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3 hrs ago
user_Kailash Fulwari
Kailash Fulwari
अजमेर, अजमेर, राजस्थान•
3 hrs ago

  • user_Kailash Fulwari
    Kailash Fulwari
    अजमेर, अजमेर, राजस्थान
    जय हो
    3 hrs ago
More news from राजस्थान and nearby areas
  • Post by Kailash Fulwari
    1
    Post by Kailash Fulwari
    user_Kailash Fulwari
    Kailash Fulwari
    अजमेर, अजमेर, राजस्थान•
    7 hrs ago
  • Post by Moinuddin Khan स्वाधीन भारत
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    Post by Moinuddin Khan  स्वाधीन भारत
    user_Moinuddin Khan  स्वाधीन भारत
    Moinuddin Khan स्वाधीन भारत
    Media Consultant अजमेर, अजमेर, राजस्थान•
    18 hrs ago
  • भारत में हर साल 14 अप्रैल को राष्ट्रीय अग्निशमन सेवा दिवस मनाया जाता है। यह दिन 1944 के मुंबई डॉक विस्फोट में शहीद हुए 66 बहादुर दमकलकर्मियों की याद में समर्पित है, जिन्होंने लोगों की जान बचाते हुए अपनी जान की आहुति दे दी। इस दिन को ‘शहीद दिवस’ के रूप में भी मनाया जाता है, जिसमें देशभर में अग्निशमन विभाग द्वारा कार्यक्रम आयोजित कर शहीद फायर कर्मियों को श्रद्धांजलि दी जाती है। साथ ही लोगों को आग से बचाव, सुरक्षा उपायों और जागरूकता के बारे में जानकारी दी जाती है। अग्निशमन कर्मचारी हर दिन अपनी जान जोखिम में डालकर दूसरों की जान बचाते हैं। ऐसे सभी वीरों को इस दिन देश नमन करता है। वीडियो में देखें: 👉 अग्निशमन सेवा दिवस पर आयोजित कार्यक्रम 👉 शहीद दमकलकर्मियों को दी गई श्रद्धांजलि 👉 आग से बचाव के जरूरी उपाय
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    भारत में हर साल 14 अप्रैल को राष्ट्रीय अग्निशमन सेवा दिवस मनाया जाता है। यह दिन 1944 के मुंबई डॉक विस्फोट में शहीद हुए 66 बहादुर दमकलकर्मियों की याद में समर्पित है, जिन्होंने लोगों की जान बचाते हुए अपनी जान की आहुति दे दी।
इस दिन को ‘शहीद दिवस’ के रूप में भी मनाया जाता है, जिसमें देशभर में अग्निशमन विभाग द्वारा कार्यक्रम आयोजित कर शहीद फायर कर्मियों को श्रद्धांजलि दी जाती है। साथ ही लोगों को आग से बचाव, सुरक्षा उपायों और जागरूकता के बारे में जानकारी दी जाती है।
अग्निशमन कर्मचारी हर दिन अपनी जान जोखिम में डालकर दूसरों की जान बचाते हैं। ऐसे सभी वीरों को इस दिन देश नमन करता है।
वीडियो में देखें:
👉 अग्निशमन सेवा दिवस पर आयोजित कार्यक्रम
👉 शहीद दमकलकर्मियों को दी गई श्रद्धांजलि
👉 आग से बचाव के जरूरी उपाय
    user_News Daily Hindi
    News Daily Hindi
    Local News Reporter अजमेर, अजमेर, राजस्थान•
    21 hrs ago
  • jeene ka Khushi na Marne ka Gam Koi puche la la to bol dena 750 Wale Hain Ham 👆😈🧍🧍
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    jeene ka Khushi na Marne ka Gam Koi puche la la to bol dena 750 Wale Hain Ham 👆😈🧍🧍
    user_Birendrasingh"पैसा > प्यार ?"
    Birendrasingh"पैसा > प्यार ?"
