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शहडोल,,, ब्यौहारी से दुर्गेश कुमार गुप्ता की रिपोर्ट,,
Durgesh Kumar Gupta
शहडोल,,, ब्यौहारी से दुर्गेश कुमार गुप्ता की रिपोर्ट,,
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- Post by Durgesh Kumar Gupta2
- *पर्यटन नियमों के सख्त पालन के निर्देश* *वाहन मालिकों, गाइड और ड्राइवरों की बीच अहम बैठक संपन्न* *उमरिया मार्ग से ताला के बीच जंगल में गाड़ी बिल्कुल न रोकें* उमरिया _ बांधवगढ़ टाईगर रिजर्व के ईको सेंटर में पर्यटन व्यवस्था को बेहतर बनाने और नियमों के कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन किया गया। इस बैठक में पर्यटन जोन के एसडीओ सहित सभी रेंजर, वाहन मालिक, गाइड और वाहन चालक उपस्थित रहे। अधिकारियों ने स्पष्ट रूप से निर्देश दिए कि पर्यटन गतिविधियों के दौरान किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। बैठक की अध्यक्षता कर रहे एसडीओ ने कहा कि पर्यटन क्षेत्र में अनुशासन बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि यह न केवल पर्यटकों की सुरक्षा से जुड़ा है, बल्कि वन्यजीवों और पर्यावरण संरक्षण के लिए भी महत्वपूर्ण है। उन्होंने सभी जिप्सी चालकों और गाइडों को निर्देशित किया कि वे निर्धारित मार्गों का ही उपयोग करें और किसी भी परिस्थिति में नियमों की अनदेखी न करें। अधिकारियों ने बताया कि कई बार यह देखा गया है कि कुछ वाहन उमरिया मार्ग से ताला के बीच जंगल में गाड़ी को रोक कर जंगली जानवरों के रहवास में खलल डालने जैसे कृत्य करते हैं।साथ ही पर्यटन जोन के अंदर भी चालक तेज गति से वाहन चलाते हैं या निर्धारित समय और मार्गों का पालन नहीं करते, जिससे दुर्घटना की संभावना बढ़ जाती है और वन्यजीवों को भी खतरा उत्पन्न होता है। ऐसे मामलों को गंभीरता से लेते हुए अब निगरानी और सख्ती बढ़ाई जाएगी। बैठक में यह भी स्पष्ट किया गया कि सभी गाइडों को पर्यटकों को सही जानकारी देने और उन्हें नियमों के प्रति जागरूक करने की जिम्मेदारी निभानी होगी। यदि कोई पर्यटक नियमों का उल्लंघन करता है, तो उसकी सूचना तुरंत संबंधित अधिकारियों को देना अनिवार्य होगा। वन विभाग के रेंजरों ने कहा कि नियमित रूप से चेकिंग अभियान चलाए जाएंगे और दोषी पाए जाने पर जुर्माना, लाइसेंस निलंबन या अन्य दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने जिप्सी मालिकों से अपील की कि वे अपने ड्राइवरों को नियमों के प्रति पूरी तरह प्रशिक्षित करें और समय-समय पर उनकी निगरानी भी करें। बैठक के अंत में सभी उपस्थित लोगों ने पर्यटन नियमों का पालन करने और क्षेत्र की गरिमा बनाए रखने का संकल्प लिया। अधिकारियों ने उम्मीद जताई कि इस पहल से पर्यटन व्यवस्था में सुधार आएगा और पर्यटकों को सुरक्षित एवं बेहतर अनुभव प्राप्त होगा।2
- किसान की फसल बर्बाद हो गई वह नहीं दिखाई देती है1
- Post by Deepesh Pandey Dist Chief Director ACFI Rewa1
- Post by Bolti Divare1
