मोहम्मदाबाद पुलिस ने फतेहगढ़/फर्रुखाबाद के ग्राम मुड़गांव में जमीनी कब्जे और वर्चस्व को लेकर हुए खूनी संघर्ष के मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इस दौरान फायरिंग भी हुई, जिसमें सतेन्द्र सिंह के सिर में गोली लगी, जबकि उनके पुत्र अभय और दोस्त राहुल के पैर में गोली लगी। वहीं, मनोज के सिर में गंभीर चोट आई और अन्य लोग भी घायल हुए। पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों के कब्जे से घटना में प्रयुक्त एक लाइसेंसी .32 बोर रिवॉल्वर, 4 खोखा कारतूस, 4 जिंदा कारतूस, 3 लकड़ी के डंडे और 1 लोहे की पाइप बरामद की है। हथियार के इस्तेमाल की पुष्टि होने पर मुख्य आरोपी के खिलाफ धारा 27/30 आर्म्स एक्ट की बढ़ोतरी कर दी गई है। पुलिस के मुताबिक, यह हिंसक विवाद 6 जुलाई 2026 को हुआ था, जब दोनों पक्षों ने एक राय होकर लाठी-डंडों, लोहे की रॉड और ईंट-पत्थरों से हमला किया और जान से मारने की नीयत से फायरिंग की। इस मामले में मु.अ.सं. 228/2026 के तहत धारा 191(2), 191(3), 190, 109(1), 125, 131 बीएनएस के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। गिरफ्तार किए गए आरोपियों में रामनारायण पुत्र बाबू सिंह, मनीष पुत्र रामनारायण, अजीत पुत्र शिव नरेश सिंह, राम नरेश पुत्र बाबू सिंह और शिव नरेश पुत्र बाबू सिंह, सभी निवासी ग्राम मुड़गांव, थाना मोहम्मदाबाद शामिल हैं। पूछताछ में मुख्य आरोपी रामनारायण ने कबूला कि उसका और सतेन्द्र सिंह के बीच जमीन पर कब्जे और वर्चस्व को लेकर पुराना विवाद चल रहा था, और इसी विवाद के दौरान उसने अपनी लाइसेंसी रिवॉल्वर से फायरिंग की। पुलिस गिरफ्तार पांचों आरोपियों के आपराधिक इतिहास की जानकारी भी जुटा रही है और अन्य थानों में दर्ज मुकदमों को भी विवेचना में शामिल करने पर विचार कर रही है। अपर पुलिस अधीक्षक गिरीश कुमार ने बताया कि सभी गिरफ्तार आरोपियों के विरुद्ध अग्रिम विधिक कार्रवाई कर न्यायालय भेजा जा रहा है, जबकि फरार आरोपियों की तलाश में पुलिस की टीमें दबिशें दे रही हैं। इस पूरे ऑपरेशन का नेतृत्व प्रभारी निरीक्षक मदन मोहन चतुर्वेदी ने किया, जिसमें उपनिरीक्षक कपिल कुमार, उपनिरीक्षक लक्ष्मण सिंह, हेड कांस्टेबल सुनील कुमार और कांस्टेबल भूपेन्द्र सिंह, जितेन्द्र सिंह, हरिओम चाहर तथा शेखर कटारिया भी शामिल रहे।
मोहम्मदाबाद पुलिस ने फतेहगढ़/फर्रुखाबाद के ग्राम मुड़गांव में जमीनी कब्जे और वर्चस्व को लेकर हुए खूनी संघर्ष के मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इस दौरान फायरिंग भी हुई, जिसमें सतेन्द्र सिंह के सिर में गोली लगी, जबकि उनके पुत्र अभय और दोस्त राहुल के पैर में गोली लगी। वहीं, मनोज के सिर में गंभीर चोट आई और अन्य लोग भी घायल हुए। पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों के कब्जे से घटना में प्रयुक्त एक लाइसेंसी .32 बोर रिवॉल्वर, 4 खोखा कारतूस, 4 जिंदा कारतूस, 3 लकड़ी के डंडे और 1 लोहे की पाइप बरामद की है। हथियार के इस्तेमाल की पुष्टि होने पर मुख्य आरोपी के खिलाफ धारा 27/30 आर्म्स एक्ट की बढ़ोतरी कर दी गई है। पुलिस के मुताबिक, यह हिंसक विवाद 6 जुलाई 2026 को हुआ था, जब दोनों पक्षों ने एक राय होकर लाठी-डंडों, लोहे की रॉड और ईंट-पत्थरों से हमला किया और जान से मारने की नीयत से फायरिंग की। इस मामले में मु.