प्रयागराज के जसरा स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) से सामने आई तस्वीरों ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहां सीएचसी की बाउंड्री के बाहर कबाड़ और कचरे के ढेर में सरकारी दवाइयां, जांच किट और अन्य चिकित्सा सामग्री बेतरतीब हालत में पड़ी मिलीं। रविवार को स्थानीय लोगों की नजर इस पर पड़ने के बाद पूरे इलाके में सनसनी फैल गई, और इन तस्वीरों व वीडियो के सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने से सरकारी दावों की जमीनी हकीकत उजागर हुई। क्षेत्रीय लोगों का आरोप है कि अस्पताल प्रशासन गरीब मरीजों के हक को लूट रहा है। उनका कहना है कि प्रदेश सरकार जहां गरीब और जरूरतमंद मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, वहीं जसरा सीएचसी में मरीजों को सरकारी दवाएं देने के बजाय बाहर मेडिकल स्टोर से महंगी दवाएं खरीदने पर मजबूर किया जाता है। इतना ही नहीं, अस्पताल में जांच सुविधाएं उपलब्ध होने के बावजूद मरीजों को निजी पैथोलॉजी सेंटरों पर भेजा जाता है। सूत्रों के अनुसार, शासन से मुफ्त इलाज और जांच के लिए भेजी गई दवाइयां व किट स्टोरों में पड़ी-पड़ी खराब हो जाती हैं और बाद में उन्हें चुपचाप फेंक दिया जाता है। आरोप यह भी है कि निजी मेडिकल स्टोर और पैथोलॉजी सेंटरों को फायदा पहुंचाने के लिए कमीशनखोरी का संगठित खेल चल रहा है, जिसके चलते गरीब मरीजों के नाम पर आने वाली सरकारी सुविधाएं कबाड़ में फेंकी जा रही हैं। इस पूरे प्रकरण ने स्वास्थ्य विभाग की पारदर्शिता और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिससे क्षेत्र में भारी आक्रोश व्याप्त है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि गरीब और असहाय मरीज इलाज के नाम पर आर्थिक शोषण झेलने को मजबूर हैं, जबकि सरकारी संसाधनों की खुलेआम बर्बादी की जा रही है। लोगों ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कर दोषी डॉक्टरों, कर्मचारियों और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग उठाई है। क्षेत्रवासियों का कहना है कि यदि समय रहते इस नेटवर्क पर कार्रवाई नहीं हुई तो सरकारी अस्पतालों पर जनता का भरोसा पूरी तरह टूट जाएगा। अब सबकी निगाहें स्वास्थ्य विभाग पर टिकी हैं कि वह इस गंभीर मामले में सख्त कदम उठाता है या फिर यह मामला भी अन्य शिकायतों की तरह कागजों और फाइलों में दबकर रह जाएगा।
प्रयागराज के जसरा स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) से सामने आई तस्वीरों ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहां सीएचसी की बाउंड्री के बाहर कबाड़ और कचरे के ढेर में सरकारी दवाइयां, जांच किट और अन्य चिकित्सा सामग्री बेतरतीब हालत में पड़ी मिलीं। रविवार को स्थानीय लोगों की नजर इस पर पड़ने के बाद पूरे इलाके में सनसनी फैल गई, और इन तस्वीरों व वीडियो के सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने से सरकारी दावों की जमीनी हकीकत उजागर हुई। क्षेत्रीय लोगों का आरोप है कि अस्पताल प्रशासन गरीब मरीजों के हक को लूट रहा है। उनका कहना है कि प्रदेश सरकार जहां गरीब और जरूरतमंद मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, वहीं जसरा सीएचसी में मरीजों को सरकारी दवाएं देने के बजाय बाहर मेडिकल स्टोर से महंगी दवाएं खरीदने पर मजबूर किया जाता है। इतना ही नहीं, अस्पताल में जांच सुविधाएं उपलब्ध होने के बावजूद मरीजों को निजी पैथोलॉजी सेंटरों पर भेजा जाता है। सूत्रों के अनुसार, शासन से मुफ्त इलाज और जांच के लिए भेजी गई दवाइयां व किट स्टोरों में पड़ी-पड़ी
खराब हो जाती हैं और बाद में उन्हें चुपचाप फेंक दिया जाता है। आरोप यह भी है कि निजी मेडिकल स्टोर और पैथोलॉजी सेंटरों को फायदा पहुंचाने के लिए कमीशनखोरी का संगठित खेल चल रहा है, जिसके चलते गरीब मरीजों के नाम पर आने वाली सरकारी सुविधाएं कबाड़ में फेंकी जा रही हैं। इस पूरे प्रकरण ने स्वास्थ्य विभाग की पारदर्शिता और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिससे क्षेत्र में भारी आक्रोश व्याप्त है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि गरीब और असहाय मरीज इलाज के नाम पर आर्थिक शोषण झेलने को मजबूर हैं, जबकि सरकारी संसाधनों की खुलेआम बर्बादी की जा रही है। लोगों ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कर दोषी डॉक्टरों, कर्मचारियों और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग उठाई है। क्षेत्रवासियों का कहना है कि यदि समय रहते इस नेटवर्क पर कार्रवाई नहीं हुई तो सरकारी अस्पतालों पर जनता का भरोसा पूरी तरह टूट जाएगा। अब सबकी निगाहें स्वास्थ्य विभाग पर टिकी हैं कि वह इस गंभीर मामले में सख्त कदम उठाता है या फिर यह मामला भी अन्य शिकायतों की तरह कागजों और फाइलों में दबकर रह जाएगा।
