अक्षय तृतीया / आखातीज का विशेष धार्मिक महत्व माना गया है। कहते हैं इस दिन किए गए पुण्यकार्यो का कभी क्षय नहीं होता इसलिए इसे अक्षय तृतीया भी कहते हैं। अक्षय तृतीय तिथि को ही भगवान परशुराम जी का जन्मदिन माना जाता है। अक्षय तृतीया / आखातीज का विशेष धार्मिक महत्व माना गया है। कहते हैं इस दिन किए गए पुण्यकार्यो का कभी क्षय नहीं होता इसलिए इसे अक्षय तृतीया भी कहते हैं। अक्षय तृतीय तिथि को ही भगवान परशुराम जी का जन्मदिन माना जाता है। भगवान परशुराम, भगवान विष्णु के छठवें अवतार, ब्राह्मण कुल में जन्मे महान योद्धा हैं। धर्मशास्त्र बताते हैं कि उन्होंने 21 बार पृथ्वी को पापीयों से विहीन कर अधर्म का नाश किया। धर्मनिष्ठा, न्यायप्रियता और तपस्या के प्रतीक भगवान परशुराम हमें सत्य का मार्ग दिखाते हैं। भगवान परशुराम जी की जयंती के उपलक्ष में देशभर में उत्सव मनाएं जाते हैं। खैरथल के परशुराम मंदिर(बगीची) में भी ब्राह्मण समाज द्वारा हवन-यज्ञ और भंडारा महाप्रसादी का आयोजन किया गया। सैकड़ों श्रद्धालुओं ने दर्शन, पूजा पाठ कर महाप्रसादी ग्रहण की। आप सभी देशवासियों को भगवान परशुराम जयंती एवं अक्षय तृतीया की हार्दिक मंगलकामनाएं।
अक्षय तृतीया / आखातीज का विशेष धार्मिक महत्व माना गया है। कहते हैं इस दिन किए गए पुण्यकार्यो का कभी क्षय नहीं होता इसलिए इसे अक्षय तृतीया भी कहते हैं। अक्षय तृतीय तिथि को ही भगवान परशुराम जी का जन्मदिन माना जाता है। अक्षय तृतीया / आखातीज का विशेष धार्मिक महत्व माना गया है। कहते हैं इस दिन किए गए पुण्यकार्यो का कभी क्षय नहीं होता इसलिए इसे अक्षय तृतीया भी कहते हैं। अक्षय तृतीय तिथि को ही भगवान परशुराम जी का जन्मदिन माना जाता है। भगवान परशुराम, भगवान विष्णु के छठवें अवतार, ब्राह्मण कुल में जन्मे महान योद्धा हैं। धर्मशास्त्र बताते हैं कि उन्होंने 21 बार पृथ्वी को पापीयों से विहीन कर अधर्म का नाश किया। धर्मनिष्ठा, न्यायप्रियता और तपस्या के प्रतीक भगवान परशुराम हमें सत्य का मार्ग दिखाते हैं। भगवान परशुराम जी की जयंती के उपलक्ष में देशभर में उत्सव मनाएं जाते हैं। खैरथल के परशुराम मंदिर(बगीची) में भी ब्राह्मण समाज द्वारा हवन-यज्ञ और भंडारा महाप्रसादी का आयोजन किया गया। सैकड़ों श्रद्धालुओं ने दर्शन, पूजा पाठ कर महाप्रसादी ग्रहण की। आप सभी देशवासियों को भगवान परशुराम जयंती एवं अक्षय तृतीया की हार्दिक मंगलकामनाएं।
- अक्षय तृतीया / आखातीज का विशेष धार्मिक महत्व माना गया है। कहते हैं इस दिन किए गए पुण्यकार्यो का कभी क्षय नहीं होता इसलिए इसे अक्षय तृतीया भी कहते हैं। अक्षय तृतीय तिथि को ही भगवान परशुराम जी का जन्मदिन माना जाता है। भगवान परशुराम, भगवान विष्णु के छठवें अवतार, ब्राह्मण कुल में जन्मे महान योद्धा हैं। धर्मशास्त्र बताते हैं कि उन्होंने 21 बार पृथ्वी को पापीयों से विहीन कर अधर्म का नाश किया। धर्मनिष्ठा, न्यायप्रियता और तपस्या के प्रतीक भगवान परशुराम हमें सत्य का मार्ग दिखाते हैं। भगवान परशुराम जी की जयंती के उपलक्ष में देशभर में उत्सव मनाएं जाते हैं। खैरथल के परशुराम मंदिर(बगीची) में भी ब्राह्मण समाज द्वारा हवन-यज्ञ और भंडारा महाप्रसादी का आयोजन किया गया। सैकड़ों श्रद्धालुओं ने दर्शन, पूजा पाठ कर महाप्रसादी ग्रहण की। आप सभी देशवासियों को भगवान परशुराम जयंती एवं अक्षय तृतीया की हार्दिक मंगलकामनाएं।1
- खुशखेड़ा औद्योगिक क्षेत्र में स्थित श्री विजय इंडस्ट्रीज में लगी भीषण आग1
- Post by संवाददाता दैनिक कंचन केसरी1