अ.सं. 228/2026 के तहत धारा 191(2), 191(3), 190, 109(1), 125, 131 बीएनएस के तहत मुकदमा दर्ज
किया गया है। गिरफ्तार किए गए आरोपियों में रामनारायण पुत्र बाबू सिंह, मनीष पुत्र रामनारायण, अजीत पुत्र शिव नरेश सिंह, राम नरेश पुत्र बाबू सिंह और शिव नरेश पुत्र बाबू सिंह, सभी निवासी ग्राम मुड़गांव, थाना मोहम्मदाबाद शामिल हैं। पूछताछ में मुख्य आरोपी रामनारायण ने कबूला कि उसका और सतेन्द्र सिंह के बीच जमीन पर कब्जे और वर्चस्व को लेकर पुराना विवाद चल रहा था, और इसी विवाद के दौरान उसने अपनी लाइसेंसी रिवॉल्वर से फायरिंग की। पुलिस गिरफ्तार पांचों आरोपियों के आपराधिक इतिहास की जानकारी भी जुटा रही है और अन्य थानों में दर्ज मुकदमों को भी विवेचना में शामिल करने पर विचार कर रही है। अपर पुलिस अधीक्षक गिरीश कुमार ने बताया कि सभी गिरफ्तार आरोपियों के विरुद्ध अग्रिम विधिक कार्रवाई कर न्यायालय भेजा जा रहा है, जबकि फरार आरोपियों की तलाश में पुलिस की टीमें दबिशें दे रही हैं। इस पूरे ऑपरेशन का नेतृत्व प्रभारी निरीक्षक मदन मोहन चतुर्वेदी ने किया, जिसमें उपनिरीक्षक कपिल कुमार, उपनिरीक्षक लक्ष्मण सिंह, हेड कांस्टेबल सुनील कुमार और कांस्टेबल भूपेन्द्र सिंह, जितेन्द्र सिंह, हरिओम चाहर तथा शेखर कटारिया भी शामिल रहे।
- हरियाणा के गुरुग्राम में कल रात हुई तेज़ बारिश के कारण नेशनल हाईवे का एक हिस्सा धंस गया। इस घटना के तुरंत बाद सड़क पर करीब 10 किलोमीटर लंबा ट्रैफिक जाम लग गया, जिससे यात्रियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।1
- मोहम्मदाबाद पुलिस ने फतेहगढ़/फर्रुखाबाद के ग्राम मुड़गांव में जमीनी कब्जे और वर्चस्व को लेकर हुए खूनी संघर्ष के मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इस दौरान फायरिंग भी हुई, जिसमें सतेन्द्र सिंह के सिर में गोली लगी, जबकि उनके पुत्र अभय और दोस्त राहुल के पैर में गोली लगी। वहीं, मनोज के सिर में गंभीर चोट आई और अन्य लोग भी घायल हुए। पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों के कब्जे से घटना में प्रयुक्त एक लाइसेंसी .32 बोर रिवॉल्वर, 4 खोखा कारतूस, 4 जिंदा कारतूस, 3 लकड़ी के डंडे और 1 लोहे की पाइप बरामद की है। हथियार के इस्तेमाल की पुष्टि होने पर मुख्य आरोपी के खिलाफ धारा 27/30 आर्म्स एक्ट की बढ़ोतरी कर दी गई है। पुलिस के मुताबिक, यह हिंसक विवाद 6 जुलाई 2026 को हुआ था, जब दोनों पक्षों ने एक राय होकर लाठी-डंडों, लोहे की रॉड और ईंट-पत्थरों से हमला किया और जान से मारने की नीयत से फायरिंग की। इस मामले में मु.