लहसुन की फसल ने किसानों के आंसू पोछे,भाव अच्छे, लेकिन कमाई में निराशा। रायपुर क्षेत्र में हाड़ौती के झालावाड़ जिले में करीब 25 हजार हेक्टेयर में लहसुन की बुवाई होती है। इस बार किसानों को मंडियों में अच्छे भाव मिल रहे हैं, जिससे वे खुश भी हैं, लेकिन उत्पादन कम और क्वालिटी खराब होने से निराशा भी है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाड़ौती के लहसुन की अच्छी मांग रहती है, लेकिन निर्यात ठप होने से किसानों को फायदा नहीं मिल पा रहा है। मंडियों में अच्छी आवक, लेकिन सप्लाई में कमी इस साल मंडियों में लहसुन की जोरदार आवक हो रही है। देशी लहसुन का भाव 3000 से 12000 रुपये प्रति क्विंटल और ऊटी किस्म का 5000 से 15000 रुपये प्रति क्विंटल तक मिल रहा है। हालांकि खराब क्वालिटी के कारण अन्य राज्यों और विदेशों में सप्लाई नहीं हो पा रही है। लहसुन एक्सपोर्ट लायक नहीं होने से बांग्लादेश, कजाकिस्तान और अमेरिका जैसे देशों में डिमांड के अनुसार सप्लाई नहीं हो पा रही है। किसानों को पड़ोसी राज्यों की मंडियों का सहारा झालावाड़ के किसान खानपुर और मनोहरथाना की मंडियों के बेचान करते हैं। पिछले साल से कम हुई पैदावार किसान राजेश दांगी कालीतलाई के अनुसार इस बार लहसुन की पैदावार पिछले साल से कम रही है। जहां पहले एक बीघा में 25 से 26 कट्टे निकलते थे, वहीं इस बार केवल 20 से 22 कट्टे ही मिल रहे हैं। मंडियों में लहसुन का भाव 2500 से 12500 रुपये प्रति क्विंटल के बीच चल रहा है। एमएसपी नहीं होने से किसानों की परेशानी लहसुन एमएसपी वाली फसलों में शामिल नहीं है, इसलिए किसानों को मजबूरी में कम भाव पर भी बिक्री करनी पड़ती है। कटाई के बाद लहसुन को सुरक्षित रखना भी चुनौती है, क्योंकि नमी या अधिक गर्मी से यह जल्दी खराब हो जाता है। एक हेक्टेयर में लागत का आंकड़ा किसानों के अनुसार एक हेक्टेयर में लहसुन की बुवाई, कटाई, निराई-गुड़ाई पर करीब 35 हजार रुपये खर्च होते हैं। इसमें 10 से 15 हजार रुपये बीज, 10 हजार रुपये कीटनाशक और करीब 5-5 हजार रुपये अन्य खर्चों में लगते हैं। लहसुन की बुवाई अक्टूबर में होती है और मार्च में फसल तैयार हो जाती है। औसत भाव, लेकिन क्वालिटी पर निर्भर कमाई इस बार लहसुन के औसत भाव 10-11 हजार रुपये प्रति क्विंटल हैं, जबकि उच्च गुणवत्ता वाले लहसुन के भाव 18 हजार रुपये तक जा रहे हैं। किसानों के अनुसार लाभ इस बात पर निर्भर करता है कि फसल की क्वालिटी कैसी है और निर्यात की स्थिति क्या रहती है। बुवाई और उत्पादन पर क्यों पड़ रहा असर? फरवरी में बढ़े तापमान के कारण लहसुन का आकार सही नहीं बन पाया। इससे उत्पादन और क्वालिटी दोनों पर नकारात्मक असर पड़ा। 