मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में अपने अधिकारों और मांगों को लेकर दिव्यांगजन एक बार फिर सड़कों पर उतर आए हैं। प्रदेशभर से आए दिव्यांगों ने भोपाल के ख़ुशीलाल मैदान में डेरा डाल दिया है और शांतिपूर्ण ढंग से अपनी आवाज बुलंद कर रहे हैं। हाथों में तख्तियां, व्हीलचेयर और बैसाखियों के सहारे प्रदर्शन कर रहे इन लोगों का कहना है कि बढ़ती महंगाई के इस दौर में सरकार से मिलने वाली महज 600 रुपये प्रतिमाह सामाजिक सुरक्षा पेंशन उनके जीवनयापन के लिए बेहद नाकाफी है। शारीरिक चुनौतियों के साथ जीवन पहले ही कठिन है, ऐसे में इतनी कम राशि से दवा, इलाज, भोजन और अन्य जरूरतें पूरी करना असंभव हो गया है। प्रदर्शन में शामिल विकलांग बल के प्रदेश अध्यक्ष भारत मुनिया, उत्तर प्रदेश से आए राष्ट्रीय महासचिव पुनीत कुमार और राष्ट्रीय सदस्य मैथिलशरण शर्मा ने सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार एक तरफ लाडली बहना योजना के तहत महिलाओं को 1500 रुपये दे रही है, लेकिन विकलांगों की उसे कोई चिंता नहीं है। दिव्यांग जनों को न तो आवास मिल पा रहा है और न ही शौचालय की सुविधा मिल रही है। इस महंगाई के जमाने में मात्र 600 रुपये की पेंशन से गुजारा करना नामुमकिन है। दिव्यांग संगठनों ने सरकार से सामाजिक सुरक्षा पेंशन को बढ़ाकर कम से कम 5000 रुपये प्रतिमाह करने की मांग की है। इसके साथ ही रोजगार के बेहतर अवसर, शिक्षा में सुविधाएं, सरकारी योजनाओं का लाभ और स्वास्थ्य सेवाओं तक सुलभ पहुंच सुनिश्चित करने की मांग भी उठाई गई है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे पूरे प्रदेश में संबंधित जनप्रतिनिधियों और कलेक्टर को अपनी मांगों का ज्ञापन सौंप चुके हैं। यदि सरकार ने उनकी समस्याओं को संवेदनशीलता से सुनकर जल्द कोई सकारात्मक निर्णय नहीं लिया, तो आने वाले समय में आंदोलन को और भी व्यापक किया जाएगा।
मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में अपने अधिकारों और मांगों को लेकर दिव्यांगजन एक बार फिर सड़कों पर उतर आए हैं। प्रदेशभर से आए दिव्यांगों ने भोपाल के ख़ुशीलाल मैदान में डेरा डाल दिया है और शांतिपूर्ण ढंग से अपनी आवाज बुलंद कर रहे हैं। हाथों में तख्तियां, व्हीलचेयर और बैसाखियों के सहारे प्रदर्शन कर रहे इन लोगों का कहना है कि बढ़ती महंगाई के इस दौर में सरकार से मिलने वाली महज 600 रुपये प्रतिमाह सामाजिक सुरक्षा पेंशन उनके जीवनयापन के लिए बेहद नाकाफी है। शारीरिक चुनौतियों के साथ जीवन पहले ही कठिन है, ऐसे में इतनी कम राशि से दवा, इलाज, भोजन और अन्य जरूरतें पूरी करना असंभव हो गया है। प्रदर्शन में शामिल विकलांग बल के प्रदेश अध्यक्ष भारत मुनिया, उत्तर प्रदेश से आए राष्ट्रीय महासचिव पुनीत कुमार और राष्ट्रीय सदस्य मैथिलशरण शर्मा ने सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार एक तरफ लाडली बहना योजना के तहत महिलाओं को 1500 रुपये दे रही है, लेकिन विकलांगों की उसे कोई चिंता नहीं है। दिव्यांग जनों को न तो आवास मिल पा रहा है और न ही शौचालय की सुविधा मिल रही है। इस महंगाई के जमाने में मात्र 600 रुपये की पेंशन से गुजारा करना नामुमकिन है। दिव्यांग संगठनों ने सरकार से सामाजिक सुरक्षा पेंशन को बढ़ाकर कम से कम 5000 रुपये प्रतिमाह करने की मांग की है। इसके साथ ही रोजगार के बेहतर अवसर, शिक्षा में सुविधाएं, सरकारी योजनाओं का लाभ और स्वास्थ्य सेवाओं तक सुलभ पहुंच सुनिश्चित करने की मांग भी उठाई गई है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे पूरे प्रदेश में संबंधित जनप्रतिनिधियों और कलेक्टर को अपनी मांगों का ज्ञापन सौंप चुके हैं। यदि सरकार ने उनकी समस्याओं को संवेदनशीलता से सुनकर जल्द कोई सकारात्मक निर्णय नहीं लिया, तो आने वाले समय में आंदोलन को और भी व्यापक किया जाएगा।
