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गया जिला के टनकुप्पा प्रखंड अन्तर्गत मायापुर में शुक्रवार को सूबे के मुखिया नीतीश कुमार की समृद्धि यात्रा के तहत आयोजित सभा उस समय चर्चा का विषय बन गई, जब सभा में शामिल कुछ लोग अचानक सड़क किनारे स्थित एक किसान के चने के खेत में घुस गए और हरे भरे चने उखाड़ खाने लगे। सभा में दूर-दूर से आए महिला-पुरुषों की भीड़ जैसे ही सड़क किनारे हरे चने की फसल देखी, कई लोग खुद को रोक नहीं पाए और खेत में उतर गए। देखते ही देखते दर्जनों लोग खेत में फैल गए और चने तोड़-तोड़ कर खाने लगे। यह दृश्य इतना सामान्य सा बना दिया गया मानो किसी की महीनों की मेहनत की कोई कीमत ही न हो। सबसे हैरानी की बात यह रही कि सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में कुछ पुलिसकर्मी भी उसी खेत के चने खाते हुए नजर आ रहे हैं। जिस पुलिस पर कानून और व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी होती है, वही अगर किसी गरीब किसान की फसल को इस तरह नुकसान पहुंचाते दिखे तो यह दृश्य किसी भी संवेदनशील व्यक्ति को अंदर तक झकझोर देता है। जरा सोचिए उस किसान पर क्या बीत रही होगी, जिसने दिन रात मेहनत करके, धूप बरसात सहकर अपनी फसल तैयार की होगी। खेत में लहलहाता चना उसके लिए सिर्फ फसल नहीं बल्कि उसके परिवार की उम्मीद, बच्चों की पढ़ाई और घर के खर्च का सहारा होता है। लेकिन कुछ मिनटों की लापरवाही और भीड़ की मानसिकता ने उसकी मेहनत को यूं ही रौंद डाला। ग्रामीणों का कहना है कि अगर प्रशासन और पुलिस चाहती तो भीड़ को खेत में जाने से रोक सकती थी। लेकिन जब सुरक्षा में तैनात लोग ही तमाशबीन बन जाएं या खुद फसल तोड़ने लगें, तो फिर किसान किससे न्याय की उम्मीद करे! यह घटना सिर्फ एक खेत के नुकसान की कहानी नहीं है, बल्कि यह हमारे समाज की उस सोच को भी दिखाती है जहां किसी गरीब किसान की मेहनत को मामूली समझ लिया जाता है। सवाल यह भी उठता है कि जिस समृद्धि यात्रा का उद्देश्य विकास और समृद्धि का संदेश देना है, उसी यात्रा के दौरान अगर एक किसान की फसल ही उजाड़ दिए जाए तो यह कैसी समृद्धि है! स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि मामले की जांच कर जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की जाए और जिस किसान की फसल को नुकसान हुआ है उसे उचित मुआवजा दिया जाए। क्योंकि किसान की मेहनत पर चोट सिर्फ उसकी जेब पर नहीं, बल्कि उसकी उम्मीदों पर भी लगती है। गया जिला के टनकुप्पा प्रखंड अन्तर्गत मायापुर में शुक्रवार को सूबे के मुखिया नीतीश कुमार की समृद्धि यात्रा के तहत आयोजित सभा उस समय चर्चा का विषय बन गई, जब सभा में शामिल कुछ लोग अचानक सड़क किनारे स्थित एक किसान के चने के खेत में घुस गए और हरे भरे चने उखाड़ खाने लगे। सभा में दूर-दूर से आए महिला-पुरुषों की भीड़ जैसे ही सड़क किनारे हरे चने की फसल देखी, कई लोग खुद को रोक नहीं पाए और खेत में उतर गए। देखते ही देखते दर्जनों लोग खेत में फैल गए और चने तोड़-तोड़ कर खाने लगे। यह दृश्य इतना सामान्य सा बना दिया गया मानो किसी की महीनों की मेहनत की कोई कीमत ही न हो। सबसे हैरानी की बात यह रही कि सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में कुछ पुलिसकर्मी भी उसी खेत के चने खाते हुए नजर आ रहे हैं। जिस पुलिस पर कानून और व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी होती है, वही अगर किसी गरीब किसान की फसल को इस तरह नुकसान पहुंचाते दिखे तो यह दृश्य किसी