सिविल अस्पताल कन्नौद में नहीं है लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस सुविधा, इलाज से पहले हार जाति है कई जिंदगियां कन्नौद, सिविल अस्पताल कन्नौद में गंभीर मरीजों के लिए लाइफ सपोर्ट वेंटीलेटर युक्त एंबुलेंस उपलब्ध नहीं है अस्पताल में जब किसी मरीज की हालत ज्यादा नाजुक होती है तब इंदौर से वेंटिलेटर वाली एंबुलेंस बुलाई जाती है इंदौर से कन्नौद तक वेंटिलेटर युक्त एंबुलेंस पहुंचने में 3 घंटे के आसपास का समय लग जाता है इस दौरान मरीज अस्पताल में ही भर्ती रहता है वेंटिलेटर सपोर्ट ना होने के कारण उसकी हालत लगातार बिगड़ती जाती है वेंटिलेटर सपोर्ट एंबुलेंस नहीं होने से इलाज का गोल्डन टाइम निकल जाता है चिकित्सकों के अनुसार गंभीर मरीजों के मामले में शुरुआती समय महत्वपूर्ण होता है यदि इसी दौरान वेंटीलेटर और एडवांस लाइफ सपोर्ट मिल जाए तो मरीज की जान बचाई जा सकती है लेकिन कन्नौद सिविल अस्पताल में यह सुविधा न होने से इलाज का वह जरूरी समय निकल जाता है जो कई बार मरीजों के लिए जानलेवा तक साबित होता है क्षेत्र के लोगों और मरीजों के परिजनों ने मांग की है कि कन्नौद के सिविल अस्पताल में स्थायी रूप से वेंटिलेटर युक्त लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस उपलब्ध कराई जाए ताकि मरीजों को समय पर जीवन रक्षक सुविधा मिल सके और इंदौर से एंबुलेंस बुलाने में होने वाली देरी से बचा जा सके, लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस में वेंटिलेटर मशीन ऑक्सीजन सप्लाई और बैकअप हार्ट व ऑक्सीजन मॉनिटरिंग सिस्टम इमरजेंसी दवाइयां प्रशिक्षित मेडिकल स्टाफ एंबुलेंस में प्राथमिक इलाज आदि की सुविधा उपलब्ध रहती है, कन्नौद ब्लॉक में एक 108 तथा एक जननी एक्सप्रेस एंबुलेंस उपलब्ध रहती है, दोनों सुविधा को भोपाल मुख्यालय से ऑपरेट किया जाता है जिससे अस्पताल में मरीज को एंबुलेंस की इमरजेंसी में आवश्यकता पड़ने पर आधे से एक घंटा और कभी इससे भी अधिक समय लग जाता है "नगर सहित आसपास अनेक डेंजर जोन होते रहते हैं हादसे" कन्नौद नगर को सब डिवीजन का दर्जा प्राप्त होने के साथ ही यहां से एक राष्ट्रीय राजमार्ग तथा दूसरा राज्यमार्ग होकर गुजरता है जिसके कारण हमेशा हजारों वाहनों की आवाजाही लगी रहती है नगर सहित आसपास कई डेंजर जोन है अनेकों बार गंभीर दुर्घटना घटित होने पर गंभीर घायल मरीज की जान बचाने के लिए तत्काल सामान्य एंबुलेंस की उपलब्धता के लिए स्थानीय ब्लॉक स्तर पर ही एंबुलेंस ऑपरेटिंग की व्यवस्था होना चाहिए क्योंकि एंबुलेंस बुलाने के लिए कॉल करने पर घंटों का समय तो एंबुलेंस की उपलब्धता में ही लग जाता है इस दौरान मरीज दर्द से तड़पता रहता है शुक्रवार दोपहर 1 बजे इस संबंध में ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर डॉक्टर लोकेश मीणा ने कहा कि यदि वेंटीलेटर वाली एंबुलेंस एवं उसका स्टाफ कन्नौद के शासकीय अस्पताल में उपलब्ध रहेगा तो निश्चित ही मरीजों को गंभीर स्थिति में इसका विशेष लाभ मिलेगा "अस्पताल प्रबंधन के पास नहीं