“जब शिक्षक ही हो जाए रिश्वत का शिकार…” तो कैसे होगा बच्चों का भविष्य तैयार ? विजय कुमार, वरिष्ठ पत्रकार विशेष रिपोर्ट: भारत में शिक्षा को “राष्ट्र निर्माण की नींव” कहा जाता है। लेकिन अगर उसी नींव को खोखला करने वाले लोग सिस्टम के भीतर बैठ जाएं, तो .......... सवाल केवल भ्रष्टाचार का नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्र के भविष्य का हो जाता है। गया का जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) कार्यालय आज इसी सड़े हुए तंत्र का जीवंत उदाहरण बन चुका है—जहां शिक्षा नहीं, बल्कि फाइलों की दलाली, रिश्वतखोरी और अमानवीय संवेदनहीनता का कारोबार चल रहा है। और यह कार्यालय फाइलों का कब्रिस्तान बना हुआ है। सवाल यह है कि....... "फाइलों का कब्रिस्तान" या भ्रष्टाचार का अड्डा? विगत 13 जनवरी 2026 को जब जिलाधिकारी शशांक शुभंकर ने डीईओ कार्यालय परिसर में लगाए गए जनता दरबार में लगभग दो सौ शिक्षको की खुद शिकायतें सुनीं, तो ...... जो सामने आया वह किसी एक दिन की गड़बड़ी नहीं थी— यह वर्षों से पनपते एक “सिस्टमेटिक करप्शन” का खुला दस्तावेज था। फाइलें महीनों नहीं, सालों तक दबाकर रखी गईं थी। लोग न्याय के लिए भटकते रहे, लेकिन दफ्तर के अंदर “फाइल चलाने” की असली शर्त थी—रिश्वत। सबसे बड़ा कलंक: "शिक्षक ही शिकार" गया की एक महिला शिक्षक—शांति कुमारी—का मामला इस सड़े हुए तंत्र की सबसे भयावह तस्वीर पेश करता है। 19 वर्षों से वेतन नहीं बार-बार अपमान, उत्पीड़न वेतन बिल बनाने के लिए रिश्वत की मांग.... यह केवल एक व्यक्ति की पीड़ा नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की बेशर्मी है। यह सीधा-सीधा संविधान उल्लंघन है: अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) अनुच्छेद 16 (सरकारी नौकरी में समान अवसर) अनुच्छेद 21 (जीवन और गरिमा का अधिकार) प्रश्न यह है—क्या एक शिक्षक का जीवन, उसकी गरिमा, उसका अधिकार—इस सिस्टम के लिए कोई मायने नहीं रखता? डीएम की कार्रवाई: एक उम्मीद या अस्थायी इलाज? जिलाधिकारी ने वेतन रोकने, स्थानांतरण करने और जांच बैठाने जैसे कदम उठाए— यह सराहनीय कदम है। लेकिन क्या यह पर्याप्त है? क्या सिर्फ कुछ लिपिकों पर कार्रवाई से यह सड़ा हुआ ढांचा सुधर जाएगा? या फिर यह केवल “ऊपरी मरहम” है, जबकि बीमारी अंदर तक फैली हुई है? सवाल जो जवाब मांगते हैं 19 साल तक वेतन क्यों नहीं मिला? जिम्मेदार अधिकारियों पर अब तक आपराधिक मामला क्यों नहीं? शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारियों की भूमिका क्या रही? क्या यह अकेला मामला है या एक बड़े घोटाले की झलक? यह सिर्फ भ्रष्टाचार नहीं—यह राष्ट्र के खिलाफ अपराध है। जब एक शिक्षक को ही न्याय नहीं मिलता, तो वह बच्चों को क्या सिखाएगा? जब शिक्षा तंत्र ही भ्रष्ट हो जाए, तो अगली पीढ़ी का चरित्र कैसे बनेगा? यह केवल आर्थिक घोटाला नहीं यह नैतिक पतन है। यह संवैधानिक मूल्यों की हत्या है। निष्कर्ष: अब चुप रहना अपराध है यह समय है जब: दोषियों पर FIR और कड़ी कानूनी कार्रवाई हो, पूरे शिक्षा विभाग की स्वतंत्र जांच (CBI/न्यायिक जांच) हो पीड़ित शिक्षक को तत्काल न्याय और मुआवजा मिले अगर अब भी कार्रवाई नहीं हुई, तो यह केवल एक शिक्षक का नहीं, बल्कि पूरे समाज का हार होगा। “जब शिक्षक रो रहा हो, तो समझिए—देश का भविष्य खतरे में है।”