- मध्य प्रदेश के सीधी जिले की इस पावन धरा को कभी "सिद्धभूमि" कहा जाता था। एक ऐसी भूमि जहाँ ऋषि-मुनियों की तपस्या की गूँज थी, जहाँ बीरबल की बुद्धिमानी के किस्से थे और जहाँ सफेद बाघ 'मोहन' की दहाड़ ने पूरी दुनिया में जिले का नाम रौशन किया। लेकिन आज इसी सीधी जिले के सीने पर एक गहरा ज़ख्म है—"सूखा नदी"। वो नदी जिसे कभी 'जीवनदायिनी' कहा जाता था, आज अपने अस्तित्व के लिए लड़ रही है। करीब 25 किलोमीटर का सफर तय करने वाली यह नदी चुन्हा गांव से निकलकर सोन नदी की गोद में समा जाती है। सालों से एक अटूट मान्यता चली आ रही है कि इसके जल में स्नान करने से बच्चों का कुपोषण और एनीमिया जैसा 'सूखा रोग' जड़ से खत्म हो जाता है। लोग इसे आस्था की धार मानते हैं, लेकिन विज्ञान की कसौटी पर तस्वीर कुछ और ही है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि जो पानी कभी अमृत था, वो अब सीवेज और कचरे के मिलने से ज़हर बन चुका है। आस्था अपनी जगह है, लेकिन गंदे पानी में मासूमों को नहलाना उन्हें फंगल इन्फेक्शन और बीमारियों के दलदल में धकेलने जैसा है। विडंबना देखिए, जो नदी आस्था का केंद्र थी, उसे विकास की भूख ने 'नाला' बना दिया। और इस बर्बादी की आग में घी डालने का काम किया 'करौंदिया उत्तर टोला' के उन भू-माफियाओं ने, जिन्होंने कानून की आँखों में धूल झोंककर सरकारी तंत्र के साथ ऐसा 'मधुर संबंध' बनाया कि रातों-रात भूगोल ही बदल दिया गया। भ्रष्टाचार की पराकाष्ठा तो देखिए कि राजस्व विभाग के पटवारी की कलम ने वो जादू दिखाया कि खसरा नंबर 385 से 389 के बीच का वो सार्वजनिक रास्ता, जहाँ से पीढ़ियों का आना-जाना था, उसे सरकारी नक्शे से ही साफ़ कर दिया गया। लाखों की 'सेवा राशि' के बदले आम आदमी के हक को चंद रसूखदारों के हाथों बेच दिया गया और प्रशासनिक तंत्र तमाशबीन बना रहा। यही नहीं, पूर्व कलेक्टर अभिषेक सिंह ने जिस नदी के लिए सौंदर्यीकरण और पक्की सड़कों का सपना बुना था, आज उसी सरकारी निवेश पर माफियाओं की गिद्ध दृष्टि जमी है। प्रशासन लंबे समय तक मौन रहा, लेकिन ये 'मौन व्रत' तब टूटा जब मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का हंटर चला। सीधी के औचक निरीक्षण के दौरान जब मुख्यमंत्री ने प्रशासनिक ढिलाई देखी, तो उनका पारा सातवें आसमान पर पहुँच गया और तत्कालीन कलेक्टर को तत्काल प्रभाव से हटा दिया गया। यह एक सीधा संदेश था कि जनता के हक से खिलवाड़ करने वाले अब बख्शे नहीं जाएंगे। अब जिला प्रशासन की कमान नवागत कलेक्टर विकास मिश्रा के हाथों में है और करौंदिया की जनता टकटकी लगाए देख रही है कि क्या 'विकास' के नाम पर आए ये नए साहब उस 'जादुई नक्शे' के पीछे छिपे पटवारी और रसूखदारों के असली चेहरों को बेनकाब कर पाएंगे? क्षेत्रीय विधायक रीती पाठक ने भी अब ललकार दिया है कि अतिक्रमणकारी चाहे कितना भी ताकतवर क्यों न हो, उसे बख्शा नहीं जाएगा। लेकिन सवाल आज भी वही खड़ा है कि क्या हमारी आस्था भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाएगी? क्या 'जीवनदायिनी' सूखा नदी फिर से अपनी कल-कल करती स्वच्छ धारा पा सकेगी, या फिर भू-माफियाओं के लालच में एक गंदा नाला बनकर इतिहास के पन्नों में दफन हो जाएगी? अब फैसला प्रशासन की इच्छाशक्ति और सीधी की जागरूक जनता को करना है।1
- बीहड़ नदी पुल पर संकट के बदल सवालों के घेरे में प्रशासन1
- Post by Durgesh Kumar Gupta1