है कोई विकल्प" सिविल अस्पताल के पास वेंटीलेटर वाली एंबुलेंस का कोई विकल्प नहीं है जरूरत पड़ने पर इंदौर से ही एंबुलेंस बुलानी पड़ती है परिजनों का कहना रहता है कि फोन लगाने के बाद एंबुलेंस के पहुंचने तक कई घंटे गुजर जाते हैं और मरीजों की हालत जानलेवा हो जाती है कन्नौद से अस्पताल में उपलब्ध साधन एंबुलेंस में केवल सीमित सुविधाएं हैं गंभीर मरीज को लगातार मॉनिटरिंग और वेंटिलेटर सपोर्ट की आवश्यकता होती है जो सामान्य एंबुलेंस में संभव नहीं ऐसे में मरीज को सुरक्षित तरीके से रेफर करना भी चुनौती बन जाता है
सिविल अस्पताल कन्नौद में नहीं है लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस सुविधा, इलाज से पहले हार जाति है कई जिंदगियां कन्नौद, सिविल अस्पताल कन्नौद में गंभीर मरीजों के लिए लाइफ सपोर्ट वेंटीलेटर युक्त एंबुलेंस उपलब्ध नहीं है अस्पताल में जब किसी मरीज की हालत ज्यादा नाजुक होती है तब इंदौर से वेंटिलेटर वाली एंबुलेंस बुलाई जाती है इंदौर से कन्नौद तक वेंटिलेटर युक्त एंबुलेंस पहुंचने में 3 घंटे के आसपास का समय लग जाता है इस दौरान मरीज अस्पताल में ही भर्ती रहता है वेंटिलेटर सपोर्ट ना होने के कारण उसकी हालत लगातार बिगड़ती जाती है वेंटिलेटर सपोर्ट एंबुलेंस नहीं होने से इलाज का गोल्डन टाइम निकल जाता है चिकित्सकों के अनुसार गंभीर मरीजों के मामले में शुरुआती समय महत्वपूर्ण होता है यदि इसी दौरान वेंटीलेटर और एडवांस लाइफ सपोर्ट मिल जाए तो मरीज की जान बचाई जा सकती है लेकिन कन्नौद सिविल अस्पताल में यह सुविधा न होने से इलाज का वह जरूरी समय निकल जाता है जो कई बार मरीजों के लिए जानलेवा तक साबित होता है क्षेत्र के लोगों और मरीजों के परिजनों ने मांग की है कि कन्नौद के सिविल अस्पताल में स्थायी रूप से वेंटिलेटर युक्त लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस उपलब्ध कराई जाए ताकि मरीजों को समय पर जीवन रक्षक सुविधा मिल सके और इंदौर से एंबुलेंस बुलाने में होने वाली देरी से बचा जा सके, लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस में वेंटिलेटर मशीन ऑक्सीजन सप्लाई और बैकअप हार्ट व ऑक्सीजन मॉनिटरिंग सिस्टम इमरजेंसी दवाइयां प्रशिक्षित मेडिकल स्टाफ एंबुलेंस में प्राथमिक इलाज आदि की सुविधा उपलब्ध रहती है, कन्नौद ब्लॉक में एक 108 तथा एक जननी एक्सप्रेस एंबुलेंस उपलब्ध रहती है, दोनों सुविधा को भोपाल मुख्यालय से ऑपरेट किया जाता है जिससे अस्पताल में मरीज को एंबुलेंस की इमरजेंसी में आवश्यकता पड़ने पर आधे से एक घंटा और कभी इससे भी अधिक समय लग जाता है "नगर सहित आसपास अनेक डेंजर जोन होते रहते हैं हादसे" कन्नौद नगर को सब डिवीजन का दर्जा प्राप्त होने के साथ ही यहां से एक राष्ट्रीय राजमार्ग तथा दूसरा राज्यमार्ग होकर गुजरता है जिसके कारण हमेशा हजारों वाहनों की आवाजाही लगी रहती है नगर सहित आसपास कई डेंजर जोन है अनेकों बार गंभीर दुर्घटना घटित होने पर गंभीर घायल मरीज की जान बचाने के लिए तत्काल सामान्य एंबुलेंस की उपलब्धता के