    Graphic designer अजमेर, अजमेर, राजस्थान•
    23 hrs ago
  • नसीराबाद में गूंजा जयकारा: सेन महाराज की 726वीं जयंती पर निकली भव्य शोभायात्रा
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    नसीराबाद में गूंजा जयकारा: सेन महाराज की 726वीं जयंती पर निकली भव्य शोभायात्रा
    user_Dilip sen
    Dilip sen
    नसीराबाद, अजमेर, राजस्थान•
    3 hrs ago
  • ### 📰 अवैध बजरी परिवहन पर पुलिस की बड़ी कार्रवाई, डंपर जब्त, एक गिरफ्तार **नागौर, 13 अप्रैल 2026** जिले के थाना थांवला पुलिस ने अवैध बजरी खनन और परिवहन के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए एक डंपर जब्त किया है तथा एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, जिला पुलिस अधीक्षक **रोशन मीणा (IPS)** के निर्देशानुसार अवैध खनन के विरुद्ध लगातार अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में थांवला थाना पुलिस टीम ने गश्त के दौरान कोड गांव क्षेत्र में एक संदिग्ध डंपर को रोका। जांच में डंपर अवैध बजरी से भरा पाया गया। डंपर चालक ने पूछताछ में अपना नाम **राजेश कुमावत (36), निवासी गोविन्दगढ़, जिला अजमेर** बताया। उसके पास बजरी परिवहन का कोई वैध परमिट या रॉयल्टी नहीं मिली। इस पर पुलिस ने डंपर (नंबर RJ 02 GB 1687) को जब्त कर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ थाना थांवला में प्रकरण संख्या 69/2026 दर्ज करते हुए **बीएनएस की धारा 303(2), 112(2) तथा एमएमडीआर एक्ट की धारा 4/21** के तहत मामला दर्ज किया है। यह कार्रवाई थाना प्रभारी **अशोक कुमार झाझड़िया** के नेतृत्व में पुलिस टीम द्वारा की गई। पुलिस अब यह जांच कर रही है कि अवैध बजरी कहां से लाई गई थी। 👉 पुलिस का कहना है कि अवैध खनन और परिवहन के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रहेगा।
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    ### 📰 अवैध बजरी परिवहन पर पुलिस की बड़ी कार्रवाई, डंपर जब्त, एक गिरफ्तार
**नागौर, 13 अप्रैल 2026**
जिले के थाना थांवला पुलिस ने अवैध बजरी खनन और परिवहन के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए एक डंपर जब्त किया है तथा एक आरोपी को गिरफ्तार किया है।
पुलिस के अनुसार, जिला पुलिस अधीक्षक **रोशन मीणा (IPS)** के निर्देशानुसार अवैध खनन के विरुद्ध लगातार अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में थांवला थाना पुलिस टीम ने गश्त के दौरान कोड गांव क्षेत्र में एक संदिग्ध डंपर को रोका। जांच में डंपर अवैध बजरी से भरा पाया गया।
डंपर चालक ने पूछताछ में अपना नाम **राजेश कुमावत (36), निवासी गोविन्दगढ़, जिला अजमेर** बताया। उसके पास बजरी परिवहन का कोई वैध परमिट या रॉयल्टी नहीं मिली। इस पर पुलिस ने डंपर (नंबर RJ 02 GB 1687) को जब्त कर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस ने आरोपी के खिलाफ थाना थांवला में प्रकरण संख्या 69/2026 दर्ज करते हुए **बीएनएस की धारा 303(2), 112(2) तथा एमएमडीआर एक्ट की धारा 4/21** के तहत मामला दर्ज किया है।
यह कार्रवाई थाना प्रभारी **अशोक कुमार झाझड़िया** के नेतृत्व में पुलिस टीम द्वारा की गई। पुलिस अब यह जांच कर रही है कि अवैध बजरी कहां से लाई गई थी।
👉 पुलिस का कहना है कि अवैध खनन और परिवहन के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रहेगा।