भी संवेदनशील व्यक्ति को अंदर तक झकझोर देता है। जरा सोचिए उस किसान पर क्या बीत रही होगी, जिसने दिन रात मेहनत करके, धूप बरसात सहकर अपनी फसल तैयार की होगी। खेत में लहलहाता चना उसके लिए सिर्फ फसल नहीं बल्कि उसके परिवार की उम्मीद, बच्चों की पढ़ाई और घर के खर्च का सहारा होता है। लेकिन कुछ मिनटों की लापरवाही और भीड़ की मानसिकता ने उसकी मेहनत को यूं ही रौंद डाला। ग्रामीणों का कहना है कि अगर प्रशासन और पुलिस चाहती तो भीड़ को खेत में जाने से रोक सकती थी। लेकिन जब सुरक्षा में तैनात लोग ही तमाशबीन बन जाएं या खुद फसल तोड़ने लगें, तो फिर किसान किससे न्याय की उम्मीद करे! यह घटना सिर्फ एक खेत के नुकसान की कहानी नहीं है, बल्कि यह हमारे समाज की उस सोच को भी दिखाती है जहां किसी गरीब किसान की मेहनत को मामूली समझ लिया जाता है। सवाल यह भी उठता है कि जिस समृद्धि यात्रा का उद्देश्य विकास और समृद्धि का संदेश देना है, उसी यात्रा के दौरान अगर एक किसान की फसल ही उजाड़ दिए जाए तो यह कैसी समृद्धि है! स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि मामले की जांच कर जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की जाए और जिस किसान की फसल को नुकसान हुआ है उसे उचित मुआवजा दिया जाए। क्योंकि किसान की मेहनत पर चोट सिर्फ उसकी जेब पर नहीं, बल्कि उसकी उम्मीदों पर भी लगती है।

4 hrs ago
user_हेमन्त कुमार  सिंह
हेमन्त कुमार सिंह
जनहित मे समर्पित Wazirganj•
4 hrs ago

गया जिला के टनकुप्पा प्रखंड अन्तर्गत मायापुर में शुक्रवार को सूबे के मुखिया नीतीश कुमार की समृद्धि यात्रा के तहत आयोजित सभा उस समय चर्चा का विषय बन गई, जब सभा में शामिल कुछ लोग अचानक सड़क किनारे स्थित एक किसान के चने के खेत में घुस गए और हरे भरे चने उखाड़ खाने लगे। सभा में दूर-दूर से आए महिला-पुरुषों की भीड़ जैसे ही सड़क किनारे हरे चने की फसल देखी, कई लोग खुद को रोक नहीं पाए और खेत में उतर गए। देखते ही देखते दर्जनों लोग खेत में फैल गए और चने तोड़-तोड़ कर खाने लगे। यह दृश्य इतना सामान्य सा बना दिया गया मानो किसी की महीनों की मेहनत की कोई कीमत ही न हो। सबसे हैरानी की बात यह रही कि सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में कुछ पुलिसकर्मी भी उसी खेत के चने खाते हुए नजर आ रहे हैं। जिस पुलिस पर कानून और व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी होती है, वही अगर किसी गरीब किसान की फसल को इस तरह नुकसान पहुंचाते दिखे तो यह दृश्य किसी भी संवेदनशील व्यक्ति को अंदर तक झकझोर देता है। जरा सोचिए उस किसान पर क्या बीत रही होगी, जिसने दिन रात मेहनत करके, धूप बरसात सहकर अपनी फसल तैयार की होगी। खेत में लहलहाता चना उसके लिए सिर्फ फसल नहीं बल्कि उसके परिवार की उम्मीद, बच्चों की पढ़ाई और घर के खर्च का सहारा होता है। लेकिन कुछ मिनटों की लापरवाही और भीड़ की मानसिकता ने उसकी मेहनत को यूं ही रौंद डाला। ग्रामीणों का कहना है कि अगर प्रशासन और पुलिस चाहती तो भीड़ को खेत में जाने से रोक सकती थी। लेकिन जब सुरक्षा में तैनात लोग ही तमाशबीन बन जाएं या खुद फसल तोड़ने लगें, तो फिर किसान किससे न्याय की उम्मीद करे! यह घटना सिर्फ एक खेत के नुकसान की कहानी नहीं है, बल्कि यह हमारे समाज की उस सोच को भी दिखाती है जहां किसी गरीब किसान की मेहनत को मामूली समझ लिया जाता है। सवाल यह भी उठता है कि जिस समृद्धि यात्रा का उद्देश्य विकास और समृद्धि का संदेश देना है, उसी यात्रा के दौरान अगर