2025-26 में कुल 26,038 हेक्टेयर में लहसुन की बुवाई की गई। इस बार औसतन प्रति हेक्टेयर केवल 5 क्विंटल उत्पादन हुआ। सामान्य स्थिति में 10 से 12 क्विंटल प्रति हेक्टेयर उत्पादन होने पर किसानों को बेहतर लाभ मिलता है। कम पैदावार के कारण किसानों की आय और मुनाफा प्रभावित हुआ। अब पैकेजिंग से बढ़ेगी बिक्री लहसुन की बिक्री बढ़ाने के लिए अब किसान ग्रेडिंग और पैकेजिंग पर ध्यान दे रहे हैं। अलग-अलग क्वालिटी के लहसुन को 1 किलो से 20 किलो तक के पैकेट में तैयार किया जा रहा है। सही तरीके से पैक किया गया लहसुन करीब 6 महीने तक खराब नहीं होता। इससे व्यापारियों को सप्लाई में आसानी होगी और किसानों को भी बेहतर कीमत मिलने की उम्मीद है। पहले किसान बिना क्वालिटी पर ध्यान दिए लहसुन बेच देते थे, लेकिन अब बेहतर गुणवत्ता के साथ बाजार में भेज रहे हैं।
लहसुन की फसल ने किसानों के आंसू पोछे,भाव अच्छे, लेकिन कमाई में निराशा। रायपुर क्षेत्र में हाड़ौती के झालावाड़ जिले में करीब 25 हजार हेक्टेयर में लहसुन की बुवाई होती है। इस बार किसानों को मंडियों में अच्छे भाव मिल रहे हैं, जिससे वे खुश भी हैं, लेकिन उत्पादन कम और क्वालिटी खराब होने से निराशा भी है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाड़ौती के लहसुन की अच्छी मांग रहती है, लेकिन निर्यात ठप होने से किसानों को फायदा नहीं मिल पा रहा है। मंडियों में अच्छी आवक, लेकिन सप्लाई में कमी इस साल मंडियों में लहसुन की जोरदार आवक हो रही है। देशी लहसुन का भाव 3000 से 12000 रुपये प्रति क्विंटल और ऊटी किस्म का 5000 से 15000 रुपये प्रति क्विंटल तक मिल रहा है। हालांकि खराब क्वालिटी के कारण अन्य राज्यों और विदेशों में सप्लाई नहीं हो पा रही है। लहसुन एक्सपोर्ट लायक नहीं होने से बांग्लादेश, कजाकिस्तान और अमेरिका जैसे देशों में डिमांड के अनुसार सप्लाई नहीं हो पा रही है। किसानों को पड़ोसी राज्यों की मंडियों का सहारा झालावाड़ के किसान खानपुर और मनोहरथाना की मंडियों के बेचान करते हैं। पिछले साल से कम हुई पैदावार किसान राजेश दांगी कालीतलाई के
अनुसार इस बार लहसुन की पैदावार पिछले साल से कम रही है। जहां पहले एक बीघा में 25 से 26 कट्टे निकलते थे, वहीं इस बार केवल 20 से 22 कट्टे ही मिल रहे हैं। मंडियों में लहसुन का भाव 2500 से 12500 रुपये प्रति क्विंटल के बीच चल रहा है। एमएसपी नहीं होने से किसानों की परेशानी लहसुन एमएसपी वाली फसलों में शामिल नहीं है, इसलिए किसानों को मजबूरी में कम भाव पर भी बिक्री करनी पड़ती है। कटाई के बाद लहसुन को सुरक्षित रखना भी चुनौती है, क्योंकि नमी या अधिक गर्मी से यह जल्दी खराब हो जाता है। एक हेक्टेयर में लागत का आंकड़ा किसानों के अनुसार एक हेक्टेयर में लहसुन की बुवाई, कटाई, निराई-गुड़ाई पर करीब 35 हजार रुपये खर्च होते हैं। इसमें 10 से 15 हजार रुपये बीज, 10 हजार रुपये कीटनाशक और करीब 5-5 हजार रुपये अन्य खर्चों में लगते हैं। लहसुन की बुवाई अक्टूबर में होती है और मार्च में फसल तैयार हो जाती है। औसत भाव, लेकिन क्वालिटी पर निर्भर कमाई इस बार लहसुन के औसत भाव 10-11 हजार रुपये प्रति क्विंटल हैं, जबकि उच्च गुणवत्ता वाले लहसुन के भाव 18 हजार रुपये तक जा रहे हैं।