    user_Vishnaram saini
    Vishnaram saini
    Riyan Badi, Nagaur•
    1 hr ago
  • आनासागर केवल एक झील नहीं अपितु हिंदू विजय का जल स्मारक है : जगदीश राणा* (इतिहास, श्रद्धा और सांस्कृतिक चेतना का संगम राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अजमेर का घोष प्रदर्शन नौका नाद हुआ सम्पन्न) अजमेर शहर की पहचान बनी आनासागर झील एक बार फिर एक विशेष अवसर की साक्षी बनी 14 अप्रैल को राष्ट्रऋषि डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, अजयमेरू द्वारा “नौका नाद” कार्यक्रम सम्पन्न हुआ इस आयोजन में श्रद्धा, इतिहास और सामाजिक चेतना—तीनों का संतुलित समावेश देखने को मिला।इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ चित्तौड़ प्रांत के संघचालक जगदीश राणा ने कहा कि महाराजा अर्णोराज ने अरावली की पहाड़ियों के बीच तुर्क सेना को बुरी तरह परास्त किया। इस युद्ध में भारी रक्तपात से लहूलुहान हुई अजमेर की धरती को साफ करने और पवित्र करने के उद्देश्य से महाराजा ने चंद्रा नदी (जिसे लूणी की सहायक माना जाता है) के जल को रोककर वहां एक विशाल जलाशय बनवाया ये वही आना सागर है ये आनासागर केवल एक झील नहीं अपितु हिंदू विजय का जल स्मारक है।अजमेर भारत के प्राचीनतम नगरों में से एक है जिसकी समृद्धि का अनुमान इसी बात से लगाया जा सकता है, कि देश की वर्तमान राजधानी नई दिल्ली भी एक समय अजमेर के परमवीर चौहान शासकों के अधीन हुआ करती थी। चंद्रमा की ज्योत्सना में नहाई हुई आनासागर की श्वेत छतरियों की झिलमिल आकृतिया इस झील के निर्माता अर्णोराज और चौहान शासकों की गौरवशाली कहानिया कहती हुई प्रतीत होती है इसी ओर संपूर्ण समाज का ध्यान आकर्षित करता है संघ का यह नौका नाद जो आनासागर की लहरों पर सम्पन्न हुआ है । इस अवसर पर महानगर संघचालक खाजूलाल चौहान ने कहा कि यह आयोजन डॉ. भीमराव अंबेडकर के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने का माध्यम है, जिन्होंने समरस, न्यायपूर्ण और संगठित समाज का स्वप्न देखा। उनके जीवन का संघर्ष केवल अधिकारों के लिए नहीं, बल्कि समाज में आत्मसम्मान और समरसता स्थापित करने के लिए था। इसी संदर्भ में यह उल्लेखनीय है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने भी अपने प्रारंभ से सामाजिक समरसता को अपने कार्य का केंद्र बनाया। इतिहास में ऐसे प्रसंग मिलते हैं जब बाबा साहब संघ के कार्यक्रमों में गए और स्वयंसेवकों के बीच जाति-भेद से परे समरस व्यवहार को देखकर संतोष व्यक्त किया। एक शिक्षा वर्ग के दौरान उन्होंने जब स्वयंसेवकों से उनकी सामाजिक पहचान पूछी, तो यह स्पष्ट हुआ कि वहाँ व्यवहार में कोई भेदभाव नहीं था—यह उनके लिए एक सकारात्मक अनुभव था।महाराष्ट्र की धरती ने दो ऐसे व्यक्तित्व दिए—डॉ. भीमराव अंबेडकर और डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार—जिन्होंने अपने-अपने तरीके से समाज में जागरण का कार्य किया। दोनों के कार्य की पद्धति अलग रही, लेकिन लक्ष्य समान था—एक संगठित, समरस और आत्मगौरव से युक्त समाज। बाबा साहब ने स्पष्ट कहा था कि अस्पृश्यता केवल एक वर्ग के प्रयास से समाप्त नहीं होगी, बल्कि पूरे समाज की मानसिकता में परिवर्तन आवश्यक है। इसी दिशा में समाज में संघ “हिन्दवः सोदरा सर्वे” के भाव को व्यवहार में उतारने का पिछले 100 सालों से निरंतर कार्य कर रहा है। संघ में घोष के बारे में जानकारी देते हुए उन्होंने बताया राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की घोष परंपरा 1927 से चली आ रही है, जो भारतीय शास्त्रीय रागों और सांस्कृतिक ध्वनियों पर आधारित है। यह केवल वाद्य यंत्रों का संयोजन नहीं, बल्कि अनुशासन, सामूहिकता और राष्ट्रभाव की सजीव अभिव्यक्ति है।