मैहर नगर के वार्ड क्रमांक 9 स्थित मुक्तिधाम मार्ग पर चल रही सीवर लाइन परियोजना पिछले लगभग आठ माह से अधर में लटकी हुई है, जिससे यह विकास कार्य कम और प्रशासनिक अव्यवस्था का प्रतीक अधिक दिखाई देने लगा है। महीनों पहले खोदे गए विशाल गड्ढे आज भी वैसे ही पड़े हैं, और कार्य की गति लगभग ठप है। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए मैहर नगर कांग्रेस अध्यक्ष प्रभात द्विवेदी ने जिला प्रशासन और नगर पालिका की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कलेक्टर से पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की है। अपने निरीक्षण के बाद जारी वीडियो बयान में श्री द्विवेदी ने बताया कि मुक्तिधाम मार्ग पर सीवर लाइन के नाम पर बड़े-बड़े गड्ढे खोद दिए गए हैं, लेकिन न तो काम पूरा हुआ है और न ही नागरिकों की सुरक्षा के लिए कोई प्रभावी प्रबंध किए गए हैं। मार्ग का एक हिस्सा लगभग अवरुद्ध हो चुका है, जिससे स्थानीय रहवासियों, बुजुर्गों, स्कूली बच्चों और वाहन चालकों को रोज मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सुरक्षा के नाम पर सिर्फ हरे रंग की साधारण जाली लगाकर जिम्मेदार एजेंसी अपनी जवाबदेही से बचना चाहती है। द्विवेदी ने सवाल उठाया कि अगर रात के अंधेरे में या बारिश में कोई राहगीर, बुजुर्ग या दोपहिया वाहन चालक इन गड्ढों में गिरकर दुर्घटना का शिकार होता है, तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा? प्रभात द्विवेदी ने चिंता व्यक्त की कि इतने लंबे समय से कार्य अधूरा होने के बावजूद, नगर पालिका स्तर पर कोई प्रभावी निगरानी या नियंत्रण नहीं दिख रहा है। उन्होंने जनता की ओर से पूछा कि यह लापरवाही आखिर किसकी है – कार्यदायी एजेंसी की, तकनीकी अधिकारियों की, या परियोजना की निगरानी के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की। उन्होंने आगे आरोप लगाया कि करोड़ों की परियोजनाओं में यदि समयसीमा, गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों का पालन नहीं हो रहा है, तो यह केवल प्रशासनिक शिथिलता नहीं, बल्कि जनता के विश्वास के साथ खिलवाड़ है, क्योंकि विकास कार्यों का उद्देश्य सुविधा देना होता है, न कि भय और असुरक्षा पैदा करना। नगर कांग्रेस अध्यक्ष ने कलेक्टर मैहर से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए, आठ माह से कार्य अधूरा रहने के लिए जिम्मेदार व्यक्ति या एजेंसी का पता लगाया जाए और परियोजना की निगरानी में हुई चूक के लिए दोषी अधिकारियों व संबंधित एजेंसी के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए। इसके साथ ही, कार्यस्थलों पर तुरंत मजबूत बैरिकेडिंग, चेतावनी संकेत और सुरक्षा व्यवस्था लागू करने की मांग भी की गई, ताकि किसी भी संभावित दुर्घटना को रोका जा सके। श्री द्विवेदी ने चेतावनी दी कि प्रशासन को किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार करने के बजाय समय रहते कार्रवाई करनी चाहिए, और जनता जानना चाहती है कि यह काम आठ महीने से क्यों रुका है और इसकी जवाबदेही किसकी है। क्षेत्र के नागरिकों में भी स्थिति में सुधार न होने को लेकर गहरा आक्रोश है और वे जिला प्रशासन से इस जनहित के मुद्दे पर संज्ञान लेने की उम्मीद लगाए बैठे हैं।
