भुगतान करने या प्राप्त करने वाले व्यक्ति पर कोई शुल्क नहीं लगा सकता। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पहले ही कहा था कि MDR चार्ज व्यापारियों पर लागू होता है, ग्राहकों पर नहीं। यह फैसला डिजिटल इंडिया को और मजबूत करेगा। #UPI #DigitalIndia #RuPay #BankCharges #nirmalasitharaman1
- Post by Ramakant1
- फतेहपुर,,, में रोडवेज बस में साइकिल सवार को रौंदा, हादसे में युवक की दर्दनाक मौत1
- विधायक श्रीकांत कटियार के सुपुत्र ने बाढ़ ग्रसित परिवारों को बांटी राहत सामग्री आज विधानसभा क्षेत्र बांगरमऊ की ग्राम पंचायत जाजामऊ एहतमाली में मेरी अनुपस्थिति में पुत्र श्री अंशुल कटियार जी द्वारा बाढ़ पीड़ित परिवारों के बीच राहत सामग्री वितरित की गई। संकट की इस घड़ी में प्रभावित परिवारों के साथ खड़ा होना हमारा सामाजिक दायित्व है। बाढ़ प्रभावित सभी परिवारों को हरसंभव सहयोग एवं सहायता उपलब्ध कराने के लिए हम सदैव प्रतिबद्ध हैं। 🙏 Bharatiya Janata Party (BJP) BJP Uttar Pradesh2
- बाढ़ के पानी में रील का जुनून, पुलिस ने सिखाया सबक। बाढ़ के पानी से लबालब बंधे (नहर) में जान जोखिम में डालकर नहाने और रील बनाने पहुंचे करीब आधा दर्जन युवकों को पुलिस ने पकड़ लिया। युवकों से मौके पर ‘डक वॉक’ कराकर सबक सिखाया और भविष्य में बाढ़ के पानी में जाने से सख्त मना किया। बाढ़ के पानी में नहाना और रील बनाना जानलेवा साबित हो सकता है। हादसों में कई लोग अपनी जान गंवा चुके हैं, बावजूद इसके सोशल मीडिया रील के चक्कर में युवा खतरा मोल ले रहे हैं। पुलिस ने दोबारा पकड़े जाने पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी।1
- मंदिर में मछली-भात पर सियासत: अजय राय पर उठे सवाल के बाद अब बीजेपी नेताओं पर क्यों नहीं उठ रही आपत्ति? मंदिर में मछली-भात पर सियासत: अजय राय पर उठे सवाल के बाद अब बीजेपी नेताओं पर क्यों नहीं उठ रही आपत्ति? निषाद समाज की पार्टी के हनुमानगढ़ी में आयोजित एक कार्यक्रम को लेकर राजनीतिक विवाद एक बार फिर चर्चा में है। आरोप है कि पहले एक बैठक के दौरान उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कांग्रेस नेता अजय राय पर मछली-भात खाने को लेकर सवाल उठाए थे। अब सामने आए एक कार्यक्रम या वीडियो को लेकर विपक्ष और स्थानीय लोगों की ओर से सवाल उठाया जा रहा है कि जब बीजेपी से जुड़े लोग कथित तौर पर मंदिर परिसर या धार्मिक स्थल पर बैठकर मछली-भात खाते दिखाई दे रहे हैं, तो इस मामले पर वही आपत्ति क्यों नहीं जताई जा रही? मामले ने राजनीतिक गलियारों में दोहरे मापदंड को लेकर बहस छेड़ दी है। सवाल उठ रहा है कि यदि किसी राजनीतिक नेता के मछली-भात खाने से धार्मिक भावनाओं का मुद्दा बनता है, तो फिर उसी तरह की घटना में दूसरे नेताओं के लिए अलग पैमाना क्यों अपनाया जा रहा है? विरोधियों का कहना है कि राजनीति में धार्मिक भावनाओं का मुद्दा सभी के लिए समान होना चाहिए। उनका सवाल है कि क्या नियम और धार्मिक मर्यादाएं केवल विपक्षी नेताओं के लिए हैं, या फिर सत्तारूढ़ दल के नेताओं पर भी समान रूप से लागू होती हैं? हालांकि, इस पूरे मामले पर संबंधित बीजेपी नेताओं या प्रशासन की ओर से क्या आधिकारिक प्रतिक्रिया आती है, इस पर नजर बनी हुई है। फिलहाल यह मुद्दा सोशल मीडिया और राजनीतिक बहस में तेजी से चर्चा का विषय बनता जा रहा है। अब बड़ा सवाल यही है—अजय राय पर मछली-भात को लेकर सवाल उठाने वाली राजनीति, अपने ही लोगों के मामले में क्या जवाब देगी?1
- AMU में छात्राओं का फूटा गुस्सा, घटिया खाने के विरोध में प्रदर्शन; मैनेजमेंट से धक्का-मुक्की AMU में छात्राओं का फूटा गुस्सा, घटिया खाने के विरोध में प्रदर्शन; मैनेजमेंट से धक्का-मुक्की अलीगढ़: अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (AMU) के अब्दुल्ला गर्ल्स कॉलेज के हॉस्टल में खाने की गुणवत्ता और साफ-सफाई को लेकर छात्राओं का आक्रोश सामने आया। छात्राओं ने मेस में परोसे जा रहे भोजन की कथित खराब गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए विरोध-प्रदर्शन किया। बताया जा रहा है कि बड़ी संख्या में छात्राएं अपनी शिकायतों को लेकर कॉलेज परिसर में प्रदर्शन के लिए पहुंचीं। छात्राओं का आरोप है कि हॉस्टल में मिलने वाले भोजन की गुणवत्ता संतोषजनक नहीं है और साफ-सफाई को लेकर भी गंभीर लापरवाही बरती जा रही है। प्रदर्शन के दौरान कॉलेज प्रबंधन और सुरक्षा कर्मियों के साथ छात्राओं की तीखी बहस की स्थिति भी बनी। इसके बाद कथित तौर पर धक्का-मुक्की और हाथापाई तक की नौबत आ गई। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद मामला चर्चा में है। अब सवाल यह है कि छात्राओं की शिकायतों पर विश्वविद्यालय प्रशासन क्या कार्रवाई करता है और हॉस्टल मेस की व्यवस्था में सुधार के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं। हालांकि, भोजन की गुणवत्ता और हाथापाई से जुड़े आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।1