लिए स्थानीय ब्लॉक स्तर पर ही एंबुलेंस ऑपरेटिंग की व्यवस्था होना चाहिए क्योंकि एंबुलेंस बुलाने के लिए कॉल करने पर घंटों का समय तो एंबुलेंस की उपलब्धता में ही लग जाता है इस दौरान मरीज दर्द से तड़पता रहता है शुक्रवार दोपहर 1 बजे इस संबंध में ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर डॉक्टर लोकेश मीणा ने कहा कि यदि वेंटीलेटर वाली एंबुलेंस एवं उसका स्टाफ कन्नौद के शासकीय अस्पताल में उपलब्ध रहेगा तो निश्चित ही मरीजों को गंभीर स्थिति में इसका विशेष लाभ मिलेगा "अस्पताल प्रबंधन के पास नहीं है कोई विकल्प" सिविल अस्पताल के पास वेंटीलेटर वाली एंबुलेंस का कोई विकल्प नहीं है जरूरत पड़ने पर इंदौर से ही एंबुलेंस बुलानी पड़ती है परिजनों का कहना रहता है कि फोन लगाने के बाद एंबुलेंस के पहुंचने तक कई घंटे गुजर जाते हैं और मरीजों की हालत जानलेवा हो जाती है कन्नौद से अस्पताल में उपलब्ध साधन एंबुलेंस में केवल सीमित सुविधाएं हैं गंभीर मरीज को लगातार मॉनिटरिंग और वेंटिलेटर सपोर्ट की आवश्यकता होती है जो सामान्य एंबुलेंस में संभव नहीं ऐसे में मरीज को सुरक्षित तरीके से रेफर करना भी चुनौती बन जाता है
- खातेगांव/नेमावर, 26 फरवरी 2026। तहसील खातेगांव के ग्राम सवासड़ा में कोरकू आदिवासी समाज की एक युवती को कथित रूप से बेचने, जातिसूचक गालियां देने एवं जान से मारने की धमकी देने का गंभीर मामला सामने आया है। घटना को लेकर समाज में आक्रोश व्याप्त है। पीड़ित पक्ष और समाज के लोगों ने नेमावर थाने पहुंचकर आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के लिए आवेदन सौंपा है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, ग्राम सवासड़ा निवासी रामनारायण धनगर (उर्फ हत्ता) एवं राजपाल धनगर पर आरोप है कि उन्होंने युवती के पिता भगवान सिंह कर्मा को शराब और भोजन का प्रलोभन देकर बहला-फुसलाया। आरोप है कि पिता की आर्थिक और सामाजिक स्थिति का फायदा उठाते हुए युवती को अवैध रूप से बेच दिया गया, जो गंभीर आपराधिक कृत्य और मानव तस्करी की श्रेणी में आता है। पीड़ित पक्ष का यह भी आरोप है कि जब परिवार ने विरोध किया तो आरोपियों द्वारा जातिसूचक शब्दों का प्रयोग कर अपमानित किया गया और जान से मारने की धमकी दी गई। घटना के बाद से परिवार दहशत में है। कोरकू समाज के प्रतिनिधियों ने प्रशासन से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए तथा पीड़ित परिवार को सुरक्षा प्रदान की जाए। थाना नेमावर पुलिस का कहना है कि आवेदन प्राप्त हुआ है और मामले की जांच की जा रही है। जांच के आधार पर वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।1