मैहर नगर के वार्ड क्रमांक 9 स्थित मुक्तिधाम मार्ग पर चल रही सीवर लाइन परियोजना पिछले लगभग आठ माह से अधर में लटकी हुई है, जिससे यह विकास कार्य कम और प्रशासनिक अव्यवस्था का प्रतीक अधिक दिखाई देने लगा है। महीनों पहले खोदे गए विशाल गड्ढे आज भी वैसे ही पड़े हैं, और कार्य की गति लगभग ठप है। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए मैहर नगर कांग्रेस अध्यक्ष प्रभात द्विवेदी ने जिला प्रशासन और नगर पालिका की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कलेक्टर से पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की है। अपने निरीक्षण के बाद जारी वीडियो बयान में श्री द्विवेदी ने बताया कि मुक्तिधाम मार्ग पर सीवर लाइन के नाम पर बड़े-बड़े गड्ढे खोद दिए गए हैं, लेकिन न तो काम पूरा हुआ है और न ही नागरिकों की सुरक्षा के लिए कोई प्रभावी प्रबंध किए गए हैं। मार्ग का एक हिस्सा लगभग अवरुद्ध हो चुका है, जिससे स्थानीय रहवासियों, बुजुर्गों, स्कूली बच्चों और वाहन चालकों को रोज मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सुरक्षा के नाम पर सिर्फ हरे रंग की साधारण जाली लगाकर जिम्मेदार एजेंसी अपनी जवाबदेही से बचना चाहती है। द्विवेदी ने सवाल उठाया कि अगर रात के अंधेरे में या बारिश में कोई राहगीर, बुजुर्ग या दोपहिया वाहन चालक इन गड्ढों में गिरकर दुर्घटना का शिकार होता है, तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा? प्रभात द्विवेदी ने चिंता व्यक्त की कि इतने लंबे समय से कार्य अधूरा होने के बावजूद, नगर पालिका स्तर पर कोई प्रभावी निगरानी या नियंत्रण नहीं दिख रहा है। उन्होंने जनता की ओर से पूछा कि यह लापरवाही आखिर किसकी है – कार्यदायी एजेंसी की, तकनीकी अधिकारियों की, या परियोजना की निगरानी के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की। उन्होंने आगे आरोप लगाया कि करोड़ों की परियोजनाओं में यदि समयसीमा, गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों का पालन नहीं हो रहा है, तो यह केवल प्रशासनिक शिथिलता नहीं, बल्कि जनता के विश्वास के साथ खिलवाड़ है, क्योंकि विकास कार्यों का उद्देश्य सुविधा देना होता है, न कि भय और असुरक्षा पैदा करना। नगर कांग्रेस अध्यक्ष ने कलेक्टर मैहर से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए, आठ माह से कार्य अधूरा रहने के लिए जिम्मेदार व्यक्ति या एजेंसी का पता लगाया जाए और परियोजना की निगरानी में हुई चूक के लिए दोषी अधिकारियों व संबंधित एजेंसी के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए। इसके साथ ही, कार्यस्थलों पर तुरंत मजबूत बैरिकेडिंग, चेतावनी संकेत और सुरक्षा व्यवस्था लागू करने की मांग भी की गई, ताकि किसी भी संभावित दुर्घटना को रोका जा सके। श्री द्विवेदी ने चेतावनी दी कि प्रशासन को किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार करने के बजाय समय रहते कार्रवाई करनी चाहिए, और जनता जानना चाहती है कि यह काम आठ महीने से क्यों रुका है और इसकी जवाबदेही किसकी है। क्षेत्र के नागरिकों में भी स्थिति में सुधार न होने को लेकर गहरा आक्रोश है और वे जिला प्रशासन से इस जनहित के मुद्दे पर संज्ञान लेने की उम्मीद लगाए बैठे हैं।
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- मैहर के वार्ड क्रमांक 9 में मुक्तिधाम मार्ग पर चल रही सीवर लाइन परियोजना आठ माह से अधर में लटकी हुई है, जिसके कारण खोदे गए विशाल गड्ढे आज भी वैसे ही पड़े हैं और कार्य ठप है। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए मैहर नगर कांग्रेस अध्यक्ष प्रभात द्विवेदी ने जिला प्रशासन और नगर पालिका की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कलेक्टर से पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की है। द्विवेदी ने एक वीडियो बयान में बताया कि मुक्तिधाम मार्ग पर सीवर लाइन के लिए बड़े-बड़े गड्ढे खोदे गए, लेकिन महीनों बाद भी न तो कार्य पूरा हुआ और न ही नागरिकों की सुरक्षा के लिए कोई प्रभावी उपाय किए गए। मार्ग का एक हिस्सा लगभग अवरुद्ध हो चुका है, जिससे स्थानीय रहवासियों, बुजुर्गों, स्कूली बच्चों और वाहन चालकों को रोजाना परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सुरक्षा के नाम पर केवल हरे रंग की साधारण