एक किसान की फसल ही उजाड़ दिए जाए तो यह कैसी समृद्धि है! स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि मामले की जांच कर जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की जाए और जिस किसान की फसल को नुकसान हुआ है उसे उचित मुआवजा दिया जाए। क्योंकि किसान की मेहनत पर चोट सिर्फ उसकी जेब पर नहीं, बल्कि उसकी उम्मीदों पर भी लगती है। गया जिला के टनकुप्पा प्रखंड अन्तर्गत मायापुर में शुक्रवार को सूबे के मुखिया नीतीश कुमार की समृद्धि यात्रा के तहत आयोजित सभा उस समय चर्चा का विषय बन गई, जब सभा में शामिल कुछ लोग अचानक सड़क किनारे स्थित एक किसान के चने के खेत में घुस गए और हरे भरे चने उखाड़ खाने लगे। सभा में दूर-दूर से आए महिला-पुरुषों की भीड़ जैसे ही सड़क किनारे हरे चने की फसल देखी, कई लोग खुद को रोक नहीं पाए और खेत में उतर गए। देखते ही देखते दर्जनों लोग खेत में फैल गए और चने तोड़-तोड़ कर खाने लगे। यह दृश्य इतना सामान्य सा बना दिया गया मानो किसी की महीनों की मेहनत की कोई कीमत ही न हो। सबसे हैरानी की बात यह रही कि सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में कुछ पुलिसकर्मी भी उसी खेत के चने खाते हुए नजर आ रहे हैं। जिस पुलिस पर कानून और व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी होती है, वही अगर किसी गरीब किसान की फसल को इस तरह नुकसान पहुंचाते दिखे तो यह दृश्य किसी भी संवेदनशील व्यक्ति को अंदर तक झकझोर देता है। जरा सोचिए उस किसान पर क्या बीत रही होगी, जिसने दिन रात मेहनत करके, धूप बरसात सहकर अपनी फसल तैयार की होगी। खेत में लहलहाता चना उसके लिए सिर्फ फसल नहीं बल्कि उसके परिवार की उम्मीद, बच्चों की पढ़ाई और घर के खर्च का सहारा होता है। लेकिन कुछ मिनटों की लापरवाही और भीड़ की मानसिकता ने उसकी मेहनत को यूं ही रौंद डाला। ग्रामीणों का कहना है कि अगर प्रशासन और पुलिस चाहती तो भीड़ को खेत में जाने से रोक सकती थी। लेकिन जब सुरक्षा में तैनात लोग ही तमाशबीन बन जाएं या खुद फसल तोड़ने लगें, तो फिर किसान किससे न्याय की उम्मीद करे! यह घटना सिर्फ एक खेत के नुकसान की कहानी नहीं है, बल्कि यह हमारे समाज की उस सोच को भी दिखाती है जहां किसी गरीब किसान की मेहनत को मामूली समझ लिया जाता है। सवाल यह भी उठता है कि जिस समृद्धि यात्रा का उद्देश्य विकास और समृद्धि का संदेश देना है, उसी यात्रा के दौरान अगर एक किसान की फसल ही उजाड़ दिए जाए तो यह कैसी समृद्धि है! स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि मामले की जांच कर जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की जाए और जिस किसान की फसल को नुकसान हुआ है उसे उचित मुआवजा दिया जाए। क्योंकि किसान की मेहनत पर चोट सिर्फ उसकी जेब पर नहीं, बल्कि उसकी उम्मीदों पर भी लगती है।

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  • गया जिला के टनकुप्पा प्रखंड अन्तर्गत मायापुर में शुक्रवार को सूबे के मुखिया नीतीश कुमार की समृद्धि यात्रा के तहत आयोजित सभा उस समय चर्चा का विषय बन गई, जब सभा में शामिल कुछ लोग अचानक सड़क किनारे स्थित एक किसान के चने के खेत में घुस गए और हरे भरे चने उखाड़ खाने लगे। सभा में दूर-दूर से आए महिला-पुरुषों की भीड़ जैसे ही सड़क किनारे हरे चने की फसल देखी, कई लोग खुद को रोक नहीं पाए और खेत में उतर गए। देखते ही देखते दर्जनों लोग खेत में फैल गए और चने तोड़-तोड़ कर खाने लगे। यह दृश्य इतना सामान्य सा बना दिया गया मानो किसी की