- राजस्थान में सेन समाज की नाबालिग बच्ची के साथ दुष्कर्म कर जघन्य कृत्य कर हत्या करने वाले हत्यारे को फांसी देने की मांग को लेकर राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा कन्नौद,हाटपिपल्या/सर्व सेन समाज द्वारा राष्ट्रपति के नाम नायाब तहसीलदार वर्षा वर्मा को शुक्रवार दोपहर 1 बजे ज्ञापन सौंपा, गया ज्ञापन का वाचन करते हुए सर्व सेन समाज अध्यक्ष मुकेश वर्मा ने बताया कि पिछले दिनों राजेस्थान के बाड़मेर जिले के गांव रंजितपुरा में सेन समाज की कक्षा आठवीं में पड़ने वाली नाबालिग बच्ची परिक्षा देने विधालय जा रही थी। नाबालिग बच्ची के साथ अपराधिक छवि के युवक ने बलात्कार कर उसकी निर्मम तरीकेनं से हत्या कर दी। इस जघन्य हत्या कर बलात्कार करने वाले बलात्कार हत्यारे को फांसी देने की मांग को लेकर राष्ट्रपति के नाम सर्व सेन समाज द्वारा ज्ञापन दिया। इस अवसर पर वरिष्ठ रामेश्वर परमार, संतोष परमार, सचिव देवानंद वर्मा,अखिल भारतीय युवा सर्व सेन प्रदेश उपाध्यक्ष मनोहर भाटिया, पूर्व जिला अध्यक्ष संतोष वर्मा, पुर्व अध्यक्ष मुकेश परमार,महेश वर्मा, रमेश वर्मा,संजय वर्मा, रतनलाल वर्मा, तुलसीराम वर्मा, रमेश वर्मा, देवराज वर्मा,कमल वर्मा, अशोक वर्मा, कन्हैया सोलीवाल, सन्तोष वर्मा, मुकेश भाटिया , सागर वर्मा,आदी मौजूद थे।3
- नगर के राधा कृष्ण मंदिरो सहित श्री जगदीश्वर धाम मंदिर गंज में जगदीश्वर धाम महिला मंडल सहित अन्य महिला मंडल टीम ने श्री राधा कृष्ण के साथ फूलों की होली खेली एवं महिलाओं ने आपस में गुलाल भी लगाया।1
- 📢 📌 सीहोर जिले में आमजन की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से पुलिस द्वारा बाजारों, भीड़-भाड़ वाले स्थानों, सुनसान इलाकों, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन एवं अन्य संवेदनशील क्षेत्रों में नियमित पैदल एवं वाहन गश्त की जा रही है। 📌 होटल, लॉज, ढाबों आदि की भी सघन चेकिंग की जा रही है, ताकि किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर तत्काल कार्रवाई की जा सके। 📌 कानून व्यवस्था बनाए रखने और नागरिकों को सुरक्षित वातावरण प्रदान करने हेतु यह अभियान लगातार जारी रहेगा।1
- देवास / भोपाल में किसान महापंचायत में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री मल्लिकार्जुन खड़गे लोकसभा में प्रतिपक्ष नेता राहुल गांधी के मुख्य उपस्थिती में जीतू पटवारी एवं धर्मेंद्र सिंह चौहान के नेतृत्व में एक विशाल किसान महाचोपाल का आयोजन किया गया जिसमें विगत दिनों मोदी सरकार द्वारा अमेरिका के साथ स्वीकृत किसान विरोधी ट्रेड ड्रिल को लेकर राहुल गांधी जी खड़के जी ने किसानो को संबोधित किया,किसान महाचोपाल में देवास जिला किसान कांग्रेस के अध्यक्ष विश्वजीत सिंह चौहान के नेतृत्व में जिले के सैकड़ो किसानों ने किसान महाचोपाल में भाग लिया इस दौरान विश्वजीत सिंह चौहान ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष श्री जीतू पटवारी किसान कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष श्री धर्मेंद्र सिंह चौहान पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह जी राहुल,कुणाल चौधरी जी से भेंट की ।इस अवसर पर वरिष्ठ नेताओं ने देवास जिला किसान कांग्रेस द्वारा किए जा रहे कार्यों की प्रशंसा करते हुए कहा कि आने वाला समय कांग्रेस पार्टी का है आप सब साथी किसानों को एक जुट रखो ट्रेड ड्रिल की कमियों को उन्हें बताएं एवं जागरूक करे । इस अवसर पर श्री चौहान के साथ बड़ी संख्या में हाटपिपल्या विधानसभा क्षेत्र के कांग्रेस जनों के साथ जिले के किसान बड़ी संख्या में उपस्थित थे।4
