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रायपुर जिले के आरंग विकासखंड के खरोरा क्षेत्र में चार दिन पहले हुई भारी वर्षा के कारण कई गांवों के खेतों में जलभराव हो गया है। पानी भरने की वजह से खेतों में धान के बीजों का अंकुरण प्रभावित होकर पूरी तरह नष्ट हो गया है। इस नुकसान के कारण किसानों को अब अपने खेतों में दोबारा धान की बुवाई करनी पड़ रही है। वर्तमान में क्षेत्र में दोबारा धान की बुवाई का कार्य तेजी से किया जा रहा है, जबकि जिन स्थानों पर स्थिति अनुकूल है, वहां किसान थरहा (धान की रोपाई) का काम कर रहे हैं। जावा रायपुर के सुनील नायक ने बताया कि इस भारी बारिश के कारण किसानों को अतिरिक्त खर्च का बोझ उठाकर दोबारा बुवाई करनी पड़ रही है। फिलहाल, किसान मौसम के अनुकूल रहने की उम्मीद के साथ खेती-किसानी के काम में जुटे हुए हैं।
रोहित वर्मा
रायपुर जिले के आरंग विकासखंड के खरोरा क्षेत्र में चार दिन पहले हुई भारी वर्षा के कारण कई गांवों के खेतों में जलभराव हो गया है। पानी भरने की वजह से खेतों में धान के बीजों का अंकुरण प्रभावित होकर पूरी तरह नष्ट हो गया है। इस नुकसान के कारण किसानों को अब अपने खेतों में दोबारा धान की बुवाई करनी पड़ रही है। वर्तमान में क्षेत्र में दोबारा धान की बुवाई का कार्य तेजी से किया जा रहा है, जबकि जिन स्थानों पर स्थिति अनुकूल है, वहां किसान थरहा (धान की रोपाई) का काम कर रहे हैं। जावा रायपुर के सुनील नायक ने बताया कि इस भारी बारिश के कारण किसानों को अतिरिक्त खर्च का बोझ उठाकर दोबारा बुवाई करनी पड़ रही है। फिलहाल, किसान मौसम के अनुकूल रहने की उम्मीद के साथ खेती-किसानी के काम में जुटे हुए हैं।
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- छत्तीसगढ़ के रायपुर स्थित एमएमआई नारायणा हॉस्पिटल पर एक पीड़ित महिला ने इलाज के नाम पर "गोरखधंधा" करने और भारी अनियमितता का बेहद गंभीर आरोप लगाया है। अंबिकापुर की रहने वाली श्रीमती सुभद्रा गुप्ता ने एक वीडियो जारी कर अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ न्याय की गुहार लगाई है। उनका आरोप है कि उनके पति के पास 15 लाख रुपये का इंश्योरेंस था, लेकिन अस्पताल ने बिना बताए बिल को बढ़ाकर 56 से 57 लाख रुपये तक पहुंचा दिया है। पीड़िता के अनुसार, उनके पति श्री भरत प्रसाद गुप्ता को गत 11 अप्रैल को पैरालिसिस का अटैक आया था, जिसके बाद उन्हें पहले अंबिकापुर के संजीवनी अस्पताल में भर्ती कराया गया और फिर 14 अप्रैल को रेफर कर रायपुर के एमएमआई नारायणा हॉस्पिटल लाया गया। महिला का आरोप है कि एक महीने से अधिक समय बीत जाने के बाद भी उनके पति के स्वास्थ्य में 1% भी सुधार नहीं हुआ है, जबकि बाहर से लगातार दवाइयां लाने के बावजूद अस्पताल का बिल लगातार बढ़ता ही जा रहा है। श्रीमती सुभद्रा गुप्ता ने रोते हुए मानसिक प्रताड़ना का आरोप लगाया और कहा कि वे अब तक 30 लाख रुपये जमा कर चुकी हैं, लेकिन अस्पताल प्रशासन उन्हें डिस्चार्ज करने के लिए 25-26 लाख रुपये और मांग रहा है। 5 लाख रुपये का तुरंत इंतजाम करने की बात कहने पर भी मरीज को डिस्चार्ज नहीं किया जा रहा है और उन्हें जमीन व घर बेचने के लिए उकसाया जा रहा है, जिससे वे आत्महत्या करने तक को मजबूर हो रही हैं। पीड़िता ने छत्तीसगढ़ सरकार, स्वास्थ्य विभाग और जनता से तत्काल जांच कर दोषियों पर कार्रवाई करने और उनके पति को बिना शर्त डिस्चार्ज कराने की गुहार लगाई है। इस गंभीर मामले पर फिलहाल अस्पताल प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं के व्यापार में तब्दील होने को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।1