महीनों की मेहनत की कोई कीमत ही न हो। सबसे हैरानी की बात यह रही कि सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में कुछ पुलिसकर्मी भी उसी खेत के चने खाते हुए नजर आ रहे हैं। जिस पुलिस पर कानून और व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी होती है, वही अगर किसी गरीब किसान की फसल को इस तरह नुकसान पहुंचाते दिखे तो यह दृश्य किसी भी संवेदनशील व्यक्ति को अंदर तक झकझोर देता है। जरा सोचिए उस किसान पर क्या बीत रही होगी, जिसने दिन रात मेहनत करके, धूप बरसात सहकर अपनी फसल तैयार की होगी। खेत में लहलहाता चना उसके लिए सिर्फ फसल नहीं बल्कि उसके परिवार की उम्मीद, बच्चों की पढ़ाई और घर के खर्च का सहारा होता है। लेकिन कुछ मिनटों की लापरवाही और भीड़ की मानसिकता ने उसकी मेहनत को यूं ही रौंद डाला। ग्रामीणों का कहना है कि अगर प्रशासन और पुलिस चाहती तो भीड़ को खेत में जाने से रोक सकती थी। लेकिन जब सुरक्षा में तैनात लोग ही तमाशबीन बन जाएं या खुद फसल तोड़ने लगें, तो फिर किसान किससे न्याय की उम्मीद करे! यह घटना सिर्फ एक खेत के नुकसान की कहानी नहीं है, बल्कि यह हमारे समाज की उस सोच को भी दिखाती है जहां किसी गरीब किसान की मेहनत को मामूली समझ लिया जाता है। सवाल यह भी उठता है कि जिस समृद्धि यात्रा का उद्देश्य विकास और समृद्धि का संदेश देना है, उसी यात्रा के दौरान अगर एक किसान की फसल ही उजाड़ दिए जाए तो यह कैसी समृद्धि है! स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि मामले की जांच कर जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की जाए और जिस किसान की फसल को नुकसान हुआ है उसे उचित मुआवजा दिया जाए। क्योंकि किसान की मेहनत पर चोट सिर्फ उसकी जेब पर नहीं, बल्कि उसकी उम्मीदों पर भी लगती है।
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    गया जिला के टनकुप्पा प्रखंड  अन्तर्गत मायापुर में शुक्रवार को सूबे के मुखिया नीतीश कुमार की समृद्धि यात्रा के तहत आयोजित सभा उस समय चर्चा का विषय बन गई, जब सभा में शामिल कुछ लोग अचानक सड़क किनारे स्थित एक किसान के चने के खेत में घुस गए और हरे भरे चने उखाड़ खाने लगे। सभा में दूर-दूर से आए महिला-पुरुषों की भीड़ जैसे ही सड़क किनारे हरे चने की फसल देखी, कई लोग खुद को रोक नहीं पाए और खेत में उतर गए। देखते ही देखते दर्जनों लोग खेत में फैल गए और चने तोड़-तोड़ कर खाने लगे। यह दृश्य इतना सामान्य सा बना दिया गया मानो किसी की महीनों की मेहनत की कोई कीमत ही न हो। सबसे हैरानी की बात यह रही कि सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में कुछ पुलिसकर्मी भी उसी खेत के चने खाते हुए नजर आ रहे हैं। जिस पुलिस पर कानून और व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी होती है, वही अगर किसी गरीब किसान की फसल को इस तरह नुकसान पहुंचाते दिखे तो यह दृश्य किसी भी संवेदनशील व्यक्ति को अंदर तक झकझोर देता है।
जरा सोचिए उस किसान पर क्या बीत रही होगी, जिसने दिन रात मेहनत करके, धूप बरसात सहकर अपनी फसल तैयार की होगी। खेत में लहलहाता चना उसके लिए सिर्फ फसल नहीं बल्कि उसके परिवार की उम्मीद, बच्चों की पढ़ाई और घर के खर्च का सहारा होता है। लेकिन कुछ मिनटों की लापरवाही और भीड़ की मानसिकता ने उसकी मेहनत को यूं ही रौंद डाला। ग्रामीणों का कहना है कि अगर प्रशासन और पुलिस चाहती तो भीड़ को खेत में जाने से रोक सकती थी। लेकिन जब सुरक्षा में तैनात लोग ही तमाशबीन बन जाएं या खुद फसल तोड़ने लगें, तो फिर किसान किससे न्याय की उम्मीद करे!  