- 2.05 लाख की रिश्वत मांगने वाली संविदा पर्यवेक्षक 5 हजार लेते रंगे हाथों गिरफ्तार आंगनवाड़ी सहायिका को कार्यकर्ता बनाने के नाम पर मांगी थी मोटी रकम, लोकायुक्त की कार्रवाई से विभाग में हड़कंप संवाददाता ईस्हाक गौरी खंडवा जिले के खालवा क्षेत्र में महिला एवं बाल विकास विभाग की संविदा पर्यवेक्षक अंजिला मोहे को आज गुरुवार को 5 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए लोकायुक्त टीम ने रंगे हाथों पकड़ लिया। आरोपी ने आंगनवाड़ी सहायिका से कार्यकर्ता पद पर पदस्थापना कराने के नाम पर कुल 2 लाख 5 हजार रुपये की मांग की थी। जानकारी के अनुसार, 27 वर्षीय सलिता पालवी, निवासी ग्राम मोजवाड़ी, अक्टूबर 2025 से आंगनवाड़ी केंद्र क्रमांक-1 मोजवाड़ी में सहायिका के पद पर कार्यरत हैं। मोजवाड़ी आंगनवाड़ी केंद्र-3 में कार्यकर्ता पद रिक्त होने पर उन्होंने नियमानुसार आवेदन प्रस्तुत किया था। आरोप है कि सेक्टर सांवलीखेड़ा की संविदा पर्यवेक्षक अंजिला मोहे (55), निवासी ग्राम मलगांव ने पहले सहायिका पद पर नियुक्ति के नाम पर 5 हजार रुपये लिए थे और बाद में कार्यकर्ता पद पर पदस्थापना के लिए 2 लाख रुपये की अतिरिक्त मांग की। कुल 2.05 लाख रुपये की रिश्वत की मांग से विभाग में हड़कंप मच गया। शिकायत के बाद बिछाया गया ट्रैप——पीड़िता सलिता पालवी ने मामले की शिकायत लोकायुक्त इंदौर के विशेष पुलिस अधीक्षक राजेश सहाय से की। शिकायत का सत्यापन होने के बाद लोकायुक्त टीम ने योजनाबद्ध तरीके से ट्रैप कार्रवाई की। गुरुवार को आरोपी को 5 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया गया। आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण (संशोधन) अधिनियम 2018 की धारा 7 के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है। इस कार्रवाई में लोकायुक्त इंस्पेक्टर प्रतिभा तोमर, आशुतोष मिठास, आरक्षक विजय कुमार, शिवप्रकाश पाराशर, कमलेश परिहार, आदित्य सिंह भदौरिया, मनीष माथुर एवं महिला आरक्षक अनिता प्रजापति की महत्वपूर्ण भूमिका रही। इस कार्रवाई के बाद महिला एवं बाल विकास विभाग में हड़कंप की स्थिति है और मामले की आगे की जांच जारी है।1
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- सिविल अस्पताल कन्नौद में नहीं है लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस सुविधा, इलाज से पहले हार जाति है कई जिंदगियां कन्नौद, सिविल अस्पताल कन्नौद में गंभीर मरीजों के लिए लाइफ सपोर्ट वेंटीलेटर युक्त एंबुलेंस उपलब्ध नहीं है अस्पताल में जब किसी मरीज की हालत ज्यादा नाजुक होती है तब इंदौर से वेंटिलेटर वाली एंबुलेंस बुलाई जाती है इंदौर से कन्नौद तक वेंटिलेटर युक्त एंबुलेंस पहुंचने में 3 घंटे के आसपास का समय लग जाता है इस दौरान मरीज अस्पताल में ही भर्ती रहता है वेंटिलेटर सपोर्ट ना