- प्रयागराज के जसरा स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) से सामने आई तस्वीरों ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहां सीएचसी की बाउंड्री के बाहर कबाड़ और कचरे के ढेर में सरकारी दवाइयां, जांच किट और अन्य चिकित्सा सामग्री बेतरतीब हालत में पड़ी मिलीं। रविवार को स्थानीय लोगों की नजर इस पर पड़ने के बाद पूरे इलाके में सनसनी फैल गई, और इन तस्वीरों व वीडियो के सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने से सरकारी दावों की जमीनी हकीकत उजागर हुई। क्षेत्रीय लोगों का आरोप है कि अस्पताल प्रशासन गरीब मरीजों के हक को लूट रहा है। उनका कहना है कि प्रदेश सरकार जहां गरीब और जरूरतमंद मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, वहीं जसरा सीएचसी में मरीजों को सरकारी दवाएं देने के बजाय बाहर मेडिकल स्टोर से महंगी दवाएं खरीदने पर मजबूर किया जाता है। इतना ही नहीं, अस्पताल में जांच सुविधाएं उपलब्ध होने के बावजूद मरीजों को निजी पैथोलॉजी सेंटरों पर भेजा जाता है। सूत्रों के अनुसार, शासन से मुफ्त इलाज और जांच के लिए भेजी गई दवाइयां व किट स्टोरों में पड़ी-पड़ी खराब हो जाती हैं और बाद में उन्हें चुपचाप फेंक दिया जाता है। आरोप यह भी है कि निजी मेडिकल स्टोर और पैथोलॉजी सेंटरों को फायदा पहुंचाने के लिए कमीशनखोरी का संगठित खेल चल रहा है, जिसके चलते गरीब मरीजों के नाम पर आने वाली सरकारी सुविधाएं कबाड़ में फेंकी जा रही हैं। इस पूरे प्रकरण ने स्वास्थ्य विभाग की पारदर्शिता और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिससे क्षेत्र में भारी आक्रोश व्याप्त है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि गरीब और असहाय मरीज इलाज के नाम पर आर्थिक शोषण झेलने को मजबूर हैं, जबकि सरकारी संसाधनों की खुलेआम बर्बादी की जा रही है। लोगों ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कर दोषी डॉक्टरों, कर्मचारियों और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग उठाई है। क्षेत्रवासियों का कहना है कि यदि समय रहते इस नेटवर्क पर कार्रवाई नहीं हुई तो सरकारी अस्पतालों पर जनता का भरोसा पूरी तरह टूट जाएगा। अब सबकी निगाहें स्वास्थ्य विभाग पर टिकी हैं कि वह इस गंभीर मामले में सख्त कदम उठाता है या फिर यह मामला भी अन्य शिकायतों की तरह कागजों और फाइलों में दबकर रह जाएगा।2
- रविवार को प्रयागराज जिले में भीषण गर्मी और तेज धूप का व्यापक असर देखा गया, जहाँ दोपहर के समय तापमान लगभग 44 डिग्री सेल्सियस तक पहुँच गया। शहर से करीब 15 किलोमीटर दूर घूरपुर क्षेत्र समेत पूरे प्रयागराज में इस तीव्र गर्मी के कारण सामान्य जनजीवन बुरी तरह प्रभावित रहा। तेज धूप और गर्म हवाओं के चलते दोपहर में सड़कें पूरी तरह सुनसान दिखीं, और लोग केवल आवश्यक कार्यों के लिए ही घरों से बाहर निकले। बाजारों और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर भी सामान्य दिनों की तुलना में भीड़ काफी कम दर्ज की गई। गर्मी के बढ़ते प्रकोप के कारण लोगों को उमस और लू जैसी स्थितियों का सामना करना पड़ा। चिकित्सकों ने इस स्थिति के मद्देनजर लोगों को दोपहर के समय घरों से बाहर निकलने से बचने, पर्याप्त मात्रा में पानी पीने और धूप से अपना बचाव करने की विशेष सलाह दी है।1