यह घटना सिर्फ एक खेत के नुकसान की कहानी नहीं है, बल्कि यह हमारे समाज की उस सोच को भी दिखाती है जहां किसी गरीब किसान की मेहनत को मामूली समझ लिया जाता है। सवाल यह भी उठता है कि जिस समृद्धि यात्रा का उद्देश्य विकास और समृद्धि का संदेश देना है, उसी यात्रा के दौरान अगर एक किसान की फसल ही उजाड़ दिए जाए तो यह कैसी समृद्धि है! स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि मामले की जांच कर जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की जाए और जिस किसान की फसल को नुकसान हुआ है उसे उचित मुआवजा दिया जाए। क्योंकि किसान की मेहनत पर चोट सिर्फ उसकी जेब पर नहीं, बल्कि उसकी उम्मीदों पर भी लगती है।
    user_हेमन्त कुमार  सिंह
    हेमन्त कुमार सिंह
    जनहित मे समर्पित Wazirganj•
    4 hrs ago
  • नवादा। अल्लाह की इबादत रहमत और बरकतों का महीना रमजान मुबारक 20 मार्च शुक्रवार को खत्म हुई। हिसुआ अकबरपुर रजौली सिरदला नारदीगंज मेसकौर समेत नवादा जिला भर के मस्जिदों ईदगाहों मदरसों में रोजेदारों अकीदतमंदों नमाजियों ने 20 मार्च शुक्रवार को अलविदा जुमा की नमाज अदा किया । अलविदा जुमा को लेकर मस्जिदों में नमाजियों का भीड़ उमड़ रहे थे । हिसुआ प्रखंड के तहत मंझवे के जामा मस्जिद में बड़े छोटे बुजुर्ग समेत बच्चे लोग अलविदा जुमा की नमाज अदा करते हुए दिखा गया। हाफिज मोहम्मद इकबाल ने नवादा समेत पूरे हिंदुस्तान में अमन चैन खुशहाली तरक्की के लिए दुआ की मांग की गई। हाफिज मोहम्मद इकबाल ने बताया कि 20 मार्च शुक्रवार की शाम ईद की चांद दीदार होने पर शनिवार को ईद मुबारक हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा । 21 मार्च शनिवार की सुबह मंझवे के जामा मस्जिद में 8:15 बजे चक पर सुबह 8:00 बजे जमुआंवा में सुबह 8:00 बजे ईद मुबारक की नमाज अदा किया जाएगा
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    नवादा। अल्लाह की इबादत रहमत और बरकतों का महीना रमजान मुबारक  20 मार्च शुक्रवार को खत्म हुई। हिसुआ अकबरपुर रजौली सिरदला नारदीगंज मेसकौर समेत नवादा जिला भर के मस्जिदों ईदगाहों मदरसों में रोजेदारों अकीदतमंदों  नमाजियों ने 20 मार्च शुक्रवार को अलविदा जुमा की नमाज अदा किया । अलविदा जुमा को लेकर मस्जिदों में नमाजियों का भीड़ उमड़ रहे थे । हिसुआ  प्रखंड  के तहत  मंझवे के जामा मस्जिद में बड़े छोटे बुजुर्ग समेत बच्चे लोग  अलविदा जुमा की  नमाज अदा करते हुए दिखा गया। हाफिज मोहम्मद इकबाल ने नवादा समेत पूरे हिंदुस्तान में अमन चैन खुशहाली तरक्की के लिए दुआ की मांग की गई। 
हाफिज मोहम्मद इकबाल ने बताया कि  20 मार्च शुक्रवार की शाम ईद की चांद दीदार होने पर शनिवार को ईद मुबारक हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा ।  21 मार्च शनिवार की सुबह मंझवे के जामा मस्जिद में 8:15 बजे चक पर सुबह 8:00 बजे जमुआंवा में सुबह 8:00 बजे ईद मुबारक की नमाज अदा किया जाएगा
    user_Imtiyaj A Fonwel
    Imtiyaj A Fonwel
    हिसुआ, नवादा, बिहार•
    3 hrs ago
  • मुहल्ले वालों से बात कर पता चला के नाली साफ़ नहीं करने पर नाली के बहाव को रोक दिया गया मुहल्ले के ही कुछ लोगों ने द्वारा।
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    मुहल्ले वालों से बात कर पता चला के नाली साफ़ नहीं करने पर नाली के बहाव को रोक दिया गया मुहल्ले के ही कुछ लोगों ने  द्वारा।
    user_Tws News
    Tws News