- बिलासपुर में राज्यसभा सांसद और शायर इमरान प्रतापगढ़ी ने NEET विवाद को लेकर केंद्र सरकार पर बड़ा हमला बोला है। उन्होंने केंद्र सरकार को घेरते हुए मांग की है कि वह इस परीक्षा से जुड़े कथित घोटाले और इसकी वजह से हुई 21 छात्रों की आत्महत्या की जवाबदेही तय करे। इसके साथ ही उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की भी पुरजोर मांग उठाई है। इमरान प्रतापगढ़ी ने ऐलान किया है कि इस कथित घोटाले का देशभर में प्रचार किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि राहुल गांधी युवाओं से अपना संवाद लगातार जारी रखेंगे और कांग्रेस का यह अभियान आगे भी बड़े स्तर पर जारी रहेगा।1
- धार्मिक आस्था और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के बीच टकराव का एक नया मामला सामने आया है। सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें एक युवती काली मां का रूप धारण कर बिना वस्त्र नृत्य करती दिखाई दे रही है। इस वीडियो के सामने आते ही इंटरनेट पर तीखी प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई है और देखते ही देखते यह मुद्दा एक राष्ट्रीय बहस का विषय बन गया है। इस वीडियो में दिखाए गए दृश्य काफी संवेदनशील हैं। इस पूरे मामले को लेकर यह स्पष्ट किया गया है कि किसी भी धर्म, आस्था या समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंचाने का कोई उद्देश्य नहीं है।1
- गरियाबंद पुलिस अधीक्षक वेदव्रत सिरमौर के दिशा-निर्देश में आज मालगांव के शिवम नर्सिंग कॉलेज में छात्र-छात्राओं और स्टाफ के लिए एक विधिक व सुरक्षा जागरूकता कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक कर्ण कुमार उके, डीएसपी गोपाल वैश्य, जिला अस्पताल के डॉक्टर एम.के. श्याम, मेमीचंद सोनवानी और गरियाबंद थाना प्रभारी शिशिर पाण्डेय मुख्य रूप से उपस्थित रहे। कार्यशाला के दौरान उपस्थित सभी छात्र-छात्राओं को कानून, सुरक्षा और साइबर अपराधों से बचाव के कड़े नियमों की जानकारी दी गई। कार्यक्रम में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक कर्ण कुमार उके ने बढ़ते ऑनलाइन फ्रॉड और साइबर अपराधों पर प्रकाश डालते हुए छात्रों को अनजान लिंक पर क्लिक न करने, ओटीपी साझा न करने और डिजिटल बैंकिंग में सावधानी बरतने के टिप्स दिए। वहीं, थाना प्रभारी शिशिर पाण्डेय ने देश में लागू हुए नए कानूनी प्रावधानों और धाराओं के बारे में विस्तार से बताया ताकि भावी नर्स और नागरिक अपने अधिकारों व कर्तव्यों के प्रति सजग रह सकें। इसके साथ ही, डीएसपी गोपाल वैश्य ने सड़क सुरक्षा व यातायात नियमों का पालन करने की अपील करते हुए लोगों को हेलमेट पहनने, सीट बेल्ट लगाने और नाबालिगों द्वारा वाहन न चलाने की सख्त हिदायत दी। तत्पश्चात, आपातकालीन चिकित्सा स्थिति से निपटने के लिए जिला अस्पताल के डॉक्टर एम.के. श्याम ने दिल का दौरा पड़ने या सांस रुकने की स्थिति में मरीज की जान बचाने के लिए सीपीआर (कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेसन) तकनीक का लाइव डेमो दिया। इस प्रशिक्षण में नर्सिंग स्टाफ और उपस्थित पुलिस स्टाफ को जान बचाने की बारीकियां सिखाई गईं। इसी कड़ी में, राजिम थाना क्षेत्र के प्रेमरतन पैलेस में क्रेडिट एक्सेस फाउंडेशन द्वारा आयोजित सामाजिक आर्थिक कार्यशाला में भी राजिम पुलिस टीम और गरियाबंद साइबर सेल की टीम ने पहुंचकर उपस्थित लोगों को साइबर जागरूकता के संबंध में विस्तृत जानकारी दी।2