अ.सं. 228/2026 के तहत धारा 191(2), 191(3), 190, 109(1), 125, 131 बीएनएस के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। गिरफ्तार किए गए आरोपियों में रामनारायण पुत्र बाबू सिंह, मनीष पुत्र रामनारायण, अजीत पुत्र शिव नरेश सिंह, राम नरेश पुत्र बाबू सिंह और शिव नरेश पुत्र बाबू सिंह, सभी निवासी ग्राम मुड़गांव, थाना मोहम्मदाबाद शामिल हैं। पूछताछ में मुख्य आरोपी रामनारायण ने कबूला कि उसका और सतेन्द्र सिंह के बीच जमीन पर कब्जे और वर्चस्व को लेकर पुराना विवाद चल रहा था, और इसी विवाद के दौरान उसने अपनी लाइसेंसी रिवॉल्वर से फायरिंग की। पुलिस गिरफ्तार पांचों आरोपियों के आपराधिक इतिहास की जानकारी भी जुटा रही है और अन्य थानों में दर्ज मुकदमों को भी विवेचना में शामिल करने पर विचार कर रही है। अपर पुलिस अधीक्षक गिरीश कुमार ने बताया कि सभी गिरफ्तार आरोपियों के विरुद्ध अग्रिम विधिक कार्रवाई कर न्यायालय भेजा जा रहा है, जबकि फरार आरोपियों की तलाश में पुलिस की टीमें दबिशें दे रही हैं। इस पूरे ऑपरेशन का नेतृत्व प्रभारी निरीक्षक मदन मोहन चतुर्वेदी ने किया, जिसमें उपनिरीक्षक कपिल कुमार, उपनिरीक्षक लक्ष्मण सिंह, हेड कांस्टेबल सुनील कुमार और कांस्टेबल भूपेन्द्र सिंह, जितेन्द्र सिंह, हरिओम चाहर तथा शेखर कटारिया भी शामिल रहे।2
- बांग्ला गोटिया ब तीसराम के मढ़ैया में ग्रामीण पिछले एक साल से सड़क संबंधी समस्याओं से जूझ रहे हैं, जहाँ का मुख्य रास्ता कटा हुआ है और अभी तक इसका निर्माण नहीं हुआ है। इस वजह से ग्रामीणों को खेतों से होकर आवाजाही करनी पड़ रही है। हाल ही में हुई बारिश ने उनकी परेशानी और बढ़ा दी है, क्योंकि खेतों के रास्ते में अब गहरे गड्ढे हो गए हैं और उनमें पानी भर गया है, जिससे आवागमन और भी मुश्किल हो गया है। ग्रामीणों का कहना है कि इस स्थिति में उनका आना-जाना बेहद कठिन हो गया है, लेकिन लोक निर्माण विभाग (PWD) के अधिकारी उनकी शिकायतों पर कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं और 'गहरी नींद' में सोए हुए हैं।1
- फर्रुखाबाद जिले के कमालगंज क्षेत्र में ग्रामीणों को जलभराव की समस्या का सामना करना पड़ रहा है, जिसके चलते उन्हें काफी परेशानियों से जूझना पड़ रहा है।1
- एक अज्ञात वारदात से संबंधित विस्तृत जानकारी प्राप्त करने के लिए पाठकों से पूरी खबर पढ़ने का आह्वान किया गया है। यह पोस्ट घटना के संपूर्ण विवरण को जानने और समझने पर जोर देती है, जिससे पाठकों को उस विशेष वारदात के सभी पहलुओं से अवगत होने का अवसर मिल सके और वे इससे जुड़ी हर जानकारी प्राप्त कर सकें।1
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- उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले की सदर तहसील में आयोजित समाधान दिवस से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है।1