    Advertising Photographer हिसुआ, नवादा, बिहार•
    10 hrs ago
  • 2 घंटे तक गायब रहे डॉक्टर, लाइन में तड़पते रहे लोग — गया चाकन अस्पताल में लापरवाही उजागर
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    2 घंटे तक गायब रहे डॉक्टर, लाइन में तड़पते रहे लोग — गया चाकन अस्पताल में लापरवाही उजागर
    user_AMIT KUMAR
    AMIT KUMAR
    गया टाउन सी.डी.ब्लॉक, गया, बिहार•
    2 hrs ago
  • मम्मी हम लव मैरिज करेंगे
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    मम्मी हम लव मैरिज करेंगे
    user_Singer Ravi Tiger
    Singer Ravi Tiger
    Artist राजगीर, नालंदा, बिहार•
    2 hrs ago
  • गया शहर के वार्ड संख्या 44 में नगर निगम गयाजी द्वारा गदा लोल सरोवर का निर्माण एवं सौंदर्यीकरण कार्य करीबन 80 लाख के लागत से कार्य जारी है। गया शहर के गदालोल सरोवर एक प्रमुख धार्मिक सरोवर है। इस सरोवर का जिक्र वायु पुराण में है। मान्यता है की भगवान विष्णु ने गया जी पहुंचकर हैती दैत्य को मारे थे और अपना गदा को इसी सरोवर धोये तब से इस सरोवर का नाम गदालोल सरोवर हुआ। विष्णु नगरी गया जी में गदा लोल सरोवर की अपनी बड़ी धार्मिक महता है। लाखों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा यह गदालोल सरोवर उपेक्षित था और धार्मिक पहचान विलुप्त होते जा रहा था। पूरा तालाब जलकुंभी से घिर गया था। वार्ड संख्या 44 के पार्षद संगीता देवी एवं पार्षद प्रतिनिधि सुरेंद्र यादव के तत्परता से नगर निगम गयाजी द्वारा 80 लाख के लागत से सरोवर का निर्माण एवं सौंदर्यीकरण कार्य कराया जा रहा है।
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    गया शहर के वार्ड संख्या 44 में नगर निगम गयाजी द्वारा गदा लोल सरोवर का निर्माण एवं सौंदर्यीकरण कार्य करीबन 80 लाख के लागत से कार्य जारी है। गया शहर के गदालोल सरोवर एक प्रमुख धार्मिक सरोवर है। इस सरोवर का जिक्र वायु पुराण में है। मान्यता है की भगवान विष्णु ने गया जी पहुंचकर हैती दैत्य को मारे थे और अपना गदा को इसी सरोवर धोये तब से इस सरोवर का नाम गदालोल सरोवर हुआ। विष्णु नगरी गया जी में गदा लोल सरोवर की अपनी बड़ी धार्मिक महता है। लाखों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा यह गदालोल सरोवर उपेक्षित था और धार्मिक पहचान विलुप्त होते जा रहा था। पूरा तालाब जलकुंभी से घिर गया था। वार्ड संख्या 44 के पार्षद संगीता देवी एवं पार्षद प्रतिनिधि सुरेंद्र यादव के तत्परता से नगर निगम गयाजी द्वारा 80 लाख के लागत से सरोवर का निर्माण एवं सौंदर्यीकरण कार्य कराया जा रहा है।
    user_Uma Shanker singh
    Uma Shanker singh
    रिपोर्टर Gaya, Bihar•
    3 hrs ago
  • Awpl joining
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    Awpl joining
    user_Rajput Ji
    Rajput Ji
    नीम चक बथानी, गया, बिहार•
    3 hrs ago
  • राजबल्लभ यादव के पुत्र अखिलेश यादव की सड़क दुर्घटना में दर्दनाक मौत की खबर ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। इस हादसे के बाद नवादा और आसपास के क्षेत्रों में शोक की लहर दौड़ गई है। जिस किसी ने भी यह खबर सुनी, उसकी आंखें नम हो गईं और दिल भर आया। मिली जानकारी के अनुसार, अखिलेश यादव एक सड़क हादसे का शिकार हो गए, जिसमें उनकी मौके पर ही मौत हो गई। बताया जा रहा है कि दुर्घटना इतनी भीषण थी कि उन्हें बचाने का मौका तक नहीं मिल सका। हादसे की खबर जैसे ही परिवार और समर्थकों तक पहुंची, घर में कोहराम मच गया। अखिलेश यादव अपने सरल स्वभाव और मिलनसार व्यक्तित्व के लिए जाने जाते थे। इलाके के लोग बताते हैं कि वे हमेशा लोगों के सुख दुख में साथ खड़े रहने वाले युवक थे। उनके असमय निधन से न सिर्फ परिवार बल्कि पूरे समाज को गहरा आघात पहुंचा है।