- मुंडावर: पूर्व विधायक धर्मपाल चौधरी की 8वीं पुण्यतिथि पर दी भावभीनी श्रद्धांजलि; कार्यकर्ताओं ने याद किया विकास पुरुष का योगदान जाट बहरोड़ (अलवर/मुंडावर)। नीमराना उपखंड के समीपवर्ती मुंडावर क्षेत्र के गांव जाट बहरोड़ में रविवार को मुंडावर के पूर्व विधायक एवं पूर्व संसदीय सचिव स्वर्गीय धर्मपाल चौधरी की 8वीं पुण्यतिथि श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाई गई। इस अवसर पर क्षेत्र के कोने-कोने से आए समर्थकों और कार्यकर्ताओं ने उनकी समाधि स्थल पर पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन किया। शोक के चलते हवन कार्यक्रम स्थगित कार्यक्रम की जानकारी देते हुए उनके पुत्र व पूर्व विधायक मनजीत चौधरी ने बताया कि पुण्यतिथि के अवसर पर हवन यज्ञ का आयोजन प्रस्तावित था, लेकिन गांव में व्याप्त शोक की स्थिति को देखते हुए इसे स्थगित कर दिया गया। इसके बाद एक श्रद्धांजलि सभा का आयोजन हुआ, जिसमें उपस्थित जनसमूह ने स्व. धर्मपाल चौधरी की प्रतिमा के समक्ष शीश नवाकर उनके द्वारा क्षेत्र में कराए गए ऐतिहासिक विकास कार्यों को याद किया। क्षेत्र के विकास में रहा अतुलनीय योगदान श्रद्धांजलि सभा में वक्ताओं ने कहा कि स्व. धर्मपाल चौधरी मुंडावर से तीन बार विधायक रहे और उन्होंने राजनीति में सेवा की एक नई मिसाल पेश की थी। क्षेत्र के लोग आज भी उन्हें एक 'जननायक' के रूप में याद करते हैं। इनकी रही विशेष उपस्थिति श्रद्धांजलि सभा में स्व. धर्मपाल चौधरी की धर्मपत्नी विमला देवी, पूर्व विधायक मनजीत चौधरी, अमित चौधरी (भाजपा उपाध्यक्ष मंडल जाट बहरोड़), भीमराज यादव, श्रवण सिंह शेखावत (अध्यक्ष, सरस दूध डेयरी), नितिन सागवान (प्रधान, मुंडावर पंचायत समिति), महेश गुप्ता, भूप सिंह अध्यापक सहित बड़ी संख्या में भाजपा कार्यकर्ता और स्थानीय नागरिक मौजूद रहे।1
- *रतनपुरा निवासी शिंभू जो 14 अप्रैल की शाम से घर से लापता था।* आज शिंभू की डेड बॉडी रेलवे स्टेशन खैरथल के पास मिली है। शव को पहुंचाया गया राजकीय सैटलाइट हॉस्पिटल खैरथल। *रोटी बैंक की शव वाहिनी मौके पर मौजूद1
- Post by SARPANCH PUTRA MONI1
- Post by महेंद्र सिंह1
- प्रथम प्रयास में कोमल चौधरी ने लहराया परचम, RAS परीक्षा में हासिल की 698वीं रैंक मुंडावर/सोडावास। राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) द्वारा घोषित राज्य एवं अधीनस्थ सेवा संयुक्त प्रतियोगी परीक्षा (RAS) के परिणाम में सोडावास क्षेत्र की बेटी कोमल चौधरी ने सफलता का परचम लहराया है। कोकावास निवासी सुरेंद्र ठेकेदार की सुपुत्री कोमल ने पूरे प्रदेश में 698वीं रैंक प्राप्त कर राठ क्षेत्र का मान बढ़ाया है। प्रारंभिक शिक्षा और शैक्षणिक सफर कोमल की इस सफलता के पीछे उनकी शुरुआती शिक्षा का बड़ा योगदान रहा है। उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा राव वीरेंद्र सिंह उच्च माध्यमिक विद्यालय, सोडावास से पूरी की। इसके बाद उन्होंने प्रज्ञा महिला महाविद्यालय, सोडावास से अपनी स्नातक (Graduation) की डिग्री प्राप्त की। विशेष बात यह है कि कोमल ने अपने पहले ही प्रयास में यह मुकाम हासिल किया है, जो युवाओं के लिए प्रेरणा का विषय है। क्षेत्र में हर्ष की लहर बेटी की इस उपलब्धि पर क्षेत्र के गणमान्य नागरिकों ने उनके उज्जवल भविष्य की कामना की। इस खुशी के अवसर पर उनके निवास पर बधाई देने वालों का तांता लगा रहा। इस दौरान मुख्य रूप से मौजूद रहे: भीमराज यादव (उपाध्यक्ष, भाजपा जाट बहरोड मंडल) वीरेंद्र सिंह (निदेशक, राव बीरेंद्र स्कूल) अजीत चौधरी, अमित शर्मा, सुरेंद्र कुमार एवं समस्त ग्रामवासी। भविष्य की आशाएँ परिजनों और ग्रामीणों ने कोमल को मिठाई खिलाकर आशीर्वाद दिया। भीमराज यादव और वीरेंद्र सिंह ने कहा कि कोमल ने न केवल अपने परिवार का, बल्कि पूरे जिले का नाम रोशन किया है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि कोमल भविष्य में भी इसी तरह समर्पण के साथ कार्य करते हुए प्रशासनिक सेवाओं के माध्यम से समाज और क्षेत्र के विकास में अपना योगदान देंगी।1