किसानों के अनुसार लाभ इस बात पर निर्भर करता है कि फसल की क्वालिटी कैसी है और निर्यात की स्थिति क्या रहती है। बुवाई और उत्पादन पर क्यों पड़ रहा असर? फरवरी में बढ़े तापमान के कारण लहसुन का आकार सही नहीं बन पाया। इससे उत्पादन और क्वालिटी दोनों पर नकारात्मक असर पड़ा। 2025-26 में कुल 26,038 हेक्टेयर में लहसुन की बुवाई की गई। इस बार औसतन प्रति हेक्टेयर केवल 5 क्विंटल उत्पादन हुआ। सामान्य स्थिति में 10 से 12 क्विंटल प्रति हेक्टेयर उत्पादन होने पर किसानों को बेहतर लाभ मिलता है। कम पैदावार के कारण किसानों की आय और मुनाफा प्रभावित हुआ। अब पैकेजिंग से बढ़ेगी बिक्री लहसुन की बिक्री बढ़ाने के लिए अब किसान ग्रेडिंग और पैकेजिंग पर ध्यान दे रहे हैं। अलग-अलग क्वालिटी के लहसुन को 1 किलो से 20 किलो तक के पैकेट में तैयार किया जा रहा है। सही तरीके से पैक किया गया लहसुन करीब 6 महीने तक खराब नहीं होता। इससे व्यापारियों को सप्लाई में आसानी होगी और किसानों को भी बेहतर कीमत मिलने की उम्मीद है। पहले किसान बिना क्वालिटी पर ध्यान दिए लहसुन बेच देते थे, लेकिन अब बेहतर गुणवत्ता के साथ बाजार में भेज रहे हैं।
- रायपुर क्षेत्र में हाड़ौती के झालावाड़ जिले में करीब 25 हजार हेक्टेयर में लहसुन की बुवाई होती है। इस बार किसानों को मंडियों में अच्छे भाव मिल रहे हैं, जिससे वे खुश भी हैं, लेकिन उत्पादन कम और क्वालिटी खराब होने से निराशा भी है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाड़ौती के लहसुन की अच्छी मांग रहती है, लेकिन निर्यात ठप होने से किसानों को फायदा नहीं मिल पा रहा है। मंडियों में अच्छी आवक, लेकिन सप्लाई में कमी इस साल मंडियों में लहसुन की जोरदार आवक हो रही है। देशी लहसुन का भाव 3000 से 12000 रुपये प्रति क्विंटल और ऊटी किस्म का 5000 से 15000 रुपये प्रति क्विंटल तक मिल रहा है। हालांकि खराब क्वालिटी के कारण अन्य राज्यों और विदेशों में सप्लाई नहीं हो पा रही है। लहसुन एक्सपोर्ट लायक नहीं होने से बांग्लादेश, कजाकिस्तान और अमेरिका जैसे देशों में डिमांड के अनुसार सप्लाई नहीं हो पा रही है। किसानों को पड़ोसी राज्यों की मंडियों का सहारा झालावाड़ के किसान खानपुर और मनोहरथाना की मंडियों के बेचान करते हैं। पिछले साल से कम हुई पैदावार किसान राजेश दांगी कालीतलाई के अनुसार इस बार लहसुन की पैदावार पिछले साल से कम रही है। जहां पहले एक बीघा में 25 से 26 कट्टे निकलते थे, वहीं इस बार केवल 20 से 22 कट्टे ही मिल रहे हैं। मंडियों में लहसुन का भाव 2500 से 12500 रुपये प्रति क्विंटल के बीच चल रहा है। एमएसपी नहीं होने से