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- प्रयागराज के जसरा स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) से सामने आई तस्वीरों और वीडियो ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रदेश सरकार जहां गरीब मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, वहीं सीएचसी जसरा के परिसर के बाहर कबाड़ और कचरे के ढेर में सरकारी दवाइयां, जांच किट और चिकित्सा सामग्री बेतरतीब हालत में पड़ी मिलीं, जिससे पूरे इलाके में सनसनी फैल गई और सोशल मीडिया पर बवाल मच गया। रविवार को स्थानीय लोगों ने सीएचसी जसरा की बाउंड्री के बाहर दवाओं और मेडिकल सामग्री के ढेर को देखा तो वे दंग रह गए। आरोप है कि जिन दवाओं और जांच किटों को गरीब मरीजों तक पहुंचना चाहिए था, वे धूल और कचरे में सड़ती पाई गईं। क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि अस्पताल में आने वाले मरीजों को सरकारी दवाइयां देने के बजाय बाहर महंगे मेडिकल स्टोर से दवाएं खरीदने को मजबूर किया जाता है, और जांच सुविधाएं होने के बावजूद निजी पैथोलॉजी सेंटरों पर भेजा जाता है। यह भी आरोप है कि मुफ्त इलाज और जांच के लिए भेजी गई दवाइयां व किट स्टोरों में पड़ी-पड़ी खराब हो जाती हैं और फिर चुपचाप फेंक दी जाती हैं, ताकि निजी मेडिकल स्टोर और पैथोलॉजी सेंटरों को फायदा पहुंचाने के लिए कमीशनखोरी का संगठित खेल चलता रहे। इस पूरे मामले से स्वास्थ्य विभाग की पारदर्शिता और जवाबदेही पर गंभीर प्रश्न खड़े हो गए हैं। गरीब और असहाय मरीज आर्थिक शोषण झेलने को मजबूर हैं, जबकि सरकारी संसाधनों की खुलेआम बर्बादी की जा रही है। क्षेत्र में भारी आक्रोश व्याप्त है और लोगों ने पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच कर दोषी डॉक्टरों, कर्मचारियों और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। क्षेत्रवासियों का कहना है कि यदि समय रहते इस पर कार्रवाई नहीं हुई तो सरकारी अस्पतालों पर जनता का भरोसा टूट जाएगा। अब सभी की निगाहें स्वास्थ्य विभाग पर टिकी हैं कि वह इस गंभीर मामले में क्या सख्त कदम उठाता है।1
- उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिले के मेजा में स्थित प्रसिद्ध पहाड़ी महादेव मंदिर से जुड़ा एक मामला सामने आया है। मंदिर के संत ने कुछ लोगों द्वारा मंदिर की जमीन पर किए जा रहे कब्जे को लेकर अपनी बात कही है।1
- मेजा, प्रयागराज के भटौती पहाड़ी पर स्थित सिद्धेश्वर नाथ पहाड़ी महादेव मंदिर में पुरुषोत्तम मास के पावन अवसर पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। इस दौरान सुबह-शाम भगवान शिव की विधिवत आरती और श्रृंगार किया जा रहा है, जिससे पूरे क्षेत्र में भक्तिमय माहौल बना हुआ है। पिछले दिनों मंदिर परिसर में सोलर पंप खराब हो जाने के कारण श्रद्धालुओं, वहां शिक्षा ग्रहण करने वाले वटुकों और मुख्य पुजारी आचार्य बृज बिहारी दास को पेयजल संकट का सामना करना पड़ रहा था। इस गंभीर समस्या को लेकर पुजारी ने सोशल मीडिया के माध्यम से व्यवस्था सुधारने की गुहार लगाई थी। इसके बाद, समाजसेवियों ने त्वरित पहल करते हुए मंदिर परिसर में खराब सोलर पंप को बदलकर एक नया पंप स्थापित कराया, जिससे अब मंदिर में पेयजल की व्यवस्था सुचारु रूप से बहाल हो गई है और श्रद्धालुओं को बड़ी राहत मिली है। समाजसेवी बालेंद्र द्विवेदी ने इस संदर्भ में क्षेत्रीय लोगों से अपील करते हुए कहा है कि कुछ लोग मंदिर को अपने-अपने नजरिए से राजनीतिक अखाड़ा बनाने का प्रयास कर रहे हैं, जो कि बिलकुल उचित नहीं है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि भगवान सभी के होते हैं, इसलिए इस आस्था के केंद्र को राजनीति से दूर रखा जाना चाहिए। साथ ही, द्विवेदी ने पुरुषोत्तम मास के इस पवित्र अवसर पर क्षेत्रीय लोगों से अधिक से अधिक संख्या में मंदिर पहुंचकर जलाभिषेक करने का आग्रह भी किया है।1
- उत्तर प्रदेश के देवरिया में मुख्यमंत्री का हेलीकॉप्टर उतरते ही जिलाधिकारी मधुसूदन हुल्गी तेजी से दौड़ने लगे। उनका यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है, जिसमें उनके गनर और अर्दली भी पीछे छूट गए।1
- प्रयागराज के शंकरगढ़ में NH 35 पर जेके और अल्ट्राटेक सीमेंट प्लांट के पास सड़क किनारे खड़े वाहन आए दिन हादसों का कारण बन रहे हैं। भारी वाहनों की लंबी कतारें सड़क की पटरियों पर कब्जा जमाए रहती हैं, जिससे आम जनता को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। प्रशासन द्वारा कई बार चालान करने के बावजूद यह समस्या जस की तस बनी हुई है।1