“जब शिक्षक ही हो जाए रिश्वत का शिकार…” तो कैसे होगा बच्चों का भविष्य तैयार ? विजय कुमार, वरिष्ठ पत्रकार विशेष रिपोर्ट: भारत में शिक्षा को “राष्ट्र निर्माण की नींव” कहा जाता है। लेकिन अगर उसी नींव को खोखला करने वाले लोग सिस्टम के भीतर बैठ जाएं, तो .......... सवाल केवल भ्रष्टाचार का नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्र के भविष्य का हो जाता है। गया का जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) कार्यालय आज इसी सड़े हुए तंत्र का जीवंत उदाहरण बन चुका है—जहां शिक्षा नहीं, बल्कि फाइलों की दलाली, रिश्वतखोरी और अमानवीय संवेदनहीनता का कारोबार चल रहा है। और यह कार्यालय फाइलों का कब्रिस्तान बना हुआ है। सवाल यह है कि....... "फाइलों का कब्रिस्तान" या भ्रष्टाचार का अड्डा? विगत 13 जनवरी 2026 को जब जिलाधिकारी शशांक शुभंकर ने डीईओ कार्यालय परिसर में लगाए गए जनता दरबार में लगभग दो सौ शिक्षको की खुद शिकायतें सुनीं, तो ...... जो सामने आया वह किसी एक दिन की गड़बड़ी नहीं थी— यह वर्षों से पनपते एक “सिस्टमेटिक करप्शन” का खुला दस्तावेज था। फाइलें महीनों नहीं, सालों तक दबाकर रखी गईं थी। लोग न्याय के लिए भटकते रहे, लेकिन दफ्तर के अंदर “फाइल चलाने” की असली शर्त थी—रिश्वत। सबसे बड़ा कलंक: "शिक्षक ही शिकार" गया की एक महिला शिक्षक—शांति कुमारी—का मामला इस सड़े हुए तंत्र की सबसे भयावह तस्वीर पेश करता है। 19 वर्षों से वेतन नहीं बार-बार अपमान, उत्पीड़न वेतन बिल बनाने के लिए रिश्वत की मांग.... यह केवल एक व्यक्ति की पीड़ा नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की बेशर्मी है। यह सीधा-सीधा संविधान उल्लंघन है: अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) अनुच्छेद 16 (सरकारी नौकरी में समान अवसर) अनुच्छेद 21 (जीवन और गरिमा का अधिकार) प्रश्न यह है—क्या एक शिक्षक का जीवन, उसकी गरिमा, उसका अधिकार—इस सिस्टम के लिए कोई मायने नहीं रखता? डीएम की कार्रवाई: एक उम्मीद या अस्थायी इलाज? जिलाधिकारी ने वेतन रोकने, स्थानांतरण करने और जांच बैठाने जैसे कदम उठाए— यह सराहनीय कदम है। लेकिन क्या यह पर्याप्त है? क्या सिर्फ कुछ लिपिकों पर कार्रवाई से यह सड़ा हुआ ढांचा सुधर जाएगा? या फिर यह केवल “ऊपरी मरहम” है, जबकि बीमारी अंदर तक फैली हुई है? सवाल जो जवाब मांगते हैं 19 साल तक वेतन क्यों नहीं मिला? जिम्मेदार अधिकारियों पर अब तक आपराधिक मामला क्यों नहीं? शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारियों की भूमिका क्या रही? क्या यह अकेला मामला है या एक बड़े घोटाले की झलक? यह सिर्फ भ्रष्टाचार नहीं—यह राष्ट्र के खिलाफ अपराध है। जब एक शिक्षक को ही न्याय नहीं मिलता, तो वह बच्चों को क्या सिखाएगा? जब शिक्षा तंत्र ही भ्रष्ट हो जाए, तो अगली पीढ़ी का चरित्र कैसे बनेगा? यह केवल