किसानों की परेशानी लहसुन एमएसपी वाली फसलों में शामिल नहीं है, इसलिए किसानों को मजबूरी में कम भाव पर भी बिक्री करनी पड़ती है। कटाई के बाद लहसुन को सुरक्षित रखना भी चुनौती है, क्योंकि नमी या अधिक गर्मी से यह जल्दी खराब हो जाता है। एक हेक्टेयर में लागत का आंकड़ा किसानों के अनुसार एक हेक्टेयर में लहसुन की बुवाई, कटाई, निराई-गुड़ाई पर करीब 35 हजार रुपये खर्च होते हैं। इसमें 10 से 15 हजार रुपये बीज, 10 हजार रुपये कीटनाशक और करीब 5-5 हजार रुपये अन्य खर्चों में लगते हैं। लहसुन की बुवाई अक्टूबर में होती है और मार्च में फसल तैयार हो जाती है। औसत भाव, लेकिन क्वालिटी पर निर्भर कमाई इस बार लहसुन के औसत भाव 10-11 हजार रुपये प्रति क्विंटल हैं, जबकि उच्च गुणवत्ता वाले लहसुन के भाव 18 हजार रुपये तक जा रहे हैं। किसानों के अनुसार लाभ इस बात पर निर्भर करता है कि फसल की क्वालिटी कैसी है और निर्यात की स्थिति क्या रहती है। बुवाई और उत्पादन पर क्यों पड़ रहा असर? फरवरी में बढ़े तापमान के कारण लहसुन का आकार सही नहीं बन पाया। इससे उत्पादन और क्वालिटी दोनों पर नकारात्मक असर पड़ा। 2025-26 में कुल 26,038 हेक्टेयर में लहसुन की बुवाई की गई। इस बार औसतन प्रति हेक्टेयर केवल 5 क्विंटल उत्पादन हुआ। सामान्य स्थिति में 10 से 12 क्विंटल प्रति हेक्टेयर उत्पादन होने पर किसानों को बेहतर लाभ मिलता है। कम पैदावार के कारण किसानों की आय और मुनाफा प्रभावित हुआ। अब पैकेजिंग से बढ़ेगी बिक्री लहसुन की बिक्री बढ़ाने के लिए अब किसान ग्रेडिंग और पैकेजिंग पर ध्यान दे रहे हैं। अलग-अलग क्वालिटी के लहसुन को 1 किलो से 20 किलो तक के पैकेट में तैयार किया जा रहा है। सही तरीके से पैक किया गया लहसुन करीब 6 महीने तक खराब नहीं होता। इससे व्यापारियों को सप्लाई में आसानी होगी और किसानों को भी बेहतर कीमत मिलने की उम्मीद है। पहले किसान बिना क्वालिटी पर ध्यान दिए लहसुन बेच देते थे, लेकिन अब बेहतर गुणवत्ता के साथ बाजार में भेज रहे हैं।3
- बकानी: भानपुरिया गांव निवासी युवक की कीटनाशक का सेवन करने से इलाज के दौरान हुई मौत बकानी :-भानपुरिया गांव निवासी युवक की कीटनाशक का सेवन करने से इलाज के दौरान मौत हो गई पुलिस से प्राप्त जानकारी के अनुसार थाना क्षेत्र के भानपुरिया गांव निवासी एक व्यक्ति ने खेत मे स्प्रे करने वाले कीटनाशक का सेवन कर लिया इससे उसकी झालावाड़ अस्पताल में इलाज के दौरान बीती रात को मौत हो गई। हेड कांस्टेबल घनश्याम ने बताया कि रमेश (50)पुत्र कालू लाल ने 28 अप्रैल को घर पर ही खेत में स्प्रे करने वाली एंडोसल्फान कीटनाशक का सेवन कर लिया है, इससे उसकी तबीयत बिगड़ने पर परिजन उसे बकानी अस्पताल लेकर आए, जहां उसका प्राथमिक उपचार के बाद झालावाड़ भेज दिया, इस पर झालावाड़ के एसआरजी अस्प्ताल में इलाज चल रहा था, ऐसे में बीती रात को