होने के कारण उसकी हालत लगातार बिगड़ती जाती है वेंटिलेटर सपोर्ट एंबुलेंस नहीं होने से इलाज का गोल्डन टाइम निकल जाता है चिकित्सकों के अनुसार गंभीर मरीजों के मामले में शुरुआती समय महत्वपूर्ण होता है यदि इसी दौरान वेंटीलेटर और एडवांस लाइफ सपोर्ट मिल जाए तो मरीज की जान बचाई जा सकती है लेकिन कन्नौद सिविल अस्पताल में यह सुविधा न होने से इलाज का वह जरूरी समय निकल जाता है जो कई बार मरीजों के लिए जानलेवा तक साबित होता है क्षेत्र के लोगों और मरीजों के परिजनों ने मांग की है कि कन्नौद के सिविल अस्पताल में स्थायी रूप से वेंटिलेटर युक्त लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस उपलब्ध कराई जाए ताकि मरीजों को समय पर जीवन रक्षक सुविधा मिल सके और इंदौर से एंबुलेंस बुलाने में होने वाली देरी से बचा जा सके, लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस में वेंटिलेटर मशीन ऑक्सीजन सप्लाई और बैकअप हार्ट व ऑक्सीजन मॉनिटरिंग सिस्टम इमरजेंसी दवाइयां प्रशिक्षित मेडिकल स्टाफ एंबुलेंस में प्राथमिक इलाज आदि की सुविधा उपलब्ध रहती है, कन्नौद ब्लॉक में एक 108 तथा एक जननी एक्सप्रेस एंबुलेंस उपलब्ध रहती है, दोनों सुविधा को भोपाल मुख्यालय से ऑपरेट किया जाता है जिससे अस्पताल में मरीज को एंबुलेंस की इमरजेंसी में आवश्यकता पड़ने पर आधे से एक घंटा और कभी इससे भी अधिक समय लग जाता है "नगर सहित आसपास अनेक डेंजर जोन होते रहते हैं हादसे" कन्नौद नगर को सब डिवीजन का दर्जा प्राप्त होने के साथ ही यहां से एक राष्ट्रीय राजमार्ग तथा दूसरा राज्यमार्ग होकर गुजरता है जिसके कारण हमेशा हजारों वाहनों की आवाजाही लगी रहती है नगर सहित आसपास कई डेंजर जोन है अनेकों बार गंभीर दुर्घटना घटित होने पर गंभीर घायल मरीज की जान बचाने के लिए तत्काल सामान्य एंबुलेंस की उपलब्धता के लिए स्थानीय ब्लॉक स्तर पर ही एंबुलेंस ऑपरेटिंग की व्यवस्था होना चाहिए क्योंकि एंबुलेंस बुलाने के लिए कॉल करने पर घंटों का समय तो एंबुलेंस की उपलब्धता में ही लग जाता है इस दौरान मरीज दर्द से तड़पता रहता है शुक्रवार दोपहर 1 बजे इस संबंध में ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर डॉक्टर लोकेश मीणा ने कहा कि यदि वेंटीलेटर वाली एंबुलेंस एवं उसका स्टाफ कन्नौद के शासकीय अस्पताल में उपलब्ध रहेगा तो निश्चित ही मरीजों को गंभीर स्थिति में इसका विशेष लाभ मिलेगा "अस्पताल प्रबंधन के पास नहीं है कोई विकल्प" सिविल अस्पताल के पास वेंटीलेटर वाली एंबुलेंस का कोई विकल्प नहीं है जरूरत पड़ने पर इंदौर से ही एंबुलेंस बुलानी पड़ती है परिजनों का कहना रहता है कि फोन लगाने के बाद एंबुलेंस के पहुंचने तक कई घंटे गुजर जाते हैं और मरीजों की हालत जानलेवा हो जाती है कन्नौद से अस्पताल में उपलब्ध साधन एंबुलेंस में केवल सीमित सुविधाएं हैं गंभीर मरीज को लगातार मॉनिटरिंग और वेंटिलेटर सपोर्ट की आवश्यकता होती है जो सामान्य एंबुलेंस में संभव नहीं ऐसे में मरीज को सुरक्षित तरीके से रेफर करना भी चुनौती बन जाता है1