नौका नाद कार्यक्रम में संघ के 50 स्वयंसेवक 14 अप्रैल को सायं पांच बजे आनासागर झील के किनारे पुरानी चौपाटी पर अपने वाद्य यंत्रों के साथ एकत्रित हुए सभी स्वयंसेवक झील में चल रहे बेटरी के क्रूज (जहाज) पर सवार हुए । वाद्य यंत्रों के माध्यम से 35 देशभक्ति की धुन शहरवासियों को सुनाई । इनमें शंख, बांसुरी, आनक और प्रणय के साथ नागांग (सैक्सोफोन), स्वरद (कलैरिलेट), गोमुख (यूफोनियम), तुयां (ट्रम्पेट), त्रिभुज और झल्लरी शामिल थे। क्रूज पर सवार सभी स्वयंसेवक पुरानी चौपाटी से शुरू होकर झील के चारों ओर भ्रमण किया। शहरवासी चौपाटी के किनारे खड़े होकर वाद्य यंत्रों की धुन को सुन और सराहा। बाबा साहब अंबेडकर की जयंती पर यह आयोजन यह संदेश देता है कि जब समाज अपने महापुरुषों, अपने इतिहास और अपनी प्रकृति—तीनों के प्रति सजग होता है, तभी एक सशक्त और समरस राष्ट्र का निर्माण संभव होता है।
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    आनासागर केवल एक झील नहीं अपितु हिंदू विजय का जल स्मारक है : जगदीश राणा*
(इतिहास, श्रद्धा और सांस्कृतिक चेतना का संगम राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अजमेर का घोष प्रदर्शन नौका नाद हुआ सम्पन्न) अजमेर शहर की पहचान बनी आनासागर झील एक बार फिर एक विशेष अवसर की साक्षी बनी 14 अप्रैल को राष्ट्रऋषि डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, अजयमेरू द्वारा “नौका नाद” कार्यक्रम सम्पन्न हुआ इस आयोजन में श्रद्धा, इतिहास और सामाजिक चेतना—तीनों का संतुलित समावेश देखने को मिला।इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ चित्तौड़ प्रांत के संघचालक जगदीश राणा ने कहा कि महाराजा अर्णोराज ने अरावली की पहाड़ियों के बीच तुर्क सेना को बुरी तरह परास्त किया। इस युद्ध में भारी रक्तपात से लहूलुहान हुई अजमेर की धरती को साफ करने और पवित्र करने के उद्देश्य से महाराजा ने चंद्रा नदी (जिसे लूणी की सहायक माना जाता है) के जल को रोककर वहां एक विशाल जलाशय बनवाया ये वही आना सागर है ये आनासागर केवल एक झील नहीं अपितु हिंदू विजय का जल स्मारक है।अजमेर भारत के प्राचीनतम नगरों में से एक है जिसकी समृद्धि का अनुमान इसी बात से लगाया जा सकता है, कि देश की वर्तमान राजधानी नई दिल्ली भी एक समय अजमेर के परमवीर चौहान शासकों के अधीन हुआ करती थी। चंद्रमा की ज्योत्सना में नहाई हुई आनासागर की श्वेत छतरियों की झिलमिल आकृतिया  इस झील के निर्माता अर्णोराज और चौहान शासकों की गौरवशाली कहानिया कहती हुई प्रतीत होती है इसी ओर संपूर्ण समाज का ध्यान आकर्षित करता है संघ का यह नौका नाद जो आनासागर की लहरों पर सम्पन्न हुआ है । इस अवसर पर महानगर संघचालक खाजूलाल चौहान ने कहा कि यह आयोजन डॉ. भीमराव अंबेडकर के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने का माध्यम है, जिन्होंने समरस, न्यायपूर्ण और संगठित समाज का स्वप्न देखा। उनके जीवन का संघर्ष केवल अधिकारों के लिए नहीं, बल्कि समाज में आत्मसम्मान और समरसता स्थापित करने के लिए था।