गभीर हालात में उसकी इलाज के दौरान मौत हो गई। झालावाड़ अस्पताल चौकी पुलिस ने वार्ड से सूचना मिलने के बाद शव को अस्पताल की मोर्चरी में रखवाया और बकानी पुलिस को सूचना दी, इसके बाद आज गुरुवार को सुबह बकानी पुलिस झालावाड़ अस्पताल पहुंची, यहां परिजनों से रिपोर्ट लेकर शव का पोस्टमार्टम कराया और अंतिम संस्कार के लिए परिजनों को सौंप दिया। मृतक के एक बेटा है 12 साल का जो पढ़ाई कर रहा है। पर जिन्होंने बताया कि मृतक ने शराब के नशे में कीटनाशक दवा का सेवन किया था। इस पर पुलिस ने सदिग्ध अवस्था मे मौत होने के मामले की जांच शुरू कर दी है।1
- झालावाड़-जिले की अकलेरा थाना पुलिस ने अवैध तरीकों से ब्याज पर ब्याज वसूलने वाले सुदघोर आरोपी को गिरफ्तार किया है पुलिस कार्रवाई के दौरान आरोपी घर से कई खाली स्टांप ,साइन किए खाली चेक ,छोटी डायरियां तथा जमीन के कई कागजात मिले हैं वहीं मोंके से करीब 6 करोड रुपए के लेन देन हिसाब को भी पुलिस ने जप्त किया है मामले में जानकारी देते हुए पुलिस अधीक्षक अमित कुमार ने बताया कि अकलेरा थाना क्षेत्र के घनश्याम शर्मा ने एक शिकायत पत्र पेश किया था जिसमें उसने बताया था कि नई बस्ती निवासी सुगनचंद के द्वारा लोगों को अपने जाल में फंसा कर अवैध रूप से ब्याज पर ब्याज वसूला जा रहा है आरोपी सुगनचंद के द्वारा कई लोगों से अमानत के नाम पर खाली चेक जमीन के कागज व साइन किए खाली स्टांप रखवाए गए हैं आरोपी ब्याज की रकम को वसूल करने के लिए लोंगो को डराने धमकाने तथा जान से मारने की धमकी देने जैसे हथकंडे अपनाता है वहीं आरोपी के द्वारा कुछ लोगों को ब्याज वसूलने के लिए रखा गया है जो लोगों को नाजायज परेशान करते हैं परिवादी ने शिकायत में बताया कि ब्याज की रकम देने के बावजूद आरोपी के द्वारा उसे मानसिक रूप से परेशान किया जा रहा है ऐसे में उसकी मानसिक स्थिति खराब हो चुकी है एसपी ने बताया कि परिवादी की शिकायत के बाद आरोपी सुगन चंद के घर पर पुलिस के द्वारा दबिश दी गई इस दौरान आरोपी के घर से कई छोटी डायरियां साइन किए हुए खाली चेक बैंक की पासबुक्स जमीन के कागज खाली स्टांप बरामद किए गए एसपी ने बताया कि इस दौरान आरोपी के पास से करीब 6 करोड रुपए के लेनदेन का हिसाब भी मौके से जप्त किया गया है4
- रामगंजमंडी में मोड़क थाना क्षेत्र के नेशनल हाईवे पर एक बड़ा सड़क हादसा हो गया। कोटा से झालावाड़ की ओर जा रहा एक ट्रक अमझार नदी की पुलिया पर अनियंत्रित होकर करीब 30 फीट नीचे नदी में जा गिरा। हादसे में ट्रक चालक गंभीर रूप से घायल हो गया, जिसे पुलिस ने राहगीरों की मदद से मोड़क अस्पताल पहुंचाया गया।1