- भोपाल में निगम मुख्यालय कार्यालय से नई इलेक्ट्रिक पीएम ई-बस सेवा का ट्रायल रन किया गया। इस दौरान शहर का भ्रमण कर सफर के साथ चने और भुट्टो का आनंद लिया गया। इस अवसर पर महापौर श्रीमती मालती राय जी, निगम अध्यक्ष श्री किशन सूर्यवंशी और एम आई सी सदस्य श्री मनोज राठौर उपस्थित रहे। इनके साथ ही एम आई सी सदस्य गण, जोन अध्यक्ष गण, पार्षद गण एवं अधिकारी गण भी इस ट्रायल रन के दौरान मौजूद रहे।1
- मध्य प्रदेश के विधायक आरिफ मसूद ने यूसीसी बिल को लेकर एक बयान दिया है। अपने इस बयान में विधायक आरिफ मसूद ने सीधे तौर पर आरोप लगाया है कि यूसीसी बिल के अंदर ही चोरी की गई है। उन्होंने इस बिल पर खुद बिल के भीतर ही चोरी होने का गंभीर आरोप मढ़ा है।1
- भोपाल में आशा-ऊषा कार्यकर्ताओं ने अपनी मांगों को लेकर एक विशाल धरना प्रदर्शन किया। इस विरोध प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं द्वारा अपनी मांगों के संबंध में एक ज्ञापन भी सौंपा गया।4
- भोपाल के हुजूर से शायर गंगाधर मलाजपुरे ने अपनी भावनाएं व्यक्त करते हुए एक बेहद खूबसूरत और दर्दभरी शायरी साझा की है। उन्होंने लिखा है, 'तेरे प्यार की तमन्ना गम जिंदगी कैसा है, बड़ी तेज आंधी आए चिराग बुझ न जाए, मोहब्बत रास न आए।' इस शायरी के माध्यम से उन्होंने प्यार की चाहत, जिंदगी के गमों और तेज आंधी के बीच चिराग के बुझ जाने के डर के साथ ही मोहब्बत रास न आने के गहरे दर्द को बयां किया है।1
- हज-2027 के लिए ऑनलाइन आवेदन करने की अंतिम तारीख को आगे बढ़ा दिया गया है। पूर्व में आवेदन करने की आखिरी तिथि 20 जुलाई निर्धारित थी, जिसे अब बढ़ाकर 24 जुलाई-2026 कर दिया गया है।1
- भोपाल नगर निगम में नई इलेक्ट्रिक (ई) बस का निरीक्षण किया गया है। इस दौरान महापौर, नगर निगम कमिश्नर, सभी पार्षदों और अधिकारियों ने नई ई-बस का निरीक्षण कर उसकी सुविधाओं का बारीकी से अवलोकन किया। भोपाल में आधुनिक और पर्यावरण-अनुकूल सार्वजनिक परिवहन की दिशा में इस पहल को एक बेहद महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।2
- भोपाल के खुशीलाल मैदान में मध्य प्रदेशभर से आए दिव्यांगजन अपनी विभिन्न मांगों को लेकर धरने पर बैठ गए हैं। प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग सामाजिक सुरक्षा पेंशन को 600 रुपये से बढ़ाकर 5 हजार रुपये प्रतिमाह करने की है। दिव्यांगजनों का साफ कहना है कि इस भयंकर महंगाई के दौर में महज 600 रुपये की पेंशन से दवा, इलाज और रोजमर्रा का जरूरी खर्च चलाना संभव नहीं है। इस प्रदर्शन में विकलांग बल के प्रदेश अध्यक्ष भारत मुनिया, राष्ट्रीय महासचिव पुनीत कुमार और राष्ट्रीय सदस्य मैथिल शरण शर्मा भी शामिल हुए। इन सभी ने सरकार से दिव्यांगों के लिए आवास, शौचालय, रोजगार और विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ सुनिश्चित कराने की मांग पुरजोर तरीके से उठाई है। धरने पर बैठे प्रदर्शनकारियों ने सरकार को कड़ी चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें जल्द पूरी नहीं की गईं, तो इस आंदोलन को पूरे प्रदेश में और भी तेज किया जाएगा।1
- जंतर मंतर प्रदर्शन के दौरान भारी बवाल मच गया है, जिसके बाद पुलिस की कार्रवाई को लेकर सवाल और बहस तेज हो गई है। इस प्रदर्शन का एक वीडियो सोशल मीडिया पर बेहद तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो सामने आने के बाद पुलिस की कार्रवाई को लेकर तीखे सवाल खड़े किए जा रहे हैं और पूछा जा रहा है कि "ये कैसे-कैसे आदमी लाठीचार्ज करने आए थे?"1