आर्थिक घोटाला नहीं यह नैतिक पतन है। यह संवैधानिक मूल्यों की हत्या है। निष्कर्ष: अब चुप रहना अपराध है यह समय है जब: दोषियों पर FIR और कड़ी कानूनी कार्रवाई हो, पूरे शिक्षा विभाग की स्वतंत्र जांच (CBI/न्यायिक जांच) हो पीड़ित शिक्षक को तत्काल न्याय और मुआवजा मिले अगर अब भी कार्रवाई नहीं हुई, तो यह केवल एक शिक्षक का नहीं, बल्कि पूरे समाज का हार होगा। “जब शिक्षक रो रहा हो, तो समझिए—देश का भविष्य खतरे में है।”
- Post by Hindustan Express News1
- गया जिले के आमस पुलिस ने आमस बाजार से एक दुकानदार को 2.214 किलोग्राम गांजा के साथ गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी, शेरघाटी-1 के निर्देश पर गठित एक विशेष टीम ने की। पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि आमस बाजार में एक व्यक्ति अपनी दुकान में अवैध रूप से गांजा बेच रहा है। इस सूचना को गंभीरता से लेते हुए अंचलाधिकारी आमस और आमस थाना के पुलिस पदाधिकारियों को मिलाकर एक टीम बनाई गई। टीम ने आमस थाना क्षेत्र के आमस बाजार स्थित शंभू साव के घर और दुकान पर छापेमारी की। तलाशी के दौरान उनके घर से कुल 2.214 किलोग्राम गांजा बरामद हुआ। पुलिस ने मौके से ही आरोपी आमस बाजार निवासी स्वर्गीय लक्ष्मी साव के 55 वर्षीय पुत्र शंभु साव को गिरफ्तार कर लिया। बरामद गांजा जब्त कर लिया गया है और आरोपी के खिलाफ संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जा रही है।उल्लेखनीय है कि आरोपी पूर्व में 2007 और 2023 में गंजा के कांड में जेल जा चुका है छापेमारी दल में अंचलाधिकारी अरशद मदनी,थानाध्यक्ष धनंजय कुमार, एसआई अखिलेश कुमार, एएसआई बजरंगी सिंह और एएसआई भीम पासवान सहित अन्य पुलिसकर्मी शामिल थे। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि क्षेत्र में अवैध नशे के कारोबार के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा और ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई की जाएगी।1
- Post by जन सेवक1
- औरंगाबाद में फर्जी आईपीएस अधिकारी बनकर ठगी करने वाले को पुलिस ने किया गिरफ्तार, आरोपी के पास कई विभागों के अवैध आई कार्ड बरामद। औरंगाबाद में फर्जी आईपीएस बनकर ठगी और धमकी देने का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। मामले में उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले के राजेश शुक्ला को दाउदनगर पुलिस द्वारा गिरफ्तार किया गया है। जानकारी के अनुसार, दाउदनगर के कपड़ा कारोबारी उत्तर दरवाजा मोहल्ला, वार्ड संख्या-10 के रहने वाले राकेश कुमार ने आरोप लगाया है कि 19 फरवरी को उनके मोबाइल पर एक अज्ञात नंबर से कॉल आया। कॉल करने वाले ने अपना नाम राजेश शुक्ला बताते हुए खुद को उत्तर प्रदेश कैडर का आईपीएस अधिकारी बताया। बाद में मुलाकात के दौरान उसने अपना आई कार्ड भी दिखाया, जिससे प्रभावित होकर व्यवसायी ने उस पर विश्वास कर लिया। आरोप है कि परिचय बढ़ाने के बाद उक्त व्यक्ति ने किसी जरूरी काम का हवाला देते हुए पैसों की मांग की। उसके पद के प्रभाव में आकर राकेश कुमार ने 15 मार्च को दो किस्तों