घटना की सूचना मिलते ही इलाके के कई जनप्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता और सैकड़ों की संख्या में लोग उनके घर पहुंचने लगे। हर किसी की जुबान पर बस एक ही बात थी, इतनी कम उम्र में इस तरह का दुखद अंत किसी ने सोचा भी नहीं था। परिजनों का रो रोकर बुरा हाल है। माता पिता और परिवार के अन्य सदस्यों का दर्द देखकर वहां मौजूद लोगों की आंखें भी भर आईं। पूरे इलाके में मातम का माहौल है और लोग ईश्वर से प्रार्थना कर रहे हैं कि दिवंगत आत्मा को शांति मिले और परिवार को इस असीम दुख को सहने की शक्ति मिले। इस हृदयविदारक घटना ने एक बार फिर सड़क सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक हंसता खेलता परिवार पल भर में गहरे शोक में डूब गया और इलाके ने एक युवा चेहरा खो दिया। लोगों का कहना है कि जिंदगी का कोई भरोसा नहीं, इसलिए हर पल को संभलकर और जिम्मेदारी से जीना जरूरी है। अखिलेश यादव की यह दर्दनाक विदाई पूरे समाज के लिए एक गहरी सीख और पीड़ा बनकर रह गई है।
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    राजबल्लभ यादव के पुत्र अखिलेश यादव की सड़क दुर्घटना में दर्दनाक मौत की खबर ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। इस हादसे के बाद नवादा और आसपास के क्षेत्रों में शोक की लहर दौड़ गई है। जिस किसी ने भी यह खबर सुनी, उसकी आंखें नम हो गईं और दिल भर आया। मिली जानकारी के अनुसार, अखिलेश यादव एक सड़क हादसे का शिकार हो गए, जिसमें उनकी मौके पर ही मौत हो गई। बताया जा रहा है कि दुर्घटना इतनी भीषण थी कि उन्हें बचाने का मौका तक नहीं मिल सका। हादसे की खबर जैसे ही परिवार और समर्थकों तक पहुंची, घर में कोहराम मच गया। अखिलेश यादव अपने सरल स्वभाव और मिलनसार व्यक्तित्व के लिए जाने जाते थे। इलाके के लोग बताते हैं कि वे हमेशा लोगों के सुख दुख में साथ खड़े रहने वाले युवक थे। उनके असमय निधन से न सिर्फ परिवार बल्कि पूरे समाज को गहरा आघात पहुंचा है।घटना की सूचना मिलते ही इलाके के कई जनप्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता और सैकड़ों की संख्या में लोग उनके घर पहुंचने लगे। हर किसी की जुबान पर बस एक ही बात थी, इतनी कम उम्र में इस तरह का दुखद अंत किसी ने सोचा भी नहीं था। परिजनों का रो रोकर बुरा हाल है। माता पिता और परिवार के अन्य सदस्यों का दर्द देखकर वहां मौजूद लोगों की आंखें भी भर आईं। पूरे इलाके में मातम का माहौल है और लोग ईश्वर से प्रार्थना कर रहे हैं कि दिवंगत आत्मा को शांति मिले और परिवार को इस असीम दुख को सहने की शक्ति मिले। इस हृदयविदारक घटना ने एक बार फिर सड़क सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक हंसता खेलता परिवार पल भर में गहरे शोक में डूब गया और इलाके ने एक युवा चेहरा खो दिया। लोगों का कहना है कि जिंदगी का कोई भरोसा नहीं, इसलिए हर पल को संभलकर और जिम्मेदारी से जीना जरूरी है। अखिलेश यादव की यह दर्दनाक विदाई पूरे समाज के लिए एक गहरी सीख और पीड़ा बनकर रह गई है।
    user_हेमन्त कुमार  सिंह
    हेमन्त कुमार सिंह
    जनहित मे समर्पित Wazirganj•
    11 hrs ago
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