इसी संदर्भ में यह उल्लेखनीय है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने भी अपने प्रारंभ से सामाजिक समरसता को अपने कार्य का केंद्र बनाया। इतिहास में ऐसे प्रसंग मिलते हैं जब बाबा साहब संघ के कार्यक्रमों में गए और स्वयंसेवकों के बीच जाति-भेद से परे समरस व्यवहार को देखकर संतोष व्यक्त किया। एक शिक्षा वर्ग के दौरान उन्होंने जब स्वयंसेवकों से उनकी सामाजिक पहचान पूछी, तो यह स्पष्ट हुआ कि वहाँ व्यवहार में कोई भेदभाव नहीं था—यह उनके लिए एक सकारात्मक अनुभव था।महाराष्ट्र की धरती ने दो ऐसे व्यक्तित्व दिए—डॉ. भीमराव अंबेडकर और डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार—जिन्होंने अपने-अपने तरीके से समाज में जागरण का कार्य किया। दोनों के कार्य की पद्धति अलग रही, लेकिन लक्ष्य समान था—एक संगठित, समरस और आत्मगौरव से युक्त समाज। बाबा साहब ने स्पष्ट कहा था कि अस्पृश्यता केवल एक वर्ग के प्रयास से समाप्त नहीं होगी, बल्कि पूरे समाज की मानसिकता में परिवर्तन आवश्यक है। इसी दिशा में समाज में संघ “हिन्दवः सोदरा सर्वे” के भाव को व्यवहार में उतारने का पिछले 100 सालों से निरंतर कार्य कर रहा है।
संघ में घोष के बारे में जानकारी देते हुए उन्होंने बताया
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की घोष परंपरा 1927 से चली आ रही है, जो भारतीय शास्त्रीय रागों और सांस्कृतिक ध्वनियों पर आधारित है। यह केवल वाद्य यंत्रों का संयोजन नहीं, बल्कि अनुशासन, सामूहिकता और राष्ट्रभाव की सजीव अभिव्यक्ति है।नौका नाद कार्यक्रम में 
संघ के 50 स्वयंसेवक 14  अप्रैल को सायं पांच बजे आनासागर झील के किनारे पुरानी चौपाटी पर अपने वाद्य यंत्रों के साथ एकत्रित हुए सभी स्वयंसेवक झील में चल रहे बेटरी के क्रूज (जहाज) पर सवार हुए । वाद्य यंत्रों के माध्यम से 35 देशभक्ति की धुन शहरवासियों को सुनाई । इनमें शंख, बांसुरी, आनक और प्रणय के साथ नागांग (सैक्सोफोन), स्वरद (कलैरिलेट), गोमुख (यूफोनियम),  तुयां (ट्रम्पेट), त्रिभुज और झल्लरी शामिल थे। क्रूज पर सवार सभी स्वयंसेवक पुरानी चौपाटी से शुरू होकर झील के चारों ओर भ्रमण किया। शहरवासी चौपाटी के किनारे खड़े होकर वाद्य यंत्रों की धुन को सुन और सराहा।
बाबा साहब अंबेडकर की जयंती पर यह आयोजन यह संदेश देता है कि जब समाज अपने महापुरुषों, अपने इतिहास और अपनी प्रकृति—तीनों के प्रति सजग होता है, तभी एक सशक्त और समरस राष्ट्र का निर्माण संभव होता है।
    user_Shahid hussain
    Shahid hussain
    Local News Reporter अजमेर, अजमेर, राजस्थान•
    5 hrs ago
  • Post by Kailash Fulwari
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    Post by Kailash Fulwari
    user_Kailash Fulwari
    Kailash Fulwari
    अजमेर, अजमेर, राजस्थान•
    8 hrs ago
  • chai Patti Na saka aadivasi Sher hai kabhi nahin Le sakta Takkar 👆😈
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    chai Patti Na saka aadivasi Sher hai kabhi nahin Le sakta Takkar 👆😈
    user_Birendrasingh"पैसा > प्यार ?"
    Birendrasingh"पैसा > प्यार ?"
    Graphic designer अजमेर, अजमेर, राजस्थान•
    23 hrs ago
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