में 37,000 और 10,000 रुपये, कुल 47,000 रुपये ऑनलाइन माध्यम से उसके खाते में भेज दिए। मामले का खुलासा तब हुआ जब 2 अप्रैल को आरोपित अचानक राकेश कुमार की दुकान पर पहुंच गया और दोबारा आईपीएस अधिकारी होने का रौब दिखाते हुए, 20 हजार रुपये की अवैध मांग करने लगा। जब व्यवसायी ने पैसे देने से इंकार किया, तो राजेश शुक्ला ने गाली-गलौज करते हुए जान से मारने की धमकी दी। दुकान पर हो रहे हंगामे को सुनकर आसपास के लोग और दुकान के कर्मचारी मौके पर पहुंचे। सूचना पर पहुंची पुलिस ने राजेश को हिरासत में लिया और आवश्यक पूछताछ की, जिसमें राजेश ने अपना अपराध स्वीकार किया। इस मामले को लेकर पीड़ित ने दाउदनगर थाना में लिखित आवेदन देकर आरोपी के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी और धमकी देने की धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कराने की मांग की है। इस मामले में दाउदनगर एसडीपीओ अशोक दास ने बताया कि फर्जी आईपीएस बनकर ठगी और जालसाजी मामले में आरोपी को गिरफ्तार किया गया है। पूछताछ में आरोपी अपराध स्वीकार किया। इसके पास से सीआईए, एनआईए, भारतीय जनता पार्टी का चुनावी कार्ड, मानवाधिकार का नियुक्ति पत्र, खाकी वस्त्र, सहित कई अन्य अवैध दस्तावेज मिले हैं। आवश्यक कार्रवाई के बाद आरोपी को जेल भेज दिया गया है।1
- आज गया शहर के रामपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत ब्रह्मयोनि पहाड़ सिगरा स्थान पानी टंकी के बगल में झाड़ी से एक अज्ञात महिला का शव बरामद हुआ। जो चुनरी रंग का साड़ी पहनी थी ऊपर से गुलाबी रंग का तौलिया ओढ़ाया हुआ था। नारियल रस्सी से गर्दन कसा था। जिसका पहचान नही हो पाया। सूचना मिलते ही घटनास्थल पर पहुंच कर रामपुर थाना पुलिस टीम जॉच में जुटी।1
- या–डेहरी पैसेंजर ट्रेन पर चढ़ने के दौरान एक दर्दनाक हादसा सामने आया है। गया जाने के लिए पुराने आरपीएफ बैरक के पास ट्रेन पकड़ने की कोशिश कर रहे एक युवक का पैर फिसल गया, जिससे वह ट्रेन के नीचे आ गया। इस हादसे में उसके दोनों पैर कट गए और वह गंभीर रूप से घायल हो गया। घायल युवक की पहचान नाराइज गांव निवासी संजय ठाकुर के 22 वर्षीय पुत्र दीपक कुमार के रूप में की गई है। घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। स्थानीय लोगों एवं रेलवे कर्मियों की मदद से उसे तुरंत रफीगंज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया। वहां तैनात डॉक्टर धनंजय कुमार ने प्राथमिक उपचार के बाद उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए बेहतर इलाज के लिए मगध मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल, गया रेफर कर दिया। इस संबंध में आरपीएफ इंस्पेक्टर राम सुमेर ने बताया कि युवक चलती ट्रेन पर चढ़ने का प्रयास कर रहा था, इसी दौरान संतुलन बिगड़ने से यह हादसा हो गया। फिलहाल युवक की स्थिति गंभीर बनी हुई है। रेलवे पुलिस मामले की जांच कर रही है और आगे की कार्रवाई की जा रही है।1
- सदर अस्पताल में लगभग चार दिनों से अल्ट्रासाउंड सेवा ठप, मरीज परेशान1
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