जाली लगाई गई है, जिससे रात के अंधेरे या बारिश में दुर्घटना होने पर जवाबदेही तय करना मुश्किल होगा। उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि इतने लंबे समय से कार्य अधूरा होने के बावजूद नगर पालिका स्तर पर कोई प्रभावी निगरानी या नियंत्रण नहीं दिखाई देता। जनता यह जानना चाहती है कि आखिर यह लापरवाही किसकी है — कार्यदायी एजेंसी की, तकनीकी अधिकारियों की, या परियोजना की निगरानी करने वाले जिम्मेदार अधिकारियों की। द्विवेदी ने आरोप लगाया कि करोड़ों रुपये की परियोजनाओं में समयसीमा, गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों का पालन न होना केवल प्रशासनिक शिथिलता नहीं, बल्कि जनता के विश्वास के साथ खिलवाड़ है। नगर कांग्रेस अध्यक्ष ने मैहर कलेक्टर से निष्पक्ष जांच कराने, आठ माह से कार्य अधूरा रहने के लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान करने और परियोजना की निगरानी में हुई चूक के लिए दोषी अधिकारियों तथा संबंधित एजेंसी के विरुद्ध कठोर कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की है। इसके साथ ही उन्होंने कार्यस्थलों पर तत्काल मजबूत बैरिकेडिंग, चेतावनी संकेत और पुख्ता सुरक्षा व्यवस्था लागू करने को कहा है ताकि किसी भी संभावित दुर्घटना को टाला जा सके। द्विवेदी ने जोर दिया कि प्रशासन को किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार करने के बजाय समय रहते कार्रवाई करनी चाहिए।1
- मैहर जिले की ग्राम पंचायत सेमरा के अंतर्गत आने वाले माडा गांव में गंभीर सड़क समस्या बताई गई है। स्थानीय निवासियों के अनुसार, गांव की सड़क की हालत इतनी खराब है कि यदि किसी व्यक्ति की तबीयत अचानक बिगड़ जाती है, तो उन्हें अस्पताल या अन्य जगहों पर आने-जाने में भारी कठिनाई का सामना करना पड़ता है।1
- मध्य प्रदेश के रीवा संभाग से स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर एक बेहद चिंताजनक खबर सामने आई है, जहाँ गर्भवती महिलाओं के बीच गंभीर रक्ताल्पता (एनीमिया) एक बड़ी स्वास्थ्य चुनौती के रूप में उभरी है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, पूरे संभाग में 2 हजार से अधिक गर्भवती महिलाएं शरीर में खून की भारी कमी से जूझ रही हैं। इस गंभीर समस्या से रीवा के साथ-साथ सतना, सिंगरौली और सीधी जिले भी प्रमुख रूप से प्रभावित हैं, जहाँ ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों की गर्भवती महिलाओं में हीमोग्लोबिन का स्तर खतरनाक रूप से कम पाया गया है। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री ने इस पर त्वरित संज्ञान लिया है। उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा कि सरकार इस स्थिति को लेकर बेहद गंभीर है और विभाग जल्द ही इन प्रभावित जिलों में विशेष अभियान चलाएगा। स्वास्थ्य मंत्री ने आश्वस्त किया कि गर्भवती महिलाओं तक उचित पोषण, आयरन-फॉलिक एसिड की गोलियां और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं सुचारु रूप से पहुंचाई जाएंगी ताकि एनीमिया के इस ग्राफ को नीचे लाया जा सके। जमीनी स्तर पर सरकारी अस्पतालों के प्रसूति वार्डों पर मरीजों का भारी दबाव और स्वास्थ्य सुविधाओं व मरीजों की भारी भीड़ साफ बताती है कि अभी भी बहुत काम किया जाना बाकी है। विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर सही पोषण न मिलना, जागरूकता की कमी और स्वास्थ्य केंद्रों तक देर से पहुंचना महिलाओं में खून की कमी के मुख्य कारण हैं। गर्भावस्था के दौरान एनीमिया न सिर्फ मां के स्वास्थ्य के लिए खतरा है, बल्कि होने वाले बच्चे के मानसिक और शारीरिक विकास को भी प्रभावित करता है। अब देखना यह होगा कि स्वास्थ्य विभाग के इन नए आंकड़ों और स्वास्थ्य मंत्री के आश्वासन के बाद रीवा संभाग के सतना, सीधी और सिंगरौली जैसे जिलों में स्वास्थ्य व्यवस्था जमीनी स्तर पर कितनी जल्दी सुधरती है।1