- मध्यप्रदेश के सतना जिले में एक निलंबित इंजीनियर के वायरल वीडियो ने सरकारी सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वित्तीय अनियमितता के आरोपों में पहले ही सस्पेंड हो चुके इंजीनियर सतीश समेले ने इस वीडियो के जरिए विभाग में चल रहे भ्रष्टाचार को लेकर बड़ा खुलासा किया है, जिससे पूरे प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया है। वायरल वीडियो में सतीश समेले ने सीधे तौर पर आरोप लगाया है कि पंचायत से लेकर भोपाल तक कमीशन का खेल चलता है। उन्होंने दावा किया कि विभाग में बाकायदा "सूटकेस" सिस्टम काम करता है और इंजीनियरों से केवल "वसूली एजेंट" के रूप में काम करवाया जाता है। बंदूक लेकर निरीक्षण पर जाने वाले इस अधिकारी के इस बेबाक बयान ने भ्रष्टाचार की पोल खोलकर रख दी है। इस खुलासे के बाद स्थानीय लोगों में भारी नाराजगी देखी जा रही है। संजय पटेल (Sanjay Patel) नाम के एक यूजर ने अपना आक्रोश व्यक्त करते हुए लिखा कि एक सामान्य व्यक्ति अगर 10 रुपये का हेरफेर करे तो उसे चोरी माना जाता है, और ये लोग प्रतिष्ठा के अगुवा बने फिर रहे हैं; इस सिस्टम को फेल करने वालों को फांसी की सजा होनी चाहिए। इस पूरे मामले पर फिलहाल शासन-प्रशासन की ओर से कोई भी आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।1
- गरियाबंद जिले के राजिम क्षेत्र में स्थित जतमई मंदिर प्रांगण के बड़े पार्किंग के पास शनिवार सुबह सड़क पर निर्माण कंपनी का डामर ऑयल बिखरने से कई राहगीर हादसे का शिकार हो गए। सड़क पर बिखरे इस तेल को राहगीर देख नहीं पाए, जिसके कारण लगभग 5 से 7 दुपहिया वाहन चालक फिसलकर गिर गए और उनके शरीर के विभिन्न हिस्सों में चोटें आईं। बारिश के सीजन और शनिवार का दिन होने की वजह से बड़ी संख्या में लोग माता के दर्शन करने और जतमई मंदिर के झरने का आनंद लेने पहुंच रहे थे। हादसे को बढ़ता देख आसपास के दुकानदारों और पार्किंग वालों ने मुस्तैदी दिखाई और आने-जाने वाले लोगों को रोक-रोक कर सड़क पर ऑयल बिखरा होने की जानकारी दी और किनारे से जाने को कहा। यह सड़क निर्माण कार्य एडीबी प्रोजेक्ट के तहत पांडुका से लेकर मुंडागांव तक कराया जा रहा है, जो लगभग पूरा हो चुका है। गायडबरी गांव के पास बचे हुए थोड़े काम के लिए शुक्रवार को डामरीकरण किया गया था, जिसके बाद निर्माण कंपनी की गाड़ियों को जतमई मंदिर की बड़ी पार्किंग में खड़ा कर दिया गया था। इन्हीं गाड़ियों से ऑयल धीरे-धीरे बहकर मुख्य सड़क पर आ गया। इस घोर लापरवाही की जानकारी देने के बाद भी जिम्मेदार निर्माण कंपनी के लोग समय पर मौके पर नहीं पहुंचे। जब वे पहुंचे भी, तो उन्होंने सड़क किनारे की मिट्टी-मटेरियल डालकर खानापूर्ति करने की कोशिश की, जो नाकाफी रही। वर्तमान में जतमई घटारानी मंदिर में भारी भीड़ उमड़ रही है, लेकिन सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं हैं। यह घटना जतमई सेवा समिति, स्थानीय जनप्रतिनिधियों और जिला प्रशासन की उदासीनता और गैर-जिम्मेदाराना रवैये को उजागर करती है, जिससे साफ है कि श्रद्धालुओं को अब प्रशासन के भरोसे रहने के बजाय अपनी सुरक्षा खुद ही करनी होगी।4