- फर्रुखाबाद नगर पालिका ने मदारवाड़ी मोहल्ले को मानसून की पहली फुहार के साथ ही एक 'अनोखा' और 'मुफ्त वॉटर पार्क' भेंट किया है, जहाँ नागरिकों को बिना किसी टिकट के 'सड़न' और नालियों के 'शुद्ध, सुगंधित और गंदे' पानी का आनंद उठाने का मौका मिल रहा है। पत्रकार आर्यन बाजपेई के अनुसार, हल्की बारिश में ही नगर पालिका के 'कागजी विकास' की ड्रेनेज लाइनें ऐसे बहीं कि पूरा मोहल्ला 'वेनिस नगरी' में तब्दील हो गया, और घरों के अंदर नालियों का पानी बहने लगा। इस 'परम पूजनीय और परम सुस्त' नगर पालिका की इस अद्भुत व्यवस्था से मदारवाड़ी के निवासी 'कृतज्ञता' से भरे हुए हैं। रामप्रकाश नामक एक 'सौभाग्यशाली पीड़ित' ने बताया कि जरा सी बारिश में ही नाली का 'पवित्र' जल उनके बेडरूम तक पहुँच जाता है, जिससे बच्चों को स्कूल जाने की बोरियत नहीं झेलनी पड़ती क्योंकि उनकी किताबें पानी में तैर रही होती हैं। उन्होंने शिकायत के 'भजन' गाए, पर अफसर 'समाधि में लीन' हैं। एक अन्य त्रस्त महिला ने प्रशासन से सड़कों की जगह 'सब्सिडी पर नावें' दिलवाने की गुजारिश की, क्योंकि घुटनों तक कीचड़ और पानी के कारण स्कूटर-बाइक केवल शो-पीस बन गए हैं। स्थानीय दुकानदारों का धंधा भी 'डिजिटल' से सीधे 'एक्वाटिक' हो चुका है, ग्राहक दुकान तक तैरकर नहीं पहुँच पा रहे और दुकान के अंदर का सामान 'जल-समाधि' ले चुका है, जिससे व्यापारी अब राशन की जगह मछली पकड़ने का जाल बेचने की सोच रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि हर साल करोड़ों का 'नाला सफाई बजट' आता है, पर यह बजट एक 'गुप्त और आध्यात्मिक प्रक्रिया' से गुजरता है। आरोप है कि नगर पालिका के कर्मचारी 'कागजों पर गोताखोरी' करते हैं और मदारवाड़ी की सड़कें 'इंजीनियरिंग का अजूबा' हैं, जहाँ ढलान पानी को बाहर भेजने के बजाय घरों के अंदर आमंत्रित करती है। पानी के रास्ते में खड़े 'अवैध निर्माणों' को प्रशासन का ऐसा 'मूक आशीर्वाद' मिला हुआ है कि पानी भी उनसे रास्ता बदलकर जनता के घरों में घुस जाता है। जब इस जलभराव के बारे में नगर पालिका के 'आला हुक्मरानों' से पूछा गया, तो उन्होंने अपनी आँखें आधी खोलते हुए वही 'अमर और शाश्वत मंत्र' दोहरा दिया— "मामला संज्ञान में है, जल्द ही ड्रेनेज सुधारा जाएगा।" यह 'संज्ञान' शब्द एक 'दिव्य शक्ति' है जो हर साल मानसून में जागती है और धूप निकलते ही वापस 'कुंभकर्णी नींद' में सो जाती है। लेखक ने व्यंग्यात्मक लहजे में मदारवाड़ी की जनता से कहा है कि उन्हें 'साफ-सुथरी सड़कें और सूखी नालियां' जैसी पिछड़ी सोच छोड़कर, इसे आधुनिक विकास मानना चाहिए जहाँ टैक्स देने के बदले उन्हें घर बैठे 'नाव की सवारी' का रोमांच मिले। साथ ही, नगर पालिका प्रशासन से विनम्र निवेदन किया गया है कि वे विकास की इस 'गंगा' को सिर्फ मदारवाड़ी तक सीमित न रखें, बल्कि इसे पूरे फर्रुखाबाद में बहाकर शहर को बिना गोवा गए 'बीच' का मजा लेने का अवसर प्रदान करें। इस पूरी स्थिति पर 'कुंभकर्णी प्रशासनिक तंत्र' की जय-जयकार की गई है।2