- मैहर जिले में केजेएस फैक्ट्री के पास दो ट्रकों की आमने-सामने टक्कर हो गई। इस भीषण भिड़ंत के दौरान, दोनों ट्रकों के ड्राइवर समय रहते अपने वाहनों से कूदने में सफल रहे, जिससे उनकी जान बाल-बाल बच गई।1
- घुनवारा में कानून-व्यवस्था की स्थिति पर गंभीर सवाल उठाए जा रहे हैं, जिसमें बार-बार यह पूछा जा रहा है कि क्या इस क्षेत्र में गुंडा राज स्थापित हो चुका है।1
- मैहर नगर के वार्ड क्रमांक 9 स्थित मुक्तिधाम मार्ग पर चल रही सीवर लाइन परियोजना पिछले लगभग आठ माह से अधर में लटकी हुई है, जिससे यह विकास कार्य कम और प्रशासनिक अव्यवस्था का प्रतीक अधिक दिखाई देने लगा है। महीनों पहले खोदे गए विशाल गड्ढे आज भी वैसे ही पड़े हैं, और कार्य की गति लगभग ठप है। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए मैहर नगर कांग्रेस अध्यक्ष प्रभात द्विवेदी ने जिला प्रशासन और नगर पालिका की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कलेक्टर से पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की है। अपने निरीक्षण के बाद जारी वीडियो बयान में श्री द्विवेदी ने बताया कि मुक्तिधाम मार्ग पर सीवर लाइन के नाम पर बड़े-बड़े गड्ढे खोद दिए गए हैं, लेकिन न तो काम पूरा हुआ है और न ही नागरिकों की सुरक्षा के लिए कोई प्रभावी प्रबंध किए गए हैं। मार्ग का एक हिस्सा लगभग अवरुद्ध हो चुका है, जिससे स्थानीय रहवासियों, बुजुर्गों, स्कूली बच्चों और वाहन चालकों को रोज मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सुरक्षा के नाम पर सिर्फ हरे रंग की साधारण जाली लगाकर जिम्मेदार एजेंसी अपनी जवाबदेही से बचना चाहती है। द्विवेदी ने सवाल उठाया कि अगर रात के अंधेरे में या बारिश में कोई राहगीर, बुजुर्ग या दोपहिया वाहन चालक इन गड्ढों में गिरकर दुर्घटना का शिकार होता है, तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा? प्रभात द्विवेदी ने चिंता व्यक्त की कि इतने लंबे समय से कार्य अधूरा होने के बावजूद, नगर पालिका स्तर पर कोई प्रभावी निगरानी या नियंत्रण नहीं दिख रहा है। उन्होंने जनता की ओर से पूछा कि यह लापरवाही आखिर किसकी है – कार्यदायी एजेंसी की, तकनीकी अधिकारियों की, या परियोजना की निगरानी के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की। उन्होंने आगे आरोप लगाया कि करोड़ों की परियोजनाओं में यदि समयसीमा, गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों का पालन नहीं हो रहा है, तो यह केवल प्रशासनिक शिथिलता नहीं, बल्कि जनता के विश्वास के साथ खिलवाड़ है, क्योंकि विकास कार्यों का उद्देश्य सुविधा देना होता है, न कि भय और असुरक्षा पैदा करना। नगर कांग्रेस अध्यक्ष ने कलेक्टर मैहर से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए, आठ माह से कार्य अधूरा रहने के लिए जिम्मेदार व्यक्ति या एजेंसी का पता लगाया जाए और परियोजना की निगरानी में हुई चूक के लिए दोषी अधिकारियों व संबंधित एजेंसी के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए। इसके साथ ही, कार्यस्थलों पर तुरंत मजबूत बैरिकेडिंग, चेतावनी संकेत और सुरक्षा व्यवस्था लागू करने की मांग भी की गई, ताकि किसी भी संभावित दुर्घटना को रोका जा सके। श्री द्विवेदी ने चेतावनी दी कि प्रशासन को किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार करने के बजाय समय रहते कार्रवाई करनी चाहिए, और जनता जानना चाहती है कि यह काम आठ महीने से क्यों रुका है और इसकी जवाबदेही किसकी है। क्षेत्र के नागरिकों में भी स्थिति में सुधार न होने को लेकर गहरा आक्रोश है और वे जिला प्रशासन से इस जनहित के मुद्दे पर संज्ञान लेने की उम्मीद लगाए बैठे हैं।1