- कोटा ग्रामीण के सीमलिया थाना पुलिस ने अवैध शराब तस्करी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए 240 पव्वे देशी शराब से भरी 5 पेटियां और एक स्विफ्ट कार जब्त की है। नाकाबंदी के दौरान बारां की ओर से आई संदिग्ध कार को रोकने का प्रयास किया गया, लेकिन कार सवार दो आरोपी पुलिस नाकाबंदी तोड़कर फरार हो गए। पीछा करने पर आरोपी कार छोड़कर भाग निकले। तलाशी में कार के अंदर प्लास्टिक के कट्टे में भरी अवैध नीबू देशी शराब बरामद हुई। पुलिस ने शराब और वाहन को जब्त कर एक्साइज एक्ट के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।1
- राठौर क्षत्रिय समाज द्वारा नरसिंह चतुर्दशी के उपलक्ष्य में भगवान नरसिंह जी की भव्य शोभायात्रा निकाली गई | भक्ति मय हुआ सोयत कला नगर वासियों ने फूलों से पुष्प वर्षा के साथ किया भगवान की झांकी की जगह जगह आरती के साथ ही दर्शन किया1
- Post by हर खबर आपके साथ1
- राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के संघटन प्रभारी महेश धाकड़ ने राष्ट्रीय मजदूर संघ कार्यालय रामगंजमंडी में कांग्रेस पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं की बैठक ली। बैठक में संघटन बढ़ाओ, लोकतंत्र बचाओ अभियान की समीक्षा करते हुए उन्होंने कार्यकर्ताओं को संगठन मजबूती के लिए जुटने का आह्वान किया। महेश धाकड़ ने कहा कि कांग्रेस की विचारधारा भाईचारे और शांति की रही है, जिसने देश को मजबूत आधार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान भाजपा सरकार लोकतंत्र और संविधान को कमजोर करने का काम कर रही है। लोकसभा में राहुल गांधी का माइक बंद किए जाने जैसे उदाहरण लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए चिंताजनक हैं। उन्होंने राजस्थान सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि पंचायतीराज और स्थानीय निकाय चुनावों को टालकर आमजन के अधिकारों का हनन किया जा रहा है तथा ओबीसी आयोग का कार्यकाल बार-बार बढ़ाना सरकार की मंशा पर सवाल खड़े करता है। इसके बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने भाजपा प्रदेश प्रभारी राधामोहन अग्रवाल द्वारा कांग्रेस विधायक एवं पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट पर दिए बयान के विरोध में थाना चौराहे पर पुतला दहन किया और जमकर नारेबाजी की। महेश धाकड़ ने बयान को गैरजिम्मेदाराना बताते हुए इसकी निंदा की। इस दौरान ब्लॉक अध्यक्ष देवेन्द्र सिंह गोयंदा, रामगंजमंडी नगर अध्यक्ष पवन बाबेल, पूर्व उपप्रधान राजेंद्र सिंह सिसोदिया, सचिव जसविंदर सिंह विक्की, पूर्व पालिका उपाध्यक्ष रमेश मीणा, ब्लॉक महासचिव संगठन कमल गुर्जर, सुकेत नगर अध्यक्ष मोहम्मद रऊफ, ब्लॉक उपाध्यक्ष अशोक मेघवाल, ब्लॉक प्रवक्ता चतुर्भुज अहीर, मंडल अध्यक्ष जसवंत मीणा, सावन ललावत, अल्पसंख्यक विभाग अध्यक्ष नदीम बेग, श्याम आचार्य, विक्रम सिंह भदौरिया, रिंकू धाकड़, गोपाल सिंह, बाबूलाल बैसला, अदनान, छीतर लाल गुर्जर, ओम बाबा, मोहन बैरवा, शोएब मेव, आसिफ मेव, दिनेश नागर, रामेश्वर गुप्ता सहित कई कार्यकर्ता मौजूद रहे।1